अर्जुन और रिया की मुलाकात एक दशक से भी ज़्यादा वक़्त के बाद हुई थी। बचपन के साथी, स्कूल के वो प्यारे दिन, और फिर ज़िंदगी की अपनी-अपनी राहों पर निकल जाना। रिया की ज़िंदगी थोड़ी ज़्यादा पथरीली थी। उसकी शादी एक ऐसे शख्स से हुई थी, जिसने उसके सारे सपनों को पैरों तले रौंद दिया था, और अब वो सिर्फ एक नाम की पत्नी थी, जिसकी रूह ख़ामोश हो चुकी थी। अर्जुन की सफल करियर ने उसे आत्मविश्वास तो दिया था, लेकिन उसके दिल में कहीं रिया के लिए एक अनकही जगह हमेशा बनी रही थी, एक ऐसी कसक जो वक़्त के साथ कभी मिटी नहीं थी।
एक दोस्त की शादी में उनकी नज़रें मिलीं। रिया नीले रंग की साड़ी में बेहद खूबसूरत लग रही थी, लेकिन उसकी आँखों में एक गहरी उदासी की परत थी, जिसे अर्जुन ने तुरंत भाँप लिया था। उसके भरे हुए तरबूज साड़ी के पल्लू से झाँक रहे थे, जो उसके कभी नज़दीक से देखे हुए थे। अर्जुन के भीतर एक पुरानी आग सुलग उठी, लेकिन उसने ख़ुद को संभाला। अर्जुन, अपने गठीले शरीर और चौड़े कंधों के साथ, एक सफल व्यक्ति का अंदाज़ लिए खड़ा था, उसकी आँखों में रिया को देखकर एक चमक आ गई थी, जो बरसों से शांत थी।
शुरुआती हिचकिचाहट के बाद, उन्होंने बातें करना शुरू किया। बचपन की शरारतें, स्कूल के किस्से, सब याद आए। रिया ने धीरे-धीरे अपनी शादीशुदा ज़िंदगी की कड़वाहट अर्जुन को बताई। उसकी आवाज़ में दर्द था, और अर्जुन का दिल पिघल गया। उसने रिया का हाथ अपने हाथ में लिया, एक हल्की-सी सहलाहट दी, जिसमें सांत्वना और असीमित प्यार भरा था। रिया ने अपनी पलकें झुका लीं, उसके गालों पर एक हल्की-सी लाली दौड़ गई, जिसे उसने तुरंत छुपा लिया। उस स्पर्श में वर्षों का इंतजार और भावनाओं का सैलाब छिपा था।
रात गहरी हो चली थी, और शादी का शोर अब धीमा पड़ रहा था। रिया को घर जाना था, जहाँ वो अपने पति से फिर उन्हीं बेजान दीवारों का सामना करने वाली थी। अर्जुन ने उसे अपने घर तक छोड़ने की पेशकश की, और रिया ने बिना किसी सवाल के मान लिया। कार में चुप्पी थी, लेकिन उस चुप्पी में एक अनदेखा खिंचाव था, जो दोनों को एक-दूसरे की ओर खींच रहा था। रिया की साँसों की धीमी आवाज़ अर्जुन को स्पष्ट सुनाई दे रही थी, और उसके दिल की धड़कनें भी बेकाबू हो रही थीं।
जब वे अर्जुन के अपार्टमेंट पहुंचे, तो रिया ने उतरने में हिचकिचाहट दिखाई। अर्जुन ने कहा, “थोड़ी देर बैठो, रिया। एक कप कॉफ़ी पीकर जाना।” रिया ने उसकी आँखों में देखा और उसके अनुरोध को अस्वीकार नहीं कर पाई। अंदर, माहौल शांत और आरामदायक था। अर्जुन ने हल्की रोशनी जला दी, जो उनके चेहरों पर एक नरम चमक बिखेर रही थी। उनके बीच की अनकही बातें अब और भी प्रबल हो चुकी थीं। रिया सोफे पर बैठ गई, उसकी निगाहें फर्श पर टिकी थीं, मानो वो अपने अंदर चल रहे तूफान से जूझ रही हो।
