रिया भाभी की मीठी चु@@ई—>
बाहर सावन की रिमझिम फुहारें पड़ रही थीं और घर के भीतर सन्नाटा पसरा हुआ था। समीर अपनी बालकनी में खड़ा होकर बारिश की बूंदों को गिरते देख रहा था, लेकिन उसका ध्यान बाहर कम और रसोई में काम कर रही अपनी भाभी रिया पर ज्यादा था। रिया भाभी के पति, यानी समीर के बड़े भाई, काम के सिलसिले में शहर से बाहर गए हुए थे। समीर हमेशा से ही अपनी भाभी की खूबसूरती का कायल था। उनकी सांवली सलोनी त्वचा, बड़ी-बड़ी आँखें और उनके शरीर का वो खास उभार समीर की रातों की नींद उड़ा देता था। रिया भाभी जब चलती थीं, तो उनके भारी और रसीले तरबूज साड़ी के भीतर ऐसे हिलते थे जैसे दो जीवंत प्राणी कैद से आजाद होने के लिए तड़प रहे हों। समीर उन्हें देखते ही अपनी उत्तेजना को काबू करने की कोशिश करता, लेकिन आज का माहौल कुछ अलग ही था।
समीर धीरे से रसोई की तरफ बढ़ा, जहाँ रिया भाभी सब्जी काट रही थीं। उन्होंने एक हल्का आसमानी रंग का स्लीवलेस ब्लाउज पहना था, जिसमें से उनके गोरे कंधे और पीठ का बड़ा हिस्सा साफ नजर आ रहा था। समीर ने देखा कि काम करते समय उनकी साड़ी का पल्लू थोड़ा खिसक गया था, जिससे उनके एक तरबूज का ऊपरी हिस्सा और उस पर मौजूद छोटा सा मटर जैसा उभार साफ झलक रहा था। समीर का सांस लेना दूभर हो गया। उसके पैंट के भीतर उसका खीरा अब अंगड़ाइयां लेने लगा था और अपनी जगह बनाने के लिए बेताब था। भाभी के शरीर से आती मोगरे की खुशबू और रसोई में मसालों की महक मिलकर एक अजीब सा नशा पैदा कर रही थी। समीर ने हिम्मत जुटाई और उनके पीछे जाकर खड़ा हो गया, जिससे उसकी सांसें भाभी की गर्दन को छूने लगीं।
रिया भाभी ने जैसे ही समीर की मौजूदगी महसूस की, उनके शरीर में एक सिहरन सी दौड़ गई। उन्होंने मुड़कर देखा और समीर की आंखों में छिपी उस आग को पहचान लिया जिसे वो अब तक अनदेखा करती आ रही थीं। ‘समीर, तुम यहाँ क्या कर रहे हो?’ उन्होंने धीमी आवाज में पूछा, लेकिन उनकी आवाज में कोई नाराजगी नहीं थी, बल्कि एक अजीब सी कशमकश थी। समीर ने बिना कुछ बोले उनके हाथ से चाकू ले लिया और उसे बगल में रख दिया। उसने भाभी के दोनों हाथों को अपने हाथों में लिया और उन्हें सहलाने लगा। रिया की धड़कनें तेज हो गई थीं, उनके सीने पर मौजूद वो दोनों तरबूज अब तेजी से ऊपर-नीचे हो रहे थे। समीर ने महसूस किया कि भाभी का शरीर भी उसी आग में जल रहा है जिसमें वो खुद कई महीनों से तप रहा था।
समीर ने धीरे से अपना हाथ भाभी की कमर पर रखा और उन्हें अपनी ओर खींच लिया। उनके बीच की दूरी अब पूरी तरह खत्म हो गई थी। भाभी ने अपनी आँखें बंद कर ली थीं और उनके होंठ कांप रहे थे। समीर ने धीरे से उनके होठों पर अपने होंठ रख दिए और उनके चेहरे का रसपान करने लगा। यह सिर्फ एक शारीरिक आकर्षण नहीं था, बल्कि एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव भी था जो पिछले कई सालों से उनके बीच पनप रहा था। भाभी ने भी अपनी बाहें समीर की गर्दन के चारों ओर डाल दीं और उसे और करीब खींच लिया। समीर का हाथ अब भाभी की साड़ी के पल्लू को हटाकर सीधे उनके रेशमी तरबूजों तक पहुँच गया था। जैसे ही उसने उन्हें अपने हाथों में भरा, भाभी के मुंह से एक दबी हुई कराह निकल गई। वह तरबूज इतने नरम और गर्म थे कि समीर को लगा जैसे वह स्वर्ग का स्पर्श कर रहा हो।
