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जवान मामी की मदहोश चु@@ई

समीर अपने मामा के घर पहुँचा जहाँ उसकी जवान मामी शालिनी अकेले रहती थी क्योंकि मामा शहर से बाहर काम पर गए हुए थे। शालिनी की उम्र करीब पैंतीस साल थी लेकिन उसका शरीर किसी बीस साल की कली जैसा खिला हुआ और गदराया हुआ था जिसे देखकर कोई भी अपना आपा खो सकता था। समीर ने जैसे ही उसे देखा उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई और उसके दिल की धड़कनें एक अनजानी उत्तेजना के साथ बहुत तेज होने लगी थीं। शालिनी ने एक तंग कुर्त्ता पहना हुआ था जिससे उसके उभरे हुए तरबूज साफ नजर आ रहे थे और समीर की नजरें बार-बार वहीं जा रही थीं।

शालिनी मामी का बदन बहुत ही आकर्षक और सुडौल था जिसे देखकर समीर के मन में हलचल मच गई थी और वह अपनी नजरें उनसे हटा नहीं पा रहा था। उनके गोरे रंग और उस पर काले बालों का मेल बहुत ही सुंदर लग रहा था और उनकी चाल में एक ऐसी मादकता थी जो समीर को दीवाना बना रही थी। जब भी वह चलती थीं तो उनके पिछवाड़े की लचक समीर के दिल में छुरियाँ चला देती थी और उसका मन करता था कि वह बस उन्हें देखता रहे। उनके होंठों की लाली और उनकी नशीली आँखें समीर को अपनी ओर खींच रही थीं जैसे कोई चुंबक लोहे को खींचता है और समीर इस खिंचाव से बच नहीं पा रहा था।

समीर और शालिनी के बीच हमेशा से एक दोस्ताना रिश्ता रहा था लेकिन इस बार घर में अकेले होने की वजह से उनके बीच एक नया और गहरा खिंचाव जन्म ले रहा था। दोनों के बीच बातों का सिलसिला शुरू हुआ और बातों-बातों में ही वे एक-दूसरे के काफी करीब आने लगे जिससे उनके बीच की दूरियां धीरे-धीरे कम होने लगी थीं। शालिनी भी शायद समीर की आँखों में छिपी प्यास को महसूस कर रही थी और वह भी उसके साथ वक्त बिताने के बहाने ढूंढ रही थी जो समीर के लिए एक अच्छा संकेत था। वे घंटों बैठकर पुरानी यादें ताज़ा करते और एक-दूसरे की पसंद-नापसंद के बारे में बातें करते जिससे उनका भावनात्मक जुड़ाव और भी गहरा हो गया था।

गर्मी की उस दोपहर जब समीर ने देखा कि शालिनी सोफे पर आराम कर रही है तो उसके मन में एक अजीब सी हलचल पैदा हुई और वह धीरे से उनके पास जाकर बैठ गया। शालिनी की सांसों की आवाज़ और उनके बदन की महक समीर को मदहोश कर रही थी और उसने हिम्मत जुटाकर अपना हाथ उनके कंधे पर रखा। जैसे ही समीर का हाथ उनके रेशमी बदन से छुआ शालिनी के शरीर में एक बिजली सी दौड़ गई और उन्होंने अपनी आँखें खोलकर समीर की तरफ देखा जिसमें डर नहीं बल्कि एक अनकही चाहत साफ झलक रही थी। समीर ने उनके चेहरे को सहलाया और उनके मटर जैसे कोमल निप्पलों की उभरी हुई आकृति कुर्त्ते के ऊपर से ही दिखने लगी थी जिससे माहौल में कामुकता और भी बढ़ गई थी।

शालिनी की झिझक अब कम होने लगी थी और उसने समीर के हाथ को पकड़कर अपने तरबूजों की ओर खींच लिया जिससे समीर का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। समीर ने धीरे-धीरे उनके कुर्त्ते के बटन खोले और उनके गोरे और गोल तरबूजों को आज़ाद कर दिया जिन्हें देखकर समीर की लार टपकने लगी थी। उसने अपने हाथों में उन बड़े तरबूजों को लिया और उन्हें जोर-जोर से दबाने लगा जिससे शालिनी के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली। समीर ने झुककर उनके मटरों को अपने मुँह में भर लिया और उन्हें चूसने लगा जिससे शालिनी का पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया और वह समीर के बालों में अपनी उंगलियां फँसाकर उसे और जोर से अपनी ओर खींचने लगी।

