मैडम की गहरी चुदाई—>
समीर अपनी पुरानी प्रोफेसर कविता मैडम के घर उनकी मदद करने पहुँचा था। कविता मैडम हमेशा से ही शांत और गंभीर स्वभाव की रही थीं, लेकिन आज उनके चेहरे पर एक अलग ही चमक थी। उन्होंने एक सुनहरी किनारी वाली नीली शिफॉन की साड़ी पहनी हुई थी, जो उनके शरीर के हर उतार-चढ़ाव को बखूबी बयां कर रही थी। समीर उनकी खूबसूरती को देख कर दंग रह गया, क्योंकि कॉलेज के दिनों के बाद वह आज उन्हें इतनी करीब से देख रहा था। कमरे में हल्की मद्धम रोशनी थी और चारों तरफ किताबों की भीनी-भीनी खुशबू फैली हुई थी, जो माहौल को और भी रूमानी बना रही थी। समीर का मन उनकी सादगी और उस छिपी हुई कामुकता को देख कर तेजी से धड़कने लगा था जिसे वह इतने सालों से दबाए बैठा था।
कविता मैडम के शरीर की बनावट किसी अप्सरा से कम नहीं थी; उनकी उम्र ने उनकी खूबसूरती को और भी निखार दिया था। साड़ी के ब्लाउज से उनके उभरे हुए गोल-मटोल तरबूज आधे बाहर झाँक रहे थे, जो समीर की धड़कनों को तेज़ करने के लिए काफी थे। उनके तरबूज इतने सख्त और रसीले लग रहे थे कि समीर का मन उन्हें छूने के लिए मचलने लगा। उनकी पतली कमर और चौड़े कूल्हे साड़ी में सिमटे हुए थे, लेकिन फिर भी अपनी मौजूदगी का अहसास करा रहे थे। उनकी गर्दन पर पसीने की छोटी-छोटी बूंदें चमक रही थीं, जो उनके सांवले रंग पर मोतियों जैसी लग रही थीं। समीर की नजरें बार-बार उनकी नाभि और उस रेशमी पेट पर जा टिकती थीं जो साड़ी के सरकने से बार-बार दिखाई दे जाता था।
जैसे-जैसे रात गहरी होती गई, दोनों के बीच की दूरी कम होने लगी। वे मेज पर रखे कागजातों को देख रहे थे, तभी अचानक समीर का हाथ कविता मैडम की रेशमी कमर से टकरा गया। एक बिजली सी समीर के पूरे शरीर में दौड़ गई और उसने देखा कि कविता मैडम ने भी अपनी आँखें बंद कर ली थीं। उनके चेहरे पर शर्म और चाहत का मिला-जुला भाव था, जो समीर को आगे बढ़ने का इशारा दे रहा था। समीर ने धीरे से अपनी उँगलियाँ उनकी कमर के खुले हिस्से पर फेरीं, जिससे कविता मैडम के शरीर में एक सिहरन पैदा हो गई और उन्होंने एक ठंडी आह भरी। उनकी सांसें अब तेज चलने लगी थीं और कमरे का तापमान जैसे अचानक से बढ़ गया हो, ऐसा महसूस होने लगा था।
कविता मैडम ने शर्माते हुए अपनी आँखें झुका लीं और समीर के मजबूत कन्धों पर अपना सिर रख दिया। उनकी सांसों की गर्मी समीर की गर्दन पर महसूस हो रही थी, जो उसे और भी उत्तेजित कर रही थी। समीर ने धीरे से उनके ब्लाउज के हुक खोलना शुरू किया, जिससे उनके रसीले तरबूज पूरी तरह से आज़ाद हो गए। जैसे ही वे बाहर आए, कमरे की ठंडी हवा ने उनके मटर को और भी सख्त कर दिया, जिन्हें देख कर समीर के मुँह में पानी आ गया। उसने अपनी जीभ से उन मटर को सहलाना शुरू किया और कविता मैडम के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली। उन्होंने समीर के बालों को अपनी उंगलियों में जकड़ लिया और उसे अपने और भी करीब खींच लिया, जैसे वे बरसों की प्यासी हों।
समीर ने अब धीरे-धीरे उनकी साड़ी के पल्लू को नीचे गिरा दिया और उनके पूरे शरीर को निहारने लगा। उनकी सांवली त्वचा पर सफ़ेद लाइट का पड़ना उन्हें किसी मूर्ति जैसा अहसास दे रहा था। समीर ने घुटनों के बल बैठकर उनकी खाई की तरफ हाथ बढ़ाया। जैसे ही उसकी उंगलियां रेशमी साड़ी के अंदर से होती हुई उनकी रेशमी खाई तक पहुँचीं, उसे वहां भारी नमी महसूस हुई। कविता मैडम ने अपनी जांघों को सिकोड़ लिया लेकिन समीर ने प्यार से उन्हें फैलाया और अपनी उंगली से खोदना शुरू किया। मैडम की सिसकारियां अब तेज होने लगी थीं और वे समीर का नाम बार-बार पुकार रही थीं, उनके शरीर से पसीना बहकर उनकी खाई के बालों में समा रहा था।
