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चाची की मदहोश चु@@ई


चाची की मदहोश चु@@ई—>समीर पिछले एक हफ्ते से अपनी चाची शीला के घर पर रह रहा था क्योंकि उसके माता-पिता एक तीर्थ यात्रा पर गए थे और चाचा को किसी जरूरी ऑफिस के काम से शहर से बाहर जाना पड़ा था। शीला करीब पैंतीस साल की एक बेहद खूबसूरत और सुडौल महिला थी जिसकी सांवली रंगत और बड़ी-बड़ी काली आँखें किसी को भी सम्मोहित करने के लिए काफी थीं। वह घर में अक्सर पतली पारभासी साड़ियाँ पहनती थी जिससे उसके शरीर की बनावट साफ झलकती थी और समीर की युवा आँखों को भटकने पर मजबूर कर देती थी। शीला की चाल में एक ऐसी मटक थी कि जब वह रसोई में काम करती या घर की सफाई करती तो समीर का ध्यान अपनी किताबों से हटकर उसकी कमर की लचक पर टिक जाता था।

शीला के बदन की बनावट बहुत ही मदहोश करने वाली थी जिसके ऊपरी हिस्से में दो विशाल और उभरे हुए तरबूज जैसे अंग थे जो हमेशा ब्लाउज की सीमाओं को तोड़ने के लिए बेताब दिखते थे। उन रसीले तरबूजों के बीच एक गहरी घाटी थी जिसमें अक्सर पसीने की बूंदें चमकती रहती थीं जिन्हें देखकर समीर का मन करता कि वह उन्हें अपनी जीभ से साफ कर दे। उन तरबूजों के शिखर पर छोटे और गहरे रंग के मटर के दाने जैसे उभार थे जो अक्सर ठंड या गीलेपन के कारण साड़ी के कपड़े के पार भी अपनी मौजूदगी का अहसास करा देते थे। उसकी कमर पतली थी लेकिन नीचे का हिस्सा काफी चौड़ा और मांसल था जिसे समीर मन ही मन उसका भारी पिछवाड़ा कहकर पुकारता था जो चलने पर लहरों की तरह हिलता था।

दोनों के बीच एक अनकहा आकर्षण जन्म ले रहा था जो सिर्फ रिश्तों की मर्यादा के कारण दबा हुआ था लेकिन भावनाओं का ज्वार धीरे-धीरे बढ़ रहा था। समीर अक्सर शीला की मदद करने के बहाने रसोई में चला जाता जहाँ उनकी बाँहें आपस में टकरा जातीं और एक बिजली सी उनके पूरे शरीर में दौड़ जाती थी। शीला भी इस बदलाव को महसूस कर रही थी और उसकी आँखों में समीर के लिए एक अलग ही चमक आ गई थी जो कभी-कभी शर्म से झुक जाती तो कभी शरारत से समीर को निहारती रहती। वह अक्सर समीर के सामने झुककर काम करती जिससे उसके तरबूजों का आधा हिस्सा समीर की नजरों के सामने आ जाता और समीर अपनी उत्तेजना को दबाने के लिए गहरी सांसें लेने लगता।

एक दोपहर जब बाहर बहुत गर्मी थी और घर के अंदर सन्नाटा पसरा हुआ था शीला समीर के कमरे में आई और उसे गर्मी से बेहाल पाकर पंखे की हवा में बैठने को कहा। समीर ने देखा कि शीला ने बहुत ही पतली नाइटी पहनी हुई थी जिसके नीचे उसने कुछ भी नहीं पहना था और उसके तरबूज उस पतले कपड़े के अंदर साफ नजर आ रहे थे। शीला ने समीर के पास बैठकर उसके बालों में उंगलियां फेरना शुरू किया जिससे समीर का पूरा बदन कांप उठा और उसकी झिझक टूटने लगी। उसने धीरे से शीला का हाथ पकड़ लिया और उसे अपनी आँखों में देखते हुए चूम लिया जिससे शीला की सांसों की गति अचानक बढ़ गई और उसने अपनी आँखें बंद कर लीं।

समीर ने अपना हाथ धीरे से ऊपर उठाया और शीला के एक नरम तरबूज को अपने हाथ की हथेली में भर लिया जो बहुत ही कोमल और गर्म महसूस हो रहा था। शीला के मुंह से एक दबी हुई कराह निकली और उसने समीर को अपने और करीब खींच लिया जिससे उसके मटर जैसे दाने समीर की छाती पर चुभने लगे। समीर ने अपनी जीभ से शीला की गर्दन को सहलाया और धीरे-धीरे नीचे उतरते हुए उसके तरबूजों के बीच की खाई को गीला करना शुरू किया जिससे शीला के शरीर में उत्तेजना की लहरें उठने लगीं। वह अपनी उंगलियों से समीर के बालों को खींचने लगी और उसके नाम को पुकारते हुए अपनी इच्छा जाहिर करने लगी जो अब किसी भी बांध को तोड़ने के लिए तैयार थी।

