रीना की रसीली चु@@ई—>शहर के उस पुराने और शांत इलाके में समीर पिछले दो सालों से अकेला रह रहा था, उसका जीवन दफ्तर की फाइलों और लैपटॉप की स्क्रीन के बीच सिमट कर रह गया था। दोपहर के तीन बज रहे थे और बाहर की तपिश कमरे की खिड़की से छनकर अंदर आ रही थी, तभी उसे पड़ोस के खाली फ्लैट में कुछ हलचल सुनाई दी। कॉरिडोर में सामान रखने की आवाज और भारी कदमों की आहट ने उसकी बोरियत को तोड़ दिया था और जब उसने दरवाजा खोलकर बाहर झांका, तो उसकी नजर रीना पर पड़ी। रीना, जो शायद अभी-अभी वहां रहने आई थी, पसीने में तर-बतर अपनी भारी साड़ी को संभालते हुए एक बड़ा सा डिब्बा खींचने की कोशिश कर रही थी। उसका चेहरा गुलाबी हो गया था और सांसें तेज चलने के कारण उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी, जिससे समीर की नजरें उसके शरीर के उभारों पर टिक गईं।
रीना का शरीर किसी सजीली मल्लिका जैसा था, उसकी उम्र करीब बत्तीस साल रही होगी, लेकिन उसके अंगों की कसावट किसी कम उम्र की लड़की को भी मात दे रही थी। उसकी रेशमी साड़ी उसके शरीर से चिपक गई थी, जिससे उसके दोनों भारी और गोल-मटोल तरबूज साफ झलक रहे थे, जो हर हरकत के साथ धीरे-धीरे हिल रहे थे। समीर ने गौर किया कि गर्मी की वजह से उसके ब्लाउज का कपड़ा गीला हो चुका था और उसके अंदर दबे हुए छोटे-छोटे मटर जैसे सिरे उभर आए थे। उसका पिछवाड़ा काफी चौड़ा और मांसल था, जो झुकने पर और भी ज्यादा आकर्षक लग रहा था, जिसे देखकर समीर के मन में हलचल मच गई। उसकी कमर का घेरा और वहां जमी हल्की सी चर्बी उसे एक परिपक्व और कामुक लुक दे रही थी, जिसने समीर के संयम को हिलाकर रख दिया था।
समीर ने आगे बढ़कर मदद की पेशकश की, तो रीना ने अपनी कजरारी आंखों से उसे देखा और एक मधुर मुस्कान बिखेर दी, जिससे समीर का दिल जोर से धड़कने लगा। उसने भारी सूटकेस उठाते समय जानबूझकर रीना के करीब होने की कोशिश की, जिससे उसके शरीर से आती मोगरे की महक और पसीने की हल्की नमकीन खुशबू समीर के नथुनों में समा गई। जब उन दोनों के हाथ गलती से आपस में टकराए, तो एक बिजली सी दौड़ गई और रीना की आंखों में भी एक अजीब सी चमक और झिझक दिखाई दी। उस एक पल के स्पर्श ने उनके बीच एक अनकहा भावनात्मक सेतु बना दिया था, जहां दोनों अजनबी होते हुए भी एक-दूसरे की शारीरिक ऊर्जा को महसूस कर पा रहे थे। कमरे के अंदर सामान रखते समय समीर का ध्यान बार-बार रीना की गहरी नाभि और उसकी साड़ी के नीचे छिपे हुए भारी पिछवाड़े की गोलाई पर जा रहा था।
रीना ने शुक्रिया कहने के बहाने समीर को शाम को चाय पर बुलाया, और समीर ने बिना पलक झपकाए तुरंत हां कह दी, क्योंकि उसके मन में पहले से ही आकर्षण का ज्वालामुखी धधक रहा था। शाम को जब वह रीना के फ्लैट पर पहुंचा, तो माहौल बिल्कुल अलग था; हल्की रोशनी और धीमी संगीत ने वहां एक मादक समां बांध दिया था। रीना अब एक हल्की पारदर्शी नाइटी में थी, जिसके अंदर से उसके दोनों बड़े तरबूज साफ दिखाई दे रहे थे और उनके ऊपर मौजूद मटर जैसे दाने सीधे समीर को चुनौती दे रहे थे। जैसे ही रीना ने चाय का कप समीर की ओर बढ़ाया, उसकी नाइटी का गला थोड़ा और झुक गया, जिससे समीर को उसकी गहरी खाई की एक झलक मिल गई, जो गहरे बालों से ढकी हुई और रसीली लग रही थी। समीर की सांसें भारी होने लगीं और उसके निचले हिस्से में सोता हुआ खीरा धीरे-धीरे अपनी पूरी लंबाई में जागने लगा, जिससे उसे अपनी पैंट में तनाव महसूस होने लगा।
