प्रिया आज अपने नए ऑफिस के पहले दिन बहुत उत्साहित थी लेकिन साथ ही उसके मन में एक अजीब सी घबराहट भी थी क्योंकि वह एक अनजान जगह पर आई थी जहां चार मजबूत कद-काठी वाले मुस्टंडे पुरुष पहले से ही काम कर रहे थे जिनकी घनी काली मूंछें उनकी मर्दानगी को और ज्यादा उभार रही थीं और वे सब उसे देखते ही एक गहरी नजर से मुस्कुराए जैसे कि कोई नई और कोमल चीज उनके सामने आ गई हो जिसे वे धीरे-धीरे अपने करीब लाना चाहते हों। उसकी साड़ी का ब्लाउज थोड़ा टाइट था जिससे उसकी स्त@#@ थोड़े उभरे हुए नजर आ रहे थे और स्कर्ट उसके ग@#@ड की गोलाई को हल्का सा दबा रही थी जिससे वह खुद को बहुत असहज महसूस कर रही थी लेकिन फिर भी वह मुस्कुराकर उनसे हाथ मिलाने आगे बढ़ी।
जब उसने एक-एक करके उनसे परिचय किया तो पहले रमेश ने उसका हाथ थामा और उसकी हथेली को थोड़ी देर तक अपने बड़े हाथ में दबाए रखा जिससे प्रिया के शरीर में एक अजीब सी गर्मी दौड़ गई और वह खुद को रोकने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसके मन में एक छिपी हुई इच्छा जाग रही थी कि काश यह स्पर्श और लंबा चले। फिर सुरेश ने आगे बढ़कर उसकी पीठ पर हल्का सा हाथ रखकर उसे अपनी तरफ खींचा और बोला कि यहां काम बहुत अच्छा है लेकिन कभी-कभी बहुत तनाव भी होता है जिसे दूर करने के लिए कुछ खास तरीके भी हैं और उसकी बात सुनकर प्रिया के गाल लाल हो गए लेकिन वह हंसकर टालने की कोशिश कर रही थी जबकि उसके अंदर एक गहरा आकर्षण बढ़ता जा रहा था।
महेश और दिनेश ने भी बारी-बारी से उसे स्वागत किया और उनके घने मूंछों वाली मुस्कान में कुछ ऐसा जादू था कि प्रिया बार-बार उनकी तरफ देखे बिना नहीं रह पा रही थी। दिन भर काम के दौरान वे लोग बार-बार उसके डेस्क पर आते रहते और कोई न कोई बहाना बनाकर उसके बहुत करीब खड़े हो जाते जिससे उनकी सांसें उसके गले और कान के पास महसूस होतीं और वह महसूस कर रही थी कि उसके स्त@#@ के नि@#@ल धीरे-धीरे सख्त हो रहे हैं और उसकी चू@#@त में एक हल्की सी नमी आ गई है जिसे वह छुपाने की कोशिश कर रही थी लेकिन खुद को पूरी तरह रोक नहीं पा रही थी।
शाम होते-होते ऑफिस में सिर्फ वे पांच ही बचे थे और रमेश ने दरवाजा बंद कर दिया तथा कहा कि आज पहला दिन है तो थोड़ी पार्टी कर लेते हैं जिससे प्रिया थोड़ी घबरा गई लेकिन उसके शरीर ने जवाब दिया कि वह भी अंदर से यही चाहती है। सुरेश उसके पीछे आकर खड़ा हो गया और उसकी कमर पर हाथ रखकर धीरे से उसे अपनी तरफ खींचा जबकि महेश ने आगे से उसकी ठोड़ी उठाकर पहला चु@#@न उसके होंठों पर किया जो इतना गहरा और लंबा था कि प्रिया की सांसें तेज हो गईं और वह आह भरकर खुद को उनके बीच छोड़ दिया। दिनेश ने उसकी साड़ी का पल्लू धीरे से खींचा और ब्लाउज के हुक खोलने लगा जिससे उसकी चू@#@ी बाहर आ गईं और चारों जोर से उन्हें देख रहे थे।
