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ऑफिस वाली जबरदस्त चु@@ई

ऑफिस वाली जबरदस्त चु@@ई

उस शाम ऑफिस की ऊँची इमारत की अड़तीसवीं मंजिल पर सन्नाटा पसरा हुआ था, सिर्फ एयरकंडीशनर की हल्की गड़गड़ाहट सुनाई दे रही थी। नेहा अपनी मेज पर बैठी आखिरी फाइल निबटाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसका मन बार-बार अपने केबिन के बाहर खड़े बॉस, विक्रम की ओर जा रहा था। नेहा चौबीस साल की एक बेहद आकर्षक लड़की थी, जिसकी गालों की लाली और आँखों की चमक किसी को भी मदहोश कर सकती थी। उसने आज एक सफेद रंग की बेहद चुस्त फॉर्मल शर्ट पहनी थी, जिसके बटन उसकी छाती के उभारों के दबाव से जैसे टूटने को बेताब थे। उसके शरीर की बनावट ऐसी थी कि कोई भी मर्द उसे एक बार देख ले तो बस देखता ही रह जाए, खासकर उसके उभरे हुए तरबूज जो शर्ट के अंदर अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे।

विक्रम, जो करीब बयालीस साल का एक रसूखदार और गठीले बदन का आदमी था, नेहा की हर हरकत पर अपनी पैनी नजर गड़ाए हुए था। वह धीरे-धीरे नेहा की ओर बढ़ा और उसके पीछे खड़ा होकर मेज पर रखी फाइल को देखने का बहाना करने लगा। नेहा को अपने पीछे विक्रम की गर्म साँसें महसूस हो रही थीं, जिससे उसकी रीढ़ की हड्डी में एक सिहरन दौड़ गई। विक्रम के शरीर से आने वाली महंगी परफ्यूम और पसीने की मिली-जुली मर्दाना खुशबू नेहा के दिमाग पर छाने लगी थी। कमरे की मद्धम रोशनी और बाहर शहर की टिमटिमाती लाइटों ने एक ऐसा माहौल बना दिया था जहाँ पेशेवर मर्यादा और व्यक्तिगत इच्छाओं के बीच की रेखा धुंधली होती जा रही थी। नेहा के हाथ कांपने लगे थे और वह चाहकर भी कीबोर्ड पर अपनी उंगलियां नहीं चला पा रही थी।

विक्रम ने बहुत धीरे से अपना हाथ नेहा के कंधे पर रखा और धीरे से झुककर उसके कान के पास फुसफुसाया, “नेहा, तुम बहुत ज्यादा काम करती हो, तुम्हें थोड़ा आराम करना चाहिए।” जैसे ही उसके होंठ नेहा के कान की लौ को छुए, नेहा की आँखें बंद हो गईं और उसके मुँह से एक हल्की सी आह निकल गई। विक्रम का हाथ अब धीरे-धीरे नीचे सरक रहा था, और उसने नेहा के उन कोमल तरबूज को ऊपर से ही अपनी हथेली में भर लिया। नेहा ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि उसकी देह और भी ज्यादा ढीली पड़ गई। उसे महसूस हो रहा था कि उसके शरीर के अंदर एक दबी हुई आग सुलगने लगी है। विक्रम के भारी हाथों का स्पर्श उसके उन मटरों को और भी ज्यादा सख्त बना रहा था जो अब शर्ट के महीन कपड़े के पार अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे थे।

विक्रम ने उसे कुर्सी से उठाया और अपनी ओर घुमाया, उनकी आँखों में एक-दूसरे के प्रति अदम्य प्यास साफ झलक रही थी। नेहा की सांसें अब तेज और भारी हो चुकी थीं, और उसका सीना ऊपर-नीचे हो रहा था। विक्रम ने अपनी उंगलियों से नेहा की शर्ट के बटन एक-एक करके खोलने शुरू किए…

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