चाय पीते-पीते उनके बीच की झिझक खत्म होने लगी और बातों का सिलसिला शारीरिक आकर्षण की ओर मुड़ने लगा, जहां शब्दों से ज्यादा आंखों की भाषा काम कर रही थी। समीर ने धीरे से अपना हाथ रीना के हाथ पर रखा, जो रेशम जैसा कोमल था, और रीना ने अपना हाथ हटाया नहीं, बल्कि उसकी उंगलियों को कस लिया। रीना के चेहरे पर शर्म और हवस का एक मिला-जुला भाव था, वह धीरे-धीरे कांप रही थी और उसकी भारी आहें कमरे के सन्नाटे को चीर रही थीं। समीर ने हिम्मत जुटाकर उसे अपनी ओर खींचा और उसके गले पर अपने होंठ रख दिए, जिससे रीना के मुंह से एक दबी हुई कराह निकल गई। वह उसके कान के पास फुसफुसाया कि वह कितनी सुंदर है, और रीना ने अपनी आंखें बंद कर लीं, मानो उसने खुद को समीर के हवाले कर दिया हो।
समीर के हाथ अब रीना के जिस्म की परतों को टटोलने लगे थे, उसने नाइटी के ऊपर से ही उसके रसीले तरबूजों को अपनी हथेलियों में भर लिया और उन्हें जोर-जोर से दबाने लगा। रीना मदहोशी में अपना सिर पीछे की ओर झुकाए हुए थी और उसके मटर जैसे सिरे अब समीर की उंगलियों के नीचे और भी सख्त हो गए थे। समीर ने धीरे से नाइटी को कंधे से नीचे सरकाया, जिससे वे दोनों विशाल और दूधिया गोरे तरबूज पूरी तरह आजाद हो गए, जिनकी महक उसे दीवाना बना रही थी। उसने झुककर एक मटर को अपने मुंह में भर लिया और उसे चूसने लगा, जबकि दूसरा हाथ नीचे जाकर रीना की रेशमी खाई को सहलाने लगा। रीना की खाई पहले से ही गीली हो चुकी थी और उसके अंदर से एक मादक रस निकल रहा था, जो समीर की उंगलियों को फिसलन भरा बना रहा था।
समीर ने अब रीना को पूरी तरह निर्वस्त्र कर दिया था और उसकी नजरें उस काली और घनी खाई पर टिकी थीं, जो कामुकता का चरम केंद्र थी। उसने अपनी उंगली से खोदना शुरू किया, जिससे रीना का पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया और वह समीर के बालों को अपनी उंगलियों में जकड़ने लगी। समीर ने अब अपने कपड़े उतार दिए और उसका विशाल खीरा पूरी तरह से खड़ा होकर अपनी मजबूती दिखा रहा था, जिसे देखकर रीना की सांसें थम गईं। रीना ने नीचे झुककर समीर के खीरे को अपने हाथों में लिया और उसे प्यार से सहलाने लगी, फिर उसने धीरे से खीरा मुंह में लेना शुरू किया। उसके गरम और गीले मुंह के अहसास ने समीर को पागल कर दिया था, वह अपनी आंखें मूंदकर उस सुख का आनंद ले रहा था जो उसे दुनिया से अलग कर रहा था।
