होटल के उस आलीशान कमरे में मद्धम रोशनी फैली हुई थी, जो माहौल को और भी अधिक रहस्यमयी और उत्तेजक बना रही थी। राहुल अपने बिस्तर पर लेटा हुआ था, थकावट उसके शरीर पर हावी थी, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी बेचैनी थी जो उसे सोने नहीं दे रही थी। वह शहर के इस सबसे महंगे होटल में एक व्यापारिक सौदे के सिलसिले में रुका हुआ था, जहाँ हर चीज़ विलासिता का प्रतीक थी। तभी अचानक उसके कमरे के दरवाजे पर एक हल्की सी दस्तक हुई, जिसने सन्नाटे को पूरी तरह से चीर दिया। राहुल ने सोचा कि शायद रूम सर्विस वाला होगा, लेकिन जब उसने दरवाजा खोला, तो उसके सामने जो दृश्य था, उसने उसकी साँसों की गति को एक पल के लिए जैसे पूरी तरह रोक दिया।
सामने एक अत्यंत सुंदर स्त्री खड़ी थी, जिसकी उम्र लगभग अठारह से तीस के बीच रही होगी, और उसकी आँखों में एक अजीब सी उलझन और गहरी चमक थी। उसने एक गहरे नीले रंग की रेशमी साड़ी पहनी हुई थी, जो उसके शरीर के हर घुमाव को बड़ी खूबसूरती से उभार रही थी। उसकी साड़ी का पल्लू कंधे से थोड़ा खिसका हुआ था, जिससे उसके उन्नत और सुडौल तरबूज का ऊपरी हिस्सा साफ़ झलक रहा था। राहुल उसे बस देखता ही रह गया, क्योंकि उसकी बनावट किसी अप्सरा से कम नहीं थी। उसके चेहरे पर हल्की सी घबराहट थी, जो उसे और भी अधिक कामुक बना रही थी, और उसके शरीर से उठने वाली चमेली की खुशबू राहुल के नथुनों में समाने लगी थी।
उस स्त्री ने धीमी आवाज़ में कहा कि उसके कमरे का दरवाजा लॉक हो गया है और उसे मदद चाहिए, लेकिन उसकी आवाज़ में एक ऐसी खनक थी जिसने राहुल के मन के भीतर एक हलचल पैदा कर दी। राहुल ने उसे अंदर आने का इशारा किया और जैसे ही वह कमरे के भीतर दाखिल हुई, वातावरण में एक अलग ही तनाव पैदा हो गया। वह स्त्री जैसे ही सोफे पर बैठी, उसकी साड़ी थोड़ी और सिमट गई, जिससे उसके गोरे पैर और कमर का वह हिस्सा दिखने लगा जो किसी को भी पागल कर सकता था। राहुल ने गौर किया कि उसके तरबूज काफी बड़े और पुष्ट थे, जो साड़ी के तंग ब्लाउज के भीतर कैद होने के लिए संघर्ष कर रहे थे। ब्लाउज की तंग फिटिंग के कारण उसके मटर साफ़ तौर पर उभरे हुए नज़र आ रहे थे, जो ठंडक या शायद उत्तेजना की वजह से सख्त हो गए थे।
बातों का सिलसिला शुरू हुआ और धीरे-धीरे औपचारिकता की दीवारें गिरने लगीं, जिससे उन दोनों के बीच एक अनकहा भावनात्मक जुड़ाव महसूस होने लगा। उस स्त्री का नाम मीरा था, और उसने बताया कि वह भी यहाँ अकेली ही रुकी हुई है, और यह अकेलापन उसे अक्सर उदास कर देता है। राहुल ने उसकी बातों को बड़े ध्यान से सुना और उसकी आँखों में झाँकते हुए महसूस किया कि वहाँ केवल उदासी नहीं, बल्कि एक गहरी प्यास भी छिपी हुई है। कमरे की खामोशी अब भारी होने लगी थी, और उन दोनों के बीच की दूरी धीरे-धीरे कम होने लगी थी। राहुल का हाथ गलती से मीरा के हाथ से टकरा गया, और उस एक स्पर्श ने जैसे बिजली का एक जोरदार करंट दोनों के शरीरों में प्रवाहित कर दिया।
मीरा ने अपनी नज़रें नहीं हटाईं, बल्कि उसने राहुल की आँखों में और भी गहराई से देखा, जैसे वह उसे अपनी गहराई में डूबने का निमंत्रण दे रही हो। राहुल ने धीरे से अपना हाथ मीरा के कंधे पर रखा और उसे अपनी ओर खींचना शुरू किया, जिससे उसके मन का द्वंद्व और झिझक धीरे-धीरे पिघलने लगी। मीरा की साँसें अब तेज चलने लगी थीं, और उसके तरबूज ऊपर-नीचे हो रहे थे, जो राहुल की नज़रों को बार-बार अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे। राहुल ने अपने होंठ मीरा के करीब ले जाकर उसके कान के पास धीरे से फुसफुसाया, जिससे मीरा के पूरे शरीर में एक सिहरन दौड़ गई और उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। झिझक अब पूरी तरह से खत्म हो चुकी थी और केवल शुद्ध आकर्षण और इच्छा का साम्राज्य बचा था।
