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प्यासी भाभी की मदहोश करने वाली चु@@ई की कहानी

प्यासी भाभी की मदहोश करने वाली चु@@ई की कहानी—>दोपहर की तपती धूप खिड़की के रेशमी पर्दों को भेदकर कमरे के अंदर अपनी सुनहरी दस्तक दे रही थी। घर के बाकी सब लोग किसी पारिवारिक उत्सव में गए थे, लेकिन मीरा भाभी की तबीयत कुछ ठीक नहीं थी, इसलिए मैं उनके साथ रुक गया। सन्नाटा इतना गहरा था कि मुझे उनकी हर सांस की आहट साफ सुनाई दे रही थी।

मीरा भाभी सोफे पर करवट लेकर लेटी हुई थीं, उनकी पतली कमर का घेरा और उनके रेशमी ब्लाउज से झांकते उनके गोरे **तरबूज** मेरी नजरों को अपनी ओर खींच रहे थे। मैं बस चुपचाप उन्हें देख रहा था, मेरे मन में उठते तूफान को शांत करना अब मेरे बस में नहीं था। मेरा **खीरा** अपनी जगह से तेजी से अकड़ने लगा था।

मैं धीरे से उनके करीब गया और सोफे के किनारे बैठ गया। उनके चेहरे पर पसीने की छोटी-छोटी बूंदें चमक रही थीं। मैंने अपना हाथ बढ़ाकर उनके माथे से पसीना पोंछा, तो उन्होंने धीरे से अपनी आंखें खोलीं। उनकी आंखों में एक अजीब सी तड़प और गहरी प्यास नजर आ रही थी, जिसने मुझे अंदर तक झकझोर कर रख दिया।

“अजय, तुम अब तक गए नहीं?” उन्होंने धीमी आवाज में पूछा। उनकी आवाज में एक अजीब सी थरथराहट थी। मैंने बस मुस्कुराकर उनका हाथ अपने हाथ में ले लिया। उनके हाथ की कोमलता महसूस करते ही मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई। उनकी हथेलियां गर्म थीं, जैसे कोई भीतर की आग उन्हें धीरे-धीरे जला रही हो और सुकून मांग रही हो।

मैंने उनके हाथ को चूमते हुए कहा, “भाभी, आपका ख्याल रखना मेरी जिम्मेदारी है।” उन्होंने अपनी नजरें नीचे झुका लीं, लेकिन उनके चेहरे पर एक हल्की सी लाली छा गई। सन्नाटे में हमारी सांसों की गति बढ़ने लगी थी। कमरे का तापमान अचानक बढ़ गया था और हम दोनों एक-दूसरे की खुशबू में धीरे-धीरे खोने लगे थे, सब कुछ धुंधला था।

भाभी ने धीरे से अपना सिर ऊपर उठाया और मेरी आंखों में देखा। उस एक पल में हमने बिना कुछ कहे बहुत कुछ कह दिया था। मैंने झुककर उनके माथे को चूमा और फिर धीरे-धीरे अपनी नाक उनकी गर्दन पर रगड़ने लगा। उनके शरीर की महक किसी नशीले पदार्थ की तरह मेरे दिमाग पर हावी होने लगी थी, मैं बहक रहा था।

उन्होंने अपनी उंगलियां मेरे बालों में फंसा दीं और मुझे अपने और करीब खींच लिया। उनके **तरबूज** अब मेरी छाती से सट चुके थे, और उनकी गर्मी मेरे शरीर में उतर रही थी। मेरा **खीरा** अपनी पूरी ताकत से मेरे पजामे को फाड़ने की कोशिश कर रहा था। भाभी की सांसें अब मेरे कान के पास गर्म हवा के झोंके की तरह लग रही थीं।

मैंने उनके ब्लाउज की डोरियां धीरे-धीरे खोलनी शुरू कीं। उनके गोरे कंधे धूप की रोशनी में और भी ज्यादा चमक रहे थे। जब ब्लाउज थोड़ा ढीला हुआ, तो उनके उभरते हुए **तरबूज** पूरी तरह से नजर आने लगे। उनके ऊपर मौजूद गुलाबी **मटर** सर्दी की वजह से नहीं, बल्कि उत्तेजना और गहरी इच्छा की वजह से सख्त होकर खड़े हो चुके थे।

मैंने अपनी जुबान से उनके एक **मटर** को धीरे से छुआ। भाभी के मुंह से एक दबी हुई आह निकली और उन्होंने मेरी पीठ को अपने नाखूनों से जकड़ लिया। मैं उनके बदन के इस हिस्से को पूरी शिद्दत से चखने लगा। उनकी कोमलता और उनके शरीर की खुशबू ने मुझे पूरी तरह से पागल बना दिया था, मैं डूबता ही चला गया।

भाभी ने करवट बदली और मुझे अपने ऊपर आने का इशारा किया। मैंने उनके नीचे की साड़ी को हटाया, तो वहां का नजारा और भी ज्यादा हसीन था। उनकी रेशमी जांघों के बीच की गहरी **खाई** थोड़ी गीली हो चुकी थी। वहां मौजूद हल्के **बाल** किसी खूबसूरत कालीन की तरह लग रहे थे, जो मुझे अंदर आने का न्योता दे रहे थे।

