Virgin Cousin Chudai XXX
मेरा नाम साहिद है, उम्र 23 साल, करांची से। अब मैं आपको अपनी पहली सेक्स एक्सपीरियंस की कहानी सुनाता हूँ। पिछली गर्मियों में मैं छुट्टियाँ मनाने अपनी खाला के घर लाहौर गया था। खाला के तीन बच्चे हैं – एक लड़की और दो लड़के। लड़की सचमुच बहुत खूबसूरत है। बड़ी-बड़ी आँखें, तीखे-तीखे नैन-नक्श, रंग साँवला सा और फिगर वाह! 36-28-36। कमाल का फिगर। Virgin Cousin Chudai XXX
मैं कोशिश करता रहा कि इसे छू लूँ, किस कर लूँ, लेकिन वो मुझे लिफ्ट ही नहीं करवा रही थी। मैं मायूस होता चला जा रहा था और सोच रहा था कि मैं अम्मी से कहकर इसी से शादी ज़रूर करूँगा। मगर! एक दिन खाला-खालू अपने एक बेटे की टाँग चेक करवाने शेखूपुरा गए थे, क्योंकि उसकी टाँग में दर्द नहीं जा रहा था।
लाहौर में बहुत अच्छे-अच्छे डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन ठीक न हुआ तो किसी ने एक बुज़ुर्ग का बताया तो सब उधर चले गए। उस दिन मैं सोकर उठा तो देखा घर में कोई नहीं। मैं ऊपरी पोर्शन पर गया। वहाँ मुझे किसी के बातें करने की आवाज़ आई।
मैं रुक गया और झाँकते हुए जब सहन में पहुँचा तो मेरी कज़िन और पड़ोस का लड़का एक-दूसरे को किस करने में मशगूल थे। इससे पहले कि मैं कुछ करता, लड़के ने मुझे देख लिया और दुम दबाकर भाग गया। वहाँ मेरी कज़िन अकेली खड़ी रह गई। जिससे मैं शादी की उम्मीद लगाए बैठा था। मैं बहुत हैरान भी हुआ और परेशान भी।
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खैर, मैंने उससे कुछ नहीं कहा और ये सोच लिया कि अभी खाला-खालू को बता दूँगा। मैं नीचे गया और टी.वी. ऑन करके देखने लगा। मेरी कज़िन, जिसका नाम आशिया है, मेरे पास आई और बोली, “साहिद प्लीज़ जो तुमने देखा वो मेरे पैरेंट्स को मत बताना।”
इसी बीच मेरे दिमाग में आशिया को लेकर ढेर सारे आइडियाज़ आ चुके थे।
मैंने कहा, “मैं नहीं बताऊँगा अगर तुम मुझे अपने अफेयर के बारे में सच-सच बताओ। ये भी बताओ कि वो लड़का तुम्हारे साथ क्या-क्या कर चुका है और तुम्हारे दरमियान ये सब कब से चल रहा है।”
तो उसने बताया कि पिछले दो महीने से वो मेरे साथ बातें करता है और कभी-कभी किस भी कर लेता है। पिछले हफ्ते से वो मेरे मम्मे भी दबा रहा है।
मैंने पूछा, “क्या उसने तुम्हें कभी चोदा भी है?”
