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शालिनी मैम की रसीली चु@@ई

शालिनी मैम की रसीली चु@@ई—>शालिनी मैम मेरी पुरानी योगा टीचर थीं, जिन्होंने मुझे कॉलेज के दिनों में शारीरिक फिटनेस के गुर सिखाए थे। करीब पांच साल बाद जब मैं उनसे उनके नए फ्लैट पर मिलने पहुँचा, तो उन्हें देखकर मेरी धड़कनें जैसे थम सी गईं। वह अब और भी अधिक निखर गई थीं और उनके शरीर का हर हिस्सा पहले से कहीं ज्यादा गठीला और आकर्षक लग रहा था। उन्होंने एक गहरे नीले रंग का टाइट जिम वियर पहना हुआ था, जो उनके बदन की हर एक ढलान को बड़ी बेबाकी से पेश कर रहा था। जैसे ही उन्होंने मुझे अंदर बुलाया, कमरे में उनके परफ्यूम की हल्की सी महक तैर रही थी, जिसने मेरे दिमाग में पुरानी यादों और नई इच्छाओं का एक अजीब सा मिश्रण पैदा कर दिया।

शालिनी मैम की उम्र करीब 38 साल रही होगी, लेकिन उनकी फिटनेस को देखकर कोई भी उन्हें 28 से ज्यादा का नहीं कह सकता था। उनके सीने पर मौजूद दो बड़े और गोल तरबूज उस टाइट टी-शर्ट में से बाहर झांकने को बेताब लग रहे थे। उनके तरबूज इतने उभरे हुए और सख्त थे कि मेरी नजरें बार-बार वहीं जाकर टिक रही थीं। जब वह चलती थीं, तो उनके उन तरबूजों में होने वाली हल्की सी हलचल मेरे मन के भीतर एक तूफान खड़ा कर रही थी। उनकी कमर बहुत पतली थी और उनका पिछवाड़ा काफी चौड़ा और गठीला था, जो उस लैगिंग में किसी ऊंचे पहाड़ की तरह उभर कर आ रहा था। उनके शरीर की बनावट ऐसी थी कि कोई भी पुरुष उन्हें देखकर अपने होश खो बैठे।

हम सोफे पर बैठकर पुरानी बातें करने लगे, लेकिन मेरा पूरा ध्यान उनके शरीर की बनावट और उनके बात करने के अंदाज पर था। शालिनी मैम को भी शायद एहसास हो रहा था कि मैं उन्हें किस नजर से देख रहा हूँ, क्योंकि उनकी आंखों में भी एक अजीब सी चमक और शरारत थी। हमारे बीच बातों का सिलसिला धीरे-धीरे भावनात्मक होने लगा और उन्होंने बताया कि कैसे वह अपनी जिंदगी में अकेलापन महसूस करती हैं। वह मेरे करीब आकर बैठ गईं और उनके शरीर की गर्मी मुझे महसूस होने लगी। उनके तरबूजों की हल्की सी छुअन मेरी बांहों से हुई, जिससे मेरे पूरे शरीर में बिजली की एक लहर दौड़ गई और मेरा खीरा अपने आप ही अपनी जगह बनाने लगा।

बातों-बातों में उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहने लगीं कि समीर, तुम काफी बदल गए हो, अब तुम काफी मजबूत दिखने लगे हो। उनके इस स्पर्श में एक अलग ही आकर्षण था, जिसने मेरे भीतर की सारी झिझक को खत्म कर दिया। मैंने भी धीरे से उनके हाथ को दबाया और उनके चेहरे के करीब अपना चेहरा ले गया। हमारी सांसें एक-दूसरे से टकरा रही थीं और कमरे का तापमान अचानक बढ़ गया था। उनके चेहरे पर शर्म की एक हल्की सुर्खी थी, लेकिन उनकी आंखों में छुपी प्यास साफ झलक रही थी। वह धीरे से मुस्कुराईं और उन्होंने अपनी पलकें झुका लीं, जो मेरे लिए एक मूक सहमति की तरह थी।

मैने धीरे से अपना हाथ उनके कंधे पर रखा और उन्हें अपनी ओर खींचा। उन्होंने भी बिना किसी प्रतिरोध के अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया। मैंने अपनी उंगलियों से उनके रेशमी बालों को सहलाना शुरू किया और फिर धीरे-धीरे अपना हाथ उनके उन बड़े तरबूजों की ओर बढ़ाया। जैसे ही मेरा हाथ उनके एक तरबूज पर पड़ा, उन्होंने एक गहरी आह भरी। उनके तरबूज बहुत ही मुलायम लेकिन अंदर से काफी सख्त थे। टी-शर्ट के ऊपर से ही मुझे उनके मटरों का उभार महसूस हो रहा था, जो अब उत्तेजना के कारण काफी कड़े हो चुके थे। मैंने धीरे से उन मटरों को अपनी उंगलियों के बीच लेकर मसलना शुरू कर दिया, जिससे वह सिहर उठीं।