पहला स्पर्श बहुत ही कोमल और खोजपूर्ण था, जैसे वे एक-दूसरे की त्वचा की भाषा को समझने की कोशिश कर रहे हों। राहुल ने अपनी उंगलियों को मीरा के चेहरे पर फिराया और फिर धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ते हुए उसके गले और फिर उसके ब्लाउज के पास ले गया। जैसे ही राहुल के हाथ ने उसके एक तरबूज को हल्के से दबाया, मीरा के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली। उसने राहुल को और भी कसकर पकड़ लिया, जैसे वह उसे कभी छोड़ना नहीं चाहती हो। राहुल ने महसूस किया कि मीरा के मटर अब पूरी तरह से पत्थर की तरह सख्त हो चुके थे, जो उसके स्पर्श की तीव्रता को बयान कर रहे थे। कमरे की हवा अब पूरी तरह से गर्म और कामुक हो चुकी थी।
धीरे-धीरे उत्तेजना अपनी चरम सीमा की ओर बढ़ने लगी और राहुल ने मीरा की साड़ी के पल्लू को पूरी तरह से हटा दिया। उसके गोरे और चमकदार तरबूज अब राहुल के सामने बिना किसी बाधा के थे, और वह उन्हें देखकर मंत्रमुग्ध हो गया। राहुल ने अपना मुँह नीचे झुकाया और बारी-बारी से उन दोनों मटर को अपने होठों के बीच लेकर धीरे-धीरे चूसना शुरू किया। मीरा ने अपना सिर पीछे की ओर झुका लिया और उसकी उंगलियाँ राहुल के बालों में कस गई थीं। वह बार-बार अपनी कमर को ऊपर उठा रही थी, जैसे वह राहुल से और भी अधिक निकटता की मांग कर रही हो। राहुल के हाथ अब नीचे की ओर बढ़ रहे थे, जहाँ मीरा की रेशमी साड़ी के नीचे उसकी गहरी खाई छिपी हुई थी।
राहुल ने जैसे ही अपना हाथ मीरा की जांघों के बीच ले जाकर उसकी खाई को छुआ, उसे महसूस हुआ कि वह जगह पूरी तरह से गीली और चिपचिपी हो चुकी थी। मीरा की कामुकता का रस बहकर उसकी जांघों तक पहुँच रहा था, जो इस बात का प्रमाण था कि वह कितनी अधिक उत्तेजित थी। राहुल ने अपनी उंगली से खोदना शुरू किया, जिससे मीरा के शरीर में एक ज़ोरदार कंपन हुआ और उसने राहुल का नाम पुकारते हुए अपनी आँखें मीच लीं। वह अपनी उंगली को खाई के भीतर और बाहर कर रहा था, और हर बार मीरा की कराह और भी गहरी होती जा रही थी। राहुल ने अब अपना खीरा बाहर निकाला, जो अब अपनी पूरी लम्बाई और मोटाई के साथ तनकर खड़ा था और खुदाई के लिए तैयार था।
मीरा की नज़रें जब राहुल के उस विशाल खीरे पर पड़ीं, तो उसकी आँखों में एक साथ डर और बेपनाह चाहत के भाव उभरे। उसने धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाया और उस गर्म खीरे को अपनी मुट्ठी में कैद कर लिया, जिससे राहुल के मुँह से भी एक आह निकल गई। मीरा ने राहुल के खीरे को चूसना शुरू किया, उसका मुँह उस मोटाई को समाने की कोशिश कर रहा था, और राहुल को ऐसा महसूस हो रहा था जैसे वह स्वर्ग के द्वार पर खड़ा हो। कुछ देर तक खीरा चूसने के बाद, राहुल ने मीरा को बिस्तर पर लिटाया और उसे सामने से खोदने (missionary) की स्थिति में ले आया। उसने मीरा की दोनों टांगों को अपने कंधों पर रखा, जिससे उसकी गहरी खाई पूरी तरह से उसके सामने खुल गई।
