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सुनसान पार्क की झाड़ियों में पुरानी क्रश मीरा के साथ रसभरी खुदाई

पुरानी यादों का नया अहसास और सुनसान पार्क का मिलन —> शाम का धुंधलका धीरे-धीरे शहर के उस पुराने और सुनसान पार्क के कोनों में अपनी चादर बिछा रहा था, जहाँ सालों बाद रोहन और उसकी पुरानी स्कूल क्रश मीरा एक-दूसरे के सामने थे। मीरा अब पहले से कहीं ज्यादा जवान और आकर्षक लग रही थी, उसकी आँखों में वही पुरानी चमक थी लेकिन शरीर की बनावट में अब एक ठहराव और भारीपन आ गया था जो रोहन की धड़कनें तेज करने के लिए काफी था। वे दोनों बेंच पर बैठे थे और उनके बीच की दूरी पुरानी यादों की कहानियों से भर रही थी, पर हवा में एक अजीब सी गर्मी और खिंचाव महसूस हो रहा था जो दोनों को करीब ला रहा था।

रोहन की नजरें बार-बार मीरा के उभरे हुए अंगों पर जा टिकती थीं, उसकी रेशमी कुर्ती के नीचे उसके भारी तरबूज साफ झलक रहे थे जो हर सांस के साथ ऊपर-नीचे होकर रोहन के सब्र का इम्तिहान ले रहे थे। उसके शरीर की बनावट किसी अप्सरा जैसी थी, उसकी पतली कमर के नीचे का चौड़ा और गदबदा पिछवाड़ा बेंच पर इस कदर फैला हुआ था कि रोहन के मन में गहरी हलचल मच गई और उसका खीरा पेंट के अंदर ही जोर मारने लगा। मीरा को भी शायद इस बात का अहसास था कि रोहन उसे कितनी वासना और गहराई से देख रहा है, इसलिए उसने शरमाते हुए अपने दुपट्टे को थोड़ा और कस लिया जिससे उसके तरबूज और भी ज्यादा उभर कर सामने आ गए।

बातों-बातों में रोहन ने अपना हाथ धीरे से मीरा के मुलायम हाथ पर रखा, जिससे मीरा के पूरे शरीर में एक बिजली सी दौड़ गई और उसकी साँसों की गति अचानक से बढ़ गई। पार्क का वह कोना पूरी तरह से सुनसान था और लंबी-लंबी झाड़ियों की ओट में वे दोनों दुनिया की नजरों से पूरी तरह छिपे हुए थे, जहाँ सिर्फ शाम के परिंदों की चहचहाहट और उनकी बढ़ती धड़कनों का ही शोर था। रोहन ने जब मीरा की आँखों में देखा, तो उसे वहाँ सिर्फ झिझक नहीं बल्कि एक पुरानी दबी हुई आग भी दिखाई दी जो आज सालों बाद एक ज्वालामुखी बनकर फटने को पूरी तरह तैयार थी।

मीरा ने अपनी गर्दन झुका ली लेकिन रोहन का हाथ नहीं हटाया, बल्कि अपनी कोमल उंगलियों को उसके हाथ में मजबूती से फँसा लिया जिससे रोहन के अंदर का खीरा पूरी तरह से अकड़ कर अपनी कठोर मौजूदगी का अहसास कराने लगा। रोहन ने मीरा के चेहरे को धीरे से अपनी ओर घुमाया और उसके गुलाबी होंठों के करीब अपनी गर्म सांसें ले गया, मीरा ने डरते हुए अपनी आँखें बंद कर लीं और एक बहुत लंबी मदहोश कर देने वाली आह भरी। रोहन ने धीरे से उसके कानों के पास फुसफुसाते हुए कहा कि वह सालों से इस सुनसान लम्हे का इंतज़ार कर रहा था, और आज यह पार्क उनकी अधूरी प्रेम दास्तां को पूरा करने का गवाह बनेगा।

रोहन ने धीरे से मीरा के दुपट्टे को सरकाया और उसके तरबूजों पर अपना हाथ रखा, वे इतने नरम और गर्म थे कि रोहन के हाथ कांपने लगे। उसने अपनी उंगलियों से मीरा के तरबूजों के ऊपर मौजूद नन्हे मटरों को सहलाना शुरू किया, जिससे मीरा के मुँह से एक सिसकारी निकली और उसने रोहन को कसकर जकड़ लिया। रोहन ने अब और देरी न करते हुए मीरा की कुर्ती के बटन खोले और उन विशाल सफेद तरबूजों को आजाद कर दिया, जिनके मटर अब उत्तेजना के मारे पूरी तरह से सख्त होकर खड़े हो चुके थे। रोहन ने झुककर बारी-बारी से दोनों मटरों को चूसना शुरू किया, जिससे मीरा का शरीर धनुष की तरह तन गया और वह रोहन के बालों में अपनी उंगलियां फँसाकर उसे खुद से और सटाने लगी।

