गर्मियों की छुट्टियों में मैंने फैसला किया कि इस बार शहर की भागदौड़ से दूर, मामा के गांव जाकर कुछ दिन आराम से बिताऊंगा। मामा का घर बड़ा सा था, चारों तरफ हरियाली और शांत वातावरण, जो मेरे थके हुए मन को सुकून देता। वहां पहुंचते ही मामा और मामी ने बड़े प्यार से स्वागत किया, लेकिन मेरी नजरें अनायास ही उनकी बहू, यानी मेरी भाभी पर टिक गईं। भाभी का नाम रीना था, उम्र करीब 28 साल, गोरी चिट्टी, लंबे काले बाल और वो मुस्कान जो किसी को भी मोह ले। मेरे भाई, जो मामा के बेटे थे, शहर में नौकरी करते थे और इस बार छुट्टी नहीं ले सके, इसलिए भाभी घर पर अकेली ही थीं। पहले दिन हम सब साथ बैठे, बातें कीं, लेकिन भाभी की वो आंखें, जो कभी-कभी मेरी तरफ देखकर शर्मा जातीं, ने मेरे मन में एक अजीब सी हलचल पैदा कर दी। मैंने सोचा शायद यह सिर्फ थकान है, लेकिन रात को सोते समय उनकी वो साड़ी में लिपटी हुई आकृति मेरे दिमाग में घूमती रही, और मैं खुद को रोकने की कोशिश करता रहा कि यह गलत है, परिवार है।
अगले दिन सुबह उठकर मैं बगीचे में टहल रहा था, तभी भाभी चाय लेकर आईं। उनकी उंगलियां मेरी उंगलियों से छू गईं, और वो स्पर्श इतना नरम था कि मेरे शरीर में एक झुरझुरी सी दौड़ गई। हम बात करने लगे, उन्होंने पूछा कि शहर में कैसी जिंदगी है, और मैंने बताया कि अकेलापन बहुत सताता है। भाभी की आंखों में एक सहानुभूति थी, लेकिन साथ ही एक चमक जो मुझे आकर्षित कर रही थी। शाम को मामा और मामी मंदिर गए, घर पर सिर्फ हम दोनों थे। भाभी रसोई में काम कर रही थीं, मैं मदद करने के बहाने अंदर गया। वहां खड़े होकर हम हंसते-हंसते बातें करने लगे, लेकिन अचानक उनका पैर फिसला और वो मेरी बाहों में गिर पड़ीं। उस पल हमारी सांसें करीब आ गईं, मैंने उन्हें संभाला, लेकिन मेरी उंगलियां उनकी कमर पर टिक गईं, और वो स्पर्श इतना गर्म था कि मैं खुद को रोक न सका। भाभी ने शर्म से नजरें झुका लीं, लेकिन उनके होंठों पर एक हल्की मुस्कान थी, जैसे वो भी इस निकटता को महसूस कर रही हों।
धीरे-धीरे दिन बीतते गए, और हमारी बातें बढ़ती गईं। एक शाम हम छत पर बैठे थे, सूरज ढल रहा था, हवा ठंडी हो चली थी। भाभी ने अपनी साड़ी का पल्लू संभाला, लेकिन हवा में वो उड़ गया, और मैंने उसे पकड़कर वापस उनके कंधे पर रखा। उस स्पर्श में एक करंट सा दौड़ा, भाभी की सांसें तेज हो गईं, और उन्होंने मेरी तरफ देखा, आंखों में एक चाहत थी जो छिपाए नहीं छिप रही थी। मैंने कहा, “भाभी, आप बहुत खूबसूरत हैं,” और वो शर्मा कर बोलीं, “तुम भी कम नहीं हो।” हमारी बातें अब व्यक्तिगत हो गईं, उन्होंने बताया कि भाई की अनुपस्थिति में अकेलापन सताता है, और मैंने अपनी जिंदगी की खालीपन शेयर किया। उस रात सोते समय मैं उनके बारे में सोचता रहा, उनकी वो मुस्कान, वो स्पर्श, सब कुछ मेरे मन में घूम रहा था, और एक अजीब सी उत्तेजना महसूस हो रही थी जो मुझे रोकने नहीं दे रही थी।
रात को मामा और मामी सो गए, घर में सन्नाटा था। मैं अपने कमरे में लेटा था, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। अचानक दरवाजे पर खटखटाहट हुई, भाभी थीं, कह रही थीं कि डर लग रहा है, क्या साथ बैठ सकते हो। मैंने हां कहा, और वो मेरे कमरे में आ गईं। हम बिस्तर पर बैठे, बातें करने लगे, लेकिन धीरे-धीरे हमारी उंगलियां आपस में उलझ गईं। भाभी की आंखों में एक आग थी, और मेरी भी। मैंने उनके गाल को छुआ, वो नरम थे, और वो सिहर उठीं। फिर मैंने उनके होंठों की तरफ बढ़ा, और एक हल्का सा चू@#@न किया, जो इतना मीठा था कि हम दोनों खो गए। भाभी ने कहा, “यह गलत है, लेकिन रोक नहीं पा रही,” और मैंने भी यही महसूस किया। हमारी भावनाएं उफान पर थीं, स्पर्श गहरा होता गया, मैंने उनकी साड़ी का पल्लू सरकाया, और उनके स्त@#@ को छुआ, वो इतने नरम और गर्म थे कि मेरी सांसें तेज हो गईं। भाभी ने आह भरी, एक कराह सी निकली, और हम दोनों की झिझक धीरे-धीरे कम हो रही थी।
