सुहानी की यादों की खुदाई
बरसों बाद जब मैं अपने पुश्तैनी गाँव की उन पगडंडियों पर वापस लौटा, तो मिट्टी की वह सोंधी खुशबू आज भी वैसी ही थी, जैसे मेरे बचपन के दिनों में हुआ करती थी। पुरानी हवेली के आँगन में खड़ा मैं अतीत के झरोखों में झाँक ही रहा था कि तभी मेरी नज़र पड़ोस के बगीचे … Read more