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जवान माँ की चु@@ई

निशा मेरी सौतेली माँ थी और उनकी उम्र अभी मुश्किल से छत्तीस बरस की रही होगी, लेकिन उनके शरीर की बनावट को देखकर कोई भी उनकी असली उम्र का अंदाज़ा नहीं लगा सकता था। उनकी त्वचा का रंग गेहूंआ था और उनकी आँखों में हमेशा एक अजीब सी कशिश और गहराई रहती थी जो किसी को भी अपने मोहपाश में बांध ले। जब वह घर में पतली सूती साड़ी पहनकर घूमती थीं, तो उनके भारी और गोल तरबूज साड़ी के पतले कपड़े से बाहर झाँकने की कोशिश करते थे, जिन्हें देखकर मेरा मन व्याकुल हो जाता था। उनके कमर की ढलान और उनके चौड़े पिछवाड़े की मटक हर बार मेरे अंदर एक नई उत्तेजना पैदा करती थी, जिसे मैं चाहकर भी दबा नहीं पा रहा था।

मैं आर्यन, बाईस साल का जवान लड़का, अपनी पढ़ाई पूरी करके कुछ समय के लिए घर वापस आया था और मेरे पिता काम के सिलसिले में अक्सर शहर से बाहर ही रहते थे। निशा की शारीरिक बनावट बहुत ही कामुक थी; उनके शरीर का हर अंग जैसे तराशा हुआ था, विशेषकर उनके वे बड़े-बड़े तरबूज जिनके ऊपर लगे मटर जैसे उभार अक्सर साड़ी के ऊपर से ही अपनी उपस्थिति दर्ज कराते थे। मैं अक्सर चोरी-छिपे उन्हें काम करते हुए देखता रहता था और मन ही मन उस गहरी खाई की कल्पना करता था जो उनकी टांगों के बीच छिपी हुई थी। मेरे शरीर का खीरा उनकी एक मुस्कुराहट या उनके शरीर की खुशबू मात्र से ही अकड़ कर सख्त होने लगता था और मैं अपनी बढ़ती हुई प्यास से बेहाल था।

हमारे बीच एक अनकहा सा रिश्ता पनपने लगा था, जो सिर्फ माँ-बेटे का नहीं रह गया था बल्कि उसमें एक दबी हुई कामुकता और खिंचाव भी शामिल था। हम दोनों एक-दूसरे की नज़रों को पढ़ने लगे थे और अक्सर जब हमारी आँखें मिलतीं, तो निशा अपनी नज़रें झुका लेती थीं, लेकिन उनके गालों पर आने वाली लालिमा सब कुछ बयां कर देती थी। घर की शांति में जब हम दोनों अकेले होते, तो हवा में एक अजीब सी गर्मी महसूस होती थी जो हमें एक-दूसरे के करीब खींच रही थी। वह जानती थीं कि मैं उनके जिस्म का दीवाना हूँ और शायद उनके अंदर भी कहीं न कहीं उस प्यार और शारीरिक संतुष्टि की भूख थी जो पिता के बाहर रहने के कारण अधूरी थी।

उस रात उमस बहुत ज्यादा थी और सारा घर सन्नाटे में डूबा हुआ था, तभी अचानक बिजली चली गई और पूरा कमरा अंधेरे की आगोश में समा गया। मैं अपने कमरे में लेटा हुआ था कि तभी निशा मेरे कमरे में एक मोमबत्ती लेकर आईं और उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक और हिचकिचाहट थी। उन्होंने बहुत ही बारीक नाइटी पहनी हुई थी जिसके अंदर से उनके तरबूज साफ झलक रहे थे और उनके मटर जैसे उभार कपड़े को चीरकर बाहर आने को बेताब थे। मैंने धीरे से उनका हाथ पकड़ा और उन्हें अपनी ओर खींचा, जिससे वह सीधे मेरे ऊपर आ गिरीं और उनकी सांसों की गरमाहट सीधे मेरे चेहरे पर महसूस होने लगी।