धीरे-धीरे माहौल और भी गरम हो गया और समीर ने शालिनी की सलवार उतार दी जिससे उनकी मखमली खाई समीर के सामने पूरी तरह से आज़ाद हो गई। समीर ने देखा कि उनकी खाई पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और वहां से एक मीठी सी गंध आ रही थी जो समीर के खीरे को और भी सख्त कर रही थी। समीर ने अपनी जीभ से उनकी खाई को चाटना शुरू किया जिससे शालिनी बिस्तर पर तड़पने लगी और उसके मुँह से समीर का नाम बार-बार निकलने लगा। समीर ने अपनी उंगली से उनकी खाई में उंगली करना शुरू किया जिससे शालिनी का बदन थरथराने लगा और वह अपने पैरों को समीर की कमर पर कसने लगी ताकि वह और गहराई तक जा सके।

समीर ने अब अपना भारी और लंबा खीरा बाहर निकाला जिसे देखकर शालिनी की आँखें फटी की फटी रह गईं और उसने धीरे से उसे अपने हाथ में पकड़ लिया। उसने समीर के खीरे को अपने मुँह में लिया और उसे चूसने लगी जिससे समीर को जन्नत का सुख महसूस होने लगा और वह मदहोशी में डूबने लगा। शालिनी ने बड़े ही प्यार से खीरे को सहलाया और फिर उसे अपनी गीली खाई के द्वार पर रख दिया ताकि समीर अपनी खुदाई शुरू कर सके। समीर ने एक जोरदार धक्का मारा और उसका आधा खीरा शालिनी की तंग खाई के अंदर समा गया जिससे शालिनी के मुँह से एक दर्द और सुख भरी चीख निकल गई और उसने समीर को कसकर जकड़ लिया।

खुदाई का सिलसिला अब शुरू हो चुका था और समीर पूरी ताकत के साथ शालिनी की खाई को खोद रहा था जिससे पूरे कमरे में थप-थप की आवाज़ गूँजने लगी थी। शालिनी हर धक्के के साथ अपने पिछवाड़े को ऊपर उठा रही थी ताकि समीर का खीरा उसकी गहराई तक पहुँच सके और उसे चरम सुख का एहसास दिला सके। दोनों के शरीर पसीने से तर-बतर हो चुके थे और उनकी सांसें एक-दूसरे के चेहरे पर टकरा रही थीं जिससे माहौल और भी उत्तेजक हो गया था। समीर ने अब शालिनी को घुमाया और उसे पिछवाड़े से खोदना शुरू किया जो शालिनी के लिए एक नया और सुखद अनुभव था और वह इस खुदाई का भरपूर आनंद ले रही थी।

समीर की गति अब बहुत तेज हो चुकी थी और शालिनी का शरीर जवाब देने लगा था क्योंकि वह अपने रस निकलने के बहुत करीब पहुँच चुकी थी। उसने समीर को और भी जोर से धक्का मारने के लिए कहा और समीर ने अपनी पूरी जान लगा दी जिससे शालिनी की खाई के अंदर हलचल मच गई। अचानक शालिनी का पूरा शरीर कांपने लगा और उसकी खाई से गर्म रस निकलने लगा जिससे समीर का खीरा भी पूरी तरह से भीग गया। समीर ने भी अपनी आखिरी कोशिश की और अपना सारा सफेद रस शालिनी की खाई की गहराई में छोड़ दिया जिससे दोनों को एक असीम शांति और सुख का अनुभव हुआ।

खुदाई खत्म होने के बाद दोनों एक-दूसरे की बाहों में लेट गए और उनकी धड़कनें धीरे-धीरे सामान्य होने लगी थीं लेकिन उनके चेहरे पर एक संतुष्टि भरी मुस्कान थी। शालिनी ने समीर के माथे को चूमा और उसे अपने करीब खींच लिया जैसे वह उसे कभी छोड़ना नहीं चाहती थी और समीर को भी अपनी मामी के साथ बिताए इन पलों पर गर्व महसूस हो रहा था। उस दिन के बाद उनके बीच का रिश्ता और भी गहरा हो गया और वे अक्सर चोरी-छिपे इस खुदाई का आनंद लेते रहे जिससे उनकी जिंदगी में एक नई उमंग और जोश भर गया था। इस भावनात्मक और कामुक जुड़ाव ने उनके बीच के फासलों को हमेशा के लिए मिटा दिया था।

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