सिमरन की ऑफिस चुदाई—>सिमरन मेरे ऑफिस की सीनियर मैनेजर थी जिसकी उम्र लगभग 32 साल रही होगी लेकिन उसकी फिटनेस को देखकर कोई भी उसे 25 साल की कुंवारी लड़की ही समझता था। उस रात ऑफिस में हम दोनों के अलावा कोई नहीं था क्योंकि एक बहुत ही जरूरी प्रोजेक्ट की डेडलाइन सुबह तक थी और हमें उसे किसी भी कीमत पर पूरा करना था। सिमरन ने उस दिन एक बहुत ही टाइट सफेद रंग की शर्ट और काले रंग की पेंसिल स्कर्ट पहनी हुई थी जिसमें उसके शरीर का हर एक उभार साफ झलक रहा था। उसके शरीर की बनावट ऐसी थी कि कोई भी पुरुष उसे देखे बिना रह नहीं सकता था खास तौर पर उसकी शर्ट के ऊपरी दो बटन खुले हुए थे जिससे उसके गोरे और बड़े-बड़े तरबूज साफ नजर आ रहे थे जो हर सांस के साथ ऊपर नीचे हो रहे थे।
वह मेरे पास आकर बैठी तो उसके शरीर से आने वाली उस महंगी परफ्यूम की खुशबू ने मेरे दिमाग की नसों को झकझोर कर रख दिया और मेरा ध्यान काम से पूरी तरह हटकर उसके जिस्म पर जा टिका। उसके तरबूज इतने भरे हुए और गोल थे कि शर्ट का कपड़ा भी उन्हें थामने में नाकाम लग रहा था और बीच-बीच में जब वह झुककर लैपटॉप पर कुछ देखती तो उन तरबूजों के बीच की गहरी घाटी साफ दिखाई देती थी। मेरे मन में अजीब सी हलचल होने लगी थी और मैं बार-बार अपनी नजरें छिपाने की कोशिश कर रहा था लेकिन उसका यौवन मुझे अपनी ओर खींच रहा था। सिमरन भी शायद मेरी हालत को भांप रही थी क्योंकि वह बार-बार अपनी जुल्फों को कान के पीछे हटाते हुए मुझे तिरछी निगाहों से देख रही थी।
काम के बहाने जब वह मेरे और करीब आई तो उसका एक हाथ अनजाने में मेरे कंधे पर टिका और उसकी सांसें मेरे कानों के पास गर्म हवा की तरह टकराने लगीं जिससे मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई। सिमरन की आँखों में एक अजीब सी चमक थी और उसकी आवाज में अब पेशेवर सख्ताई की जगह एक मखमली मुलायमियत आ चुकी थी जो मुझे उकसा रही थी। उसने धीमी आवाज में कहा कि आर्यन क्या तुम्हें गर्मी नहीं लग रही है और यह कहते हुए उसने अपनी शर्ट का एक और बटन खोल दिया जिससे उसके तरबूजों का और भी ज्यादा हिस्सा बाहर आ गया। अब उसके उन बड़े तरबूजों के ऊपर छोटे-छोटे मटर जैसे दाने भी कपड़े के ऊपर से साफ उभर कर दिखने लगे थे जो ठंडक या उत्तेजना की वजह से सख्त हो गए थे।
मैंने हिम्मत जुटाकर अपना हाथ उसकी पतली कमर पर रखा और धीरे से उसे अपनी ओर खींचा तो उसने कोई विरोध नहीं किया बल्कि एक गहरी आह भरते हुए अपनी आँखें बंद कर लीं। उसकी कमर इतनी मुलायम और रेशमी थी कि मेरा हाथ खुद-ब-खुद नीचे की ओर फिसलने लगा जहाँ उसका भारी और मांसल पिछवाड़ा स्कर्ट के अंदर कैद था। हमारी सांसें अब एक-दूसरे में घुलने लगी थीं और माहौल में एक अजीब सी बेचैनी और कामुकता छा गई थी जो सालों से दबी हुई इच्छाओं को बाहर निकालने के लिए तैयार थी। सिमरन ने अपना हाथ मेरे चेहरे पर फेरा और मेरे होठों को चूमने लगी जिससे मेरा सारा संयम टूट गया और मैंने उसे अपनी गोद में उठा लिया।
