मीरा मामी की प्यास और बंद कमरे की तपन—>दोपहर की चिलचिलाती धूप में पूरा मोहल्ला सन्नाटे में डूबा हुआ था, लेकिन मामाजी के घर के भीतर एक अलग ही तरह की बेचैनी पनप रही थी। समीर अपनी गर्मियों की छुट्टियाँ बिताने शहर आया था और इस बार मामाजी को अचानक दफ्तर के काम से बाहर जाना पड़ा था। घर में सिर्फ समीर और उसकी बत्तीस वर्षीय मामी मीरा ही थे। मीरा मामी का व्यक्तित्व बड़ा ही मोहक था, उनकी गेहुंआ रंगत और साड़ी के पल्लू से झांकते उनके सुडौल शरीर को देखकर समीर के मन में अक्सर अजीब सी हलचल मच जाती थी। आज की गर्मी कुछ ज्यादा ही थी और घर के अंदर का तापमान भी धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा था।
मीरा मामी ने उस दिन एक बहुत ही महीन सूती साड़ी पहनी थी, जो उनके शरीर के हर उभार को स्पष्ट रूप से दर्शा रही थी। उनके सीने पर कसे हुए ब्लाउज से उनके भारी और गोल तरबूज साफ झलक रहे थे, जो उनकी हर सांस के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे। समीर उन्हें तिरछी नजरों से देख रहा था और उसके मन में बार-बार उनके उन रसभरी मटर को छूने की तीव्र इच्छा जागृत हो रही थी जो ब्लाउज के कपड़े के पीछे से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे। मामी का पिछवाड़ा इतना भरा हुआ और मांसल था कि जब वे चलती थीं, तो समीर की नजरें वहीं टिक जाती थीं।
समीर और मीरा मामी के बीच हमेशा से एक दोस्ताना रिश्ता रहा था, लेकिन आज उस दोस्ती में वासना का एक नया रंग घुल रहा था। समीर ने देखा कि मामी रसोई में काम करते हुए पसीने से तर-बतर हो रही थीं। उनके गले से पसीने की एक बूंद नीचे सरकते हुए उनके तरबूज के बीच की गहरी घाटी में जाकर समा गई। यह दृश्य देखकर समीर के नीचे का खीरा अंगड़ाई लेने लगा और उसकी पैंट में तनाव बढ़ने लगा। उसने महसूस किया कि मामी भी उसकी नजरों को भांप रही थीं, लेकिन उन्होंने आज कोई विरोध नहीं किया, बल्कि उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी।
शाम ढलते-ढलते घर में सन्नाटा और गहरा हो गया। मामी ने समीर को अपने कमरे में पंखा ठीक करने के बहाने बुलाया। जैसे ही समीर कमरे में दाखिल हुआ, उसने देखा कि मामी बिस्तर पर लेटी हुई थीं और उन्होंने अपना पल्लू एक तरफ गिरा दिया था। उनके गोरे पेट और गहरी नाभि को देखकर समीर का संयम जवाब देने लगा। उसने धीरे से उनके पास जाकर बैठने की कोशिश की, तो मामी ने मुस्कुराते हुए उसका हाथ पकड़ लिया। वह स्पर्श बिजली की तरह समीर के पूरे शरीर में दौड़ गया और उसका खीरा अब पूरी तरह से अकड़ चुका था।
मामी ने समीर की आँखों में देखते हुए कहा, ‘समीर, आज बहुत ज्यादा गर्मी है, मन कर रहा है कि कहीं ठंडक मिल जाए।’ समीर ने साहस जुटाया और उनके तरबूज पर अपना हाथ रख दिया। मामी की एक दबी हुई आह निकली और उन्होंने आँखें बंद कर लीं। समीर ने धीरे-धीरे उनके मटर को अपनी उंगलियों के बीच मसलना शुरू किया, जिससे मामी के शरीर में कंपन होने लगा। अब झिझक का पर्दा पूरी तरह से हट चुका था और दोनों एक-दूसरे की बाहों में थे। समीर ने झुककर उनके होंठों की मिठाई को चखना शुरू किया, जिससे एक मधुर संगीत सा गूंज उठा।