अब खुदाई का असली समय आ गया था, समीर ने रीना को बिस्तर के किनारे पर लिटाया और उसकी टांगों को अपने कंधों पर रख लिया ताकि वह गहराई तक जा सके। उसने अपने खीरे के सिरे को रीना की रसीली खाई के द्वार पर रखा, जहां से पहले ही काफी रस बह रहा था, और एक झटके में आधा खीरा अंदर उतार दिया। रीना के मुंह से एक तीखी लेकिन सुखद चीख निकली और उसने समीर की पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए, क्योंकि उसका रास्ता काफी तंग और गरम था। समीर ने धीरे-धीरे लय पकड़ी और सामने से खोदना शुरू किया, हर धक्के के साथ रीना के तरबूज बुरी तरह उछल रहे थे और उनके आपस में टकराने की आवाज कमरे में गूंज रही थी। रीना भी नीचे से अपना पिछवाड़ा ऊपर उठा-उठाकर समीर का साथ दे रही थी, मानो वह उस खीरे को अपने अस्तित्व के अंतिम छोर तक महसूस करना चाहती हो।
जैसे-जैसे खुदाई की गति बढ़ी, कमरे का तापमान और भी बढ़ गया और दोनों के शरीर पसीने से भीग कर एक-दूसरे से चिपकने लगे थे। समीर ने अब रीना को घुमाया और उसे पिछवाड़े से खोदने की मुद्रा में ला दिया, जिससे उसका मांसल पिछवाड़ा ऊपर की ओर उभर आया था। समीर ने पीछे से अपने खीरे को फिर से खाई के अंदर डाला और पूरी ताकत से धक्के मारने लगा, जिससे रीना के पूरे शरीर में झनझनाहट होने लगी। वह जोर-जोर से हांफ रही थी और उसकी सिसकियां अब चीखों में बदल चुकी थीं, ‘और जोर से समीर, और गहरा खोदो’ की आवाजें समीर के जोश को सातवें आसमान पर ले जा रही थीं। हर धक्के के साथ रीना का शरीर आगे की ओर झुकता और फिर वापस समीर के मजबूत शरीर से टकराता, जिससे एक गमक पैदा हो रही थी।
काफी देर तक चली इस जबरदस्त खुदाई के बाद अब दोनों ही अपने चरम आनंद के करीब पहुंच चुके थे, समीर का खीरा अब अंदर की गर्मी से फटने को तैयार था। रीना ने अपनी मांसपेशियों को सिकोड़ लिया और समीर के खीरे को पूरी मजबूती से जकड़ लिया, उसकी आंखों की पुतलियां ऊपर चढ़ गईं और शरीर थरथराने लगा। समीर ने अपनी गति को और तेज कर दिया और आखिरी के कुछ शक्तिशाली धक्कों के साथ उसका सारा रस छूट गया और रीना की खाई के अंदर गर्म झरने की तरह बहने लगा। उसी पल रीना का भी रस निकलना शुरू हुआ और वह निढाल होकर बिस्तर पर गिर पड़ी, उसकी सांसें इतनी तेज थीं कि सीना धौंकनी की तरह चल रहा था। दोनों एक-दूसरे की बाहों में बंधे हुए थे, जहां पसीना, गंध और संतुष्टि का एक अद्भुत मिलन हो रहा था, और उस शाम की वह खुदाई उनके जीवन की सबसे यादगार घटना बन गई थी।
खुदाई खत्म होने के बाद कमरे में एक गहरी शांति छा गई थी, जो केवल उनकी भारी सांसों से टूट रही थी, समीर ने रीना को अपनी बाहों में समेट लिया और उसके माथे को चूमा। रीना की हालत ऐसी थी जैसे वह किसी गहरे नशें में हो, उसके चेहरे पर बिखरे बाल और होंठों की लाली उसकी तृप्ति की कहानी बयां कर रही थी। समीर को महसूस हुआ कि यह केवल शरीर का मिलन नहीं था, बल्कि दो एकाकी आत्माओं ने एक-दूसरे में अपना सुकून ढूंढ लिया था, जिसका अहसास शब्दों से परे था। वे दोनों काफी देर तक ऐसे ही लेटे रहे, एक-दूसरे की धड़कनों को महसूस करते हुए, और समीर जानता था कि इस रसीली मुलाकात के बाद उसका और रीना का पड़ोसी वाला रिश्ता हमेशा के लिए एक गहरे और अटूट बंधन में बदल चुका है।