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आदिल और बड़ी बाजी शबनम की चु@@ई

आदिल छुट्टियों में अपनी बड़ी बाजी शबनम के घर आया था। शबनम 34 साल की थी, निकाह के बाद अकेली रहती थी क्योंकि शौहर व्यापार के सिलसिले में विदेश में था। घर दिल्ली के एक पुराने मोहल्ले में था, दो कमरे, एक छोटी बालकनी जहां से शाम की रोशनी आती थी। आदिल 21 का था, कॉलेज में पढ़ता था, लेकिन बचपन से शबनम बाजी उसके लिए अम्मी जैसी थी – देखभाल, मोहब्बत, दोस्ती। इस बार जब वह आया तो बाजी ने गले लगाया, उनके सलवार सूट की खुशबू में एक गर्माहट महसूस हुई जो पहले नहीं थी। “भाई, कितना बड़ा हो गया तू,” शबनम ने कहा, लेकिन उनकी आंखों में एक गहरी नजर थी जो आदिल को बेचैन कर गई। शाम को दोनों बैठकर बातें करने लगे – पुरानी यादें, आदिल की तालीम, शबनम के तनहा घर की शिकायत। आदिल की नजर बाजी के कुर्ते पर टिक जाती, जहां उनके स्त@#@ की आकृति हल्की उभरी हुई थी, और वह खुद को कोसता लेकिन नजरें नहीं हटा पाता।

रात का खाना खाकर शबनम ने कहा, “भाई, तू मेरे कमरे में सो जा, बाहर वाला कमरा अभी साफ नहीं है, और मुझे भी अच्छा लगेगा तेरे साथ। शौहर तो यहां हैं नहीं…” आदिल ने हां कह दी, मन में एक अजीब सी उत्तेजना थी। कमरे में लेटकर दोनों बातें करने लगे – शबनम के शौहर की गैरहाजिरी, घर की तनहाई, और धीरे-धीरे बातें शख्सी होती गईं। “भाई… तुझे कोई लड़की पसंद है?” शबनम ने पूछा। आदिल ने ना कहा। शबनम ने बाजी ने कहा, “तो बाजी को देख… बाजी कितनी खूबसूरत है?” आदिल के गाल लाल हो गए, लेकिन वह चुप रहा। रात में जब बाजी उठकर पानी पीने गईं, उनके सलवार के कुर्ते का दुपट्टा सरक गया, स्त@#@ की गहराई दिखी। आदिल ने देख लिया, और उसका ल@#ंड हल्का सा सख्त हो गया। बाजी ने देखा कि आदिल की नजरें वहां हैं, लेकिन वो अनजान बनकर मुस्कुराईं, “भाई… सो जा…”

अगले दिन सुबह बाजी नहाकर निकलीं, उनके गीले कुर्ते स्त@#@ से चिपके हुए थे, नि@#@ल साफ दिख रहे थे। आदिल बिस्तर पर लेटा था, बाजी उसके पास आईं, “भाई… चाय पिएगा?” लेकिन झुकते समय उनका स्त@#@ आदिल के हाथ से छू गया। दोनों सिहर उठे। बाजी ने कहा, “सॉरी भाई…” लेकिन उनकी आंखों में खुशी की चमक थी। आदिल का ल@#ंड अब पूरी तरह सख्त हो गया, पैंट में उभरा हुआ। बाजी ने देख लिया, लेकिन कुछ नहीं कहा, बस मुस्कुराकर चली गईं। आदिल शर्म से लाल हो गया, क्योंकि बाजी के मन में एक छिपी इच्छा जाग रही थी – “भाई का इतना सख्त… मेरे स्पर्श से…”

शाम को बाजी ने कहा, “भाई… मेरी पीठ में दर्द है… थोड़ी मालिश कर दे…” आदिल ने हां कहा। बाजी लेट गईं, कुर्ते के बटन थोड़े खुले। आदिल ने तेल लगाया, उंगलियां पीठ पर घुमाईं। बाजी ने आह भरी, “उफ्फ… भाई… अच्छा लग रहा है… और नीचे…” आदिल की उंगलियां कमर तक सरकीं, अनजाने में बाजी की ग@#@ड छू गई। बाजी सिहर उठीं, “आह… भाई… वहां भी दर्द है…” आदिल का ल@#ंड फिर सख्त हो गया, पैंट में उभरा। बाजी ने प्लेटकर देखा, और हल्के से कहा, “भाई… तुझे भी दर्द हो रहा है ना… बाजी मालिश कर दे?” आदिल शर्मा गया, “नहीं बाजी…” लेकिन बाजी ने अनजान बनकर कहा, “चुप… बाजी तेरी है…” और उनका हाथ आदिल की पैंट पर गया, ल@#ंड सा सहलाने लगी। “भाई… इतना गर्म… बाजी को खुश कर रहा है…”

