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पुरानी दोस्त की चु@@ई

आकाश और रीति कॉलेज के दिनों के बाद लगभग दस सालों के बाद एक-दूसरे से मिल रहे थे। बाहर का मौसम काफी सुहावना था और हल्की-हल्की बारिश की बूंदें रीति के घर की खिड़की पर दस्तक दे रही थीं। रीति ने गहरे लाल रंग की रेशमी साड़ी पहनी थी, जिसका गला काफी गहरा था और उसके कंधे का पल्लू बार-बार नीचे गिर रहा था। आकाश उसे देख रहा था और उसे यकीन नहीं हो रहा था कि रीति पहले से कहीं ज्यादा निखर गई थी। रीति के चेहरे पर एक अलग ही चमक थी और उसकी आँखों में वह पुरानी शरारत अभी भी जिंदा थी जो आकाश के दिल की धड़कनें बढ़ा रही थी।

रीति का शरीर अब पहले से कहीं ज्यादा सुडौल और भरा हुआ हो गया था। उसकी साड़ी के पीछे से उसकी कमर का वह हिस्सा साफ दिख रहा था जो किसी भी मर्द को पागल कर सकता था। उसके सीने पर दो विशाल और रसीले तरबूज जैसे उभार थे, जो हर सांस के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे। आकाश की नजरें चाहकर भी उन तरबूजों से नहीं हट पा रही थीं, जिनकी गोलाई साड़ी के ब्लाउज को चीरकर बाहर आने को बेताब लग रही थी। रीति को शायद इस बात का अहसास था, इसलिए वह बार-बार अपनी साड़ी को ठीक करने का नाटक कर रही थी, जिससे वे उभार और भी स्पष्ट हो रहे थे।

बातों-बातों में दोनों सोफे पर एक-दूसरे के काफी करीब आ गए थे। रीति ने आकाश को पुरानी फोटो दिखाईं और उस बहाने उसके करीब सरक आई। उसकी खुशबू आकाश के नथुनों में समा रही थी, जो किसी मदहोश कर देने वाले इत्र की तरह थी। आकाश ने महसूस किया कि रीति का हाथ गलती से उसके हाथ पर टिका हुआ था, लेकिन रीति ने उसे हटाया नहीं। उस स्पर्श ने आकाश के शरीर में बिजली की एक लहर दौड़ा दी। रीति की साँसों की गर्मी अब आकाश के गालों पर महसूस हो रही थी, जिससे माहौल में एक अजीब सी तड़प और कामुकता घुलने लगी थी।

आकाश ने धीरे से अपना हाथ रीति की कमर पर रखा, जहाँ उसकी मखमली त्वचा साड़ी के किनारे से बाहर झाँक रही थी। रीति एक पल के लिए कांप गई, लेकिन उसने विरोध नहीं किया, बल्कि उसकी आँखें और भी नशीली हो गईं। उसने धीरे से अपना सिर आकाश के कंधे पर रख दिया और एक लंबी आह भरी। आकाश ने देखा कि रीति के चेहरे पर शर्म की एक गुलाबी परत छा गई थी। उसकी इच्छाएँ अब नियंत्रण से बाहर हो रही थीं और रीति की चुप्पी उसे आगे बढ़ने का इशारा दे रही थी। कमरे की मद्धम रोशनी उनके बीच की इस बढ़ती नजदीकी को और भी गहरा बना रही थी।

तभी आकाश ने अपने होंठ रीति की गर्दन के पास ले जाकर पंखुड़ियों का रस लेना शुरू किया। रीति के मुँह से एक हल्की कराह निकली और उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। आकाश के हाथों ने अब धीरे-धीरे रीति के ब्लाउज की ओर बढ़ना शुरू किया। उसके हाथ रीति के उन भारी और मुलायम तरबूजों को सहलाने लगे, जो किसी रेशम के गोले जैसे महसूस हो रहे थे। रीति की साँसें तेज हो गई थीं और उसका शरीर उत्तेजना के मारे धनुष की तरह मुड़ रहा था। आकाश ने महसूस किया कि रीति के तरबूजों के बीच के मटर अब सख्त हो चुके थे, जो उसकी बेताबी की गवाही दे रहे थे।