उसने अपने हाथ मेरी गर्दन के चारों ओर डाल दिए और हम दोनों एक-दूसरे के होठों का रसपान करने लगे जबकि मेरा एक हाथ उसके रेशमी बालों के बीच खेल रहा था और दूसरा हाथ उसके तरबूजों को सहला रहा था। वह मेरे स्पर्श से कांप रही थी और उसकी हर आह मेरे अंदर के पुरुष को जगा रही थी। मैंने धीरे से उसकी शर्ट के बाकी बटन भी खोल दिए और अब वह अनमोल नजारा मेरे सामने था जिसे मैं रोज सपनों में देखता था। उसके तरबूज इतने सफेद और मुलायम थे कि जैसे ताजी मलाई हो और उनके ऊपर बैठे गुलाबी मटर जैसे दाने मेरी जीभ का इंतजार कर रहे थे। मैंने झुककर एक मटर को अपने मुंह में लिया तो सिमरन के मुंह से एक कराह निकली और उसने मेरा सिर और जोर से अपने सीने से चिपका लिया।
वह अब पूरी तरह से बेकाबू हो रही थी और उसकी उंगलियां मेरे बालों को बेतरतीब ढंग से सहला रही थीं। मैंने उसके शरीर के हर हिस्से को चूमना शुरू किया और धीरे-धीरे उसकी स्कर्ट को नीचे खिसका दिया जिससे उसकी लंबी और गोरी टांगें दिखने लगीं। जैसे ही मैंने उसकी स्कर्ट पूरी तरह हटाई तो देखा कि उसने लाल रंग की बहुत ही महीन जालीदार अंडरवियर पहनी हुई थी जिसके पीछे उसकी गहरी और रसीली खाई साफ झलक रही थी। उस खाई के आसपास हल्के-हल्के काले बाल थे जो उसकी खूबसूरती को और भी ज्यादा बढ़ा रहे थे। मेरा हाथ जैसे ही उसकी उस खाई के करीब पहुँचा तो वह पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और वहां से एक मादक खुशबू आ रही थी।
सिमरन ने अब मेरे कपड़े भी उतारने शुरू कर दिए और जैसे ही मेरा लंबा और सख्त खीरा उसकी नजरों के सामने आया उसकी आँखों में एक अजीब सी भूख जाग उठी। उसने बिना देर किए मेरे खीरे को अपने नाजुक हाथों में पकड़ लिया और उसे ऊपर-नीचे सहलाने लगी जिससे मुझे जन्नत का अहसास होने लगा। फिर उसने धीरे से अपना सिर नीचे झुकाया और मेरे खीरे को अपने मुंह में ले लिया जिससे मेरे मुंह से एक लंबी सिसकारी निकल गई। वह बहुत ही सलीके से मेरे खीरे को चूस रही थी और उसकी जीभ का स्पर्श मुझे पागल कर रहा था। थोड़ी देर तक खीरा चूसने के बाद उसने मुझे अपनी ओर खींचा और ऑफिस की टेबल पर ही लेट गई।
उसने अपनी दोनों टांगें हवा में फैला दीं जिससे उसकी रसीली खाई पूरी तरह से मेरे सामने खुल गई। मैंने अपनी उंगली से उसकी खाई को खोदना शुरू किया तो वह कमर उचका-उचका कर मेरा साथ देने लगी। उसकी खाई से निकलने वाला रस अब मेरी उंगलियों पर लग चुका था जो उसे और भी ज्यादा चिकना बना रहा था। सिमरन ने तड़पते हुए कहा कि आर्यन अब और इंतजार नहीं होता मुझे पूरी तरह से खोदो और अपनी इस खाई को भर दो। मैंने उसकी बात मान ली और अपने खीरे की नोक को उसकी खाई के मुहाने पर रखा और धीरे से अंदर धकेलने की कोशिश की।
