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राहुल-मीना की खुदाई

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राहुल अपनी भाभी मीना के साथ एक शांत से घर में रहता था, जब से उसके बड़े भाई, रोहित, अपने काम के सिलसिले में विदेश चले गए थे। रोहित को गए हुए लगभग आठ महीने हो चुके थे, और इस दौरान घर में मीना और राहुल ही एक-दूसरे का सहारा थे। राहुल अभी कॉलेज खत्म करके नौकरी की तलाश में था, और मीना, जो हमेशा चंचल और हंसमुख रहती थी, अब थोड़ी गुमसुम सी रहने लगी थी। राहुल उसकी खामोशी को महसूस करता था, और एक अजीब सी उदासी उसे भी घेरने लगी थी, यह जानते हुए कि उसकी भाभी अंदर से कितनी अकेली महसूस कर रही थी। उसने खुद ही घर के छोटे-मोटे कामों में हाथ बंटाना शुरू कर दिया था, ताकि मीना को थोड़ा आराम मिले और उन्हें एक-दूसरे के साथ समय बिताने का बहाना मिल सके।

मीना की उम्र पैंतीस के आसपास होगी, लेकिन उसका शरीर मानो किसी देवी की मूर्ति से कम नहीं था। साड़ी या सलवार कमीज़ में भी उसके सुडौल तरबूज की गोल घुमावदार आकृति साफ झलकती थी, और जब वह चलती थी तो उसके पिछवाड़े का हल्का सा कंपन राहुल को अपनी ओर खींचता था। उसकी कमर की पतली रेखा, जो उसके उभारदार कूल्हों पर जाकर खत्म होती थी, राहुल को अनजाने में ही अपनी कल्पनाओं में उलझाए रखती थी। राहुल ने धीरे-धीरे उन बारीकियों पर ध्यान देना शुरू कर दिया था, जो पहले उसने कभी नहीं देखी थीं—जैसे उसकी गर्दन के पीछे की हल्की सी पसीना, या उसकी साड़ी के पल्लू से कभी-कभी झांकते उसके तरबूज का ऊपरी हिस्सा।

धीरे-धीरे, उनके बीच की दीवारें कम होने लगीं। वे अब सिर्फ़ घर के कामों के बारे में नहीं, बल्कि जीवन की छोटी-छोटी बातों, सपनों और उन अकेलेपन भरी रातों के बारे में भी बात करने लगे थे, जब रोहित की कमी उन्हें महसूस होती थी। राहुल मीना का विश्वासपात्र बन गया था, उसके सारे अनकहे दर्द और इच्छाओं को समझने वाला एकमात्र शख्स। मीना ने राहुल में वह परिपक्वता और संवेदनशीलता देखी, जो उसने कभी किसी और में नहीं देखी थी। राहुल के कंधे पर सिर रखकर रोते हुए, मीना को एक ऐसा सुकून मिलता था जिसकी उसे वर्षों से तलाश थी। उनके बीच का रिश्ता अब सिर्फ़ देवर-भाभी का नहीं रहा था; यह उससे कहीं गहरा, एक भावनात्मक जुड़ाव था, जो उनकी आत्माओं को छू रहा था।

उनके बीच अब हवा में एक अजीब सा तनाव घुलने लगा था। उनकी आँखें अब अक्सर एक-दूसरे पर ठहरने लगी थीं, और उनके स्पर्श अब पहले जैसे ‘गलती से’ नहीं होते थे। राहुल मीना की हर अदा, उसकी हर मुस्कान, उसके हर छोटे से हाव-भाव में एक नई खूबसूरती देखने लगा था। उसकी देह का हर उभार, उसकी चाल का हर मोड़, उसे अपनी ओर खींचता था। मीना भी, राहुल की मजबूत बाहों, उसकी गहरी आँखों और उसकी परवाह करने वाले स्वभाव से खुद को खिंचती हुई पाती थी। उसे महसूस होता था कि उसकी वर्षों से दबी हुई अंतरंगता की भूख अब राहुल की मौजूदगी में जागृत हो रही थी, एक ऐसी आग जो धीरे-धीरे उनके बीच सुलग रही थी।

