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सिमरन की ऑफिस वाली शानदार चु@@ई

शाम के सात बज चुके थे और ऑफिस की गगनचुंबी इमारत के पंद्रहवें फ्लोर पर सन्नाटा पसरने लगा था लेकिन सिमरन के केबिन में अभी भी हलचल थी। सिमरन जो कि इस एडवरटाइजिंग फर्म की क्रिएटिव डायरेक्टर थी अपनी कुर्सी पर बैठी एक फाइल को बहुत गहराई से देख रही थी और उसके बगल में उसका जूनियर असिस्टेंट आर्यन खड़ा था। सिमरन की उम्र लगभग अड़तीस साल थी लेकिन उसका व्यक्तित्व ऐसा था कि कोई भी बीस साल का लड़का उसे देखते ही अपना आपा खो दे। उसने आज एक गहरी नीली रंग की सिल्क की साड़ी पहनी हुई थी जिसके साथ उसने एक बिना आस्तीन वाला बहुत ही गहरा गला वाला ब्लाउज पहना था जो उसके व्यक्तित्व में चार चाँद लगा रहा था। केबिन की मद्धम पीली रोशनी में सिमरन का गोरा रंग और भी ज्यादा दमक रहा था और उसके शरीर से आने वाली चंदन की भीनी-भीनी खुशबू आर्यन के दिमाग को सुन्न कर रही थी।

सिमरन का शरीर किसी तराशी हुई मूरत की तरह था जिसमें हर मोड़ पर एक गहरा आकर्षण छिपा हुआ था। जब वह फाइल की तरफ झुकती तो उसकी साड़ी का पल्लू हल्का सा खिसक जाता जिससे उसके रेशमी और भारी तरबूज साफ नजर आने लगते जो ब्लाउज की तंग सीमाओं को तोड़कर बाहर आने के लिए बेताब लग रहे थे। आर्यन की नजरें बार-बार सिमरन के उन हिलते हुए तरबूजों पर जाकर टिक जाती थीं और जब सिमरन सांस लेती तो उन तरबूजों के ऊपर मौजूद नन्हे मटर साड़ी के पतले कपड़े के नीचे से अपनी मौजूदगी का अहसास कराते थे। सिमरन का पिछवाड़ा साड़ी में लिपटा हुआ बहुत ही मादक लग रहा था और उसकी कमर का वह हिस्सा जो साड़ी और ब्लाउज के बीच खुला था वहाँ की त्वचा इतनी कोमल थी कि आर्यन का मन करता था कि वह बस उसे छू ले।

पिछले कुछ महीनों से आर्यन और सिमरन के बीच एक अनकहा सा भावनात्मक जुड़ाव बन गया था जो सिर्फ काम तक सीमित नहीं था। सिमरन अक्सर आर्यन को देर तक रोक लेती थी और वे दोनों घंटों तक नई कैंपेन के बारे में बातें करते थे लेकिन उन बातों के बीच में अक्सर एक-दूसरे की आँखों में झांकना और हल्की मुस्कुराहटें बहुत कुछ कह जाती थीं। सिमरन को अच्छा लगता था जिस तरह से आर्यन उसे सम्मान देता था और आर्यन को सिमरन की वह परिपक्वता और उसका अधिकार जताने का अंदाज बहुत भाता था। आज की रात कुछ अलग थी क्योंकि ऑफिस में उन दोनों के अलावा और कोई नहीं था और बाहर का मौसम भी कुछ अजीब सी बेचैनी पैदा कर रहा था जिससे केबिन के अंदर का तापमान बढ़ता जा रहा था।

सिमरन ने अचानक कुर्सी से उठकर खिड़की की तरफ रुख किया और अपनी साड़ी के पल्लू को ठीक करने का नाटक किया जिससे उसकी सुडौल देह का पूरा नक्शा आर्यन के सामने आ गया। आर्यन की धड़कनें तेज हो गई थीं क्योंकि उसने देखा कि सिमरन उसे शीशे के प्रतिबिंब में देख रही थी और उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान थी। सिमरन धीरे से मुड़ी और आर्यन के पास आकर खड़ी हो गई जिससे उसके तरबूजों का स्पर्श लगभग आर्यन के हाथ से हो गया। उस पल आर्यन के मन में एक गहरा संघर्ष चल रहा था कि क्या वह आगे बढ़े या फिर अपनी मर्यादा में रहे लेकिन सिमरन की आँखों में छिपी प्यास ने उसकी सारी झिझक को जैसे मोम की तरह पिघला दिया।

सिमरन ने अपना कोमल हाथ आर्यन के कंधे पर रखा और धीरे से फुसफुसाते हुए कहा कि उसे बहुत थकान महसूस हो रही है और क्या वह उसके कंधों को थोड़ा सहला सकता है। आर्यन के हाथ कांप रहे थे लेकिन जैसे ही उसने सिमरन के कंधों को छुआ उसे एक बिजली के झटके जैसा अहसास हुआ और सिमरन के मुंह से एक धीमी सी आह निकल गई। धीरे-धीरे आर्यन की उंगलियां सिमरन की गर्दन से नीचे सरकने लगीं और उसने महसूस किया कि सिमरन की त्वचा बहुत गर्म हो चुकी है। सिमरन ने अपनी गर्दन पीछे की तरफ झुका दी जिससे उसका गला पूरी तरह उजागर हो गया और आर्यन अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाया और उसने सिमरन की गर्दन पर अपने होंठ रख दिए।