जैसे ही मेरा खीरा उसकी तंग खाई के अंदर गया सिमरन ने एक दर्द भरी लेकिन सुखद चीख मारी और मेरे कंधों को अपने नाखूनों से जकड़ लिया। उसकी खाई बहुत ही तंग और गर्म थी जो मेरे खीरे को हर तरफ से कस रही थी। मैंने धीरे-धीरे सामने से खोदना (missionary) शुरू किया और हर धक्के के साथ मेरा खीरा उसकी गहराई तक जाने लगा। सिमरन की आँखों से खुशी के आंसू निकलने लगे थे और वह हर धक्के पर मेरा नाम पुकार रही थी। हमारे शरीर पसीने से तर-बतर हो चुके थे और ऑफिस की खामोशी में केवल हमारे शरीर के टकराने की और सिमरन की सिसकारियों की आवाज गूंज रही थी।
मैंने अपनी रफ्तार थोड़ी बढ़ाई और अब मैं पूरी ताकत से खुदाई कर रहा था जिससे सिमरन के तरबूज हवा में पागलों की तरह उछल रहे थे। मैंने उन तरबूजों को अपने हाथों में जकड़ लिया और उन्हें दबाते हुए अपनी खुदाई जारी रखी। सिमरन अब पूरी तरह से चरम सीमा पर पहुँचने वाली थी और उसकी पकड़ मेरे ऊपर और भी ज्यादा मजबूत हो गई थी। उसने कहा कि आर्यन मुझे घुमाओ मुझे पीछे से खुदाई करवानी है। मैंने उसे टेबल पर ही घुटनों के बल झुका दिया और अब उसका भारी पिछवाड़ा पूरी तरह से मेरी तरफ था। मैंने पीछे से खोदना (doggy style) शुरू किया और यह एंगल हमें और भी ज्यादा गहराई तक जाने दे रहा था।
उसका पिछवाड़ा मेरे हर धक्के के साथ लहरें ले रहा था और जब मेरा खीरा उसकी खाई के आखिरी छोर तक पहुँचता तो वह जोर-जोर से चिल्लाने लगती थी। हम दोनों की उत्तेजना अब अपने चरम पर थी और तभी सिमरन का शरीर जोर-जोर से कांपने लगा और उसकी खाई से बहुत सारा रस निकलने लगा। वह रस मेरे खीरे को पूरी तरह भिगो चुका था और उसी पल मेरा भी बांध टूट गया। मैंने अपने खीरे को उसकी खाई की गहराई में और जोर से धंसा दिया और मेरा सारा गरम रस उसकी खाई के अंदर ही छूट गया। हम दोनों काफी देर तक एक-दूसरे से लिपटे रहे और हमारी सांसें धीरे-धीरे सामान्य होने लगीं।
उस खुदाई के बाद सिमरन का चेहरा गुलाब की तरह खिल उठा था और उसके शरीर पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं। उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मेरे माथे को चूमते हुए कहा कि उसने आज तक ऐसा सुख कभी महसूस नहीं किया था। हम दोनों ने अपने कपड़े ठीक किए और फिर से काम पर लग गए लेकिन अब हमारे बीच वह औपचारिक रिश्ता खत्म हो चुका था और उसकी जगह एक गहरी आत्मीयता और शारीरिक जुड़ाव ने ले ली थी। उस रात की वह खुदाई हम दोनों के लिए हमेशा के लिए यादगार बन गई थी जिसने ऑफिस के उस नीरस माहौल को हमेशा के लिए बदल दिया था।