प्रिया ने कोशिश की कि वह उन्हें रोक दे लेकिन जब रमेश ने उसके एक स्त@#@ को मुंह में लेकर नि@#@ल को चूसना शुरू किया तो उसके मुंह से एक लंबी आह निकल गई और उसका शरीर खुद ब खुद उनके करीब होने लगा। सुरेश ने उसकी स्कर्ट ऊपर की और प@#@ी को उतारकर उसकी चू@#@त को उंगलियों से सहलाना शुरू किया जिससे प्रिया के शरीर में करंट सा दौड़ गया और वह कराहने लगी उफ्फ… आह… धीरे… लेकिन उसके शब्दों में कोई विरोध नहीं था बल्कि एक गहरी इच्छा छिपी हुई थी। महेश और दिनेश ने अपने कपड़े उतारे और उनके सख्त ल@#ंड बाहर आ गए जो देखकर प्रिया की आंखें फैल गईं लेकिन वह उन्हें छूने से खुद को नहीं रोक पाई।
वे उसे धीरे-धीरे मेज पर लिटा दिया और रमेश ने सबसे पहले अपना ल@#ंड उसके मुंह के पास रखा जिसे प्रिया ने हिचकिचाते हुए लेकिन इच्छा से भरे मन से चूसा शुरू कर दिया जबकि सुरेश ने उसकी चू@#@त में अपनी उंगलियां डालकर अंदर बाहर करना शुरू किया और महेश ने उसके दूसरे स्त@#@ को दबाते हुए चु@#@न ले रहा था। दिनेश उसके ग@#@ड को सहला रहा था और धीरे से अपनी उंगली अंदर डालने की कोशिश कर रहा था जिससे प्रिया के मुंह से कराहने की आवाजें निकल रही थीं आह… उफ्फ… और जोर से… मैं खुद को रोक नहीं पा रही हूं।
फिर रमेश ने उसे घुटनों के बल मेज पर बैठाया और पीछे से अपना ल@#ंड उसकी चू@#@त में धीरे-धीरे अंदर डाला जिससे प्रिया ने जोर से चीख मारी लेकिन वह खुशी की चीख थी क्योंकि उसका पूरा शरीर कंपकंपा रहा था और वह खुद पीछे धकेल रही थी ताकि पूरा ल@#ंड अंदर चला जाए। सुरेश ने सामने से अपना ल@#ंड उसके मुंह में दे दिया और वह दोनों तरफ से भरी हुई थी जबकि महेश और दिनेश उसके स्त@#@ और ग@#@ड को दबा रहे थे। उनकी चु@#@ई बहुत धीमी और गहरी थी हर थ्रस्ट के साथ प्रिया के मुंह से आहें और कराहें निकल रही थीं और वह महसूस कर रही थी कि उसके अंदर org@#@ms आने वाले हैं।
वे पोजीशन बदलते रहे पहले रमेश ने उसे अपनी गोद में बिठाकर ऊपर नीचे किया फिर सुरेश ने उसे दीवार से सटाकर खड़े होकर चु@#@ई की और महेश ने पीछे से ग@#@ड में अपना ल@#ंड डालने की कोशिश की जिससे प्रिया दोहरी खुशी में चीख रही थी। दिनेश ने बीच-बीच में उसकी चू@#@त चाटी और नि@#@ल चूसे जिससे प्रिया का शरीर बार-बार झड़ने लगा। चारों मुस्टंडे पुरुष बारी-बारी से उसे भरते रहे और हर बार जब कोई नया ल@#ंड अंदर जाता तो प्रिया को लगता कि यह स्वर्ग है। उसकी चू@#@त और ग@#@ड दोनों भरे हुए थे और वह बार-बार org@#@ms ले रही थी जिसकी वजह से उसका पूरा शरीर पसीने से तर था और वह बार-बार कह रही थी कि और जोर से… मत रुको… मैं तुम सबकी हो गई हूं।
काफी देर तक यह से@#@स चलता रहा और अंत में चारों ने बारी-बारी से उसके मुंह और शरीर पर अपना रस छोड़ा जिससे प्रिया पूरी तरह संतुष्ट हो गई लेकिन अभी भी उसके मन में इच्छा बाकी थी कि कल फिर से यही दिन आए। ऑफिस का पहला दिन इस तरह खत्म हुआ कि प्रिया अब हर रोज इसी इंतजार में रहने लगी कि चार मुस्टंडे फिर से उसे अपने बीच ले लें और वह खुद को पूरी तरह उनके हवाले कर दे।