सिमरन ने एक लंबी सांस ली और अपनी आँखें मूंद लीं और आर्यन का हाथ पकड़कर उसे अपने भारी तरबूजों पर रख दिया जिससे आर्यन का जोश सातवें आसमान पर पहुँच गया। उसने साड़ी के ऊपर से ही उन तरबूजों को दबाना शुरू किया और महसूस किया कि वे कितने नर्म और रसीले हैं जैसे कि पके हुए फल हों। सिमरन ने धीरे से आर्यन की पैंट की चेन खोली और उसके अंदर मचल रहे लंबे और सख्त खीरे को अपने हाथों में ले लिया। खीरे की गरमाहट और उसकी लंबाई महसूस करते ही सिमरन के चेहरे पर एक अलग ही चमक आ गई और उसने उसे सहलाना शुरू कर दिया जिससे आर्यन का पूरा शरीर थरथराने लगा और उसका मन किया कि वह अभी के अभी खुदाई शुरू कर दे।

आर्यन ने सिमरन को ऑफिस की उसी बड़ी मेज पर लिटा दिया और उसकी साड़ी को धीरे-धीरे उतारने लगा जिससे उसकी गोरी देह और उसके अंगों पर उगे काले बाल नजर आने लगे। सिमरन की खाई अब पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और उसमें से एक मादक गंध आ रही थी जो आर्यन को पागल बना रही थी। आर्यन ने नीचे झुककर सिमरन की खाई को चाटना शुरू किया जिससे सिमरन अपनी कमर ऊपर उठाने लगी और जोर-जोर से कराहने लगी। वह बार-बार आर्यन का सिर अपनी खाई की तरफ दबा रही थी जैसे कह रही हो कि उसे और गहराई से खोदा जाए। आर्यन की जीभ सिमरन की खाई के हर कोने को छू रही थी और सिमरन का पूरा शरीर पसीने से तर-बतर हो चुका था।

जब सिमरन की बर्दाश्त की हद खत्म होने लगी तो उसने आर्यन के खीरे को पकड़कर अपने मुंह में ले लिया और उसे बड़ी शिद्दत से चूसने लगी। खीरे के ऊपर सिमरन की गर्म जीभ और उसके मुंह का दबाव आर्यन को एक अलग ही दुनिया में ले जा रहा था जहाँ सिर्फ सुख और आनंद था। सिमरन ने खीरे को पूरी गहराई तक अपने हलक में उतार लिया और आर्यन के बाल पकड़कर उसे और अंदर धकेलने लगी। इसके बाद आर्यन ने सिमरन को मेज के किनारे पर लाया और उसे सामने से खोदने के लिए तैयार किया। जैसे ही उसने अपने सख्त खीरे को सिमरन की तंग और गीली खाई के द्वार पर रखा सिमरन ने उसे कसकर गले लगा लिया।

आर्यन ने एक जोरदार झटके के साथ अपने खीरे को सिमरन की खाई के अंदर उतार दिया जिससे सिमरन के मुंह से एक चीख निकल गई लेकिन वह चीख दर्द की नहीं बल्कि एक चरम सुख की थी। सिमरन ने अपनी टांगें आर्यन की कमर के चारों तरफ कस लीं और उसे और भी जोर से अपने अंदर धकेलने के लिए कहने लगी। आर्यन अब पूरी लय में आ चुका था और वह लगातार सिमरन की खाई की खुदाई कर रहा था जिससे मेज की चरमराहट और उनके शरीरों के टकराने की आवाज पूरे केबिन में गूंजने लगी। सिमरन के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे और आर्यन बीच-बीच में उन मटरों को अपने दांतों से हल्का सा काट लेता था जिससे सिमरन और भी ज्यादा उत्तेजित हो जाती थी।

खुदाई की यह प्रक्रिया बहुत ही गहन और लंबी चली जहाँ आर्यन कभी सिमरन को पिछवाड़े से खोदता तो कभी उसे मेज पर झुकाकर उसकी गहराई नापता। सिमरन बार-बार आर्यन का नाम पुकार रही थी और उससे कह रही थी कि वह उसे कभी न छोड़े और उसे ऐसे ही खोदता रहे। जब वे दोनों पूरी तरह से थक चुके थे और उनका पसीना एक-दूसरे में मिल गया था तब सिमरन की खाई से रस छूटने लगा और उसी पल आर्यन ने भी अपने खीरे का सारा रस सिमरन की खाई की गहराई में उड़ेल दिया। वे दोनों एक-दूसरे की बाहों में बंधे हुए वहीं मेज पर ढेर हो गए और उनकी सांसें इतनी तेज चल रही थीं जैसे कोई मैराथन दौड़ कर आए हों।

कुछ देर बाद जब उनकी सांसें सामान्य हुईं तो सिमरन ने आर्यन के माथे को चूमा और उसकी आँखों में एक अजीब सी संतुष्टि और प्यार देखा। ऑफिस के उस शांत वातावरण में अब सिर्फ उनकी धड़कनों की आवाज थी और उन दोनों को अहसास हुआ कि यह सिर्फ शारीरिक जरूरत नहीं थी बल्कि एक रूहानी जुड़ाव था जो उस रात मुकम्मल हुआ था। सिमरन ने धीरे से अपनी साड़ी उठाई और खुद को ढका लेकिन उसकी आँखों की चमक बता रही थी कि वह फिर से उस खुदाई का इंतजार करेगी। आर्यन ने उसे सहारा दिया और वे दोनों एक साथ ऑफिस से बाहर निकले जहाँ रात की ठंडी हवा उनका स्वागत कर रही थी और उनके दिलों में उस रात की यादें हमेशा के लिए कैद हो गई थीं।

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