अर्जुन ने उसके सामने कॉफ़ी रखी और उसके पास बैठ गया। उसने देखा कि रिया का हाथ काँप रहा था। “सब ठीक है, रिया?” उसने पूछा, उसकी आवाज़ में इतनी नरमी थी कि रिया की आँखों से आँसू छलक पड़े। उसने अपना सिर अर्जुन के कंधे पर रख दिया और रोने लगी। अर्जुन ने उसे प्यार से अपनी बाहों में भर लिया, उसके बालों को सहलाने लगा। रिया ने उसकी शर्ट को कसकर पकड़ लिया, उसके शरीर की गरमाहट उसे सुकून दे रही थी, एक ऐसा सुकून जिसकी उसे बरसों से कमी खल रही थी।
“मैं बहुत अकेली हूँ, अर्जुन,” रिया ने सिसकते हुए कहा। “मेरी ज़िंदगी में कुछ भी नहीं बचा।” अर्जुन ने उसे और कसकर पकड़ लिया। “तुम अकेली नहीं हो, रिया। मैं हूँ ना।” उसके शब्दों में इतना भरोसा था कि रिया ने धीरे-धीरे ऊपर देखा, उसकी आँखें अर्जुन की आँखों से मिलीं। उस पल में, बरसों का इंतज़ार, अनकहे प्यार और दबी हुई इच्छाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। अर्जुन ने धीरे से उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया, उसके गालों से आँसू पोंछे, उसका स्पर्श इतना कोमल था कि रिया के रोंगटे खड़े हो गए।
अर्जुन ने अपनी उँगलियों को रिया के होठों पर फेरा, और फिर धीरे से नीचे झुका। रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसके होंठ हल्के से खुले थे, एक अनकहे आमंत्रण की तरह। उनके होंठ धीरे से एक-दूसरे से मिले, एक कोमल, नाजुक स्पर्श, जैसे दो फूलों की पंखुड़ियाँ। रिया ने एक आह भरी, और अर्जुन ने अपनी पकड़ मज़बूत कर ली। यह कोई साधारण अमृत चखना नहीं था, यह दो प्यासी आत्माओं का मिलन था, जो बरसों के बिछोह के बाद एक-दूसरे में खो जाना चाहती थीं। उनके होंठों का यह मिलना गहराता गया, एक-दूसरे का स्वाद चखते हुए।
रिया की उँगलियाँ अर्जुन की गर्दन में उलझ गईं, और वह उसके बाल सहलाने लगी। अर्जुन ने उसे और करीब खींचा, उसके तरबूजों पर उसके सीने का दबाव महसूस हो रहा था। रिया ने अर्जुन के अमृत चखने का जवाब उतनी ही शिद्दत से दिया, मानो अपनी सारी प्यास बुझा लेना चाहती हो। उनके शरीर में एक अजीब सी ऊर्जा का संचार होने लगा, जैसे हर नस में प्यार का मीठा ज़हर दौड़ रहा हो। अर्जुन ने धीरे से उसे सोफे पर लिटाया, अपने शरीर का भार उस पर डाले बिना, उसकी आँखों में ही देखते हुए।
अर्जुन का हाथ उसकी कमर पर चला गया, और धीरे-धीरे साड़ी का पल्लू हटाते हुए उसके पेट पर रुका। रिया सिहर उठी, उसकी साँसें तेज़ हो गईं। “अर्जुन… यह क्या…” उसकी आवाज़ में अभी भी थोड़ी हिचकिचाहट थी, लेकिन उसकी आँखें उससे और आगे बढ़ने का संकेत दे रही थीं। “वही जो हम दोनों बरसों से चाहते थे, रिया,” अर्जुन ने फुसफुसाते हुए कहा, “तुम्हें महसूस करना चाहता हूँ।” उसके शब्द रिया के कानों में शहद घोल रहे थे, और उसने खुद को अर्जुन के हवाले कर दिया।