दोनों अपने अंदर पनप रही इन भावनाओं से जूझ रहे थे। यह एक वर्जित संबंध था, और अपराधबोध उन्हें हर पल सताता था। वे एक-दूसरे से नज़रे चुराते थे, लेकिन उनके शरीर, उनकी साँसें, उनकी धड़कनें उनके मन की बात कह जाती थीं। घर की चारदीवारी अब उन्हें छोटी लगने लगी थी, हर कोने में उनकी अनकही इच्छाएँ गूँजती थीं। वे इस आकर्षण से लड़ते थे, खुद को रोकते थे, लेकिन हर कोशिश उन्हें एक-दूसरे के और करीब लाती थी, उनकी इच्छाओं की लौ और तेज़ होती जाती थी। यह एक मीठा दर्द था, जो उन्हें हर रात जगाए रखता था।

एक शाम, मीना सीढ़ियों से उतरते हुए फिसल गई और उसके टखने में मोच आ गई। राहुल तुरंत भागा और उसे सहारा देने के लिए अपनी बाहों में उठा लिया। उसके गर्म शरीर का स्पर्श, उसके तरबूज का उसके सीने से दबना, और उसके पिछवाड़े का उसके हाथों में आना – यह सब एक झटके जैसा था। उसने मीना को सोफे पर धीरे से बिठाया, और जब उसका हाथ उसकी कमर पर रह गया, तो मीना का हाथ अनजाने में राहुल की बांह पर आ टिका। एक बिजली सी उनके पूरे शरीर में दौड़ गई। उनकी आँखें मिलीं, और उस पल में, सारी झिझक, सारे बंधन टूट गए। राहुल धीरे से मीना की ओर झुका, और मीना ने अपनी आँखें बंद कर लीं। राहुल ने मीना के गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रखे और एक लंबा, गहरा रसपान किया, जिसमें सदियों की प्यास समाई हुई थी।

उनके बीच का पहला रसपान एक तूफान का संकेत था। इसके बाद, हर स्पर्श, हर नज़दीकी में एक नया अर्थ था। राहुल के हाथ मीना की कमर पर धीरे-धीरे सरकने लगे, उसकी उंगलियाँ उसकी साड़ी के नीचे की त्वचा को महसूस करती थीं। मीना अपने हाथों से राहुल की पीठ सहलाती, उसके मजबूत कंधों पर अपनी उंगलियाँ फेरती। हर रसपान गहरा होता जाता, हर साँस भारी होती जाती। राहुल ने धीरे से मीना के कपड़ों पर से ही उसके तरबूज को अपनी हथेलियों में भरा और हल्का सा दबाया। मीना की एक आह उसके मुँह से निकली, और उसके शरीर में एक कंपकंपी दौड़ गई। “राहुल,” उसने फुसफुसाया, “हम क्या कर रहे हैं?” राहुल ने उसके होंठों पर फिर से रसपान किया, उसकी उंगली से उसकी गर्दन को सहलाते हुए बोला, “वही, जो हम दोनों कब से चाहते हैं, मेरी जान।”

राहुल ने धीरे-धीरे मीना की साड़ी का पल्लू हटाया और उसके ब्लाउज के हुक खोले। मीना ने शर्म और इच्छा के मिश्रण से अपनी आँखें बंद कर लीं। जब ब्लाउज खुल गया, तो उसके सामने दो बड़े, सुडौल तरबूज प्रकट हुए, जो गहरे गुलाबी रंग के मटर से सजे थे। राहुल की साँसें तेज़ हो गईं। उसने धीरे से अपने होंठ मीना के एक तरबूज पर रखे और हल्के से रसपान किया, फिर दूसरे पर। मीना की एक लंबी, मधुर चीख निकली, और उसके हाथों ने राहुल के बालों को कसकर पकड़ लिया। राहुल ने उसके मटर को अपनी जीभ से चाटा, फिर धीरे से चूसा, जिससे मीना के शरीर में बिजली सी दौड़ गई। “राहुल… आह… और तेज़,” वह फुसफुसाई, उसकी आवाज इच्छा से भारी थी।

राहुल ने धीरे-धीरे मीना के सलवार को नीचे सरकाया, और उसके सामने उसकी पूरी सुंदरता प्रकट हुई। उसकी चिकनी, गोरी जांघें और उनके बीच एक गहरी, घनी खाई, जिसके बाल करीने से सजे थे। मीना ने शरमाकर अपने हाथ से अपनी खाई को ढकने की कोशिश की, लेकिन राहुल ने उसके हाथों को धीरे से हटा दिया। “छुपाओ मत मेरी जान, यह तो जन्नत है,” उसने धीरे से कहा, और अपने होंठ मीना की जांघों पर रखे। उसने धीरे-धीरे अपनी जीभ से उसकी खाई के आसपास चाटना शुरू किया, मीना का शरीर एक आर्क की तरह ऊपर उठ गया। “आह, राहुल… बस… बस अब नहीं रुका जा रहा।” राहुल ने अपनी एक उंगली उसकी खाई में डाली, जो पहले से ही गीली थी। उसने धीरे-धीरे उंगली को अंदर-बाहर करना शुरू किया, और मीना की साँसें रुक-रुक कर चलने लगीं।