उनकी धड़कनें बहुत तेज़ थीं और मेरी भी हालत कुछ ऐसी ही थी, मेरा हाथ अनायास ही उनकी पीठ से होता हुआ उनके भारी पिछवाड़े तक पहुँच गया और मैंने उन्हें जोर से अपनी तरफ भींचा। निशा ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि उन्होंने अपनी आँखें बंद कर लीं और धीरे से आह भरी, जिससे मेरा साहस और बढ़ गया। मैंने अपने होंठ उनके गर्दन पर टिका दिए और वहां का स्वाद लेने लगा, जिससे उनके शरीर में एक सिहरन सी दौड़ गई और वह मेरे बालों में अपनी उंगलियां फंसाकर मुझे और करीब लाने लगीं। कमरे में मोमबत्ती की मद्धम रोशनी में उनके गोरे जिस्म की चमक और भी ज्यादा नशीली लग रही थी और मैं अब और रुकने के पक्ष में नहीं था।

मैंने धीरे-धीरे उनकी नाइटी के पट्टे उनके कंधों से नीचे गिरा दिए, जिससे उनके दूध जैसे सफेद और भारी तरबूज मेरे सामने पूरी तरह आज़ाद हो गए। उन तरबूजों पर लगे गहरे गुलाबी रंग के मटर प्यास से तन चुके थे और मैंने बिना देर किए एक को अपने मुंह में भर लिया और उसे धीरे-धीरे चूसने लगा। निशा के मुंह से एक दबी हुई कराह निकली और उन्होंने मेरा सिर और जोर से अपने सीने से लगा लिया, जैसे वह इसी पल का सालों से इंतज़ार कर रही थीं। मेरी उंगलियां अब नीचे की ओर बढ़ रही थीं जहाँ उनकी रेशमी और गीली खाई मेरा इंतज़ार कर रही थी, जिसे महसूस करते ही मेरा खीरा अपनी सीमाएं लांघने को तैयार हो गया।

जैसे ही मेरी उंगली उनकी उस गहरी और रसीली खाई के संपर्क में आई, वह पूरी तरह से कांप उठीं और उनके शरीर से पसीना छूटने लगा। उनकी खाई पूरी तरह से शहद जैसी चिपचिपी हो चुकी थी और वहां उगे हुए बारीक बाल मेरे स्पर्श से और भी संवेदनशील हो गए थे। मैं अपनी उंगली से खोदना शुरू किया, तो निशा की कमर ऊपर-नीचे होने लगी और वह बिस्तर की चादर को अपने हाथों में भींचने लगीं। मैंने अपना सिर नीचे झुकाया और उनकी उस महकती हुई खाई को चाटना शुरू किया, जिसका स्वाद इतना नशीला था कि मैं मदहोश होने लगा। निशा अपने दोनों हाथों से मेरे सिर को दबा रही थीं और उनके मुंह से निकलने वाली आहें कमरे की खामोशी को चीर रही थीं।

अब निशा की बर्दाश्त का बांध टूट रहा था और उन्होंने मेरे पजामे की डोरी खींच दी, जिससे मेरा विशाल और लोहे जैसा सख्त खीरा उनके सामने गर्व से तनकर खड़ा हो गया। उन्होंने पहली बार उसे अपने हाथों में लिया और उसकी गरमाहट और मोटाई महसूस करके उनकी आँखें फैल गईं। निशा ने बिना कुछ कहे अपना मुंह नीचे झुकाया और मेरे खीरे को पूरा का पूरा अपने मुंह में ले लिया और उसे बड़े चाव से चूसना शुरू किया। वह हर हिस्से को अपनी जीभ से सहला रही थीं और उनके इस कृत्य ने मुझे स्वर्ग का अनुभव करा दिया, मेरा हाथ उनके बालों में था और मैं बस उस सुखद अहसास में खोया हुआ था।