अर्जुन ने रिया की साड़ी को धीरे-धीरे उसकी कमर से ऊपर उठाया, फिर ब्लाउज के बटन खोले। रिया ने आँखें बंद कर लीं, उसके गालों पर शर्म की लाली दौड़ गई, लेकिन उसके शरीर में एक मीठी तड़प थी। अर्जुन ने उसके तरबूजों को आज़ाद किया, वे गोल और उभरे हुए थे, उसकी हर साँस के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे। उसने धीरे से एक तरबूज को अपने हाथों में लिया, उसकी गरमाहट को महसूस किया, फिर मटर को अपने होंठों से छुआ। रिया के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली।
अर्जुन ने धीरे से मटर को अपने होंठों में लिया और उसे चूसने लगा। रिया के शरीर में बिजली दौड़ गई, उसके पैरों में कंपन होने लगी। “उफ्फ… अर्जुन… बहुत अच्छा लग रहा है…” उसने अपनी पीठ को आर्क करते हुए कहा। अर्जुन ने दूसरे तरबूज पर भी वही जादू चलाया, बारी-बारी से उन्हें प्यार देता रहा, जबकि उसके होंठ रिया की गर्दन पर अमृत चख रहे थे। रिया की उँगलियाँ अर्जुन के बालों में उलझ गईं, वह अपनी सारी चेतना खो रही थी, बस इस अद्भुत एहसास में डूब जाना चाहती थी।
जब अर्जुन ने रिया के पेट पर खीरा चाटना शुरू किया, तो रिया अपने कपड़े उतारने लगी। अर्जुन ने उसकी मदद की, और जल्द ही रिया उसके सामने सिर्फ अपनी पैंटी में थी। अर्जुन ने उसकी कमर से पैंटी को नीचे खिसकाया, उसकी नग्नता उसके सामने थी। रिया ने अपने हाथ से अपनी खाई को छुपाने की कोशिश की, लेकिन अर्जुन ने प्यार से उसके हाथ हटा दिए। उसकी खाई कोमलता से बालों से ढकी थी, और अंदर से गुलाबी और भीगी हुई दिख रही थी, जैसे किसी सुबह की ओस से भरी कली।
अर्जुन ने उसकी खाई पर अपने होंठ रखे और उसे धीरे से चाटना शुरू किया। रिया के शरीर में एक ज़ोरदार झटका लगा, और वह ज़ोर से कराह उठी। “ओह… अर्जुन… यह क्या कर रहे हो तुम…” उसकी आवाज़ में दर्द और ख़ुशी दोनों थे। अर्जुन उसकी खाई को चाटता रहा, उसकी जीभ उसकी गहराई में प्रवेश कर रही थी। रिया ने अपने पैरों को फैला दिया, अपनी कमर को ऊपर उठाते हुए, ताकि अर्जुन उसे और गहराई से चाट सके। उसकी खाई से रस निकलना शुरू हो गया था, जो अर्जुन की जीभ पर मीठा लग रहा था।
रिया का पूरा शरीर काँप रहा था, उसकी साँसें अनियंत्रित हो चुकी थीं। जब अर्जुन ने अपनी उंगली उसकी खाई में डाली, तो रिया ने ज़ोर से आह भरी। “अर्जुन… बस अब और इंतज़ार नहीं होता… मुझे चाहिए…” उसकी आवाज़ में इतनी तीव्र इच्छा थी कि अर्जुन ने तुरंत अपने कपड़े उतार दिए। उसका खीरा पूरी तरह से कड़ा हो चुका था, उत्तेजना से तनकर खड़ा था, जैसे किसी राजा का दंड। रिया ने अपनी आँखें खोलकर उसे देखा, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, वासना और प्यार का मिश्रण।