जैसे-जैसे रात गहराती गई, हमारी निकटता बढ़ती गई। मैंने भाभी की गर्दन पर चू@#@न किया, वो सिहर उठीं, उनकी उंगलियां मेरे बालों में घूम रही थीं। फिर मैंने उनकी साड़ी उतारी, धीरे-धीरे, हर पल को महसूस करते हुए। उनके शरीर की वो गर्माहट, वो सुगंध, सब कुछ मुझे पागल कर रही थी। भाभी ने मेरी शर्ट उतारी, उनके हाथ मेरे सीने पर फिसले, और वो स्पर्श इतना कामुक था कि मैं खुद को रोक न सका। हम बिस्तर पर लेट गए, मैंने उनके चू@#@ी को छुआ, वो उभरे हुए थे, नि@#@ल सख्त हो गए थे। भाभी ने कराहा, “आह… इतना अच्छा लग रहा है,” और मैंने उन्हें और जोर से दबाया। हमारी भावनाएं अब नियंत्रण से बाहर थीं, मैंने उनके पूरे शरीर पर चू@#@न किए, हर हिस्से को महसूस किया। भाभी की सांसें तेज थीं, वो मेरे लि@#@ को छू रही थीं, जो सख्त हो चुका था। हम दोनों की झिझक खत्म हो चुकी थी, अब सिर्फ चाहत थी।
अब हम पूरी तरह से एक-दूसरे में खो चुके थे। मैंने भाभी को अपनी गोद में लिया, और धीरे से उनके चू@#@त पर हाथ फेरा, वो गीली हो चुकी थी, झ@#@ट नरम थे। भाभी ने आह भरी, कराहते हुए कहा, “धीरे से… प्लीज,” लेकिन उनकी आंखें और तेज मांग रही थीं। मैंने अपना ल@#ंड उनके चू@#@त पर रखा, धीरे-धीरे अंदर धकेला, और वो दर्द और सुख की मिश्रित कराह निकाली, “ओह… इतना बड़ा…” हमारी चु@#@ई शुरू हो गई, धीमी गति से, हर धक्के को महसूस करते हुए। भाभी की कमर हिल रही थी, उनके स्त@#@ उछल रहे थे, मैंने उन्हें दबाया, चू@#@न किया। हमारी सांसें मिल रही थीं, पसीना बह रहा था, और वो org@#@ms की तरफ बढ़ रही थीं। मैंने पोजीशन बदली, अब वो ऊपर थीं, मेरे ल@#ंड पर बैठकर हिल रही थीं, उनकी कराहें कमरे में गूंज रही थीं, “आह… और जोर से…” हम दोनों की भावनाएं चरम पर थीं, विचार सिर्फ एक-दूसरे के थे।
फिर मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में लिया, उनके ग@#@ड को छुआ, जो नरम और गोल थे। मैंने पीछे से धक्का दिया, भाभी की कराहें तेज हो गईं, “हां… ऐसे ही…” हमारी चु@#@ई अब तेज हो चुकी थी, हर धक्के में सुख की लहर दौड़ रही थी। भाभी के चू@#@त में मेरा ल@#ंड फिसल रहा था, गीला और गर्म। उन्होंने मेरी पीठ पर नाखून गड़ाए, दर्द और सुख का मिश्रण। हमारी संवाद अब सिर्फ आहें और कराहें थे, “ओह… मत रुको…” मैंने उनके भो@#@ड़ा को छुआ, जो फैला हुआ था, और और जोर से धक्का दिया। org@#@ms करीब था, भाभी ने चीखा, “आ रहा है…” और हम दोनों एक साथ चरम पर पहुंचे, शरीर थरथरा उठे, सुख की लहर पूरे शरीर में फैल गई। हम थक कर लेट गए, एक-दूसरे को गले लगाए, पसीने से तर, लेकिन संतुष्ट।
अगली सुबह हमारी नजरें मिलीं, शर्म थी लेकिन खुशी भी। हम जानते थे कि यह गलत है, लेकिन वो आकर्षण इतना मजबूत था कि रोक नहीं पा रहे थे। दिन में जब मौका मिला, हम फिर निकट आए, लेकिन इस बार और गहराई से। शाम को बगीचे में, पेड़ों की आड़ में, हमने फिर से@#@स किया, धीरे-धीरे, हर स्पर्श को महसूस करते हुए। भाभी की आंखों में वो चाहत थी जो मुझे पागल कर देती। रात को फिर कमरे में, हमने अलग-अलग पोजीशन आजमाई, मिशनरी, काउगर्ल, सब में वो कराहें, वो आहें, सब कुछ विस्तार से महसूस किया। मेरे ल@#ंड को उन्होंने मुंह में लिया, चू@#@न किया, जो इतना सुखद था कि मैं कराह उठा। फिर मैंने उनके चू@#@त को चाटा, जीभ से खेला, भाभी की कराहें तेज हो गईं। हमारी चु@#@ई अब रोज का हिस्सा बन गई, लेकिन हर बार नई उत्तेजना के साथ।
छुट्टियां खत्म होने वाली थीं, लेकिन हमारी भावनाएं और गहरी हो चुकी थीं। आखिरी रात हमने पूरे जोश से बिताई, हर हिस्से को छुआ, चू@#@न किया, चु@#@ई की। भाभी ने कहा, “तुम्हारे बिना अब कैसे रहूंगी,” और मैंने वादा किया कि जल्द लौटूंगा। हम जानते थे कि यह रिश्ता गुप्त रहेगा, लेकिन वो सुख, वो निकटता, सब कुछ यादगार था। गांव से लौटते समय मन भारी था, लेकिन वो यादें हमेशा साथ रहेंगी, वो स्पर्श, वो कराहें, सब कुछ।
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