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रिया भाभी की रसीली चु@@ई

रिया भाभी की रसीली चु@@ई —> रिया की उम्र करीब अठ्ठाइस साल थी और उनका शरीर किसी ढले हुए सांचे जैसा था। उनके शरीर का हर हिस्सा कामुकता से भरा हुआ था, खासकर उनकी रेशमी साड़ी के नीचे छिपे उनके बड़े-बड़े और उभरे हुए तरबूज, जो चलते समय धीरे-धीरे हिलते थे। उनके चेहरे पर हमेशा एक मासूम सी मुस्कान रहती थी, लेकिन उनकी आँखों में एक अनकही प्यास थी। रिया के पति यानी समीर के बड़े भाई काम के सिलसिले में अक्सर शहर से बाहर रहते थे, जिससे घर में अक्सर समीर और रिया ही अकेले होते थे। समीर जो कि अभी इक्कीस साल का था, अपनी भाभी के इस मादक रूप को देख-देखकर अंदर ही अंदर जलता रहता था और उनके प्रति अपनी बढ़ती इच्छाओं को दबाने की कोशिश करता था।

समीर अक्सर रिया भाभी को घर के कामों में हाथ बंटाते हुए देखता था, जब वो झुककर झाड़ू लगाती थीं तो उनके पल्लू से झांकते वो सफेद तरबूज समीर के होश उड़ा देते थे। उन तरबूजों के बीच की गहरी दरार समीर को किसी सम्मोहन की तरह अपनी ओर खींचती थी। रिया भी शायद समीर की इन नज़रों से अनजान नहीं थीं, लेकिन वो भी मर्यादा की डोर से बंधी हुई थीं। समीर अक्सर उनके करीब जाने के बहाने ढूंढता था। एक दिन दोपहर के समय जब बाहर तेज़ धूप थी, घर में सन्नाटा पसरा हुआ था और कूलर की ठंडी हवा कमरे के माहौल को और भी रूमानी बना रही थी। रिया सोफे पर लेटी हुई कोई मैगजीन पढ़ रही थीं और उनकी साड़ी उनके कमर से नीचे खिसक गई थी, जिससे उनका गोरा पेट और गहरी नाभि साफ़ नज़र आ रही थी।

समीर पानी पीने के बहाने हॉल में आया और रिया का वह खुला बदन देखकर उसकी सांसें तेज़ हो गईं। उसने देखा कि रिया की आँखें बंद थीं और वो शायद गहरी नींद में थीं। समीर की हिम्मत धीरे-धीरे बढ़ने लगी। वह दबे पांव उनके पास गया और उनके पास बैठ गया। रिया के शरीर से आने वाली धीमी-धीमी खुशबू समीर के दिमाग पर नशा करने लगी थी। उसने अपनी कांपती हुई उंगलियों से रिया के माथे पर आई एक लट को पीछे किया। जैसे ही समीर का हाथ रिया की त्वचा से छुआ, रिया की पलकें झपकीं और उन्होंने धीरे से आँखें खोलीं। समीर घबरा गया, लेकिन रिया की नज़रों में गुस्सा नहीं बल्कि एक अलग ही चमक थी, जिसने समीर को रुकने का नहीं बल्कि आगे बढ़ने का इशारा दिया।

रिया ने धीरे से समीर का हाथ पकड़ा और उसे अपने गाल पर रख लिया। समीर ने महसूस किया कि रिया का शरीर भी गर्मी से तप रहा था। उन्होंने बहुत ही धीमी आवाज़ में कहा, ‘समीर, तुम जानते हो कि तुम क्या कर रहे हो?’ समीर की धड़कनें अब उसके सीने से बाहर आने को बेताब थीं। उसने हिम्मत जुटाकर कहा, ‘भाभी, मैं खुद को और नहीं रोक सकता, आप इतनी सुंदर हैं कि मेरा मन आपके काबू में नहीं रहता।’ रिया ने एक गहरी सांस ली और समीर को अपने और करीब खींच लिया। उनकी इस पहल ने समीर के अंदर के सारे बांध तोड़ दिए। उसने धीरे से अपने होंठ रिया के गुलाबी होंठों पर रख दिए और दोनों एक-दूसरे के प्यार में डूबने लगे।

