Join WhatsApp Click Here
Join Telegram Click Here

अजनबी शहर की वो मदहोश रात और मीरा का साथ

अजनबी शहर की वो मदहोश रात और मीरा का साथ—>रात के ग्यारह बज चुके थे और मुंबई के उस आलीशान होटल के रिसेप्शन पर भारी भीड़ थी क्योंकि मूसलाधार बारिश की वजह से सारी उड़ानें रद्द हो गई थीं। राहुल अपनी ब्रीफकेस थामे खड़ा था तभी उसकी नजर मीरा पर पड़ी जो एक गहरे नीले रंग की रेशमी साड़ी में लिपटी अपनी परेशानी जाहिर कर रही थी। होटल के मैनेजर ने साफ कह दिया था कि केवल एक ही सुइट बचा है और अगर वे चाहें तो उसे साझा कर सकते हैं। दोनों की नजरें मिलीं और उस अजनबी शहर में एक अनकहे समझौते के साथ वे दोनों लिफ्ट की ओर बढ़ चले जहाँ से इस सफर की एक नई और बेहद निजी कहानी शुरू होनी थी।

मीरा की उम्र लगभग अडतीस साल रही होगी लेकिन उसके शरीर की बनावट किसी ढली हुई मूरत जैसी थी, उसकी कमर पतली लेकिन नीचे का हिस्सा काफी चौड़ा और गदराया हुआ था जिसे साड़ी का पल्लू भी पूरी तरह ढक नहीं पा रहा था। जब वह चलती थी तो उसके भारी तरबूज साड़ी के नीचे एक अलग ही हलचल पैदा करते थे और उनके ऊपर उभरे छोटे-छोटे मटर साड़ी के पतले कपड़े के नीचे से अपनी मौजूदगी का एहसास करा रहे थे। राहुल की नजरें बार-बार उसके उन उभारों पर टिक जाती थीं और उसके मन में एक अजीब सी खलबली मच रही थी जो शायद उस ठंडे कमरे की एसी की हवा से भी शांत नहीं होने वाली थी।

कमरे में पहुँचते ही माहौल में एक अजीब सी खामोशी छा गई जिसमें सिर्फ उन दोनों की सांसों की आवाज सुनाई दे रही थी। राहुल ने अपनी शर्ट के बटन खोले तो मीरा की नजरें उसके चौड़े सीने पर जा टिकीं और उसे अपने भीतर एक अज्ञात उत्तेजना महसूस होने लगी। मीरा ने अपनी साड़ी का पल्लू कंधे से गिराया तो उसके गोरे और पुष्ट तरबूज आधे से ज्यादा बाहर झलकने लगे, जिनकी गहराई में राहुल खुद को खोता हुआ महसूस कर रहा था। उन दोनों के बीच एक अनकहा खिंचाव था जो शब्दों से परे था और धीरे-धीरे एक गहरी चाहत में बदल रहा था जो बरसों की प्यास बुझाने को आतुर थी।

राहुल ने हिम्मत जुटाकर मीरा के करीब कदम बढ़ाया और धीरे से उसके कंधे पर अपना हाथ रखा, मीरा ने मना नहीं किया बल्कि अपनी आँखें मूंद लीं। उसके शरीर में एक हल्की सी कंपकंपी हुई और उसने अपनी गर्दन एक तरफ झुका ली जिससे राहुल को उसके गोरे गले पर अपना चेहरा झुकाने का मौका मिल गया। राहुल की सांसें मीरा की गर्दन पर पड़ रही थीं जिससे उसके रोम-रोम में बिजली सी दौड़ गई और उसने धीरे से राहुल की शर्ट को अपनी उंगलियों से जकड़ लिया। वह पहला स्पर्श ही इतना गहरा और भावुक था कि दोनों को अपनी मर्यादाओं के टूटने का अहसास होने लगा था लेकिन दिल रुकने को तैयार नहीं था।

जैसे-जैसे रात परवान चढ़ रही थी, राहुल का हाथ मीरा की साड़ी के नीचे उसकी चिकनी कमर पर रेंगने लगा और मीरा की आहें तेज होने लगीं। राहुल ने मीरा को अपनी ओर घुमाया और उसके गुलाबी होंठों को अपने काबू में ले लिया, दोनों एक-दूसरे के रस को इस तरह पी रहे थे जैसे सदियों के प्यासे हों। राहुल के हाथ अब मीरा के उन भारी और सख्त तरबूजों पर थे जिन्हें वह अपनी हथेलियों में भरकर जोर-जोर से भींच रहा था। मीरा के मुँह से निकलने वाली सिसकारियां उस सन्नाटे को चीर रही थीं और उसका शरीर राहुल के शरीर से पूरी तरह चिपक गया था जहाँ उसे राहुल के बढ़ते हुए खीरे की सख्ती साफ महसूस हो रही थी।

