अजनबी के साथ सफर की चु@@ई—>रात के करीब ग्यारह बज चुके थे और राजधानी एक्सप्रेस अपनी पूरी रफ्तार से पटरी पर दौड़ रही थी। रीना अपनी बर्थ पर बैठी खिड़की से बाहर अंधेरे को निहार रही थी। उसने गहरे नीले रंग की शिफॉन की साड़ी पहनी हुई थी, जो उसके गोरे बदन पर बिजली की तरह चमक रही थी। उसकी उम्र लगभग 30 साल थी, लेकिन उसका शरीर किसी कच्ची कली की तरह खिला हुआ था। रीना के बड़े-बड़े तरबूज साड़ी के ब्लाउज से बाहर झाँकने की कोशिश कर रहे थे, और जब भी वह सांस लेती, उसकी छाती में एक हलचल सी मच जाती थी। उसकी कमर का घेरा और उसके भारी पिछवाड़े उसे एक बेहद आकर्षक महिला बना रहे थे, जो किसी भी पुरुष का मन विचलित कर सकती थी।
रीना के सामने वाली सीट पर समीर बैठा था, जिसकी उम्र करीब 35 साल रही होगी। वह एक गठीले बदन का इंसान था और उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी जो बार-बार रीना के शरीर के उभारों को माप रही थी। समीर ने एक सफेद शर्ट पहनी थी जिसके ऊपर के दो बटन खुले हुए थे, जिससे उसकी चौड़ी छाती के बाल साफ नजर आ रहे थे। ट्रेन के डिब्बे में सन्नाटा था और बाकी यात्री सो चुके थे। रीना को महसूस हो रहा था कि समीर उसे देख रहा है, और इस अहसास ने उसके शरीर के भीतर एक अनजानी सी गर्मी पैदा कर दी थी। उसके मटर धीरे-धीरे सख्त होने लगे थे, जो साड़ी के पतले कपड़े के नीचे से भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे।
समीर ने बातचीत शुरू करने के लिए रीना से पानी माँगा, और फिर दोनों के बीच बातों का सिलसिला चल पड़ा। रीना ने बताया कि वह अपने मायके जा रही है और समीर एक बिजनेस ट्रिप पर था। बातों-बातों में कब दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए, पता ही नहीं चला। समीर की आवाज़ में एक नशा था जिसने रीना के मन की झिझक को धीरे-धीरे कम करना शुरू कर दिया। रीना को समीर का उसके करीब बैठना बुरा नहीं लग रहा था, बल्कि उसे एक सुखद सिहरन महसूस हो रही थी। उसकी आँखों में छिपी कामुकता अब धीरे-धीरे रीना के पूरे शरीर को अपनी गिरफ्त में ले रही थी, जिससे उसके शरीर के अंग फड़कने लगे थे।
ट्रेन के एक झटके के कारण रीना अचानक समीर के ऊपर गिर पड़ी। उसका चेहरा समीर की चौड़ी छाती से टकराया और उसके दोनों भारी तरबूज समीर के सीने पर बुरी तरह दब गए। समीर ने अपनी बाहें रीना की कमर के चारों ओर लपेट लीं और उसे अपनी ओर खींच लिया। रीना के शरीर में बिजली की एक लहर दौड़ गई। समीर की गर्म सांसें रीना की गर्दन पर महसूस हो रही थीं, जिससे उसकी उत्तेजना सातवें आसमान पर पहुँच गई। रीना ने हटने की कोशिश तो की, लेकिन उसका मन इस स्पर्श को छोड़ने को तैयार नहीं था। समीर ने धीरे से रीना के कान में फुसफुसाया, ‘तुम बहुत खूबसूरत हो रीना, तुम्हारा बदन किसी मखमली चादर जैसा है।’
समीर का हाथ धीरे-धीरे रीना की पीठ से नीचे सरकते हुए उसके भारी पिछवाड़े तक पहुँच गया। रीना के मुँह से एक धीमी आह निकली और उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। समीर ने उसके होंठों को अपने होंठों में भर लिया और उसे पागलों की तरह चूमने लगा। रीना भी अब अपने आप को रोक नहीं पाई और समीर के बालों में अपनी उंगलियां फँसा दीं। समीर का हाथ अब साड़ी के पल्लू को हटाकर उसके तरबूजों तक पहुँच गया था। उसने ब्लाउज के ऊपर से ही उन भारी फलों को दबाना शुरू किया, जिससे रीना के मटर और भी ज्यादा सख्त और संवेदनशील हो गए।
समीर ने रीना के ब्लाउज के हुक धीरे-धीरे खोले और उसके गोरे, उभरे हुए तरबूजों को आजाद कर दिया। जैसे ही वे बाहर आए, समीर उन्हें देखकर दंग रह गया। वे बिल्कुल गोल, सख्त और उनके ऊपर के मटर गुलाबी रंग के थे। समीर ने झुककर एक मटर को अपने मुँह में भर लिया और उसे चूसने लगा, जबकि दूसरे तरबूज को अपने हाथों से सहलाने लगा। रीना की कमर ऊपर को उचकी और वह समीर के बालों को अपनी मुट्ठी में भींचने लगी। उसके मुँह से सिसकारियां निकलने लगी थीं और उसे महसूस हो रहा था कि उसकी गहरी खाई अब गीली होने लगी है।
