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जंगल की वो रात

माया उस घने जंगल के किनारे बने छोटे से झोपड़े में अकेली थी। रात गहरी हो चुकी थी, और बाहर बारिश नहीं, बल्कि सिर्फ पत्तियों की सरसराहट और दूर कहीं उल्लू की आवाज थी। माया यहां इसलिए आई थी क्योंकि शहर की भीड़ से भागना चाहती थी। उसकी सफेद सूती ड्रेस हल्की सी गीली थी – झोपड़े की छत से टपकती बूंदों से। ड्रेस उसके शरीर से चिपककर उसके तरबूजों की गोलाई को और उभार रही थी।

तभी दरवाजे पर दस्तक हुई। माया चौंक गई। इतनी रात में कौन? उसने दरवाजा खोला तो सामने अक्षय खड़ा था – जंगल का गाइड, जो दिन में उसे ट्रेकिंग पर ले गया था। अक्षय का चेहरा गीला था, बाल बिखरे हुए, और आँखों में एक अजीब सी चमक। “माया, बाहर बहुत ठंड हो गई है। क्या मैं अंदर आ सकता हूं? मेरी झोपड़ी दूर है।” माया ने हिचकिचाते हुए हाँ कहा।

दोनों अंदर बैठ गए। छोटी सी आग जल रही थी, जिसकी रोशनी में अक्षय का चेहरा और गहरा लग रहा था। बातें शुरू हुईं – जंगल की कहानियां, माया की अकेली जिंदगी, अक्षय का जंगल से लगाव। धीरे-धीरे बातें व्यक्तिगत हो गईं। अक्षय ने कहा, “तुम यहां अकेली क्यों आई हो?” माया ने कुछ नहीं कहा, बस आँखें झुका लीं। अक्षय ने अपना हाथ बढ़ाया और माया के हाथ को छुआ। उस स्पर्श में एक जंगली गर्माहट थी। माया की सांस तेज हो गई। वह जानती थी कि यह गलत हो सकता है, लेकिन जंगल की चुप्पी में सब कुछ सही लग रहा था।

अक्षय धीरे से करीब आया। उनकी सांसें अब एक हो रही थीं। पहले संतरा चूसना जंगली जानवरों जैसा था – धीमा, लेकिन गहरा। अक्षय के होंठ माया के होंठों को बड़े जोश से चूस रहे थे, जीभ अंदर तक खेल रही थी। माया ने पहली बार किसी को इतने करीब महसूस किया। उसकी आँखें बंद हो गईं। अक्षय का हाथ माया की पीठ पर गया, फिर कमर पर। उसने ड्रेस के पट्टे धीरे से नीचे सरकाए। ड्रेस कंधों से फिसलकर गिर गई। माया के तरबूज आग की रोशनी में चमक रहे थे। मटर सख्त होकर बाहर आ गए थे। अक्षय ने एक तरबूज को दोनों हाथों से पकड़ा, हल्के से मसला। माया के मुंह से एक गहरी कराह निकली। अक्षय ने मटर को मुंह में लिया, जीभ से घुमाया, चूसा। माया ने अक्षय के बाल पकड़ लिए, उसे और करीब खींचा।

अक्षय ने माया को जमीन पर बिछी चटाई पर लिटा दिया। जंगल की ठंडी हवा झोपड़े में आ रही थी, लेकिन दोनों के शरीर जल रहे थे। अक्षय ने अपनी शर्ट उतारी। उसका खीरा जंगली जानवर की तरह तना हुआ था। माया ने उसे देखा, शर्म से आँखें बंद कीं, लेकिन फिर उत्सुकता से देखा। अक्षय ने माया की ड्रेस पूरी तरह उतार दी। अब माया सिर्फ प्रकृति के सामने थी। उसने माया की जांघों को सहलाया, धीरे-धीरे ऊपर की तरफ बढ़ा। खाई पर बाल हल्के से गीले थे। अक्षय ने पहले उंगली से छुआ, बहुत धीरे अंदर डाला। माया की कमर उठ गई। “अक्षय… और…” उसकी आवाज जंगल में गूंजी। अक्षय ने खाई चाटना शुरू किया – जीभ गहरी तक जाती, बाहर आती। माया का शरीर कांप रहा था। खुजली इतनी तेज थी कि वह चीखने को तैयार थी।

अक्षय ने अपना खीरा माया की खाई पर टिकाया। बहुत धीरे से दबाया। खीरा अंदर सरकता हुआ महसूस हुआ – जैसे जंगल का कोई राज खुल रहा हो। माया ने दर्द से अंगुलियां अक्षय की पीठ पर गाड़ दीं। अक्षय रुक-रुक कर अंदर जा रहा था। जब पूरा अंदर गया तो दोनों ने एक-दूसरे को कसकर जकड़ लिया। फिर अक्षय ने पिछवाड़े से खोदना शुरू किया। माया घुटनों के बल थी, अक्षय पीछे से। हर थ्रस्ट के साथ माया के तरबूज लहरा रहे थे। अक्षय एक हाथ से उन्हें मसल रहा था, दूसरा कमर पर। माया की कराहें अब जंगल की आवाजों में मिल गई थीं। पसीना दोनों के शरीर पर बह रहा था।

रफ्तार जंगली हो गई। माया महसूस कर रही थी कि उसकी खाई अब खीरे का घर बन गई है। अक्षय और गहराई से धक्का दे रहा था। अचानक माया का शरीर तेजी से कांप उठा। रस छूट गया – गर्म, तेज लहरें खाई से निकलकर खीरे को भिगो रही थीं। अक्षय भी कुछ सेकंड बाद जोर से कांप उठा और अपना रस अंदर छोड़ दिया। दोनों थककर चटाई पर गिर पड़े। लंबे समय तक एक-दूसरे से लिपटे रहे।

बाहर जंगल अब चुप था। आग की लपटें धीमी हो रही थीं। माया ने अक्षय की छाती पर सिर रखा। अक्षय ने उसके बालों में उंगलियां फिराईं। माया धीरे से बोली, “कल सुबह तुम चले जाओगे?” अक्षय ने कहा, “नहीं माया। इस जंगल में अब सिर्फ हम दोनों हैं।” दोनों ने एक-दूसरे को देखा। वो रात जंगल की सबसे गहरी और सबसे जंगली रात बन गई।

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