राहुल ने धीरे से मीरा को बिस्तर पर लिटाया और उसकी साड़ी को पूरी तरह से अलग कर दिया, अब मीरा केवल अपने अंतःवस्त्रों में थी और उसका शरीर कुन्दन सा चमक रहा था। राहुल ने झुककर मीरा के उन उभरे हुए मटरों को अपने मुँह में भर लिया और उन्हें अपनी जीभ से सहलाने लगा जिससे मीरा बिस्तर पर तड़पने लगी। उसके हाथ राहुल के बालों में उलझ गए थे और वह बार-बार राहुल को अपने और करीब खींच रही थी। राहुल ने धीरे से मीरा की पेन्टी नीचे सरकाई तो उसे वहाँ झाड़ियों जैसे मुलायम बालों से ढकी हुई एक गहरी और गीली खाई दिखाई दी जो अपनी गहराई में डूबने के लिए राहुल को आमंत्रित कर रही थी।

राहुल ने अपनी उंगली से उस खाई की गहराई को मापना शुरू किया तो मीरा ने एक जोर की कराह भरी और अपना पिछवाड़ा बिस्तर से ऊपर उठा लिया। उसकी खाई पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और राहुल की उंगली उसमें बड़ी आसानी से अंदर-बाहर हो रही थी जिससे निकलने वाली आवाज कमरे के माहौल को और भी ज्यादा कामुक बना रही थी। मीरा अब और इंतजार नहीं कर सकती थी, उसने राहुल की पैंट खोली और उसके गरम और सख्त खीरे को अपने नाजुक हाथों में पकड़ लिया। उस खीरे की लंबाई और मोटाई देखकर मीरा की आँखें फटी की फटी रह गई और उसने धीरे से उस खीरे को अपने मुँह में लेकर उसे चूसना शुरू कर दिया।

मीरा का खीरा चूसना राहुल को पागल कर रहा था, वह उसके मुँह में अपने खीरे को गहराई तक डाल रहा था और मीरा बड़े चाव से उस पर अपनी जीभ फेर रही थी। कुछ ही देर में राहुल ने मीरा को घुमाया और उसे बिस्तर पर घुटनों के बल खड़ा कर दिया जिससे उसका भारी पिछवाड़ा ऊपर की ओर तन गया। राहुल ने पीछे से मीरा की कमर पकड़ी और अपने खीरे की नोक को उसकी गीली खाई के द्वार पर टिका दिया। एक गहरे झटके के साथ राहुल ने अपना पूरा खीरा मीरा की खाई में उतार दिया और मीरा के मुँह से एक लंबी और दर्द भरी लेकिन सुखद चीख निकल गई। पिछवाड़े से खोदना इतना आनंददायक था कि मीरा की आँखें पलट गईं और वह बेतहाशा हिलने लगी।

राहुल ने अब अपनी रफ्तार बढ़ा दी थी, हर झटके के साथ उसका खीरा मीरा की गहराई को छू रहा था और दोनों के शरीर पसीने से तर-बतर हो चुके थे। कमरे में थप-थप की आवाजें गूँज रही थीं और मीरा राहुल के हर झटके को अपने भीतर महसूस कर रही थी। वह बार-बार कह रही थी, ‘हाँ राहुल, और तेज… मुझे पूरी तरह से खोद डालो, मेरी खाई को अपने रस से भर दो।’ राहुल ने फिर मीरा को सीधा लिटाया और सामने से खोदना शुरू किया, उसके तरबूज राहुल के सीने से टकरा रहे थे और हर धक्के पर मीरा का पूरा बदन थरथरा रहा था।

खुदाई अब अपने चरम पर पहुँच चुकी थी, राहुल की सांसें उखड़ रही थीं और मीरा का शरीर बार-बार धनुष की तरह मुड़ रहा था। राहुल ने मीरा की टांगें अपने कंधों पर रखीं और पूरी ताकत से अंतिम झटके लगाने लगा जिससे मीरा का रस निकलना शुरू हो गया। उसी पल राहुल ने भी एक गहरा धक्का मारा और अपना सारा गरम रस मीरा की गहरी खाई के अंदर उड़ेल दिया। दोनों एक-दूसरे की बाहों में ढह गए, उनके शरीर एक-दूसरे से जुड़े हुए थे और उनकी धड़कनें एक लय में चल रही थीं। वह रात उन दोनों के लिए सिर्फ एक जिस्मानी जरूरत नहीं बल्कि दो अजनबियों के बीच उपजा एक गहरा और अटूट भावनात्मक जुड़ाव बन गई थी।

शांति छाने के बाद राहुल ने मीरा को अपने सीने से लगा लिया और उसके माथे को चूमा, मीरा की आँखों में एक अजीब सी संतुष्टि और चमक थी। उसे अपनी हालत का अहसास हुआ, बिखरे हुए बाल और पसीने से चमकती त्वचा उसके समर्पण की कहानी कह रही थी। राहुल ने उसे धीरे से चादर ओढ़ाई और दोनों बिना कुछ बोले एक-दूसरे की गर्माहट में खो गए। सुबह जब सूरज की किरणें खिड़की से अंदर आईं, तो वे दोनों अब अजनबी नहीं थे, बल्कि उस मदहोश रात की यादों के साझीदार थे जिसने उनकी जिंदगी में एक नया रंग भर दिया था।

Leave a Comment

You cannot copy content of this page