राहुल ने अपनी टी-शर्ट और पैंट उतारी, और मीना की आँखें उसके सामने खड़े खीरे पर टिक गईं। वह मजबूत, सीधा और तनावपूर्ण था, उसकी नसें साफ दिख रही थीं। मीना ने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और राहुल के खीरे को अपनी हथेली में ले लिया। “यह कितना मजबूत है,” उसने फुसफुसाया, उसे सहलाते हुए। राहुल ने मीना को बिस्तर पर लिटाया और खुद उसके ऊपर झुक गया। मीना ने राहुल के खीरे को अपने मुंह में लिया और धीरे-धीरे चूसना शुरू किया। राहुल ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसके पूरे शरीर में एक सुखद कंपकंपी दौड़ गई। मीना ने कुशलता से उसके खीरे को मुंह में लिया और बाहर निकाला, उसकी जीभ का हर स्पर्श राहुल को पागल कर रहा था। “बस, मेरी रानी,” राहुल ने कहा, “अब और इंतजार नहीं होता।”

राहुल ने मीना को अपने नीचे लिया, और उनकी आँखें फिर से मिलीं। यह ‘सामने से खोदना’ की स्थिति थी। राहुल ने अपने खीरे को मीना की खाई के मुहाने पर रखा। मीना ने अपनी जांघें चौड़ी कीं और राहुल को अपनी ओर खींच लिया। राहुल ने धीरे से अपने खीरे को अंदर धकेलना शुरू किया। “आह…” मीना के मुंह से एक धीमी सी चीख निकली, जब खीरा धीरे-धीरे उसकी गर्म खाई में समा गया। उसने राहुल को कसकर पकड़ लिया, उसके नाखून उसकी पीठ में धंस गए। “धीरे… धीरे राहुल…” राहुल रुका और मीना की आँखों में देखा। “दर्द हो रहा है?” मीना ने सर हिलाया। “नहीं, बस… अजीब सा है।” राहुल ने मुस्कुराया और धीरे-धीरे अपने खीरे को पूरी तरह से अंदर कर दिया।

अब वे एक लय में थे। राहुल धीरे-धीरे अपनी कमर हिला रहा था, उसके खीरे का हर अंदर-बाहर मीना को स्वर्ग का अनुभव करा रहा था। “राहुल… राहुल… तुम मुझे पागल कर रहे हो,” मीना ने आह भरी, उसकी साँसें तेज़ थीं। “तुम भी, मेरी जान, तुम भी,” राहुल ने उसके कान में फुसफुसाया, उसके तरबूज को अपनी हथेलियों में भरे हुए। उनके शरीर पसीने से भीग चुके थे, और उनके होंठ बार-बार रसपान कर रहे थे। राहुल ने अपनी गति बढ़ाई, और मीना ने अपनी जांघों से उसे कसकर पकड़ लिया। “खोदो राहुल, और खोदो,” वह चिल्लाई, उसकी आवाज़ में एक जंगली इच्छा थी। राहुल ने उसकी बात मानी, और उसकी गति और तेज़ हो गई।

उनके शरीर एक हो चुके थे, उनकी धड़कनें एक ताल में धड़क रही थीं। राहुल ने मीना को पलटा और उसे ‘पिछवाड़े से खोदना’ की स्थिति में लाया। मीना ने अपनी कमर उठाई, और राहुल ने अपने खीरे को उसकी खाई में फिर से उतारा। इस नई स्थिति में, राहुल को मीना के पिछवाड़े का भरपूर नजारा मिल रहा था, जो हर धक्के के साथ हिल रहा था। उसने मीना के तरबूज को पकड़ा और उन्हें पीछे से दबाया, जबकि उसके खीरे का हर धक्का मीना को और ज़्यादा आनंद दे रहा था। “मैं… मैं आने वाली हूँ… राहुल… रस छूटने वाला है,” मीना ने हाँफते हुए कहा। राहुल को भी महसूस हो रहा था कि उसका रस छूटने वाला है। उसने अपनी अंतिम शक्ति के साथ कुछ और ज़ोरदार धक्के लगाए। “आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्स्मीना भाभी की खुदाई

