भाभी कविता समीर खुदाई
भाभी कविता समीर खुदाई—> पुरानी हवेली के आंगन में जब समीर ने कदम रखा, तो उसे लगा जैसे वक्त रुक गया हो। तपती दोपहर की सुनहरी धूप नीम के पेड़ों की पत्तियों से छनकर जमीन पर बिखरी हुई थी, जो समीर के मन में पुरानी यादों को ताजा कर रही थी। शहर की भीड़भाड़ से … Read more