जैसे-जैसे उत्तेजना बढ़ी, रोहन का हाथ मीरा की जांघों से होता हुआ उसकी रेशमी सलवार के अंदर चला गया, जहाँ उसने महसूस किया कि मीरा की खाई पूरी तरह से गीली और रसभरी हो चुकी है। रोहन ने अपनी उंगली से खाई को खोजना शुरू किया, तो मीरा ने अपनी आँखें चढ़ा लीं और मदहोशी में अपना पिछवाड़ा हिलाने लगी ताकि रोहन की उंगलियां उसकी खाई की गहराई को और बेहतर ढंग से नाप सकें। खाई के चारों ओर मौजूद छोटे-छोटे बाल रोहन की उंगलियों में फंस रहे थे, जिससे घर्षण और बढ़ गया था और मीरा के मुँह से निकलने वाली आहें अब कराहों में तब्दील हो गई थीं।

रोहन ने अपनी पेंट नीचे की और अपना विशाल और सख्त खीरा बाहर निकाला जिसे देखकर मीरा की आँखें फटी की फटी रह गई, खीरे की लंबाई और मोटाई देखकर वह थूक गटकने लगी। मीरा ने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और उस तपते हुए खीरे को अपनी मुट्ठी में पकड़ लिया, उसकी गर्मी महसूस करते ही मीरा का मन डोल गया और उसने झुककर उस खीरे को अपने मुँह में ले लिया। वह बड़े प्यार से खीरा चूसने लगी और उसकी जीभ खीरे के अगले हिस्से पर नाचने लगी, जिससे रोहन को ऐसा लगा जैसे वह जन्नत के दरवाजे पर खड़ा हो। खीरा चूसने की आवाज उस शांत पार्क में गूंज रही थी और रोहन का रस निकलने ही वाला था कि उसने मीरा को रोका।

अब रोहन ने मीरा को घास पर लिटाया और उसके पैरों को फैलाकर अपनी जगह बनाई, वह सामने से खुदाई करने के लिए पूरी तरह तैयार था। उसने अपने खीरे की नोक को मीरा की गीली खाई पर रखा और एक ही जोरदार झटके में आधा खीरा अंदर उतार दिया, जिससे मीरा के गले से एक तीखी चीख निकली जो उसकी सिसकारी में दब गई। रोहन ने धीरे-धीरे अपनी रफ्तार बढ़ाई और पूरी ताकत से सामने से खोदना शुरू किया, हर धक्के के साथ मीरा का पिछवाड़ा जमीन से ऊपर उठ जाता और उसके तरबूज पागलों की तरह ऊपर-नीचे उछलने लगते।

मीरा भी अब पूरी लय में आ चुकी थी, उसने अपने पैरों को रोहन की कमर पर लपेट लिया और हर धक्के का जवाब अपनी गहरी कराहों से देने लगी, उसकी खाई से निकलने वाला रस अब बाहर की ओर बह रहा था। रोहन ने मीरा की पोजीशन बदली और उसे घुटनों के बल बैठाकर पिछवाड़े से खोदना शुरू किया, यह पोजीशन मीरा को और भी ज्यादा उत्तेजित कर रही थी क्योंकि रोहन का खीरा अब उसकी गहराई के अंतिम छोर तक पहुँच रहा था। पिछवाड़े से खुदाई करते समय रोहन ने मीरा के तरबूजों को पीछे से कसकर पकड़ लिया और अपनी रफ्तार को चरम पर ले गया, जिससे मीरा बेकाबू होकर रोने जैसी आवाजें निकालने लगी।

पार्क की उस खामोशी में उनके शरीर के टकराने की आवाज साफ सुनी जा सकती थी, और अंत में जब दोनों की उत्तेजना अपने शिखर पर पहुँची, तो रोहन ने एक आखिरी गहरा धक्का दिया। रोहन का सारा गर्म रस मीरा की खाई के अंदर ही छूटने लगा और ठीक उसी समय मीरा का भी रस निकल गया, जिससे उसका पूरा शरीर थरथरा उठा और वह रोहन की बाहों में ढीली पड़ गई। दोनों काफी देर तक उसी हाल में एक-दूसरे से लिपटे रहे, उनकी सांसें अब भी तेज थीं और पसीने से लथपथ उनके शरीर एक-दूसरे की खुशबू में डूबे हुए थे। खुदाई के बाद का वह सुकून उनके चेहरों पर साफ दिख रहा था, जैसे बरसों की प्यास आज उस सुनसान पार्क में पूरी तरह बुझ गई हो।

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