शालिनी मैम ने अपना हाथ नीचे बढ़ाकर मेरे पैंट के ऊपर से ही मेरे खीरे को सहलाना शुरू कर दिया। मेरा खीरा अब पूरी तरह से अकड़ चुका था और उसे बाहर निकलने की जल्दी थी। उन्होंने धीरे से मेरी पैंट की चेन खोली और मेरे गरम खीरे को अपने कोमल हाथों में थाम लिया। खीरे की गर्मी और उनके हाथों की नरमी का संगम इतना सुखद था कि मेरी आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा। उन्होंने धीरे से अपना सिर झुकाया और मेरे खीरे को अपने मुंह में ले लिया। उनके गीले मुंह के अंदर खीरा चूसना इतना आनंददायक था कि मैं बस उनकी जुल्फों को पकड़कर आहें भरने लगा। वह बड़ी कुशलता से खीरा चूस रही थीं।

कुछ देर बाद, उन्होंने अपनी टी-शर्ट उतार दी और उनके नंगे तरबूज पूरी शान से मेरे सामने थे। उनके मटर गुलाबी और बहुत ही संवेदनशील थे। मैंने झुककर उनके मटरों को अपने होठों में भर लिया और उन्हें चूसने लगा। वह बिस्तर पर लेट गईं और मैंने उनके निचले हिस्से के कपड़े भी धीरे-धीरे उतार दिए। अब उनके रेशमी बाल उनकी गहरी खाई के पास फैले हुए थे। उनकी खाई पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और वहां से एक मदहोश कर देने वाली गंध आ रही थी। मैंने अपनी उंगली से उनकी खाई को सहलाया और फिर धीरे से उंगली से खुदाई शुरू कर दी। वह अपनी कमर ऊपर उठाकर जोर-जोर से कराहने लगीं।

अब मुझसे और सब्र नहीं हो रहा था। मैंने शालिनी मैम को घुटनों के बल किया और उनके पिछवाड़े के पीछे खड़ा हो गया। उनका पिछवाड़ा इतना बड़ा और रसीला था कि उसे देखकर मेरा मन किया कि मैं बस उसे देखता ही रहूँ। मैंने अपने खीरे को उनकी गीली खाई के द्वार पर रखा और एक जोरदार धक्का दिया। मेरा पूरा खीरा उनकी गहरी और तंग खाई के अंदर समा गया। वह चिल्ला उठीं, ‘आह समीर, तुमने तो मुझे फाड़ ही दिया!’ उनकी तंग खाई मेरे खीरे को चारों तरफ से जकड़ रही थी। मैंने पिछवाड़े से खुदाई की गति बढ़ानी शुरू की और कमरे में हमारे शरीरों के टकराने की आवाजें गूँजने लगीं।

हर धक्के के साथ मेरा खीरा उनकी खाई की गहराई को नाप रहा था। शालिनी मैम अपनी दोनों हथेलियों को बिस्तर पर टिकाकर झटके ले रही थीं। उनके तरबूज नीचे की ओर लटक रहे थे और हर धक्के के साथ हिल रहे थे। मैंने झुककर उनके उन बड़े तरबूजों को पीछे से ही पकड़ लिया और जोर-जोर से उन्हें दबाते हुए खुदाई जारी रखी। ‘हाँ समीर, और तेज… और गहराई से खोदो मुझे!’ उनकी इन बातों ने मेरी उत्तेजना को चरम पर पहुँचा दिया। मैंने उन्हें फिर से सीधा लिटाया और सामने से खुदाई शुरू की। उनकी टांगें मेरे कंधों पर थीं और मैं पूरी ताकत से उनके अंदर जा रहा था।

खुदाई का यह सिलसिला करीब आधे घंटे तक चला। हम दोनों पसीने से तर-बतर थे और हमारी सांसें फूल रही थीं। शालिनी मैम की खाई अब पूरी तरह से रसीली हो चुकी थी और हर बार अंदर जाते समय एक चप-चप की आवाज आ रही थी। मुझे महसूस हुआ कि मेरा रस अब निकलने ही वाला है। मैंने अपनी गति और तेज कर दी। ‘समीर, मैं भी निकलने वाली हूँ, ओह गॉड!’ शालिनी ने चिल्लाते हुए मुझे कसकर पकड़ लिया। जैसे ही उनका रस छूटना शुरू हुआ, मैंने भी अपना सारा गरम रस उनकी गहरी खाई के अंदर ही छोड़ दिया। हम दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए बिस्तर पर गिर पड़े।

उस गहरी खुदाई के बाद शालिनी मैम के चेहरे पर एक असीम संतुष्टि का भाव था। वह मेरी बांहों में लेटी हुई अपनी सांसें सामान्य करने की कोशिश कर रही थीं। उनके नंगे बदन की छुअन मुझे बहुत ही सुकून दे रही थी। हमने करीब एक घंटे तक उसी अवस्था में बातें कीं। वह बार-बार मेरे माथे को चूम रही थीं और कह रही थीं कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में ऐसा सुख कभी महसूस नहीं किया था। वह अनुभव सिर्फ शारीरिक नहीं था, बल्कि उसमें सालों की दबी हुई इच्छाएं और एक भावनात्मक जुड़ाव भी शामिल था। उस रात हमने कई बार और खुदाई की और हर बार एक नया आनंद महसूस किया।

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