राहुल अपनी भाभी मीना के साथ एक शांत से घर में रहता था, जब से उसके बड़े भाई, रोहित, अपने काम के सिलसिले में विदेश चले गए थे। रोहित को गए हुए लगभग आठ महीने हो चुके थे, और इस दौरान घर में मीना और राहुल ही एक-दूसरे का सहारा थे। राहुल अभी कॉलेज खत्म करके नौकरी की तलाश में था, और मीना, जो हमेशा चंचल और हंसमुख रहती थी, अब थोड़ी गुमसुम सी रहने लगी थी। राहुल उसकी खामोशी को महसूस करता था, और एक अजीब सी उदासी उसे भी घेरने लगी थी, यह जानते हुए कि उसकी भाभी अंदर से कितनी अकेली महसूस कर रही थी। उसने खुद ही घर के छोटे-मोटी कामों में हाथ बंटाना शुरू कर दिया था, ताकि मीना को थोड़ा आराम मिले और उन्हें एक-दूसरे के साथ समय बिताने का बहाना मिल सके।

मीना की उम्र पैंतीस के आसपास होगी, लेकिन उसका शरीर मानो किसी देवी की मूर्ति से कम नहीं था। साड़ी या सलवार कमीज़ में भी उसके सुडौल तरबूज की गोल घुमावदार आकृति साफ झलकती थी, और जब वह चलती थी तो उसके पिछवाड़े का हल्का सा कंपन राहुल को अपनी ओर खींचता था। उसकी कमर की पतली रेखा, जो उसके उभारदार कूल्हों पर जाकर खत्म होती थी, राहुल को अनजाने में ही अपनी कल्पनाओं में उलझाए रखती थी। राहुल ने धीरे-धीरे उन बारीकियों पर ध्यान देना शुरू कर दिया था, जो पहले उसने कभी नहीं देखी थीं—जैसे उसकी गर्दन के पीछे की हल्की सी पसीना, या उसकी साड़ी के पल्लू से कभी-कभी झांकते उसके तरबूज का ऊपरी हिस्सा।

धीरे-धीरे, उनके बीच की दीवारें कम होने लगीं। वे अब सिर्फ़ घर के कामों के बारे में नहीं, बल्कि जीवन की छोटी-छोटी बातों, सपनों और उन अकेलेपन भरी रातों के बारे में भी बात करने लगे थे, जब रोहित की कमी उन्हें महसूस होती थी। राहुल मीना का विश्वासपात्र बन गया था, उसके सारे अनकहे दर्द और इच्छाओं को समझने वाला एकमात्र शख्स। मीना ने राहुल में वह परिपक्वता और संवेदनशीलता देखी, जो उसने कभी किसी और में नहीं देखी थी। राहुल के कंधे पर सिर रखकर रोते हुए, मीना को एक ऐसा सुकून मिलता था जिसकी उसे वर्षों से तलाश थी। उनके बीच का रिश्ता अब सिर्फ़ देवर-भाभी का नहीं रहा था; यह उससे कहीं गहरा, एक भावनात्मक जुड़ाव था, जो उनकी आत्माओं को छू रहा था।

उनके बीच अब हवा में एक अजीब सा तनाव घुलने लगा था। उनकी आँखें अब अक्सर एक-दूसरे पर ठहरने लगी थीं, और उनके स्पर्श अब पहले जैसे ‘गलती से’ नहीं होते थे। राहुल मीना की हर अदा, उसकी हर मुस्कान, उसके हर छोटे से हाव-भाव में एक नई खूबसूरती देखने लगा था। उसकी देह का हर उभार, उसकी चाल का हर मोड़, उसे अपनी ओर खींचता था। मीना भी, राहुल की मजबूत बाहों, उसकी गहरी आँखों और उसकी परवाह करने वाले स्वभाव से खुद को खिंचती हुई पाती थी। उसे महसूस होता था कि उसकी वर्षों से दबी हुई अंतरंगता की भूख अब राहुल की मौजूदगी में जागृत हो रही थी, एक ऐसी आग जो धीरे-धीरे उनके बीच सुलग रही थी।

