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रिया साली की खुदाई

उस शाम बादलों ने जैसे पूरे शहर को अपनी बाहों में भर लिया था, और रह-रहकर होती बारिश की बौछारें मन के भीतर दबी हुई अनकही इच्छाओं को जगा रही थीं। अर्जुन बरामदे में बैठा हुआ गिरती हुई बूंदों को देख रहा था, तभी उसकी साली रिया हाथ में अदरक वाली चाय के दो प्याले लिए वहां आई। रिया के व्यक्तित्व में एक ऐसी कशिश थी जो अर्जुन को हमेशा विचलित कर देती थी, उसकी सादगी और उसकी चंचलता का मिश्रण अर्जुन के दिल की धड़कनें बढ़ा देता था। आज वह एक गहरे नीले रंग की साड़ी में थी, जिसका गला काफी गहरा था और उसकी मखमली त्वचा पर बारिश की कुछ नन्हीं बूंदें मोती की तरह चमक रही थीं।

रिया के शरीर का सौष्ठव किसी तराशी हुई मूरत जैसा था, उसकी कमर का वह हल्का सा घुमाव और साड़ी के पल्लू से झांकती उसकी गोरी पीठ अर्जुन की नजरों को अपनी ओर खींच रही थी। उसकी गहरी कट वाली चोली उसके उभारों को बड़ी खूबसूरती से सहारा दे रही थी, जिससे उसकी गर्दन और कंधों की कोमलता और भी निखर कर आ रही थी। वह जब चलती थी, तो उसकी पायलों की रुनझुन और उसके अंगों की थिरकन एक अजीब सी मादकता पैदा करती थी। अर्जुन चाहकर भी अपनी नजरें उस पर से नहीं हटा पा रहा था, वह बस उसे अपलक निहारे जा रहा था जैसे कोई प्यासा बरसों बाद पानी देख रहा हो।

चाय का प्याला अर्जुन की ओर बढ़ाते हुए रिया की उंगलियां हल्की सी अर्जुन के पोरों से छू गईं, और उस एक पल के स्पर्श ने जैसे उसके शरीर में बिजली की एक लहर दौड़ा दी। दोनों के बीच एक गहरा मौन था, लेकिन उस खामोशी में हजारों बातें तैर रही थीं जो बरसों से उनके दिलों में दबी हुई थीं। रिया ने हौले से अपनी नजरें उठाईं और अर्जुन की आंखों में देखा, जहां प्यार और चाहत का एक अथाह समंदर हिलोरें ले रहा था। उन दोनों का भावनात्मक जुड़ाव इतना गहरा था कि बिना एक शब्द कहे भी वे एक-दूसरे की तड़प और बेचैनी को साफ-साफ महसूस कर सकते थे।

अर्जुन ने धीमी आवाज में कहा, ‘रिया, आज ये बारिश कुछ अलग ही संदेश लेकर आई है, ऐसा लगता है जैसे मन की बंजर जमीन पर प्यार की खुदाई करने का वक्त आ गया है।’ रिया के चेहरे पर एक हल्की सी हया की लाली छा गई और उसने अपनी नजरें नीची कर लीं, उसकी सांसों की गति थोड़ी तेज हो गई थी जिससे उसका सीना ऊपर-नीचे होने लगा था। वह जानती थी कि उनके बीच जो खिंचाव है, वह सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि रूहानी भी है, पर समाज और रिश्तों की बंदिशें उन्हें हमेशा पीछे खींच लेती थीं। आज उस एकांत और माहौल ने उन बंदिशों की दीवार को कमजोर कर दिया था।

झिझक और मन के संघर्ष के बीच रिया ने अर्जुन के पास वाली कुर्सी पर बैठने के बजाय नीचे पायदान पर बैठना पसंद किया, जहां उसका घुटना अर्जुन के पैरों से सट रहा था। उस हल्के से संपर्क ने दोनों के भीतर एक सिहरन पैदा कर दी, अर्जुन का हाथ अनजाने में ही रिया के रेशमी बालों की ओर बढ़ा और उसने बहुत कोमलता से उसकी एक लट को कान के पीछे किया। रिया की आंखें बंद हो गईं और उसने एक लंबी, गहरी सांस ली जैसे वह उस पल को अपने भीतर उतार लेना चाहती हो। स्पर्श की वह पहली सीढ़ी उनके बीच के सारे फासलों को मिटाने के लिए काफी थी।

धीरे-धीरे निकटता बढ़ने लगी, अर्जुन का हाथ रिया के कंधे से होता हुआ उसकी मखमली पीठ की ओर बढ़ा, जहां साड़ी का कपड़ा उसकी त्वचा को महसूस करने में बाधा नहीं बन पा रहा था। रिया ने अपनी गर्दन को थोड़ा तिरछा किया, जिससे उसकी सुराहीदार गर्दन और उस पर मौजूद छोटा सा तिल अर्जुन की आंखों के सामने स्पष्ट हो गया। अर्जुन की सांसें अब रिया के कान के पास गर्म हवाओं की तरह टकरा रही थीं, जिससे रिया के पूरे बदन में एक कंपकंपी छूट गई। उसने अपनी मुट्ठियां कस लीं और एक धीमी सी आह उसके होठों से निकल गई जो बारिश के शोर में दब गई।

