अर्नव आज कई वर्षों के बाद अपने पुराने शहर वापस आया था। यहाँ की गलियाँ और हवा आज भी उसे अपनी पुरानी यादों में ले जा रही थीं। सबसे ज्यादा उसे अपनी गणित की ट्यूशन टीचर, कविता मैडम की याद आ रही थी। कविता मैडम की उम्र अब लगभग बत्तीस साल के करीब होगी, लेकिन अर्नव की आँखों में उनकी वह छवि आज भी वैसी ही ताज़ा थी—एक बेहद खूबसूरत और आकर्षक महिला, जिनकी आवाज़ में एक अजीब सा ठहराव और आँखों में एक गहरी चमक थी। अर्नव ने मन ही बनाया था कि वह आज उनसे मिलने जरूर जाएगा। वह उनके पुराने अपार्टमेंट की ओर बढ़ गया, जहाँ कभी वह शाम के वक्त पढ़ने जाया करता था। उसके दिल की धड़कनें तेज़ थीं और मन में एक अजीब सी हलचल हो रही थी, जैसे वह किसी बड़ी परीक्षा के लिए जा रहा हो।
जब अर्नव ने दरवाजे की घंटी बजाई, तो कुछ देर बाद कविता मैडम ने दरवाजा खोला। उन्हें देखते ही अर्नव की सांसें जैसे थम सी गईं। वह पहले से भी कहीं अधिक कामुक और निखरी हुई लग रही थीं। उन्होंने एक बैंगनी रंग की शिफॉन की साड़ी पहनी हुई थी, जिसमें से उनकी गोरी और चिकनी कमर साफ़ झलक रही थी। उनके शरीर की बनावट अब और भी ज्यादा परिपक्व हो गई थी। उनके सीने पर मौजूद दो बड़े और गोल तरबूज साड़ी के पतले कपड़े को चीरकर बाहर आने को बेताब लग रहे थे। जैसे-जैसे वह सांस ले रही थीं, उनके तरबूज ऊपर-नीचे हो रहे थे, जिससे अर्नव की नज़रें वहाँ से हट ही नहीं पा रही थीं। उनकी आँखों में वही पुरानी चमक थी, जिसने अर्नव को फिर से उनका दीवाना बना दिया था।
कविता ने अर्नव को अंदर बुलाया और उसे सोफे पर बैठने को कहा। दोनों के बीच औपचारिक बातें शुरू हुईं, लेकिन उन बातों के पीछे एक अनकहा आकर्षण साफ महसूस किया जा सकता था। कविता ने बताया कि उनके पति अक्सर काम के सिलसिले में शहर से बाहर रहते हैं और वह घर में काफी अकेली महसूस करती हैं। बातें करते-करते कविता अर्नव के थोड़ा करीब आकर बैठ गईं। अर्नव को उनके शरीर से उठने वाली उस भीनी-भीनी खुशबू ने मदहोश करना शुरू कर दिया था। उसने देखा कि साड़ी के पल्लू से उनके तरबूजों की गोलाई और भी ज्यादा उभरी हुई लग रही थी। अर्नव की आँखों में छिपी प्यास को कविता शायद भाँप चुकी थीं, क्योंकि उनके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान उभर आई थी।
जैसे-जैसे शाम ढलती गई, कमरे के भीतर का तापमान बढ़ता गया। अर्नव ने धीरे से अपना हाथ कविता के हाथ पर रखा। कविता ने हाथ हटाया नहीं, बल्कि अपनी उँगलियाँ अर्नव की उँगलियों में फंसा दीं। इस पहले स्पर्श ने दोनों के शरीरों में बिजली सी दौड़ा दी। अर्नव ने हिम्मत जुटाकर उनके कंधे पर हाथ रखा और उन्हें अपनी ओर खींचा। कविता ने अपनी आँखें बंद कर लीं और एक लंबी आह भरी। अर्नव ने उनके गले के पास अपने होंठ ले जाकर उनकी त्वचा की गर्माहट को महसूस किया। कविता का पूरा शरीर थरथरा उठा और उन्होंने अपनी पकड़ अर्नव की शर्ट पर मजबूत कर ली। उनके बीच की झिझक अब पूरी तरह से खत्म हो चुकी थी और केवल एक गहरी इच्छा बची थी।
अर्नव ने धीरे-धीरे कविता की साड़ी का पल्लू उनके कंधे से नीचे गिरा दिया। अब उनके ब्लाउज में दबे हुए वो भारी तरबूज पूरी तरह से अर्नव के सामने थे। अर्नव ने अपनी कांपती उँगलियों से ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोलना शुरू किया। जैसे ही ब्लाउज खुला, कविता के सफेद और सुडौल तरबूज आज़ाद होकर बाहर आ गिरे। उनके बीच में एक गहरी घाटी थी और उन पर लगे नन्हे गुलाबी मटर ठंडक और उत्तेजना से अकड़ चुके थे। अर्नव ने अपनी ज़बान से उन मटरों को सहलाना शुरू किया, जिससे कविता के मुँह से सिसकारी निकल पड़ी। वह अर्नव के बालों में अपनी उँगलियाँ फिराने लगीं और अपने शरीर को उसकी ओर धकेलने लगीं, जैसे वह चाहती हों कि अर्नव उन्हें पूरी तरह से अपना बना ले।