समीर ने अब रीना की साड़ी पूरी तरह खोल दी और उसे सिर्फ उसकी पेटीकोट और अंतःवस्त्रों में छोड़ दिया। उसने अपना हाथ रीना की जांघों के बीच ले जाकर उसकी गहरी खाई को सहलाया। रीना की खाई से निकलने वाला प्राकृतिक रस अब उसके हाथ को भिगोने लगा था। समीर ने अपना पैंट उतारा और अपना सख्त, लंबा खीरा बाहर निकाला। रीना उस विशाल खीरे को देखकर हक्की-बक्की रह गई, वह बिल्कुल सीधा और कड़क था। समीर ने रीना का हाथ पकड़कर उसे अपने खीरे पर रखा, और जैसे ही रीना ने उसे छुआ, उसके पूरे शरीर में एक करंट सा दौड़ गया।
समीर ने रीना को धीरे से बर्थ पर लिटाया और खुद उसके पैरों के बीच बैठ गया। उसने रीना की खाई को चाटना शुरू किया। रीना अपनी जगह पर तड़पने लगी, उसकी खाई में होने वाली खुजली और समीर की जीभ का अहसास उसे पागल बना रहा था। वह अपना सिर इधर-उधर पटकने लगी और उसके मुँह से ‘ओह समीर, और तेज…’ जैसी आवाजें निकलने लगीं। समीर ने अपनी दो उंगलियां रीना की खाई में डाल दीं और उन्हें अंदर-बाहर करने लगा। रीना का शरीर धनुष की तरह मुड़ गया और उसका रस छूटने ही वाला था कि समीर रुक गया।
समीर ने अब रीना को अपने खीरे के पास बैठने को कहा। रीना ने धीरे-धीरे समीर के खीरे को अपने मुँह में लिया और उसे चूसना शुरू किया। वह उसे किसी आइसक्रीम की तरह चाट रही थी और उसके ऊपरी हिस्से को अपनी जीभ से सहला रही थी। समीर को स्वर्ग जैसा आनंद मिल रहा था। वह रीना के बालों को सहलाते हुए उसके मुँह में गहरे धक्के मार रहा था। कुछ देर तक खीरा चूसने के बाद, समीर अब और इंतजार नहीं कर सकता था। उसने रीना को सामने से खोदने के लिए लिटाया और अपनी पोजीशन ले ली।
समीर ने अपने खीरे का मुँह रीना की गीली और गर्म खाई के मुहाने पर रखा। रीना ने जोर से समीर को पकड़ लिया और अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं। समीर ने एक गहरा धक्का मारा और उसका पूरा खीरा रीना की तंग खाई में समा गया। रीना के मुँह से एक जोर की चीख निकली, जो ट्रेन की आवाज़ में दब गई। समीर ने उसे संभालते हुए धीरे-धीरे हिलना शुरू किया। हर धक्के के साथ रीना के तरबूज ऊपर-नीचे नाच रहे थे और उसकी खाई से निकलने वाली ‘चप-चप’ की आवाज़ पूरे केबिन में गूँज रही थी।
खुदाई अब अपनी पूरी रफ्तार पर थी। समीर रीना को कभी पिछवाड़े से खोदता तो कभी उसे अपनी गोद में बिठाकर गहराई तक जाता। रीना पूरी तरह समीर के वश में थी और वह भी उतने ही जोश के साथ समीर का साथ दे रही थी। समीर के हर धक्के पर रीना की आहें और तेज हो जाती थीं। ‘हाँ समीर, मुझे और जोर से खोदो, आज मुझे अपना बना लो,’ रीना मदहोश होकर चिल्ला रही थी। समीर का पसीना रीना के बदन पर गिर रहा था, जिससे दोनों के शरीर आपस में चिपक रहे थे।
अंत में, जब दोनों की चरम सीमा नजदीक आई, तो समीर ने अपनी रफ्तार और बढ़ा दी। वह पागलों की तरह रीना के भीतर धक्के मार रहा था। रीना का पूरा शरीर कांपने लगा और उसकी खाई से भारी मात्रा में रस निकलने लगा। समीर ने भी एक आखिरी गहरा धक्का मारा और अपना सारा गरम रस रीना की गहराई में छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए बेदम होकर बर्थ पर गिर पड़े। रीना के चेहरे पर एक असीम शांति और संतुष्टि के भाव थे।
अगली सुबह जब ट्रेन स्टेशन पर रुकी, तो दोनों की आँखें मिलीं। समीर और रीना के बीच अब सिर्फ एक अजनबी का रिश्ता नहीं था, बल्कि एक ऐसी याद थी जो शायद वे कभी नहीं भूल पाएंगे। रीना ने अपनी साड़ी ठीक की और समीर को एक हल्की मुस्कान देते हुए ट्रेन से उतर गई। उसकी चाल में अब भी उस रात की खुदाई की थोड़ी सी लचक बाकी थी, और उसके मन में उस अजनबी समीर के प्रति एक गहरा खिंचाव रह गया था।