आशिया ने कहा, “नहीं बिलकुल नहीं, मैं ऐसा काम नहीं करवा सकती।”
फिर आशिया ने कहा, “अब मैंने तुम्हें सब सच-सच बता दिया है, अब तो तुम अम्मी-अब्बू को नहीं बताओगे।”
मैं कौन सा बेवकूफ था? मैंने एक और शर्त रख दी – “पहले तुम मेरे साथ वही कुछ करो जो तुम उस लड़के के साथ करती थीं, फिर मैं नहीं बताऊँगा।”
बजाय इसके कि वो मान जाती, वो गुस्से में आ गई और बोली, “तुम मुझे ब्लैकमेल कर रहे हो। मैंने जो करना था कर लिया, अब मैं किसी से कुछ नहीं करने वाली। तुम्हारी मर्ज़ी, बताओ या न बताओ।” ये कहकर वो दूसरे कमरे में चली गई और मैं उल्लू की तरह उसे देखता रह गया।
मुझे बहुत गुस्सा आया। मैं फौरन उठा और सीधा गेट पर चला गया, चेक किया कि गेट लगा हुआ है। उसके बाद उसके कमरे में गया। वो अपने बेड पर लेटी हुई थी। मैंने कहा, “असल में आशिया मेरे कहने का मतलब वो नहीं था…” ये कहते-कहते मैं उसके करीब पहुँच चुका था और उसके ऊपर लेट गया और उसके होंठों में होंठ डाल दिए।
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उसने बहुत ज़ोर आज़माई लेकिन नाकाम। उसकी आवाज़ तक नहीं निकल रही थी क्योंकि उसके होंठ मेरे मुँह में थे। लगभग 3 मिनट बाद मुझे महसूस हुआ कि उसने ज़ोर आज़माई बंद कर दी है और उसके होंठ भी खुलने लगे हैं और उसने अपनी ज़बान मेरे मुँह में डाल दी है।
तो मैंने उसे छोड़ दिया और कहा, “देखो आशिया, मैं तुम्हारे साथ कुछ गलत नहीं करूँगा लेकिन अगर तुम ज़ोर आज़माई करोगी तो न मज़ा आएगा और हो सकता है कुछ गलत भी हो जाए।”
तो उसने कहा, “ठीक है मगर एक वादा करो कि तुम किसी को कुछ बताओगे तो नहीं।”
मैंने कहा, “मैं क्या पागल हूँ जो किसी से कुछ कहूँगा।”
तो उसने कहा, “ठीक है फिर सबसे पहले मेरे मम्मे दबाओ।”
क्यों नहीं जान-ए-मान! मैं आज तुम्हें वो मज़ा दूँगा कि तुम उम्र भर न भूल सको। इसके बाद मैंने उसके मम्मे मसलने शुरू कर दिए और होंठों में होंठ डाल दिए। उसके मुँह से अजीब-अजीब सी आवाज़ें निकलने लगीं – ह्म्म्म्म्म्म… आह्ह्ह्ह्ह… ओफ़्फ़्फ़… मुझे और भी ज़्यादा मज़ा आने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
मैंने उसकी कमीज उतारनी शुरू की तो पहले तो उसने रोका लेकिन फिर मान गई। मैंने उसकी कमीज समेत ब्रा भी खोल दी। वाह! क्या मम्मे थे उसके। मैं तो पागल ही हो रहा था। मैंने फौरन होंठ छोड़कर मुँह मम्मों पर लगा दिया और उधर उसकी सिसकारियाँ भी बढ़ने लगीं – आह्ह्ह्ह्ह… ओफ़्फ़्फ़… साहिद प्लीज़ आहिस्ता करो… काटो नहीं, सिर्फ़ चूसो… आराम से चूसो…
और 10 मिनट तक उसके मम्मे चूसने के बाद मेरा हाथ अचानक आशिया की फुद्दी पर चला गया तो वो तो उछल ही पड़ी। अरे क्या हुआ? बोली, “नहीं, मैं ये नहीं करवाऊँगी।”
मैंने कहा, “देखो आशिया, मैं सिर्फ़ हाथ ही फेरूँगा और कुछ नहीं। इससे तुम्हें बहुत ज़्यादा मज़ा आएगा और अगर न आए तो दोबारा शलवार पहन लेना।”
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संक्षेप में मैंने उसे बहुत सारी तसल्ली देकर मना ही लिया। मैं उसकी फुद्दी पर तकरीबन तीन मिनट हाथ फेरता रहा कि मेरी एक उंगली उसकी फुद्दी में चली गई। आशिया ने हल्की सी सिसकारी भरी और कुछ नहीं कहा। मैंने दूसरी उंगली भी डाल दी। इस बार फिर वैसा ही हुआ। उसके बाद मैंने हाथ खींच लिया और सिर्फ़ मम्मे दबाने लगा और किस करने लगा। आशिया ने मेरा हाथ पकड़ा और दोबारा फुद्दी पर रख दिया।
मैंने पूछा, “मज़ा आ रहा है ना आशिया?” बोली, “हाँ।”
फिर मैंने कहा, “देखो मैंने तुम्हारे कपड़े उतारे हैं, अब मेरे भी उतारो।” तो उसने एक-एक करके सारे कपड़े उतार दिए सिवाय अंडरवियर के, जिसमें एक वज़ह उभार नज़र आ रहा था। मैंने कहा, “इसे भी उतारो।” जब उसने अंडरवियर उतारा तो 7 इंच लंबा लंड देखकर हैरान रह गई और बोली, “इसका क्या करूँ?”