दोनों के बीच की दूरी अब नाममात्र की रह गई थी, अर्जुन ने रिया के दोनों हाथों को अपने हाथों में लिया और उन्हें चूम लिया, उसके होठों का स्पर्श रिया की हथेलियों पर एक अजीब सी गुदगुदी और जलन पैदा कर रहा था। रिया का दिल इतनी जोर से धड़क रहा था कि अर्जुन उसे अपने सीने पर महसूस कर सकता था, उसकी आंखों में समर्पण का भाव था और वह पूरी तरह से अर्जुन के जादू में खो चुकी थी। अब कोई संकोच नहीं था, कोई डर नहीं था, बस एक-दूसरे को पाने की वह तीव्र इच्छा थी जो अब ज्वालामुखी की तरह फटने को तैयार थी।

जैसे-जैसे रात गहराती गई, उनकी घनिष्ठता भी अपनी चरम सीमा की ओर बढ़ने लगी, अर्जुन ने बहुत धीरे से रिया को अपनी बाहों में भर लिया और उसे अपने करीब खींच लिया। रिया का कोमल शरीर अर्जुन के सख्त बदन से टकराया, तो दोनों के मुंह से एक साथ एक तृप्त कराह निकल गई, वह अहसास इतना सुखद और इतना गहरा था कि वे पूरी दुनिया को भूल गए। कमरे में सिर्फ उनकी भारी सांसों की आवाज और बाहर गिरते पानी का मधुर संगीत गूंज रहा था, जो उनके प्रेम की इस नई कहानी का गवाह बन रहा था।

प्यार की उस प्रक्रिया में हर स्पर्श एक कविता की तरह था, अर्जुन ने जब रिया के चेहरे को अपने हाथों के प्याले में लिया, तो उसे लगा जैसे उसने दुनिया की सबसे कीमती चीज थाम ली हो। उनके होठ जब एक-दूसरे से मिले, तो उनमें बरसों की प्यास और एक-दूसरे के प्रति अगाध प्रेम झलकता था, वह चुंबन धीमा, लंबा और रूह को छू लेने वाला था। रिया ने अर्जुन के गले में अपनी बाहें डाल दीं और उसे और भी कसकर थाम लिया, जैसे वह कभी उसे अपने से दूर नहीं होने देना चाहती हो।

पसीने की नन्हीं बूंदें उनके माथे पर चमक रही थीं, और उनके शरीर की गर्मी उस ठंडे मौसम में भी एक सुखद अहसास दे रही थी। अर्जुन ने रिया के अंगों के हर उभार और हर मोड़ को अपनी उंगलियों से महसूस किया, वह जैसे उसके शरीर के मानचित्र पर प्यार की लकीरें खींच रहा था। रिया की हर आह अर्जुन के लिए एक प्रेरणा बन रही थी, वह उसे और भी ज्यादा प्यार करने के लिए उकसा रही थी, उनके बीच का वह संवाद शब्दों का नहीं बल्कि धड़कनों और सांसों का था जो एक-दूसरे में पूरी तरह समा चुके थे।

पूरी रात जैसे उन दोनों के लिए रुक गई थी, समय का चक्र थम गया था और सिर्फ उनकी मौन बातचीत जारी थी, जहां हर कराह और हर सिहरन एक नया अर्थ बयां कर रही थी। अर्जुन ने रिया की कमर के पास अपनी पकड़ मजबूत की और उसे महसूस कराया कि वह उसके लिए क्या मायने रखती है, रिया ने भी अपनी आंखें मूंदकर उस असीम सुख को अपने रोम-रोम में बसा लिया। वह मिलन सिर्फ दो शरीरों का नहीं बल्कि दो भटकती हुई रूहों का था जो आज अपनी मंजिल पा चुकी थीं।

प्यार के उस चरम आनंद के बाद जब दोनों एक-दूसरे की बाहों में शिथिल पड़े थे, तो मन में एक अजीब सी शांति और सुकून का अहसास था। अर्जुन ने रिया के माथे को चूमा और उसे अपनी छाती से सटा लिया, रिया ने उसके दिल की धड़कन पर अपना कान रखा और मुस्कुरा दी, वह धड़कन अब उसके नाम का जाप कर रही थी। उनकी आंखों में अब कोई शर्म नहीं थी, बल्कि एक ऐसा गौरव था जो सिर्फ सच्चे प्यार में ही मुमकिन होता है, उन्होंने उस रात अपने रिश्तों को एक नया आयाम दिया था।

उस रात के बाद उनकी भावनात्मक हालत पूरी तरह बदल चुकी थी, अब वे सिर्फ जीजा और साली नहीं थे, बल्कि एक ऐसी अटूट डोर से बंध गए थे जिसे दुनिया की कोई ताकत नहीं तोड़ सकती थी। उनके बीच का वह राज अब उनकी ताकत बन गया था, और उनकी हर मुलाकात में अब वह पुरानी झिझक नहीं बल्कि एक गहरा विश्वास और प्रेम की वह महक थी जो उस बारिश वाली रात में पैदा हुई थी। रिया और अर्जुन का वह मिलन उनके जीवन की सबसे सुंदर और पवित्र स्मृति बन गया था, जिसे वे हमेशा अपने दिल के कोने में संजोकर रखना चाहते थे।

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