रीति ने उत्तेजना में आकर आकाश की कमीज के बटन खोलने शुरू किए। जैसे ही आकाश का नग्न शरीर रीति के जिस्म से टकराया, दोनों के बीच की झिझक पूरी तरह खत्म हो गई। आकाश ने अब रीति की साड़ी को पूरी तरह से उतार दिया और वह अब सिर्फ अपने अंतःवस्त्रों में उसके सामने खड़ी थी। उसकी गहरी खाई अब साफ नजर आ रही थी, जिसमें से एक अजीब सी भीनी खुशबू आ रही थी। आकाश ने नीचे झुककर रीति की खाई को चाटना शुरू किया। रीति ने आकाश के बालों को जोर से पकड़ लिया और वह जोर-जोर से सिसकारियाँ भरने लगी। उसकी खाई अब रस से पूरी तरह भीग चुकी थी।

आकाश ने अपने खीरे को बाहर निकाला, जो अब तक पूरी तरह से सख्त और लंबा हो चुका था। रीति ने जब उस विशाल खीरे को देखा, तो उसकी आँखों में एक अलग ही चमक आ गई। उसने अपनी उंगलियों से उस खीरे को छुआ और फिर उसे धीरे से अपने मुँह में ले लिया। रीति के मुँह की गर्मी और उसकी जीभ का जादू आकाश को किसी दूसरी दुनिया में ले जा रहा था। वह रीति के सिर को थामकर उसे गहराई तक खीरा चूसने में मदद करने लगा। रीति का पूरा चेहरा अब पसीने से भीग चुका था और उसकी आँखें आधी बंद हो चुकी थीं।

अब समय आ गया था उस गहरी खुदाई का, जिसके लिए दोनों का शरीर और मन घंटों से तड़प रहे थे। आकाश ने रीति को बिस्तर पर लिटाया और उसकी टाँगों को ऊपर उठाया। उसने धीरे से अपने खीरे की नोक को रीति की गीली खाई के द्वार पर रखा। जैसे ही उसने पहला धक्का लगाया, रीति के मुँह से एक तीखी कराह निकली और उसने आकाश की पीठ में अपने नाखून गड़ा दिए। उसकी खाई काफी तंग थी, लेकिन रस के कारण खीरा धीरे-धीरे अंदर जाने लगा। आकाश ने अब अपनी गति बढ़ानी शुरू की और कमरे में दोनों के शरीरों के टकराने की आवाजें गूँजने लगीं।

रीति अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी थी, वह बिस्तर की चादर को अपने हाथों में भींच रही थी। आकाश हर धक्के के साथ गहराई तक खुदाई कर रहा था, जिससे रीति का पूरा शरीर हिल रहा था। उसने अब रीति को पलट दिया और पिछवाड़े से खोदना शुरू किया। यह तरीका रीति को और भी ज्यादा पसंद आया, वह घुटनों के बल बैठकर झटके झेल रही थी। उसके तरबूज नीचे की ओर लटक रहे थे और आकाश उन्हें पकड़कर जोर-जोर से झटके दे रहा था। माहौल पूरी तरह से कामुक हो चुका था और दोनों का पसीना एक-दूसरे में मिल रहा था।

खुदाई की यह प्रक्रिया काफी लंबी चली, जहाँ आकाश ने रीति के शरीर के हर हिस्से का आनंद लिया। कभी सामने से खोदना तो कभी उसे गोद में बिठाकर, आकाश रीति को तृप्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा था। रीति बार-बार कह रही थी, ‘आकाश, मुझे और जोर से खोदो, आज मुझे पूरी तरह से अपना बना लो।’ उसकी इन बातों ने आकाश की उत्तेजना को चरम पर पहुँचा दिया था। अंत में, जैसे ही आकाश ने एक जोरदार धक्का लगाया, रीति का रस निकलने लगा और वह बुरी तरह कांपने लगी। ठीक उसी पल, आकाश के खीरे से भी रस छूटा और उसने रीति की खाई को अंदर तक भर दिया।

दोनों काफी देर तक एक-दूसरे की बाहों में लिपटे रहे। रीति की साँसें अब धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं, लेकिन उसके चेहरे पर एक गहरी संतुष्टि और सुकून का भाव था। आकाश ने उसके माथे को चूमा और उसे अपनी छाती से लगा लिया। कमरे में अब भी उनकी महक और उस गहरी खुदाई की यादें तैर रही थीं। रीति ने आकाश की ओर देखते हुए कहा कि उसने आज तक ऐसा अनुभव कभी नहीं किया था। वह रात उनके लिए सिर्फ एक शारीरिक मिलन नहीं, बल्कि दो पुराने दोस्तों के मन का मिलन भी थी, जिसने उनके रिश्ते को एक नया और गहरा मोड़ दे दिया था।

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