दोनों अपने अंदर पनप रही इन भावनाओं से जूझ रहे थे। यह एक वर्जित संबंध था, और अपराधबोध उन्हें हर पल सताता था। वे एक-दूसरे से नज़रे चुराते थे, लेकिन उनके शरीर, उनकी साँसें, उनकी धड़कनें उनके मन की बात कह जाती थीं। घर की चारदीवारी अब उन्हें छोटी लगने लगी थी, हर कोने में उनकी अनकही इच्छाएँ गूँजती थीं। वे इस आकर्षण से लड़ते थे, खुद को रोकते थे, लेकिन हर कोशिश उन्हें एक-दूसरे के और करीब लाती थी, उनकी इच्छाओं की लौ और तेज़ होती जाती थी। यह एक मीठा दर्द था, जो उन्हें हर रात जगाए रखता था।

एक शाम, मीना सीढ़ियों से उतरते हुए फिसल गई और उसके टखने में मोच आ गई। राहुल तुरंत भागा और उसे सहारा देने के लिए अपनी बाहों में उठा लिया। उसके गर्म शरीर का स्पर्श, उसके तरबूज का उसके सीने से दबना, और उसके पिछवाड़े का उसके हाथों में आना – यह सब एक झटके जैसा था। उसने मीना को सोफे पर धीरे से बिठाया, और जब उसका हाथ उसकी कमर पर रह गया, तो मीना का हाथ अनजाने में राहुल की बांह पर आ टिका। एक बिजली सी उनके पूरे शरीर में दौड़ गई। उनकी आँखें मिलीं, और उस पल में, सारी झिझक, सारे बंधन टूट गए। राहुल धीरे से मीना की ओर झुका, और मीना ने अपनी आँखें बंद कर लीं। राहुल ने मीना के गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रखे और एक लंबा, गहरा रसपान किया, जिसमें सदियों की प्यास समाई हुई थी।

उनके बीच का पहला रसपान एक तूफान का संकेत था। इसके बाद, हर स्पर्श, हर नज़दीकी में एक नया अर्थ था। राहुल के हाथ मीना की कमर पर धीरे-धीरे सरकने लगे, उसकी उंगलियाँ उसकी साड़ी के नीचे की त्वचा को महसूस करती थीं। मीना अपने हाथों से राहुल की पीठ सहलाती, उसके मजबूत कंधों पर अपनी उंगलियाँ फेरती। हर रसपान गहरा होता जाता, हर साँस भारी होती जाती। राहुल ने धीरे से मीना के कपड़ों पर से ही उसके तरबूज को अपनी हथेलियों में भरा और हल्का सा दबाया। मीना की एक आह उसके मुँह से निकली, और उसके शरीर में एक कंपकंपी दौड़ गई। “राहुल,” उसने फुसफुसाया, “हम क्या कर रहे हैं?” राहुल ने उसके होंठों पर फिर से रसपान किया, उसकी उंगली से उसकी गर्दन को सहलाते हुए बोला, “वही, जो हम दोनों कब से चाहते हैं, मेरी जान।”

राहुल ने धीरे-धीरे मीना की साड़ी का पल्लू हटाया और उसके ब्लाउज के हुक खोले। मीना ने शर्म और इच्छा के मिश्रण से अपनी आँखें बंद कर लीं। जब ब्लाउज खुल गया, तो उसके सामने दो बड़े, सुडौल तरबूज प्रकट हुए, जो गहरे गुलाबी रंग के मटर से सजे थे। राहुल की साँसें तेज़ हो गईं। उसने धीरे से अपने होंठ मीना के एक तरबूज पर रखे और हल्के से रसपान किया, फिर दूसरे पर। मीना की एक लंबी, मधुर चीख निकली, और उसके हाथों ने राहुल के बालों को कसकर पकड़ लिया। राहुल ने उसके मटर को अपनी जीभ से चाटा, फिर धीरे से चूसा, जिससे मीना के शरीर में बिजली सी दौड़ गई। “आह, राहुल… और तेज़,” वह फुसफुसाई, उसकी आवाज इच्छा से भारी थी।

राहुल ने धीरे-धीरे मीना के सलवार को नीचे सरकाया, और उसके सामने उसकी पूरी सुंदरता प्रकट हुई। उसकी चिकनी, गोरी जांघें और उनके बीच एक गहरी, घनी खाई, जिसके बाल करीने से सजे थे। मीना ने शरमाकर अपने हाथ से अपनी खाई को ढकने की कोशिश की, लेकिन राहुल ने उसके हाथों को धीरे से हटा दिया। “छुपाओ मत मेरी जान, यह तो जन्नत है,” उसने धीरे से कहा, और अपने होंठ मीना की जांघों पर रखे। उसने धीरे-धीरे अपनी जीभ से उसकी खाई के आसपास चाटना शुरू किया, मीना का शरीर एक आर्क की तरह ऊपर उठ गया। “आह, राहुल… बस… बस अब नहीं रुका जा रहा।” राहुल ने अपनी एक उंगली उसकी खाई में डाली, जो पहले से ही गीली थी। उसने धीरे-धीरे उंगली को अंदर-बाहर करना शुरू किया, और मीना की साँसें रुक-रुक कर चलने लगीं।