समीर ने धीरे-धीरे मामी के कपड़े उतारना शुरू किया। जब वह पूरी तरह से निर्वस्त्र हुईं, तो समीर की आँखें उनके शरीर की सुंदरता देखकर फटी की फटी रह गईं। उनके घने काले बाल उनकी खाई के पास बिखरे हुए थे। समीर ने सबसे पहले उनके तरबूज को अपने मुंह में लिया और उन्हें रसभरी फल की तरह चूसने लगा। मामी के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं और उन्होंने समीर के सिर को अपने सीने से लगा लिया। इसके बाद समीर ने नीचे की ओर बढ़ते हुए उनकी खाई को अपनी उंगलियों से खोदना शुरू किया, जिससे मामी का पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया।
खाई से निकलता हुआ प्राकृतिक रस अब समीर की उंगलियों को भिगो चुका था। मामी ने बेकरार होकर समीर की पैंट खोली और उसके विशाल खीरा को बाहर निकाला। उन्होंने तुरंत उस खीरा को अपने मुंह में ले लिया और उसे बड़ी शिद्दत से चूसने लगीं। समीर को ऐसा लग रहा था जैसे वह स्वर्ग के द्वार पर खड़ा हो। कुछ देर खीरा चूसने के बाद, मामी ने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उसके ऊपर आकर उसकी खाई को खीरा के ऊपर सैट कर लिया। धीरे-धीरे उन्होंने उस कठोर खीरा को अपनी गहरी खाई के भीतर उतारना शुरू किया।
पूरी गहराई तक खीरा जाने के बाद मीरा मामी ने ऊपर-नीचे होकर खुदाई की प्रक्रिया शुरू कर दी। हर धक्के के साथ एक मधुर चप-चप की आवाज कमरे में गूंज रही थी। समीर ने उनके तरबूज को कसकर पकड़ लिया और नीचे से अपनी कमर को जोर-जोर से झटकने लगा। खुदाई की यह प्रक्रिया बहुत ही गहन और भावनात्मक थी। मामी के चेहरे पर सुख और पीड़ा का एक मिला-जुला भाव था। उन्होंने कहा, ‘समीर, और जोर से खोदो, आज मुझे पूरी तरह से अपनी बना लो।’ समीर ने उन्हें घुमाया और पिछवाड़े से खोदना शुरू किया, जिससे मामी की सिसकारियां और तेज हो गईं।
लगभग आधे घंटे की कड़ी खुदाई के बाद, दोनों के शरीर पसीने से लथपथ हो चुके थे। समीर का खीरा अब अपने चरम पर था और मामी की खाई भी रस छोड़ने के लिए बेकरार थी। अंततः, एक जोरदार धक्के के साथ समीर के खीरा से गर्म रस की धारा फूट पड़ी और मामी की खाई के भीतर समा गई। उसी क्षण मामी का भी रस निकलना शुरू हुआ और वे ढीली होकर समीर के ऊपर गिर पड़ीं। दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए लंबी-लंबी सांसें ले रहे थे। कमरे की हवा में अब एक अजीब सी संतुष्टि और प्रेम की खुशबू घुली हुई थी।
खुदाई के बाद की वह शांति बहुत ही सुकून देने वाली थी। समीर ने मामी के माथे को चूमा और उन्हें अपनी बाहों में समेट लिया। मामी की हालत ऐसी थी जैसे किसी प्यासी जमीन को पहली बार बारिश नसीब हुई हो। उन्होंने समीर के कान में फुसफुसाते हुए कहा कि यह एहसास उन्होंने आज से पहले कभी महसूस नहीं किया था। वह रात उन दोनों के लिए एक गुप्त समझौते की तरह थी, जिसने उनके रिश्ते को एक नई और गहरी परिभाषा दे दी थी। अब वे सिर्फ मौसी और भांजे नहीं, बल्कि दो ऐसी आत्माएं थे जिन्होंने एक-दूसरे की देह की प्यास को शांत किया था।