समीर ने अपना खीरा बाहर निकाला जो अब पूरी तरह से अकड़ चुका था और उसकी नसों में खून का बहाव बढ़ गया था। कविता मैडम ने जब उस विशाल खीरे को देखा तो उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं, उन्होंने धीरे से अपना हाथ बढ़ाकर उस खीरे को छुआ। उसकी गर्मी और सख्ती ने मैडम के अंदर कामुकता की एक नई लहर पैदा कर दी। समीर ने अपना खीरा उनके मुँह के पास ले गया और कविता मैडम ने बिना किसी झिझक के उसे अपने मुँह में ले लिया। खीरा चूसना उन्हें इतना पसंद आ रहा था कि वे उसे अपनी जीभ से सहला रही थीं, जिससे समीर का पूरा शरीर कांपने लगा और उसे लगा कि उसका रस बस निकलने ही वाला है।
फिर समीर ने उन्हें मेज पर लिटाया और उनके पैरों को अपने कन्धों पर रख लिया। उसने अपने खीरे की टोपी को उनकी गीली खाई पर रगड़ना शुरू किया, जिससे निकलने वाला लसदार पानी दोनों के बीच घर्षण को और बढ़ा रहा था। समीर ने एक गहरा सांस लिया और पूरी ताकत से सामने से खोदना शुरू किया। कविता मैडम के मुँह से एक चीख निकली जो दर्द और आनंद का मिश्रण थी। समीर ने अपनी गति बढ़ाई और हर धक्के के साथ उनके तरबूज ऊपर-नीचे उछलने लगे। मैडम के शरीर का हर हिस्सा समीर के धक्कों के साथ ताल मिला रहा था और उनकी सिसकारियां अब पूरे घर में गूँजने लगी थीं, जो उनकी संतुष्टि का सबूत थीं।
कुछ देर बाद समीर ने उन्हें घुमाया और पिछवाड़े से खोदना शुरू किया। यह मुद्रा कविता मैडम को बहुत पसंद आई क्योंकि उनका पिछवाड़ा पूरी तरह से समीर के सामने था। समीर ने उनके कूल्हों को अपने हाथों से जोर से पकड़ा और अपनी खुदाई की गति और तेज कर दी। मैडम के शरीर से पसीने की धार बह रही थी और उनकी सांसें उखड़ने लगी थीं। वे बार-बार कह रही थीं, ‘समीर, और तेज खोदो, मुझे पूरा खत्म कर दो!’ समीर ने उनके मटर को पीछे से सहलाते हुए अपने खीरे को उनकी खाई की गहराइयों तक पहुँचा दिया, जहाँ तक शायद ही कोई पहले कभी पहुँचा हो।
अंत में, दोनों का शरीर एक साथ कांपने लगा। समीर का खीरा उनकी खाई के अंदर ही फट पड़ा और गर्म रस की धारा ने मैडम के अंदरूनी हिस्सों को भिगो दिया। उसी क्षण कविता मैडम का भी रस छूट गया और वे पूरी तरह से निढाल होकर समीर की बाहों में गिर पड़ीं। दोनों का शरीर पसीने से तरबतर था और उनकी धड़कनें एक-दूसरे को सुनाई दे रही थीं। काफी देर तक वे वैसे ही लेटे रहे, उस अहसास को महसूस करते हुए जो शब्दों से परे था। कविता मैडम ने समीर के माथे को चूमा और धीरे से मुस्कुराईं, उनकी आँखों में अब एक सुकून था जो बरसों बाद उन्हें मिला था।
अगली सुबह जब धूप खिड़की से अंदर आई, तो समीर ने देखा कि मैडम अभी भी गहरी नींद में थीं। उनके चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी और उनकी खुली हुई साड़ी उनके शरीर के उन निशानों को दिखा रही थी जो रात भर की खुदाई की गवाही दे रहे थे। समीर ने उन्हें जगाने की कोशिश नहीं की, बल्कि धीरे से उनके पास लेट गया। उसे अहसास हुआ कि यह सिर्फ जिस्मानी रिश्ता नहीं था, बल्कि दो रूहों का मिलन था जो बरसों से एक-दूसरे की तलाश में थे। मैडम ने नींद में ही समीर का हाथ थाम लिया, जैसे वे उसे कभी खोना नहीं चाहती थीं, और उस कमरे में प्यार की वो खुशबू अब भी बरकरार थी।