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रेयांश और अजनबी पड़ोसन खुदाई

शहर की उस ऊँची इमारत की दसवीं मंजिल पर रेयांश पिछले दो सालों से अकेला रह रहा था, लेकिन पिछले हफ्ते ही उसके बगल वाले फ्लैट में मायरा रहने आई थी। मायरा की शख्सियत में एक अजीब सा ठहराव और रहस्य था जो रेयांश को पहली ही नजर में अपनी ओर खींच ले गया। वह जब भी कॉरिडोर में उससे मिलती, उसकी आँखों में एक हल्की सी चमक और चेहरे पर एक मद्धम सी मुस्कान होती थी, जो रेयांश के दिल की धड़कनों को अनियंत्रित करने के लिए काफी थी। उस शाम आसमान गहरे बादलों से घिरा हुआ था और ठंडी हवाएं खिड़कियों से टकराकर एक सुरीला संगीत पैदा कर रही थीं, जिससे पूरा वातावरण रूमानी हो गया था।

मायरा का व्यक्तित्व जितना शांत था, उसकी खूबसूरती उतनी ही प्रखर और मोहक थी, जिसे देख कर कोई भी अपनी सुध-बुध खो सकता था। उसने उस शाम एक गहरे नीले रंग की रेशमी साड़ी पहनी थी, जिसका डीप कट ब्लाउज उसकी गोरी और सुडौल पीठ को पूरी तरह से नुमाया कर रहा था। उसकी लंबी सुराहीदार गर्दन पर पसीने की कुछ नन्हीं बूंदें मोतियों की तरह चमक रही थीं, जो उसकी कोमलता को और भी बढ़ा रही थीं। जब वह चलती थी, तो उसकी पायल की छन-छन रेयांश के कानों में किसी मधुर राग की तरह गूंजती थी और उसके जिस्म से आने वाली मोगरे की धीमी खुशबू हवा में घुल मिलकर उसे मदहोश कर रही थी।

रेयांश बालकनी में खड़ा बारिश का इंतज़ार कर रहा था, तभी मायरा वहां आई और दोनों के बीच बातों का सिलसिला शुरू हुआ जो बहुत गहरा था। मायरा ने धीमी आवाज़ में कहा, ‘रेयांश, क्या तुम्हें भी लगता है कि ये बारिश हमारे अंदर की तन्हाई को कुरेदने के लिए आती है या फिर उसे भरने के लिए?’ रेयांश ने उसकी आँखों में झांकते हुए जवाब दिया, ‘शायद दोनों ही, मायरा, क्योंकि तन्हाई जब तक महसूस न हो, तब तक किसी के साथ होने का अहसास इतना खूबसूरत नहीं लगता।’ उनकी बातों में एक ऐसा खिंचाव था जैसे दो भटकती हुई रूहें बरसों बाद एक-दूसरे के सामने खड़ी होकर अपने दुखों और खुशियों का हिसाब कर रही हों।

जैसे-जैसे शाम ढलती गई, उनके बीच का आकर्षण एक चुंबकीय शक्ति में तब्दील होने लगा जिसे शब्दों में बयान करना नामुमकिन था। रेयांश को महसूस हो रहा था कि मायरा की हर सांस उसके करीब आने की दावत दे रही है, और मायरा भी उसकी नज़रों की तपिश को अपने चेहरे पर साफ महसूस कर रही थी। बिजली कड़की तो मायरा अनजाने में ही रेयांश के थोड़ा करीब आ गई, जिससे उनकी बाहें एक-दूसरे से छुईं और एक बिजली सी उनके पूरे शरीर में दौड़ गई। उस एक पल ने उनके बीच की झिझक की आखिरी दीवार को भी जैसे गिरा दिया था और अब सिर्फ भावनाओं का सैलाब बाकी था।

रेयांश के मन में एक गहरा संघर्ष चल रहा था कि वह अपनी भावनाओं को रोके या बहने दे, लेकिन मायरा की झुकी हुई पलकों ने उसे मौन स्वीकृति दे दी थी। उसने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और मायरा की मखमली हथेली को अपने हाथों में ले लिया, जो ठंडी हवा के बावजूद बेहद गर्म और कोमल महसूस हो रही थी। मायरा ने अपनी आँखें बंद कर लीं और एक लंबी गहरी सांस ली, जैसे वह इस स्पर्श को अपनी रूह के अंदर तक उतार लेना चाहती हो। कमरे की मद्धम रोशनी में उनके साये दीवारों पर एक-दूसरे में सिमटते हुए दिखाई दे रहे थे, जो उनके आने वाले मिलन की गवाही दे रहे थे।