चुंबन गहरा होता गया और समीर का हाथ धीरे से रिया के उभरे हुए तरबूजों की ओर बढ़ा। जैसे ही उसने रेशमी कपड़े के ऊपर से उन सख्त और गोल तरबूजों को सहलाया, रिया के मुंह से एक दबी हुई आह निकली। समीर ने अपनी उंगलियों से उन तरबूजों को दबाना शुरू किया, जिससे रिया का शरीर धनुष की तरह तन गया। रिया ने समीर की टी-शर्ट उतार दी और उसके जवान शरीर को महसूस करने लगी। समीर ने अब रिया की साड़ी का पल्लू हटा दिया और उनके ब्लाउज के हुक खोलने लगा। जैसे ही ब्लाउज खुला, रिया के दूध जैसे सफेद और बड़े तरबूज आज़ाद होकर बाहर आ गए। समीर ने देखा कि उन तरबूजों के बीच में छोटे-छोटे मटर की तरह निप्पल उभरे हुए थे, जो ठंड और उत्तेजना से सख्त हो गए थे।

समीर ने अपना मुंह उन तरबूजों पर रख दिया और उन्हें पागलों की तरह चूसने लगा। रिया ने समीर का सिर अपने सीने से और जोर से चिपका लिया और अपनी उंगलियां उसके बालों में फंसा दीं। समीर की जीभ जब रिया के मटर के दाने जैसे निप्पलों से टकराई, तो रिया की कराहें कमरे में गूंजने लगीं। समीर ने अब अपना हाथ नीचे की ओर बढ़ाया और रिया के साये के अंदर हाथ डाल दिया। वहां उसने महसूस किया कि रिया की रेशमी खाई पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। वहां उगे छोटे-छोटे कोमल बालों के बीच समीर की उंगलियां रास्ता खोजने लगीं। जैसे ही उसकी उंगली रिया की गर्म और तंग खाई के भीतर गई, रिया ने अपनी आँखें जोर से बंद कर लीं और समीर का नाम पुकारा।

समीर अब अपनी पैंट उतार चुका था और उसका खीरा पूरी तरह से तैयार और सख्त होकर खड़ा था। रिया ने जब उस विशाल खीरे को देखा तो उनकी आँखें फटी की फटी रह गई। उन्होंने अपने कोमल हाथों से उस खीरे को पकड़ा और उसे ऊपर-नीचे सहलाने लगीं। समीर को ऐसा लगा जैसे वह जन्नत के करीब पहुंच गया हो। रिया ने धीरे से अपना सिर नीचे झुकाया और समीर के खीरे को अपने मुंह में ले लिया। समीर की सांसें रुक सी गईं जब उसने महसूस किया कि रिया की गर्म जीभ उसके खीरे के चारों ओर घूम रही है। वह रिया के सिर को सहलाते हुए उस सुख का आनंद लेने लगा जिसे उसने सिर्फ सपनों में देखा था।

अब रिया बिस्तर पर लेट गई थीं और उन्होंने अपनी टांगें फैला दी थीं, जिससे उनकी गीली खाई पूरी तरह से समीर के सामने खुली हुई थी। समीर ने उनके पैरों के बीच बैठकर अपनी खाई को उनके सामने रखा और धीरे से अपने खीरे का अगला हिस्सा उनकी खाई के मुहाने पर टिका दिया। रिया ने समीर की पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए और उसे अंदर आने का इशारा किया। समीर ने एक गहरा धक्का दिया और उसका आधा खीरा रिया की तंग और गर्म खाई के अंदर समा गया। रिया के मुंह से एक तेज़ चीख निकली, लेकिन वह दर्द की नहीं, बल्कि एक असीम आनंद की थी जो उन्हें बरसों बाद मिल रहा था।