मैंने अपने हाथ से उनकी **खाई** को सहलाया, तो उन्होंने अपनी कमर ऊपर की ओर उठाई। उनकी उत्तेजना अब चरम पर थी। मैंने अपने **खीरा** को बाहर निकाला, जो अब पत्थर की तरह सख्त और बड़ा हो चुका था। भाभी ने जब उसे देखा, तो उनकी आंखें फटी रह गईं, लेकिन अगले ही पल उन्होंने उसे अपने हाथ में थाम लिया।

वह धीरे-धीरे मेरे **खीरा** को सहलाने लगीं और फिर उन्होंने अपना सिर नीचे झुकाया। उन्होंने **खीरा चूसना** शुरू कर दिया, उनकी गर्म जुबान और मुंह की पकड़ ने मुझे स्वर्ग जैसा एहसास कराया। मैं उनके सिर के बालों को सहलाता रहा, जबकि वह बड़े चाव से मेरे वजूद का आनंद ले रही थीं। मेरा अंग-अंग फड़कने लगा था।

जब मुझे लगा कि अब बर्दाश्त नहीं होगा, तो मैंने उन्हें सीधे लिटाया। मैंने उनके दोनों पैरों को चौड़ा किया और उनकी **खाई** के मुहाने पर अपना **खीरा** टिका दिया। वहां से निकल रहा चिपचिपा पानी हमारे बीच के घर्षण को कम करने के लिए तैयार था। मैंने धीरे से दबाव डाला, भाभी ने कसकर अपनी आंखें बंद कर लीं और सिसकने लगीं।

हम **सामने से खोदना** शुरू कर चुके थे। हर धक्का उनके शरीर के भीतर तक जा रहा था। उनके **तरबूज** हर धक्के के साथ ऊपर-नीचे उछल रहे थे और उनके **मटर** बार-बार मेरी छाती से टकरा रहे थे। कमरे में सिर्फ हमारे शरीर के टकराने की आवाजें और भारी सांसें गूंज रही थीं। यह एक रूहानी एहसास था, जो शब्दों से परे था।

भाभी अब पूरी तरह से लय में आ चुकी थीं। उन्होंने अपनी टांगें मेरी कमर के चारों ओर लपेट लीं ताकि मैं और गहराई तक जा सकूं। हर धक्के के साथ उनकी **खाई** की पकड़ मेरे **खीरा** पर और भी मजबूत होती जा रही थी। पसीने से भीगे हुए हमारे शरीर एक-दूसरे में सिमट कर एक हो चुके थे, जैसे कोई पुराना रिश्ता जी रहे हों।

कुछ देर बाद मैंने उन्हें पलटने के लिए कहा। वह घुटनों के बल बैठ गईं और अपना **पिछवाड़ा** ऊपर की ओर उठाया। पीछे से उनकी खूबसूरती देखने लायक थी। उनकी कमर का झुकाव और उनके नितंबों की गोलाई ने मेरी उत्तेजना को दोगुना कर दिया। मैंने पीछे से उनके बालों को पकड़ा और फिर **पिछवाड़े से खोदना** शुरू किया, धक्के अब और गहरे थे।

भाभी जोर-जोर से सिसकियां ले रही थीं, उनकी आवाज में एक अजीब सा सुकून था। मैंने अपने हाथों से उनके दोनों **तरबूज** को पीछे से पकड़ लिया और उन्हें मसलते हुए **खुदाई** जारी रखी। उनकी **खाई** से अब काफी आवाजें आ रही थीं, जो हमारे बीच के जुनून को और भी ज्यादा बढ़ा रही थीं। पूरा कमरा हमारी खुशबू से भर गया था।

हम दोनों अब अपने लक्ष्य के करीब थे। उनकी सांसें उखड़ रही थीं और मेरी धड़कनें तेज हो गई थीं। भाभी ने पीछे मुड़कर मुझे देखा, उनकी आंखों में प्यार और संतुष्टि का मिला-जुला भाव था। मैंने अपनी गति और बढ़ा दी, हर धक्का जैसे उनके अस्तित्व को छू रहा था। हम दोनों एक ही लय में डूब रहे थे।

तभी भाभी का पूरा शरीर कांपने लगा और उनकी **खाई** ने मेरे **खीरा** को जोर से जकड़ लिया। उनका **रस निकलना** शुरू हो गया था, वह जोर से चिल्लाईं और बिस्तर पर ढेर हो गईं। ठीक उसी पल मैंने भी अपना सारा लावा उनकी गहराई में छोड़ दिया। हम दोनों एक-दूसरे पर गिर पड़े, पसीने और प्रेम के रस में पूरी तरह भीगे हुए।

शांति छा गई थी, लेकिन यह शांति बहुत कुछ कह रही थी। मैंने भाभी को अपनी बांहों में भर लिया और उनके माथे को चूमा। वह मेरी छाती पर अपना सिर रखकर लंबी सांसें ले रही थीं। उस दिन हमने सिर्फ शरीर का मिलन नहीं किया था, बल्कि दो तन्हा रूहों ने एक-दूसरे में सुकून तलाश लिया था, जो हमेशा यादगार रहेगा।

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