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अजनबी पड़ोसन की चु@@ई


अजनबी पड़ोसन की चु@@ई—>

नेहा एक बहुत ही आकर्षक और मनमोहक महिला थी जिसकी उम्र करीब २८ साल के आसपास रही होगी। वह अभी हाल ही में आर्यन के बगल वाले फ्लैट में रहने आई थी और पहले ही दिन से आर्यन की नजरों में बस गई थी। नेहा का शरीर किसी तराशी हुई मूरत की तरह था, उसके अंगों का उभार किसी को भी दीवाना बनाने के लिए काफी था। जब वह चलती थी तो उसके शरीर का हर हिस्सा एक लय में डोलता था जिसे देखकर आर्यन के मन में अजीब सी हलचल होने लगती थी। वह अक्सर हल्के रंग की साड़ियां पहनती थी जो उसके गोरे बदन पर बिजली की तरह चमकती थीं और उसकी कमर के घेरे को और भी उभार देती थीं।

आर्यन एक २४ साल का गबरू जवान था जो अपनी पढ़ाई खत्म करके एक निजी कंपनी में काम करना शुरू ही किया था। नेहा के आने के बाद से उसकी रातों की नींद और दिन का चैन जैसे गायब ही हो गया था। नेहा के तरबूज इतने सुडौल और बड़े थे कि साड़ी के ब्लाउज से बाहर झाँकने की कोशिश करते प्रतीत होते थे। जब भी नेहा बालकनी में आती तो आर्यन की नजरें उसके उन रसीले तरबूज पर ही टिक जातीं। उनके ऊपर मौजूद मटर जैसे निप्पल साड़ी के कपड़े के पीछे से अपनी उपस्थिति दर्ज कराते थे जिसे देखकर आर्यन के मन का खीरा अपने आप ही कड़ा होने लगता था और उसकी पैंट में हलचल मच जाती थी।

एक शाम जब बारिश का मौसम हो रहा था और ठंडी हवाएं चल रही थीं, नेहा ने आर्यन को अपने घर किसी सामान को ठीक करने के लिए बुलाया। जैसे ही आर्यन उसके घर में दाखिल हुआ, उसे नेहा के बदन की भीनी-भीनी खुशबू ने मदहोश कर दिया। नेहा उस समय एक पारदर्शी नाइटी में थी जिसके नीचे उसने कुछ भी नहीं पहना था। उसके शरीर की बनावट साफ नजर आ रही थी और उसके तरबूज नाइटी के पतले कपड़े के पीछे से साफ झलक रहे थे। आर्यन ने जैसे ही उसके पास जाकर काम करना शुरू किया, उसके हाथ अनजाने में नेहा की कमर से छू गए जिससे नेहा के पूरे बदन में एक बिजली सी दौड़ गई और उसने एक लंबी आह भरी।

नेहा की आँखों में एक अजीब सी तड़प और प्यास थी जो शायद उसके पति के बाहर रहने की वजह से पैदा हुई थी। उसने आर्यन का हाथ पकड़ लिया और उसे अपने और भी करीब खींच लिया। आर्यन को समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे लेकिन उसकी इच्छाएं उसे रोक नहीं पा रही थीं। नेहा ने धीरे से आर्यन के कान के पास जाकर फुसफुसाते हुए कहा कि उसे बहुत अकेलापन महसूस होता है। उनकी सांसें एक-दूसरे से टकरा रही थीं और माहौल में एक कामुक गर्माहट फैल गई थी। आर्यन ने हिम्मत जुटाकर नेहा के गालों को छुआ और फिर धीरे-धीरे उसके होंठों की तरफ बढ़ने लगा जहाँ से रस टपकने को बेताब था।

जैसे ही दोनों के होंठ मिले, एक धमाका सा हुआ और उनकी जुबानें एक-दूसरे के रस को चखने लगीं। आर्यन ने धीरे से नेहा की नाइटी के ऊपर से ही उसके रसीले तरबूज को अपने हाथों में भर लिया। नेहा के मटर जैसे निप्पल अब पूरी तरह से सख्त हो चुके थे और वह आर्यन की छुअन से कराह रही थी। आर्यन ने अपनी उंगलियों से उन मटर को सहलाना शुरू किया जिससे नेहा की आँखों में नशा और भी बढ़ गया। वह आर्यन के बालों में अपनी उंगलियां फँसाकर उसे और भी जोर से अपनी ओर खींचने लगी। उनके बीच की झिझक अब पूरी तरह से खत्म हो चुकी थी और केवल शुद्ध वासना का संचार हो रहा था।