उसने अपने अंगूठे से उनके ऊपर मौजूद छोटे मटर को सहलाना शुरू किया, जिससे रिया भाभी की कामुकता और बढ़ गई। वो समीर के सीने से चिपक गईं और उनका खीरा अब उनके पेट के निचले हिस्से पर दबाव बना रहा था। समीर ने उन्हें गोद में उठा लिया और धीरे से बेडरूम की ओर ले गया। वहां पहुंचकर उसने उन्हें बिस्तर पर लिटाया और खुद उनके ऊपर झुक गया। कमरे में डिम लाइट और बाहर बारिश की आवाज ने एक अद्भुत माहौल बना दिया था। समीर ने धीरे-धीरे भाभी के कपड़े उतारने शुरू किए। जब वो पूरी तरह निर्वस्त्र हुईं, तो समीर को उनके शरीर की असली सुंदरता का एहसास हुआ। उनकी जांघों के बीच मौजूद वो गहरी खाई अब पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और वहां मौजूद काले बालों की झाड़ी के बीच से एक मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी।
समीर ने अपनी पैंट उतारी और उसका सख्त खीरा अब पूरी तरह से आज़ाद होकर भाभी की आंखों के सामने था। रिया भाभी ने पहली बार उसे इतने करीब से देखा और उसकी लंबाई और मोटाई देखकर दंग रह गई थीं। उन्होंने अपना हाथ आगे बढ़ाया और उस गर्म खीरा को अपनी मुट्ठी में कैद कर लिया। समीर के मुंह से एक आह निकल गई। भाभी ने धीरे से उसे अपने मुंह में लिया और उसे चूसने लगीं। समीर को ऐसा लगा जैसे उसके शरीर से बिजली दौड़ गई हो। वह काफी देर तक इस सुख का आनंद लेता रहा और फिर उसने भाभी को बिस्तर पर लिटाकर उनके पैरों को फैला दिया। वह अब उनकी खाई को चखना चाहता था। जैसे ही समीर ने अपनी जीभ उस गहरी खाई पर रखी, रिया भाभी का पूरा शरीर कांप उठा। वह अपने हाथों से बिस्तर की चादर को कसकर पकड़ने लगीं।
समीर ने अपनी उंगली से उस खाई को खोदना शुरू किया, जिससे भाभी के शरीर से रस टपकने लगा। वह अब और बर्दाश्त नहीं कर पा रही थीं और उन्होंने समीर को अपने ऊपर खींच लिया। समीर ने अपने खीरे को उस खाई के मुहाने पर रखा और धीरे से भीतर धकेला। रिया भाभी की आँखों से आंसू निकल आए, लेकिन वह दर्द के नहीं बल्कि चरम सुख के थे। जैसे ही आधा खीरा भीतर गया, भाभी ने समीर को कसकर जकड़ लिया। समीर ने धीरे-धीरे अपनी रफ्तार बढ़ानी शुरू की और खुदाई की प्रक्रिया को तेज कर दिया। कमरे में केवल उनके शरीर के टकराने की आवाज़ और भाभी की सिसकियां गूँज रही थीं। समीर अब पूरी तरह से उस गहरी खाई की गहराई नाप रहा था। वह कभी सामने से खोदता तो कभी भाभी को घुमाकर उनके पिछले हिस्से की तरफ से खुदाई का आनंद लेता।
रिया भाभी के तरबूज समीर के हाथों में दब रहे थे और वह बार-बार उनके मटर को अपने मुंह में भरकर चूसता। खुदाई की यह प्रक्रिया काफी लंबी चली। दोनों पसीने से लथपथ थे, लेकिन उनकी प्यास बुझने का नाम नहीं ले रही थी। समीर ने अब भाभी की दोनों टांगों को अपने कंधों पर रख लिया और पूरी ताकत से खोदना शुरू किया। ‘ओह समीर, और जोर से… मुझे पूरी तरह भर दो,’ रिया भाभी पागलों की तरह चिल्ला रही थीं। समीर की गति अब अपनी चरम सीमा पर थी। उसे महसूस हुआ कि उसका खीरा अब फटने वाला है। उसने आखिरी कुछ झटके और भी जोर से मारे और अंत में भाभी की गहरी खाई के भीतर अपना सारा गर्म रस छोड़ दिया। उसी पल रिया भाभी का भी रस निकल गया और वो समीर के नीचे निढाल होकर गिर पड़ीं।
अगले कुछ मिनटों तक दोनों एक-दूसरे की बाहों में बंधे रहे, उनकी सांसें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं। समीर ने भाभी के माथे को चूमा और उन्हें अपनी छाती से लगा लिया। रिया की आँखों में अब एक संतोष था, एक ऐसा सुख जो उन्हें शायद पहले कभी नहीं मिला था। उस दिन के बाद से उन दोनों के बीच एक नया रिश्ता जुड़ गया था। वह केवल देवर और भाभी नहीं रहे थे, बल्कि एक-दूसरे की रूह और जिस्म के साथी बन गए थे। वह रात उनके जीवन की सबसे यादगार रात थी, जिसने उनकी भावनाओं को एक नई दिशा दी थी। पसीने और रस से भीगा हुआ उनका शरीर अब एक-दूसरे के प्यार में डूबा हुआ था, और बाहर की बारिश अब थम चुकी थी, लेकिन उनके भीतर की आग अब हमेशा के लिए जलती रहने वाली थी।