राहुल ने अपने खीरे की नोक को मीरा की खाई के मुहाने पर रखा और धीरे से दबाव डालना शुरू किया। जैसे ही खीरे का सिर अंदर गया, मीरा ने दर्द और आनंद के मिले-जुले भाव में एक तीखी चीख मारी, लेकिन उसने राहुल को रुकने नहीं दिया। राहुल ने धीरे-धीरे पूरा खीरा अंदर धकेल दिया, और उसे महसूस हुआ कि मीरा की खाई कितनी तंग और गर्म थी, जो उसके खीरे को चारों ओर से कसकर जकड़ रही थी। अब असली खुदाई शुरू हुई; राहुल ने अपनी कमर को एक लयबद्ध तरीके से चलाना शुरू किया, और हर धक्के के साथ वह मीरा की गहराई को और भी करीब से महसूस कर रहा था। कमरे में केवल उनके शरीरों के टकराने की आवाज़ और मीरा की सिसकियाँ गूंज रही थीं।
खुदाई की प्रक्रिया अब अपनी पूरी रफ़्तार पकड़ चुकी थी और दोनों का शरीर पसीने से तर-बतर हो गया था। राहुल कभी धीरे तो कभी बहुत तेज़ी से धक्के लगा रहा था, जिससे मीरा का पूरा शरीर बिस्तर पर उछल रहा था। राहुल ने मीरा को घुमाया और उसे पिछवाड़े से खोदने (doggy style) की स्थिति में ले आया। इस स्थिति में राहुल का खीरा और भी अधिक गहराई तक जा पा रहा था, और मीरा पागलों की तरह कराह रही थी। उसके बड़े-बड़े तरबूज नीचे की ओर लटक रहे थे और हर धक्के के साथ बुरी तरह हिल रहे थे। राहुल ने पीछे से ही उसके मटर को अपनी उंगलियों से सहलाना शुरू किया, जिससे मीरा की उत्तेजना और भी कई गुना बढ़ गई।
जैसे-जैसे खुदाई का समय बीत रहा था, दोनों ही अपने चरम के करीब पहुँच रहे थे। मीरा ने पीछे मुड़कर राहुल को देखा, उसकी आँखों में उस समय केवल और केवल समर्पण था। राहुल ने उसे वापस सीधा लिटाया और अपनी रफ़्तार को अपनी पूरी ताकत के साथ बढ़ा दिया। वह अब पागलों की तरह उसे खोद रहा था, और हर धक्का मीरा की आत्मा तक पहुँच रहा था। अचानक मीरा का शरीर पूरी तरह से अकड़ गया और उसकी खाई से भारी मात्रा में रस निकलने लगा, वह अपने चरम पर पहुँच चुकी थी। राहुल ने भी अपनी पकड़ मजबूत की और कुछ और ज़ोरदार धक्के लगाने के बाद, अपने खीरे से सारा गर्म रस मीरा की गहराई में छोड़ दिया।
उस परम सुख के बाद, दोनों ही हांफते हुए एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े। कमरे में अब एक शांति छाई हुई थी, लेकिन वह शांति बहुत ही संतोषजनक थी। राहुल ने मीरा को अपनी बाहों में भर लिया और उसके माथे को चूमा। मीरा की हालत अब ऐसी थी कि वह हिलने की स्थिति में भी नहीं थी, उसका पूरा शरीर ढीला पड़ चुका था और उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक और सुकून था। उन्होंने काफी देर तक बिना कुछ कहे एक-दूसरे को महसूस किया, जैसे वे उस पल को हमेशा के लिए कैद कर लेना चाहते हों। वह रात उन दोनों के लिए केवल शारीरिक मिलन की नहीं, बल्कि दो अजनबी आत्माओं के एक गहरे और गुप्त जुड़ाव की गवाह बन गई थी।
अगली सुबह जब सूरज की किरणें खिड़की से छनकर अंदर आईं, तो राहुल ने देखा कि मीरा अभी भी उसके सीने से लगकर सो रही थी। उसके चेहरे पर एक ऐसी मासूमियत थी जिसे देखकर कोई भी यह अंदाज़ा नहीं लगा सकता था कि पिछली रात उन्होंने कितनी गहन खुदाई की थी। राहुल को अपनी ज़िंदगी में पहली बार ऐसा महसूस हो रहा था कि उसने केवल शरीर को नहीं, बल्कि किसी के मन को भी छुआ है। वह एहसास, वह गर्मी और वह खुशबू अब उसके वजूद का हिस्सा बन चुकी थी। यद्यपि वे दोनों जानते थे कि यह एक अस्थायी मिलन था, लेकिन उस होटल के कमरे में जो कुछ भी हुआ था, उसकी यादें उनके दिलों में हमेशा के लिए एक मीठी कसक बनकर रह जाने वाली थीं।