तन्हाई में देवर-भाभी की मदहोश खुदाई
दोपहर की उस खामोश बेला में पूरा घर सन्नाटे की चादर ओढ़े सोया हुआ था, सिवाय मीरा के कमरे के जहाँ हवा की एक हल्की सी सरसराहट खिड़की के पर्दों को हिला रही थी। मीरा, जिसकी उम्र अभी मुश्किल से तीस के पार थी, अपनी रेशमी साड़ी को संभाले बिस्तर पर लेटी पुरानी यादों में … Read more