पहला स्पर्श इतना जादुई था कि रेयांश की उंगलियां जब मायरा की कलाई पर रेंगने लगीं, तो वह अंदर तक कांप उठी और उसकी सांसें तेज़ चलने लगीं। उसने महसूस किया कि मायरा के जिस्म में एक अजीब सी हलचल हो रही है, जैसे कोई दबी हुई इच्छा अचानक जाग उठी हो और बाहर आने को बेताब हो। रेयांश ने बहुत धीरे से अपनी उंगलियों को उसकी साड़ी के पल्लू से छूते हुए उसके कंधे तक पहुँचाया, जहाँ उसकी त्वचा मखमल से भी ज्यादा मुलायम और संजीदा थी। मायरा के मुंह से एक दबी हुई आह निकली, जो कमरे के सन्नाटे को चीरते हुए रेयांश के दिल की गहराइयों तक उतर गई।

निकटता अब धीरे-धीरे बढ़ने लगी थी और उनके बीच की दूरी अब चंद इंचों की ही बची थी, जहाँ दोनों एक-दूसरे की गर्म सांसों को अपने चेहरों पर महसूस कर सकते थे। रेयांश ने अपनी दूसरी हथेली मायरा की कमर के उस हिस्से पर रखी जो साड़ी से ढका नहीं था, और वहां के स्पर्श ने मायरा के पूरे वजूद को हिला कर रख दिया। वह शर्म और चाहत के बीच झूल रही थी, उसके चेहरे पर एक गुलाबी आभा उभर आई थी और उसकी पलकें भारी होने लगी थीं। हवा में मौजूद नमी और उनके जिस्म की बढ़ती हुई तपिश ने एक ऐसा माहौल बना दिया था जहाँ सिर्फ धड़कनों का शोर सुनाई दे रहा था।

पूरी घनिष्ठता की ओर बढ़ते हुए, रेयांश ने उसे अपनी बाहों के घेरे में ले लिया और मायरा ने भी अपना सिर उसके सीने पर टिका दिया, जहाँ उसे रेयांश के दिल की तेज रफ़्तार साफ सुनाई दे रही थी। वह उसे इतनी मजबूती से थामे हुए था जैसे वह उसे कभी खुद से जुदा नहीं होने देगा, और मायरा उसकी पकड़ में खुद को सुरक्षित और पूर्ण महसूस कर रही थी। उनके बीच अब कोई पर्दा नहीं था, न तन का और न ही मन का, बस एक-दूसरे को पाने की वो तीव्र इच्छा थी जो बरसों से उनके भीतर कहीं दबी हुई थी। कमरे का कोना-कोना उनकी धीमी आहों और सरसराहटों से जीवंत हो उठा था।

प्यार की उस प्रक्रिया में हर लम्हा जैसे ठहर सा गया था, जहाँ रेयांश ने बहुत कोमलता से मायरा के चेहरे को अपने हाथों के प्याले में लिया और उसके माथे को चूमा। उसके होंठ जब मायरा की गर्दन और कंधों को छू रहे थे, तो मायरा की उंगलियां रेयांश के बालों में उलझ गईं और वह सिसकते हुए उसे और करीब खींचने लगी। उनके शरीर पसीने की बारीक बूंदों से तर हो चुके थे, जो उनके बीच के जुनून की तीव्रता को दर्शा रहे थे। हर स्पर्श के साथ एक नई कंपकंपी और हर सांस के साथ एक नया जुड़ाव पैदा हो रहा था, जो उन्हें इस दुनिया से परे किसी और ही मकाम पर ले जा रहा था।

उस चरम सुख के बाद जब वे दोनों एक-दूसरे की बाहों में ढीले पड़े हुए थे, तो कमरे में एक अजब सी शांति और सुकून व्याप्त था। रेयांश ने देखा कि मायरा की आँखों के कोनों में नमी थी, लेकिन वह दुख के नहीं बल्कि उस असीम तृप्ति के आँसू थे जो उसे आज पहली बार महसूस हुई थी। वह अब भी उसकी छाती पर सर रखकर उसकी धीमी पड़ती धड़कनों को महसूस कर रही थी और उसके मन में यह विचार आ रहा था कि प्यार सिर्फ जिस्म का मिलन नहीं, बल्कि रूहों की वो खुदाई है जहाँ पहुँचने के बाद इंसान खुद को पा लेता है। उनकी यह रात एक नए जीवन की शुरुआत थी, जो हमेशा के लिए उनके दिलों में दर्ज हो गई थी।

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