मैंने कहा, “इसे थोड़ा रगड़ो, इससे मुझे मज़ा मिलेगा।”
तो उसने ऐसे ही 2 मिनट तक किया और फिर मुझसे बोली, “साहिद मेरी एक बात मानोगे?”
मैंने कहा, “क्यों नहीं जानम।”
उसने कहा, “क्या तुम मेरी फुद्दी चाट सकते हो? प्लीज़ मेरी फुद्दी में ज़बान फेरो।”
मैं इस काम से बहुत घबराता था, मुझे अच्छा नहीं लगता था।
मैंने कहा, “देखो आशिया ये काम ठीक नहीं है।”
वो मानने को तैयार ही न थी तो मैंने कहा, “एक शर्त है – तुम मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसो, फिर मैं तुम्हारी फुद्दी चाटूँगा।”
उसने कहा, “नहीं पहले तुम।” मैंने कहा, “नहीं पहले तुम।”
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इस तरह तय हुआ कि 69 पोज़ीशन बनाई जाए। उसके बाद उसने मेरा लंड धीरे-धीरे मुँह में लेना शुरू किया और मैंने उसकी फुद्दी पर ज़बान रख दी। फिर कुछ ही देर बाद मेरा लंड उसके मुँह में आ-जा रहा था और वो बहुत शौक से मेरा लंड चूस रही थी और मैं उसकी फुद्दी के अंदर तक ज़बान ले जा रहा था।
अचानक मेरे मुँह में मनी का एक सैलाब आ गया और मैं जज़्बात की ऐसी रौ में बह रहा था कि उसकी सारी मनी जोश समझकर पी गया। फिर उसने उठकर मुझे खड़ा कर लिया और खुद नीचे बैठकर मेरा लंड चूसने लगी। मैं छूटने वाला था।
मैंने उसे बताया, “I am about to cum.”
उसने कहा, “डोन्ट वरी एंड कम इन माय माउथ।”
मैं छूटने लगा तो यकीन करिए मेरी तो चीखें निकल रही थीं – आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह… और आशिया थी कि पूरे ज़ोर से खींच रही थी और उसने एक कतरा भी ज़ाया नहीं किया और सारी मनी पी गई। मैं निढाल होकर लेट गया और वो मेरा लंड छोड़ने को तैयार ही न थी। लेटे हुए भी वो मेरा लंड चूस रही थी कि मेरा लंड फिर से तैयार होने लगा।
और मैंने कहा, “आशिया एक बात – मैंने तुम्हारी मनी पी है और एक बात तुम मेरी मानो।”
उसने कहा, “क्यों नहीं साहिद, तुमने मुझे ज़िंदगी का मज़ा दिया है। बताओ क्या कर सकती हूँ मैं तुम्हारे लिए?”