रात में बाजी ने दरवाजा बंद किया, “भाई… अब बाजी तेरी है…” उन्होंने आदिल के होंठों पर चु@#@न कर दिया, गहरा, जीभ अंदर घुसाकर। आदिल ने रोकने की कोशिश की, “बाजी… ये गुनाह है…” लेकिन شبنم ने कहा, “मोहब्बत में गुनाह नहीं… बाजी तेरी है…” शبنم ने अपना कुर्ता खोल दिया, स्त@#@ बाहर आ गए – भरे हुए, नि@#@ल गुलाबी और सख्त हो चुके थे। आदिल ने हिचकिचाते हुए छुआ, “बाजी… कितने नरम और गर्म…” शबनम ने आह भरी, “दबा… जोर से… बाजी को अच्छा लगता है… चूस ले… नि@#@ल को मुंह में लेकर चूस… आह… ऐसे ही…” आदिल ने मुंह लगाया, चूसा, शबनम की कराह निकल गई, “आह… भाई… ऐसे ही… बाजी की चू@#@ी तेरे लिए हैं… उफ्फ… और जोर से… बाजी की चू@#@ी दबाकर चूस…”

उनका हाथ आदिल की पैंट में गया, ल@#ंड बाहर निकाला – “भाई… इतना सख्त और मोटा… बाजी की चू@#@त में डाल… बाजी तरस रही है…” आदिल ने विरोध किया, “बाजी… ये पाप है…” लेकिन शबनम ने कहा, “कुछ पाप नहीं… बाजी तेरी है… देख कितनी गीली हो गई हूं तेरे स्पर्श से…” शबनम ने आदिल को लिटाया, उसकी पैंट पूरी उतार दी। ल@#ंड को मुंह में लिया, चूसा, जीभ से टिप घुमाई, अंदर-बाहर किया जैसे कोई अनुभवी। आदिल की सांसें तेज, “बाजी… उफ्फ… मत… लेकिन रुक मत… आह… बाजी की जीभ कितनी गर्म…” शबनम ने मुस्कुराकर कहा, “भाई… अब बाजी तेरी है… पूरी रात तेरे ल@#ंड से खेलूंगी…”

उन्होंने सलवार उतारी, प@#@ी साइड की, चू@#@त पूरी गीली, होंठ फूले हुए, झ@#@ट चिपकी हुई। आदिल ने उंगली डाली, “बाजी… कितनी गर्म और गीली…” शबनम ने कराहा, “आह… और अंदर… दो उंगलियां… बाजी की चू@#@त तेरे लिए तरस रही है… चाट ले… जीभ से सहला…” आदिल ने मुंह लगाया, चाटा, क्लिट चूसा। शबनम चीखी, “आآह्ह… भाई… ऐसी चाट… बाजी झड़ जाएगी… उफ्फ… और जोर से चूस… क्लिट को दांतों से हल्का काट… आह… बाजी का पहला org@#@ms आ रहा है… रस निकल रहा है… तेरे मुंह पर…”

फिर शबनम ऊपर बैठ गईं, ल@#ंड चू@#@त में उतारा। “आह… भाई… पूरा भर गया… उफ्फ… कितना मोटा और लंबा… बाजी की चू@#@त फैल गई…” शबनम ऊपर-नीचे होने लगीं। हर थ्रस्ट पर उनकी चू@#@त आदिल के ल@#ंड को निचोड़ रही थी। “आह… भाई… चु@#@ई कर… बाजी को जोर से… देख… बाजी तेरे ल@#ंड पर उछल रही है… आह… मेरी चू@#@त फाड़ दे… उफ्फ… बाजी का दूसरा org@#@ms आ रहा है… रस बह रहा है… तेरे ल@#ंड पर चिपक रहा…” आदिल ने नीचे से धक्के मारे, “बाजी… तेरी चू@#@त कितनी गर्म और तंग… आह… मैं झड़ रहा हूं… तेरी चू@#@त में रस डाल रहा हूं…” शबनम ने कराहा, “हां… अंदर छोड़… बाजी की चू@#@त भर दे… आआह्ह… हम दोनों साथ झड़ रहे हैं… org@#@ms… रस मिल रहा है…”

वे पोजीशन बदलते रहे – कभी शबनम नीचे, आदिल ऊपर, कभी पीछे से ग@#@ड में धक्के। “भाई… पीछे से… मेरी ग@#@ड में डाल… आह… कितना गहरा… बाजी की ग@#@ड तेरे ल@#ंड से फट रही है… लेकिन अच्छा लग रहा है… और जोर से… थपथपा मेरी ग@#@ड… आह… मैं फिर झड़ रही हूं…” आदिल ने स्त@#@ दबाए, नि@#@ल चूसे, जबकि धक्के मारता रहा। शबनम की कराहें कमरे में गूंज रही थीं, “उफ्फ… भाई… बाजी तेरी रखैल है अब… रोज चु@#@ई कर… बाजी की चू@#@त तेरे ल@#ंड की गुलाम है…” आखिर में आदिल ने शबनम की चू@#@त में अपना गर्म रस छोड़ा, दोनों थककर लिपट गए।

रात भर हम लिपटे रहे, सुबह शबनम ने कहा, “भाई… ये राज हमारा… लेकिन हर रात तेरे साथ… शौहर आने तक…” और आदिल ने मुस्कुराकर हां कह दी। घर का वो कमरा अब उनके से@#@स का गवाह बन गया, जहां हर रात एक नई कहानी बनती।

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