राहुल ने अपनी टी-शर्ट और पैंट उतारी, और मीना की आँखें उसके सामने खड़े खीरे पर टिक गईं। वह मजबूत, सीधा और तनावपूर्ण था, उसकी नसें साफ दिख रही थीं। मीना ने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया और राहुल के खीरे को अपनी हथेली में ले लिया। “यह कितना मजबूत है,” उसने फुसफुसाया, उसे सहलाते हुए। राहुल ने मीना को बिस्तर पर लिटाया और खुद उसके ऊपर झुक गया। मीना ने राहुल के खीरे को अपने मुंह में लिया और धीरे-धीरे चूसना शुरू किया। राहुल ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसके पूरे शरीर में एक सुखद कंपकंपी दौड़ गई। मीना ने कुशलता से उसके खीरे को मुंह में लिया और बाहर निकाला, उसकी जीभ का हर स्पर्श राहुल को पागल कर रहा था। “बस, मेरी रानी,” राहुल ने कहा, “अब और इंतजार नहीं होता।”

राहुल ने मीना को अपने नीचे लिया, और उनकी आँखें फिर से मिलीं। यह ‘सामने से खोदना’ की स्थिति थी। राहुल ने अपने खीरे को मीना की खाई के मुहाने पर रखा। मीना ने अपनी जांघें चौड़ी कीं और राहुल को अपनी ओर खींच लिया। राहुल ने धीरे से अपने खीरे को अंदर धकेलना शुरू किया। “आह…” मीना के मुंह से एक धीमी सी चीख निकली, जब खीरा धीरे-धीरे उसकी गर्म खाई में समा गया। उसने राहुल को कसकर पकड़ लिया, उसके नाखून उसकी पीठ में धंस गए। “धीरे… धीरे राहुल…” राहुल रुका और मीना की आँखों में देखा। “दर्द हो रहा है?” मीना ने सर हिलाया। “नहीं, बस… अजीब सा है।” राहुल ने मुस्कुराया और धीरे-धीरे अपने खीरे को पूरी तरह से अंदर कर दिया।

अब वे एक लय में थे। राहुल धीरे-धीरे अपनी कमर हिला रहा था, उसके खीरे का हर अंदर-बाहर मीना को स्वर्ग का अनुभव करा रहा था। “राहुल… राहुल… तुम मुझे पागल कर रहे हो,” मीना ने आह भरी, उसकी साँसें तेज़ थीं। “तुम भी, मेरी जान, तुम भी,” राहुल ने उसके कान में फुसफुसाया, उसके तरबूज को अपनी हथेलियों में भरे हुए। उनके शरीर पसीने से भीग चुके थे, और उनके होंठ बार-बार रसपान कर रहे थे। राहुल ने अपनी गति बढ़ाई, और मीना ने अपनी जांघों से उसे कसकर पकड़ लिया। “खोदो राहुल, और खोदो,” वह चिल्लाई, उसकी आवाज़ में एक जंगली इच्छा थी। राहुल ने उसकी बात मानी, और उसकी गति और तेज़ हो गई।

उनके शरीर एक हो चुके थे, उनकी धड़कनें एक ताल में धड़क रही थीं। राहुल ने मीना को पलटा और उसे ‘पिछवाड़े से खोदना’ की स्थिति में लाया। मीना ने अपनी कमर उठाई, और राहुल ने अपने खीरे को उसकी खाई में फिर से उतारा। इस नई स्थिति में, राहुल को मीना के पिछवाड़े का भरपूर नजारा मिल रहा था, जो हर धक्के के साथ हिल रहा था। उसने मीना के तरबूज को पकड़ा और उन्हें पीछे से दबाया, जबकि उसके खीरे का हर धक्का मीना को और ज़्यादा आनंद दे रहा था। “मैं… मैं आने वाली हूँ… राहुल… रस छूटने वाला है,” मीना ने हाँफते हुए कहा। राहुल को भी महसूस हो रहा था कि उसका रस छूटने वाला है। उसने अपनी अंतिम शक्ति के साथ कुछ और ज़ोरदार धक्के लगाए। “आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ठ राहुल-मीना की खुदाई

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