Join WhatsApp Click Here
Join Telegram Click Here

अतीत की प्रेम खुदाई

समीर और अवनि उस पुराने, धूल भरे तहखाने में खड़े थे जहाँ बरसों से किसी के कदम नहीं पड़े थे। समीर एक प्रसिद्ध पुरातत्वविद् बन चुका था, लेकिन आज अपनी पुरानी सीनियर और मेंटर अवनि के साथ इस खुदाई वाले प्रोजेक्ट पर काम करते हुए उसे लग रहा था जैसे वह फिर से वही नौजवान छात्र बन गया हो। अवनि की सादगी में आज भी वही जादू था जो कॉलेज के दिनों में समीर की नींदें उड़ा दिया करता था। चारों तरफ पुरानी मूर्तियों और खंडहरों के अवशेष बिखरे पड़े थे, जो इस स्थान को और भी रहस्यमयी और शांत बना रहे थे।

अवनि ने उस दिन गहरे नीले रंग की शिफॉन की साड़ी पहनी हुई थी, जिसका गला काफी गहरा था और उनके गोरे कंधों पर गिरती बालों की लटें समीर के दिल की धड़कन बढ़ा रही थीं। उनकी साड़ी का पल्लू हवा के झोंके के साथ बार-बार सरक रहा था, जिसे वे बड़ी नजाकत से वापस संभाल लेती थीं। समीर की नजरें उनके गले की उस नाजुक हंसली पर ठहर गईं जो उनकी हर सांस के साथ ऊपर-नीचे हो रही थी। उनके शरीर से आ रही मोगरे की हल्की खुशबू उस पुरानी मिट्टी की महक के साथ मिलकर एक नशीला वातावरण बना रही थी जिसने समीर के होश उड़ा दिए थे।

अवनि ने एक पुरानी दीवार पर जमी मिट्टी को हल्के हाथों से साफ करते हुए कहा, ‘समीर, देखो ये दीवारें कितनी खामोश हैं, लेकिन इनके भीतर कितने अनकहे राज दबे हुए हैं।’ समीर उनके थोडा और करीब आया और बोला, ‘शायद इन दीवारों की तरह हमारे दिल भी बहुत कुछ छुपाए बैठे हैं, अवनि मैम। खुदाई सिर्फ जमीन की नहीं होती, कभी-कभी जज्बातों की परतों को भी हटाना पड़ता है।’ उनकी नजरें मिलीं और उस एक पल में बरसों की दबी हुई तड़प और अनकहा प्यार एक-दूसरे की आँखों में साफ झलकने लगा। अवनि की पलकें शर्म से झुक गईं, लेकिन उनके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान तैर गई जो समीर को निमंत्रण दे रही थी।

उस ठंडी और अंधेरी जगह में आकर्षण की एक ऐसी बिजली कौंधी कि दोनों के बीच की दूरी सिमटने लगी। समीर ने हिम्मत जुटाकर अवनि के हाथ पर अपना हाथ रखा, जो उस समय एक पुरानी मूर्ति के हिस्से को छू रही थीं। उनके स्पर्श में एक अजीब सी सिहरन थी जिसने अवनि के पूरे शरीर में एक कंपकंपी पैदा कर दी। उन्होंने हाथ पीछे नहीं खींचा, बल्कि समीर की उंगलियों की गर्माहट को महसूस करने लगीं। उनके चेहरे पर छाई वो झिझक अब धीरे-धीरे मिट रही थी और उसकी जगह एक गहरी प्यास और चाहत ले रही थी जो सालों से अधूरी थी।

समीर का हाथ अब धीरे से अवनि की कमर की ओर बढ़ा, जहाँ साड़ी का रेशमी कपड़ा उनकी कोमल त्वचा को छू रहा था। जैसे ही समीर की उंगलियों ने उनकी कमर के उस खुले हिस्से को छुआ, अवनि के मुंह से एक दबी हुई आह निकल गई। उनके शरीर में एक सिहरन दौड़ गई और उन्होंने अपनी आँखें मूंद लीं। समीर ने उन्हें अपनी ओर खींचा और अवनि का सिर उसके मजबूत सीने पर टिक गया। दोनों की सांसें अब एक-दूसरे से टकरा रही थीं और उस खामोश तहखाने में सिर्फ उनके दिल की तेज धड़कनें ही सुनाई दे रही थीं जो किसी संगीत की तरह गूँज रही थीं।

समीर ने अवनि के चेहरे को अपने दोनों हाथों में लिया और उनके माथे को बड़ी शिद्दत से चूमा। अवनि ने अपनी बाहें समीर के गले में डाल दीं और उन्हें और भी कसकर थाम लिया। उनके बीच अब कोई पर्दा नहीं था, सिर्फ दो आत्माओं का मिलन था जो बरसों से इस लम्हे का इंतजार कर रही थीं। समीर के होंठ जब अवनि की गर्दन के पास पहुंचे, तो उनकी गर्म सांसों ने अवनि को अंदर तक हिलाकर रख दिया। वे दोनों उस पुराने खंडहर के बीच जैसे एक नई दुनिया बसा रहे थे, जहाँ सिर्फ प्रेम, स्पर्श और अहसासों की भाषा चलती थी।

पूरी घनिष्ठता के उस चरम पर, जब समीर ने अवनि को अपनी गोद में उठाया, तो अवनि ने अपना चेहरा उनके कंधे में छुपा लिया। उनका हर स्पर्श एक कविता की तरह था, जो बिना शब्दों के बहुत कुछ कह रहा था। समीर ने उन्हें एक मखमली दरी पर लिटाया जो उन्होंने खुदाई के दौरान आराम के लिए वहाँ रखी थी। उनके बीच का प्यार अब और भी गहरा और सघन होता जा रहा था। पसीने की छोटी-छोटी बूंदें अवनि के माथे पर चमक रही थीं और उनकी हर सांस में एक अजीब सी बेचैनी और संतुष्टि का मिश्रण था।

उस मिलन के बाद, जब सब कुछ शांत हो गया, अवनि समीर की बाहों में लिपटी हुई थीं। बाहर बारिश की बूंदों के गिरने की आवाज आ रही थी, जो इस पल को और भी रूमानी बना रही थी। समीर ने उनके बालों को सहलाते हुए कहा, ‘यह खुदाई सफल रही, हमने सिर्फ अतीत को नहीं ढूँढा, बल्कि खुद को भी पा लिया।’ अवनि ने मुस्कुराते हुए उनकी ओर देखा, उनकी आँखों में अब एक सुकून था जो शब्दों से परे था। उस दिन उस पुराने तहखाने में दो जिंदगियाँ फिर से जुड़ गई थीं और प्यार ने अपनी एक नई इबारत लिख दी थी।

Leave a Comment

You cannot copy content of this page

error: Content is protected !!