अर्जुन ने अपना खीरा रिया की खाई के द्वार पर रखा, और रिया ने अपने हाथों से उसे गाइड किया। “प्लीज़… अर्जुन… अब और नहीं…” वह फुसफुसाई। अर्जुन ने एक गहरा अमृत चखा, और धीरे से अपने खीरे को उसकी खाई में प्रवेश कराया। पहला प्रवेश धीमा और गहरा था। रिया ने एक लंबी साँस ली, उसके शरीर में एक हल्की टीस हुई, फिर एक अद्भुत फैलाव का एहसास हुआ। “उफ्फ…” उसकी आह निकली। अर्जुन ने उसे प्यार से देखा। “ठीक है, मेरी जान?” उसने पूछा। रिया ने सिर्फ अपना सिर हिलाकर हाँ कहा।
अर्जुन ने धीरे-धीरे अपने खीरे को अंदर-बाहर करना शुरू किया। उनकी साँसों की ताल एक हो गई थी, उनके शरीर से पसीना बहने लगा था। “और तेज़, अर्जुन… और गहरा…” रिया ने गुहार लगाई, उसकी आवाज़ अब पूरी तरह से मदहोश थी। अर्जुन ने उसकी बात मानी, और उसकी गति तेज़ कर दी। खाई की गरमाहट और कसक अर्जुन को पागल कर रही थी, और खीरा पूरी गहराई से उसे खोद रहा था। उनके शरीर के हर स्पर्श में, हर आह में, बरसों का इंतज़ार और अनकहा प्यार घुल रहा था।
वे सामने से खोद रहे थे, उनकी आँखें एक-दूसरे से मिली हुई थीं। अर्जुन ने रिया के तरबूजों को फिर से अपने हाथों में ले लिया और उन्हें सहलाने लगा, जबकि उसका खीरा उसकी खाई को लगातार खोद रहा था। रिया ने अपनी टाँगों से अर्जुन की कमर को कसकर जकड़ लिया, जैसे उसे खुद में समा लेना चाहती हो। “अर्जुन… मुझे… मुझे रस निकलने वाला है…” रिया ने हाँफते हुए कहा। अर्जुन ने अपनी गति और तेज़ कर दी, और रिया की खाई से रस छूटने लगा। उसने अर्जुन को और कसकर अपनी ओर खींचा, और एक गहरी सिसकारी के साथ, उसकी सारी इच्छाएँ पूरी हुईं।
अर्जुन ने भी अपनी गति को चरम पर पहुँचाया, और कुछ ही पलों में, उसके शरीर से भी रस निकलने लगा। उसने अपना सारा रस रिया की गरम खाई में उड़ेल दिया, और फिर उसके ऊपर ऐसे ही ढेर हो गया, उसकी साँसें तेज़ थीं। रिया ने उसे कसकर पकड़े रखा, उसकी पीठ पर प्यार से हाथ फेर रही थी। उनके शरीर एक-दूसरे में लिपटे हुए थे, पसीना और संतुष्टि से भरे हुए। उस पल में, दुनिया की सारी चिंताएँ, सारी परेशानियाँ ख़त्म हो चुकी थीं। बस वे दोनों थे, और उनके बीच का अनमोल जुड़ाव।
थोड़ी देर बाद, अर्जुन ने खुद को उठाया और रिया के बगल में लेट गया। उसने रिया को अपनी बाहों में भर लिया, और रिया उसके सीने पर सिर रखकर लेटी रही। एक अजीब सी शांति थी, एक संतुष्टि भरी ख़ामोशी। “कभी नहीं सोचा था कि ऐसा भी कुछ होगा,” रिया ने फुसफुसाते हुए कहा। “यह सब एक सपना जैसा है।” अर्जुन ने उसके बालों को चूमा। “यह सपना नहीं है, रिया। यह हमारी सच्चाई है।” रिया ने उसकी आँखों में देखा, उसके चेहरे पर अब उदासी की जगह एक अजीब सी चमक थी, उम्मीद की चमक। उनका यह मिलन सिर्फ शारीरिक नहीं था, बल्कि दो बिछड़े हुए दिलों का भावनात्मक जुड़ाव भी था, जो अब एक नई राह की तलाश में थे, एक साथ।