अंततः मैंने उन्हें सीधा लिटाया और उनके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया, जिससे उनकी रसीली खाई पूरी तरह से मेरे सामने खुल गई। मैंने अपने खीरे की नोक को उनकी खाई के मुहाने पर रखा और धीरे से दबाव डाला, जिससे वह दर्द और सुख के मिले-जुले अहसास से चीख पड़ीं। जैसे-जैसे मेरा खीरा उनकी तंग खाई के अंदर गहराई तक समाने लगा, मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मैं किसी गर्म और मखमली गुफा में प्रवेश कर रहा हूँ। पूरी तरह अंदर जाने के बाद हम दोनों कुछ पल के लिए स्थिर हो गए और एक-दूसरे की आँखों में देखते हुए उस पल की गहराई को महसूस किया, जहाँ कोई शर्म नहीं थी, सिर्फ जुनून था।

मैंने अब सामने से खोदना शुरू किया, हर धक्का इतना गहरा और दमदार था कि निशा का पूरा शरीर हिल जाता था और उनके तरबूज पागलों की तरह ऊपर-नीचे उछल रहे थे। हमारे जिस्म पसीने से तर-बतर थे और कमरे में सिर्फ हमारे अंगों के टकराने की आवाज़ें और निशा की सिसकारियां गूंज रही थीं। ‘आह आर्यन… और तेज़… मुझे पूरी तरह खोद डालो,’ उनके इन शब्दों ने मेरे अंदर जैसे आग लगा दी और मैंने अपनी रफ्तार और बढ़ा दी। मैं हर धक्के के साथ उनकी गहराई को नाप रहा था और वह हर बार मुझे और गहराई में समाने के लिए उकसा रही थीं, उनकी आँखों में अब सिर्फ और सिर्फ काम वासना का सैलाब था।

कुछ देर तक सामने से खुदाई करने के बाद मैंने उन्हें उल्टा लेटने को कहा और वह घुटनों के बल बैठ गईं, जिससे उनका भारी पिछवाड़ा ऊपर की ओर उठ गया। मैंने पीछे से उनके पिछवाड़े को थामते हुए अपने खीरे को फिर से उनकी खाई में उतारा और पिछवाड़े से खोदना शुरू किया, यह स्थिति इतनी उत्तेजक थी कि मेरा नियंत्रण खोने लगा। निशा का सिर बिस्तर पर टिका था और वह पागलों की तरह अपना पिछवाड़ा पीछे की ओर ढकेल रही थीं ताकि मेरा खीरा उनके गर्भाशय को छू सके। हर धक्के पर उनके मटर बिस्तर की चादर से रगड़ खा रहे थे और वह सुख के चरम पर पहुँचने वाली थीं, उनकी सांसें अब उखड़ने लगी थीं और शरीर धनुष की तरह तन गया था।

जल्द ही वह पल आया जब निशा का शरीर जोरों से कांपने लगा और उनकी खाई से भारी मात्रा में गर्म रस निकलने लगा, जिससे मेरी खुदाई और भी चिकनी हो गई। उनके रस छूटने के कुछ ही पलों बाद मेरा भी संयम जवाब दे गया और मैंने अपने खीरे को उनकी गहराई में पूरी तरह घुसाकर अपना सारा गर्म सफेद रस उनकी खाई में उड़ेल दिया। हम दोनों एक-दूसरे पर गिर पड़े, बेदम और पसीने से लथपथ, लेकिन मन में एक असीम शांति और संतुष्टि थी। वह रात हमारे जीवन की सबसे यादगार रात बन गई थी, जिसने हमारे बीच के सारे पर्दों को हटाकर हमें रूहानी और जिस्मानी तौर पर एक कर दिया था।

काफी देर तक हम वैसे ही लिपटे रहे, निशा का सिर मेरे सीने पर था और मैं उनके रेशमी बालों को सहला रहा था। वह धीरे से मुस्कुराईं और मेरी आँखों में देखकर बोलीं, ‘आज तुमने मुझे एक नई जिंदगी दी है आर्यन,’ और फिर हमने एक-दूसरे को बांहों में भरकर नींद की आगोश में जाने का फैसला किया। उस खुदाई के बाद निशा के चेहरे पर एक अलग ही निखार आ गया था और उनके शरीर की शिथिलता बता रही थी कि वह कितनी तृप्त थीं। हम जानते थे कि यह सिलसिला अब थमने वाला नहीं था, क्योंकि इस सुख की लत हमें लग चुकी थी और अब हर रात हमारी नई खुदाई की गवाह बनने वाली थी।

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