आर्यन ने धीरे से नेहा की नाइटी को उसके कंधे से नीचे गिरा दिया जिससे उसका पूरा नग्न शरीर आर्यन के सामने उजागर हो गया। नेहा के गोरे बदन पर उसके काले बाल किसी नागिन की तरह लटक रहे थे। उसके नीचे की खाई पूरी तरह से साफ थी और वहां से हल्का सा गीलापन निकलने लगा था जो यह बता रहा था कि वह खुदाई के लिए पूरी तरह से तैयार है। आर्यन ने नीचे झुककर नेहा की खाई को निहारना शुरू किया और अपनी जुबान से खाई चाटना शुरू कर दिया। नेहा के मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं और वह अपने पैरों को और भी चौड़ा करने लगी ताकि आर्यन उसकी गहराई तक पहुँच सके।

नेहा की खाई से निकलने वाला रस अब आर्यन के चेहरे पर लग रहा था जिसे वह बड़े चाव से चाट रहा था। नेहा ने आर्यन की पैंट की जिप खोली और उसके विशाल खीरे को बाहर निकाल लिया। खीरा पूरी तरह से लोहे की तरह सख्त हो चुका था और अपनी लंबाई और मोटाई पर गर्व कर रहा था। नेहा ने उस खीरे को अपने कोमल हाथों में लिया और उसे सहलाने लगी। कुछ ही पलों बाद उसने पूरा खीरा अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसना शुरू कर दिया। आर्यन की आँखों के सामने अंधेरा छा गया और वह सुख के चरम पर पहुँचने लगा। वह अपनी कमर को ऊपर-नीचे करने लगा ताकि खीरा नेहा के गले तक जा सके।

काफी देर तक खीरा चूसने के बाद नेहा ने आर्यन को अपने ऊपर ले लिया और उसे सामने से खोदना शुरू करने के लिए कहा। आर्यन ने अपने खीरे की नोक को नेहा की गीली खाई के द्वार पर रखा और एक जोर का धक्का दिया। खीरा आधा अंदर चला गया और नेहा के मुँह से एक जोर की चीख निकली जो दर्द और आनंद का मिश्रण थी। आर्यन ने कुछ पल रुककर उसे सामान्य होने दिया और फिर धीरे-धीरे खुदाई की गति बढ़ा दी। हर धक्के के साथ नेहा के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे और आर्यन उन्हें अपने हाथों से मसलते हुए आगे बढ़ रहा था। कमरे में केवल उनकी सांसों और शरीर के टकराने की आवाजें गूँज रही थीं।

खुदाई का यह सिलसिला काफी देर तक चलता रहा। आर्यन अब नेहा को घुमाकर उसे पिछवाड़े से खोदना शुरू करने के लिए तैयार कर चुका था। उसने नेहा को बिस्तर पर उल्टा लिटाया और उसके पिछवाड़े को ऊपर उठाकर अपने खीरे को फिर से उसकी खाई में प्रवेश कराया। इस मुद्रा में खुदाई और भी गहरी हो रही थी और आर्यन का खीरा नेहा की खाई की दीवारों को रगड़ते हुए अंदर जा रहा था। नेहा अपने दोनों हाथों से बिस्तर की चादर को जकड़े हुए थी और जोर-जोर से आर्यन का नाम पुकार रही थी। उसका पूरा बदन पसीने से तर-बतर था और उसकी सिसकारियां अब लंबी आहों में बदल चुकी थीं।

अंत में जब दोनों का रस निकलने का समय आया, तो आर्यन ने खुदाई की गति को और भी तेज कर दिया। नेहा का शरीर थरथराने लगा और उसने आर्यन को कसकर पकड़ लिया। आर्यन ने एक आखिरी गहरा धक्का दिया और उसका सारा रस नेहा की खाई के अंदर ही छूट गया। उसी समय नेहा का भी रस निकल गया और वह बेदम होकर बिस्तर पर गिर पड़ी। दोनों काफी देर तक एक-दूसरे की बाहों में लिपटे रहे और अपनी सांसों को सामान्य होने का इंतजार करने लगे। उस रात के बाद आर्यन और नेहा के बीच का रिश्ता केवल पड़ोसियों का नहीं रहा, बल्कि वे एक-दूसरे की शारीरिक और भावनात्मक जरूरतों के साथी बन गए थे।

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