अब अर्नव ने कविता को पूरी तरह से निर्वस्त्र कर दिया था। उनकी जाँघों के बीच की वह गहरी और नम खाई अब अर्नव के सामने उजागर थी। वहाँ मौजूद काले रेशमी बाल उस खाई की सुंदरता को और बढ़ा रहे थे। अर्नव ने अपनी उँगलियों को उस खाई के मुहाने पर रखा, जो पहले से ही काफी गीली हो चुकी थी। जैसे ही अर्नव ने खाई में उंगली डाली, कविता की पीठ सोफे से ऊपर उठ गई और उन्होंने जोर से कराहते हुए कहा, ‘ओह अर्नव… तुम बहुत बढ़िया कर रहे हो।’ अर्नव ने अपनी उंगली की गति बढ़ा दी और साथ ही साथ उनके तरबूजों को अपने हाथों में लेकर मसलने लगा। पूरा कमरा उनकी उत्तेजित सांसों और प्यार भरी बातों से गूँज रहा था।
अर्नव ने अब अपना कपड़ा उतारा और उसका विशाल और सख्त खीरा पूरी तरह से तनकर खड़ा हो गया। कविता ने जैसे ही उस खीरे को देखा, उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं। उन्होंने झुककर उस खीरे को अपने हाथों में लिया और उसे सहलाने लगीं। फिर उन्होंने धीरे-धीरे उस खीरे को अपने मुँह में लेना शुरू किया। अर्नव को ऐसा सुख महसूस हुआ जैसा उसने पहले कभी नहीं किया था। कविता का खीरा चूसना इतना आनंददायक था कि अर्नव के लिए खुद को रोकना मुश्किल हो रहा था। उन्होंने कविता के सिर को पकड़कर अपनी लय बिठाई और कुछ ही देर में पूरा कमरा कविता के गले से निकलने वाली आवाज़ों से भर गया।
आखिरकार, वह क्षण आ गया जिसका दोनों को बेसब्री से इंतज़ार था। अर्नव ने कविता को सोफे पर लिटाया और उनके पैरों को चौड़ा किया। उसने अपने खीरे को कविता की उस तंग और रसीली खाई के मुहाने पर टिकाया। कविता ने अर्नव को कसकर अपनी बाहों में भर लिया और धीरे से कहा, ‘अर्नव, आज मुझे अपनी पूरी खुदाई से भर दो।’ अर्नव ने एक झटके में अपना खीरा उस खाई के भीतर उतार दिया। कविता के मुँह से एक तीखी चीख निकली, जो दर्द की कम और सुख की ज्यादा थी। उनकी खाई इतनी तंग थी कि अर्नव को उसे गहराई तक खोदने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही थी, लेकिन वह रुकने वाला नहीं था।
खुदाई की प्रक्रिया अब अपनी पूरी रफ़्तार पर थी। अर्नव हर धक्के के साथ कविता की खाई की गहराई को नाप रहा था। दोनों के शरीर पसीने से लथपथ थे और एक-दूसरे से चिपक रहे थे। कमरे में केवल उनके शरीरों के टकराने की आवाज़ और कविता की आहें सुनाई दे रही थीं। कविता बार-बार अर्नव को और भी ज्यादा गहराई से खोदने के लिए कह रही थीं। ‘हाँ अर्नव, और तेज़… मुझे और गहराई तक खोदो…’ उनके ये शब्द अर्नव के भीतर की आग को और भड़का रहे थे। अर्नव ने कविता के पैरों को अपने कंधों पर रखा और पिछवाड़े से खोदना शुरू किया, जिससे उसे और भी ज्यादा गहराई तक पहुँचने का मौका मिला।
काफी देर तक चली इस जबरदस्त खुदाई के बाद, दोनों अपने चरम की ओर बढ़ रहे थे। अर्नव की सांसें उखड़ने लगी थीं और कविता का शरीर भी अब झटके लेने लगा था। अर्नव ने महसूस किया कि अब उसका रस निकलने वाला है। उसने अंतिम कुछ धक्के बहुत तेज़ी से लगाए और अपना सारा गर्म रस कविता की उस गहरी खाई के भीतर छोड़ दिया। उसी समय कविता का भी रस छूट गया और वह अर्नव को कसकर पकड़कर शांत हो गईं। दोनों एक-दूसरे की बाहों में गिरे हुए थे, उनकी सांसें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं। वह अनुभव इतना गहरा और भावनात्मक था कि दोनों के पास शब्द नहीं थे।
खुदाई के बाद की वह शांति बहुत सुकून देने वाली थी। अर्नव ने कविता के माथे को चूमा और उन्हें अपनी बाहों में समेट लिया। कविता की आँखों में एक संतुष्टि और प्यार की चमक थी। उन्होंने धीरे से कहा, ‘आज तुमने मुझे फिर से जीवित कर दिया है, अर्नव।’ अर्नव को भी एहसास हुआ कि यह सिर्फ शारीरिक सुख नहीं था, बल्कि दो रूहों का मिलन था। वे दोनों काफी देर तक वैसे ही लेटे रहे, एक-दूसरे की धड़कनों को सुनते हुए। उस रात की वह यादें अर्नव के दिल में हमेशा के लिए कैद हो गईं, एक ऐसी याद जिसमें प्यार, समर्पण और एक अधूरी प्यास का मिलन हुआ था।