पुराने दोस्त की चु@@ई —> शाम के साढ़े सात बज चुके थे और बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी, जिसके कारण जिम में सन्नाटा पसरा हुआ था। रोशनी, जो हाल ही में अपने शहर वापस लौटी थी, अपनी फिटनेस को लेकर काफी सजग रहती थी और इसीलिए उसने अपने बचपन के दोस्त समीर के जिम में दाखिला लिया था। समीर अब एक गठीले बदन वाला प्रोफेशनल ट्रेनर बन चुका था, जिसकी चौड़ी छाती और मजबूत बाजू किसी भी महिला का ध्यान भटकाने के लिए काफी थे। रोशनी ने आज काले रंग का बहुत ही तंग जिम वियर पहना हुआ था, जिसमें उसके उभरे हुए तरबूज साफ झलक रहे थे और उसकी फिटिंग इतनी गहरी थी कि जब वह झुकती थी, तो उसके तरबूजों के बीच की घाटी साफ नजर आती थी। समीर उसे वार्म-अप करते हुए देख रहा था और उसके मन में पुरानी यादें और वर्तमान की कामुकता एक साथ हिलोरें मार रही थीं।
रोशनी का शरीर अब पहले से कहीं ज्यादा कामुक और भरा हुआ हो गया था, उसके गोल और मांसल पिछवाड़े जिम की टाइट लेगिंग्स में हर हरकत के साथ थिरक रहे थे। समीर ने धीरे से उसके पास जाकर उसकी कमर पर हाथ रखा ताकि वह उसे स्ट्रेचिंग का सही तरीका बता सके, लेकिन जैसे ही समीर की उंगलियों ने रोशनी की रेशमी त्वचा को छुआ, रोशनी के शरीर में एक बिजली सी दौड़ गई। रोशनी ने मुड़कर समीर की आँखों में देखा, जहाँ उसे अपने लिए एक गहरी प्यास नजर आई, जिसे वह नजरअंदाज नहीं कर पाई। समीर के चेहरे पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं और उसकी गहरी साँसें रोशनी के कानों के पास एक मधुर संगीत की तरह गूँज रही थीं, जिससे वातावरण में एक अजीब सी बेचैनी और उत्तेजना भर गई थी।
समीर ने धीरे से रोशनी के कान के पास झुककर फुसफुसाते हुए कहा कि आज जिम में कोई नहीं है, तो क्यों न हम कुछ खास एक्सरसाइज करें। रोशनी की धड़कनें तेज हो गई थीं और उसने अपनी आँखें झुका लीं, लेकिन उसके चेहरे की लाली समीर को सब कुछ बता रही थी। समीर ने धीरे से रोशनी के टॉप के अंदर हाथ डाला और उसके रेशमी तरबूजों को अपनी हथेलियों में भर लिया, जिससे रोशनी के मुँह से एक हल्की आह निकल गई। समीर ने महसूस किया कि रोशनी के तरबूजों के ऊपर लगे छोटे-छोटे मटर अब सख्त होकर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे थे, जो इस बात का सबूत थे कि रोशनी भी अंदर ही अंदर बुरी तरह जल रही थी। समीर का हाथ धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ने लगा, जहाँ उसने रोशनी के पिछवाड़े को जोर से भींच दिया, जिससे रोशनी पूरी तरह उसके वश में हो गई।
उन दोनों के बीच सालों से दबी हुई इच्छाएं अब ज्वालामुखी की तरह फटने को तैयार थीं, और रोशनी ने अपनी झिझक त्याग कर समीर के गले में अपनी बाहें डाल दीं। समीर ने उसे गोद में उठा लिया और जिम के ही एक बेंच पर लेटा दिया, जहाँ रोशनी की लेगिंग्स को उसने धीरे से नीचे सरकाया। रोशनी की कोमल और साफ खाई अब समीर के सामने थी, जहाँ काले-काले छोटे बाल उसे और भी ज्यादा उत्तेजक बना रहे थे। समीर ने अपनी पैंट की जिप खोली और अपना विशाल और कड़क खीरा बाहर निकाला, जिसे देखकर रोशनी की आँखें फटी की फटी रह गई। उसने कभी नहीं सोचा था कि उसका पुराना दोस्त अपने पास इतना बड़ा और मोटा खीरा छिपाए बैठा होगा, जो अब पूरी तरह से उसकी खाई में उतरने के लिए बेकरार था।