समीर ने अब अपनी रफ्तार बढ़ा दी और सामने से खोदना (missionary) शुरू किया। हर धक्के के साथ समीर का खीरा रिया की खाई की गहराइयों को नाप रहा था। कमरे में केवल उनके जिस्मों के टकराने की आवाज़ें और उनकी तेज़ होती सांसें सुनाई दे रही थीं। रिया अपने पैरों को समीर की कमर के चारों ओर लपेट चुकी थीं ताकि वह हर धक्के को गहराई से महसूस कर सकें। ‘ओह समीर, तुम कितना अच्छा खोद रहे हो, और अंदर तक जाओ,’ रिया ने सिसकते हुए कहा। समीर का पसीना रिया के बदन पर गिर रहा था, जिससे दोनों के शरीर आपस में चिपक रहे थे। वह अब पूरी तरह से लय में था और बिना रुके अपनी खुदाई जारी रखे हुए था।

कुछ देर बाद समीर ने रिया को घुमाया और उन्हें बिस्तर पर घुटनों के बल खड़ा कर दिया। अब वह उन्हें पिछवाड़े से खोदना (doggy style) चाहता था। रिया का पिछवाड़ा ऊपर की ओर उठा हुआ था और उनकी गहरी खाई पीछे से और भी ज्यादा आकर्षक लग रही थी। समीर ने अपना खीरा फिर से उनकी खाई में उतारा और पीछे से तेज़ धक्के लगाने लगा। रिया के तरबूज नीचे की ओर लटक रहे थे और हर धक्के के साथ तेज़ी से झूल रहे थे। समीर ने पीछे से झुककर उनके मटर जैसे निप्पलों को अपने हाथों से मसला, जिससे रिया बेकाबू होने लगीं। वह बार-बार कह रही थीं, ‘हाँ समीर, और तेज़, मुझे पूरी तरह से भर दो।’

खुदाई का खेल अब अपने चरम पर था। समीर का खीरा अब पूरी तरह से गर्म हो चुका था और उसे महसूस हो रहा था कि उसका रस निकलने वाला है। उधर रिया की खाई भी अब बहुत ज्यादा गीली और ढीली महसूस हो रही थी, जिसका मतलब था कि उनका भी रस छूटने वाला है। समीर ने अपनी रफ्तार को और भी तेज़ कर दिया और रिया की कमर को मज़बूती से पकड़ लिया। अचानक रिया का शरीर जोर-जोर से कांपने लगा और उनके अंदर से गर्म रस का फव्वारा छूट गया। उसी पल समीर ने भी एक आखिरी गहरा धक्का दिया और अपना सारा गर्म रस रिया की खाई की गहराइयों में छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े और उनकी सांसें सामान्य होने का इंतज़ार करने लगीं।

खुदाई खत्म होने के बाद कमरे में एक शांति छा गई, लेकिन वह शांति बहुत सुकून देने वाली थी। रिया समीर की बांहों में सिमट गई थीं और उनका चेहरा समीर के सीने पर था। समीर ने उनके माथे को चूमा और उन्हें अपनी बांहों में और कस लिया। रिया ने धीरे से कहा, ‘समीर, तुमने मुझे आज वो एहसास दिलाया है जो मुझे कभी नहीं मिला, यह हमारा एक छोटा सा राज रहेगा।’ समीर ने मुस्कुराते हुए हामी भरी। दोनों उसी अवस्था में लेटे रहे, अपने शरीर की थकावट और मन की शांति को महसूस करते हुए। उस दोपहर ने उनके रिश्ते को एक नई गहराई और एक नया मोड़ दे दिया था, जिसे वे कभी भूल नहीं पाएंगे।

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