समीर ने शीला की नाइटी को ऊपर उठाया और उसके नीचे छिपे काले रेशमी बालों के जंगल को देखा जिसके बीच उसकी गुलाबी और गीली खाई छिपी हुई थी। उसने अपनी उंगलियों से उस खाई के किनारों को सहलाया तो पाया कि वह पहले से ही प्यार के रस से लबालब भरी हुई थी और समीर के स्पर्श पर और अधिक रस छोड़ रही थी। उसने अपना मुंह नीचे झुकाया और उस खाई को अपनी जीभ से सहलाना शुरू किया जिससे शीला की कमर बिस्तर से ऊपर उठ गई और वह जोर-जोर से आहें भरने लगी। समीर ने अपना सख्त और लंबा खीरा बाहर निकाला जो उत्तेजना के मारे पत्थर जैसा हो गया था और शीला की आँखों में देखते हुए उसे चूमने को कहा।

शीला ने बिना किसी देरी के समीर के खीरे को अपने हाथ में लिया और उसे सहलाने लगी जिससे समीर को अपार सुख का अनुभव हुआ। फिर उसने धीरे से उस खीरे को अपने मुंह में ले लिया और उसे चूसने लगी जैसे वह कोई बहुत ही कीमती फल हो। समीर की आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा और वह शीला के सिर को पकड़कर उसे और गहरा लेने के लिए उकसाने लगा। कुछ देर तक खीरा चूसने के बाद समीर ने शीला को बिस्तर पर सीधा लिटाया और उसकी दोनों टांगों को अपने कंधों पर रख लिया ताकि वह उस गहरी खाई की गहराई को माप सके जो अब पूरी तरह से उसकी प्रतीक्षा कर रही थी।

उसने अपने खीरे की नोक को खाई के मुहाने पर रखा और धीरे से दबाव डाला जिससे शीला के चेहरे पर दर्द और सुख के मिश्रित भाव आ गए। जैसे ही खीरा थोड़ा अंदर गया शीला ने अपनी पकड़ समीर की पीठ पर मजबूत कर ली और अपने नाखून उसकी त्वचा में गड़ा दिए। समीर ने एक झटके के साथ अपना पूरा खीरा उस खाई के अंदर उतार दिया जिससे एक गीली और मादक आवाज गूंजी और शीला ने एक लंबी चीख के साथ समीर को गले लगा लिया। अब असली खुदाई शुरू हो चुकी थी जहाँ समीर के हर धक्के के साथ शीला के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे और उनके शरीर का पसीना एक-दूसरे में मिल रहा था।

समीर ने खुदाई की गति बढ़ानी शुरू की और वह बार-बार अपने खीरे को बाहर निकालकर फिर पूरी ताकत से अंदर डालता जिससे शीला की खाई के अंदर एक हलचल मच जाती थी। शीला भी बराबर का साथ दे रही थी और अपने पिछवाड़े को ऊपर उठाकर समीर के हर प्रहार को गहराई से झेल रही थी। कमरे में सिर्फ उनके शरीर के टकराने की और भारी सांसों की आवाजें गूंज रही थीं जो एक आदिम संगीत की तरह लग रही थीं। समीर ने अब शीला को घुमाया और उसे पिछवाड़े से खोदने की मुद्रा में ला दिया जहाँ से उसे शीला के भारी नितंबों का पूरा नजारा मिल रहा था जो हर धक्के पर थरथरा रहे थे।

शीला के मुंह से लगातार उत्तेजक शब्द निकल रहे थे जैसे ‘और तेज समीर मुझे और गहरा खोदो’ जिसने समीर के अंदर के जानवर को पूरी तरह जगा दिया था। वह पागलों की तरह खुदाई कर रहा था और उसका खीरा अब पूरी तरह से शीला के रस में भीग चुका था जिससे घर्षण और अधिक सुखद हो गया था। अंत में जब समीर को लगा कि उसका रस निकलने वाला है उसने शीला को फिर से सामने से लिटाया और अपनी पूरी ताकत झोंक दी। शीला के शरीर में भी अब कंपन होने लगा था और उसकी खाई के अंदर की मांसपेशियां समीर के खीरे को कसकर जकड़ रही थीं जो संकेत था कि उसका भी रस छूटने वाला है।

एक आखिरी और जोरदार धक्के के साथ समीर के खीरे से गरम रस की धारा फूट पड़ी जो शीला की खाई की गहराई में समा गई और उसी क्षण शीला का भी रस निकल गया जिससे उसका पूरा शरीर ढीला पड़ गया। दोनों एक-दूसरे की बाँहों में सिमटकर बिस्तर पर गिर पड़े और उनकी सांसें धीरे-धीरे सामान्य होने लगीं लेकिन उस कमरे की हवा में अभी भी उस गहन मिलन की खुशबू मौजूद थी। समीर ने शीला के माथे को चूमा और वह दोनों कुछ देर तक बिना कुछ बोले बस एक-दूसरे की धड़कनों को सुनते रहे। यह सिर्फ एक शारीरिक क्रिया नहीं थी बल्कि दो आत्माओं का एक-दूसरे में विलीन होना था जिसने उनके रिश्ते को हमेशा के लिए एक नया मोड़ दे दिया था।

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