समीर ने सबसे पहले रोशनी के चेहरे को चूमना शुरू किया और धीरे-धीरे नीचे उतरते हुए उसके तरबूजों को अपने मुँह में भर लिया। वह बारी-बारी से दोनों तरबूजों को चूस रहा था और उसके मटरों को अपनी जीभ से सहला रहा था, जिससे रोशनी दर्द और मजे के मिले-जुले अहसास में कराह रही थी। रोशनी ने समीर के बालों को अपनी उंगलियों में फंसा लिया और उसे अपने और करीब खींचने लगी, उसकी साँसें अब उखड़ रही थीं। समीर ने अपनी जीभ को नीचे की ओर ले जाते हुए रोशनी की गहरी और गीली खाई को चाटना शुरू कर दिया, जिससे रोशनी का शरीर धनुष की तरह मुड़ गया। खाई चाटने के दौरान समीर को वहाँ के रसीलेपन का अहसास हुआ, जो यह बता रहा था कि खुदाई के लिए जमीन पूरी तरह तैयार हो चुकी है।
रोशनी ने उत्तेजना में आकर समीर का खीरा अपने नाजुक हाथों में पकड़ लिया और उसे सहलाने लगी, वह उसकी मोटाई और लंबाई को महसूस कर रही थी। समीर ने रोशनी को गहरी नजरों से देखा और अपना खीरा उसके मुँह के पास ले गया, जिसे रोशनी ने बिना किसी देरी के अपने मुँह में ले लिया। खीरा चूसने की आवाज जिम के उस शांत कमरे में गूँज रही थी और समीर की आँखों में एक अजीब सा सुकून था, वह रोशनी के सिर को सहला रहा था। रोशनी जिस तरह से उसके खीरे को चूस रही थी, उससे समीर का सब्र का बांध टूटने लगा था और अब वह ज्यादा देर तक खुद को रोक नहीं पा रहा था। उसने रोशनी को सीधा लेटाया और उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया ताकि वह गहराई से खुदाई कर सके।
समीर ने अपने खीरे की नोक को रोशनी की गीली और गर्म खाई के मुहाने पर रखा और एक ही जोरदार झटके में आधा खीरा अंदर उतार दिया। रोशनी के मुँह से एक तेज चीख निकली, जो खुशी और हल्के दर्द का मिश्रण थी, क्योंकि समीर का खीरा काफी मोटा था। समीर ने रुककर रोशनी के माथे को चूमा और उसे शांत होने का समय दिया, जैसे ही रोशनी ने समीर की कमर पर अपने पैर कस लिए, समीर ने पूरी ताकत से खुदाई शुरू कर दी। हर धक्के के साथ रोशनी के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे और जिम की वह बेंच चरमरा रही थी, जैसे वह भी इस मिलन की गवाह बन रही हो। समीर ने उसे सामने से खोदना जारी रखा, और रोशनी के अंदरूनी अंगों में समीर का खीरा रगड़ खाता हुआ एक अद्भुत आनंद दे रहा था।
जैसे-जैसे खुदाई की रफ्तार बढ़ी, रोशनी की आहें अब चीखों में बदलने लगी थीं और वह समीर को और जोर से खोदने के लिए उकसा रही थी। समीर ने रोशनी को घुमाया और उसे पिछवाड़े से खोदने के लिए तैयार किया, रोशनी ने घुटनों के बल झुककर अपना उभरा हुआ पिछवाड़ा समीर की ओर कर दिया। समीर ने पीछे से जब अपना खीरा रोशनी की खाई में दोबारा डाला, तो रोशनी ने अपनी गर्दन पीछे की ओर झुका ली और उसकी आँखों से खुशी के आंसू छलक आए। पिछवाड़े से खुदाई करते हुए समीर ने रोशनी के तरबूजों को पीछे से ही पकड़ रखा था और उन्हें बुरी तरह मसल रहा था। दोनों के शरीरों से पसीना टपक रहा था और कमरा उनकी उत्तेजक आवाजों और धक्कों की आवाज से भर गया था, जो एक आदिम संगीत की तरह लग रहा था।
अंत में, समीर ने महसूस किया कि उसका रस अब छूटने वाला है और रोशनी भी अपने रस के चरम पर थी, उसकी खाई बुरी तरह सिकुड़ रही थी। समीर ने रोशनी को फिर से सीधा किया और अपनी पूरी ताकत लगाकर अंतिम कुछ गहरे धक्के मारे, जिससे रोशनी का रस निकल गया और वह थरथराने लगी। ठीक उसी पल समीर ने भी अपना सारा गर्म रस रोशनी की गहरी खाई के अंदर छोड़ दिया, जिससे दोनों को एक असीम शांति का अहसास हुआ। वे दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए वहीं बेंच पर लेटे रहे, उनकी साँसें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं लेकिन उनके दिलों की धड़कन अभी भी तेज थी। रोशनी ने समीर के सीने पर अपना सिर रखा और महसूस किया कि यह केवल शारीरिक भूख नहीं थी, बल्कि सालों से दबी हुई उस दोस्ती का पूर्णता की ओर एक कदम था।