खेत की गहरी चु@@ई
गाँव की उस तपती दुपहरी में जब परिंदे भी अपने घोंसलों में दुबक जाते हैं, हमारे घर के पिछवाड़े वाले बगीचे में एक अलग ही हलचल मची थी। मेरी भाभी सुनीता, जिसका यौवन किसी उपजाऊ धरती की तरह लहलहा रहा था, पसीने से तर-बतर होकर अपने छोटे से बगीचे में काम कर रही थी। उनका … Read more