मैंने कहा, “मैं तुम्हारी फुद्दी मारना चाहता हूँ। देखो फर्स्ट टाइम थोड़ा दर्द होगा, उसके बाद मज़े ही मज़े होंगे। असल मज़ा तो फुद्दी में ही है।”
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तो उसने पहले इंकार कर दिया लेकिन बहुत तक़र्रुर के बाद वो मान ही गई और उसने टाँगें फैला लीं। मैंने उसकी कमर के नीचे तकिया रखा तो उसकी फुद्दी ऊपर को उठ आई और बहुत वाज़ेह हो गई। मैंने लंड का सुपारा धीरे-धीरे अंदर करना शुरू किया तो वो चीखने लगी।
मैंने निकाल लिया और फिर दोबारा उसकी फुद्दी पर लंड रखा और उसके ऊपर लेट गया और होंठों को मुँह में ले लिया और एक ज़ोरदार झटके से पूरा का पूरा लंड उसके अंदर कर दिया। उसने मुझे इस ज़ोर से पीछे को धकेला कि अगर मैं तैयार न होता तो यकीनन बेड से नीचे जा गिरता। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
लेकिन मैं चौंके पहले से तैयार था इसलिए वो मेरी गिरफ्त से न निकल सकी बल्कि उसकी आवाज़ तक न निकल सकी। बस घुटी-घुटी सी आवाज़ आ रही थी – आईईएईई… म्म्म्म्म… और आँखों से आँसू बह रहे थे। लेकिन मैंने लंड बाहर न निकाला और 3 मिनट बाद मैंने उसके होंठ आज़ाद कर दिए तो वो रोने लगी और बोली, “मुझे बहुत दर्द हो रहा है प्लीज़ लंड निकालो बाहर, मुझे नहीं लेने मज़े।”
मैंने कहा, “एक शर्त पर निकालूँगा – तुम बिलकुल नहीं हिलोगी और मैं खुद ही धीरे-धीरे निकालूँगा।” वो मान गई और मैं धीरे-धीरे निकालने लगा। जब आधा सुपारा बाहर आ गया तो मैंने एक और ज़ोरदार झटका दिया और फिर लंड अंदर।
इस बार वो चीख ही पड़ी – आईईएईई… मर्रर गई माँ… ओफ़्फ़्फ़… निकालो इसे बाहर।
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मैंने उसकी एक न सुनी और धीरे-धीरे झटके देने शुरू कर दिए। कुछ देर बाद वो भी ऊपर को उठने लगी और मुझसे ज़्यादा ज़ोर से ऊपर को उठने लगी और कहने लगी, “और ज़ोर से साहिद… प्लीज़ फक मी लाइक अ बिच… मुझे कुतिया की तरह चोद कुत्ते।”
इस तरह के अल्फाज़ से मैं और जोशीला हो गया और ज़ोर-ज़ोर से मारने लगा। मैंने उसे घोड़ी बना लिया और लगा झटके पर झटका मारने। इसके बाद उसने मुझे अपने नीचे कर लिया और लगी घुड़सवारी करने। फिर सारा निकाल लेती और एकदम ऊपर बैठ जाती। मैंने उससे कहा कि मैं छूट रहा हूँ।
उसने कहा, “बस एक मिनट।”
मैं छूट गया लेकिन वो एक ही लफ्ज़ कह रही थी – बस एक मिनट… आआआह्ह्ह्ह… बस एक मिनट…
ये कहते हुए वो मेरे ऊपर बैठी तकरीबन दो मिनट तक घुड़सवारी करती रही और फिर मेरे लंड के इर्द-गिर्द मनी ही मनी थी और वो नीचे आ गई। वो छूट चुकी थी। फिर हमने इकट्ठे नहाया और तीन बार और चुदाई का मज़ा लिया। फिर चूँकि खाला-खालू आने वाले थे इसलिए कपड़े बदले और अपने-अपने कमरों में मशगूल हो गए।