मेघा साली की चुदाई—>
उस दोपहर घर की शांति बहुत ही मादक लग रही थी और समीर सोफे पर बैठकर अपने लैपटॉप पर काम करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसका ध्यान बार-बार पास ही बैठी अपनी साली मेघा पर जा रहा था। मेघा ने उस दिन बहुत ही हल्का और बारीक सूती सूट पहना हुआ था, जो उसके शरीर के हर उभार को बखूबी बयां कर रहा था, खासकर उसके सीने पर टिके हुए वे दो भारी और गोल तरबूज जो सांस लेने के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे। समीर ने महसूस किया कि मेघा की नजरें भी बार-बार उसकी ओर उठ रही थीं और उन नजरों में एक ऐसी प्यास थी जिसे वह पिछले कई दिनों से भांप रहा था, लेकिन आज की तन्हाई ने उस प्यास को एक नया आयाम दे दिया था।
मेघा की उम्र महज तेईस साल थी और उसके शरीर की बनावट किसी तराशी हुई मूरत जैसी थी, जिसमें उसके सुडौल और चौड़े पिछवाड़े समीर को हमेशा से ही अपनी ओर आकर्षित करते आए थे। उसके गोरे बदन पर जब सूरज की रोशनी खिड़की से होकर पड़ रही थी, तो उसकी त्वचा सोने की तरह चमक रही थी और समीर का मन कर रहा था कि वह अपनी उंगलियों से उस कोमलता को छुए। समीर ने गौर किया कि मेघा के तरबूजों के बीच जो गहरी घाटी बन रही थी, वह किसी को भी दीवाना बनाने के लिए काफी थी और वह मन ही मन कल्पना करने लगा कि उन रसीले फलों का स्वाद कैसा होगा।
समीर और मेघा के बीच हमेशा से ही एक प्यारा सा और थोड़ा शरारती रिश्ता रहा था, लेकिन पिछले कुछ महीनों में यह रिश्ता हंसी-मजाक से बढ़कर एक अनकहे खिंचाव में बदल गया था। मेघा जब भी समीर के पास बैठती, तो जानबूझकर अपने शरीर को उससे छुआ देती और समीर के अंदर एक बिजली सी दौड़ जाती, जिससे उसका अपना खीरा उत्तेजना के मारे उसके पायजामे के अंदर छटपटाने लगता था। आज भी मेघा ने अपनी किताब छोड़ दी और समीर की तरफ मुड़कर देखते हुए अपनी गर्दन को थोड़ा टेढ़ा किया, जिससे उसके गले की नसों का उभार और भी ज्यादा कामुक लगने लगा।
“जीजू, मेरी गर्दन में बहुत तेज दर्द हो रहा है, क्या आप थोड़ा सा मालिश कर देंगे?” मेघा ने अपनी नशीली आंखों से समीर को देखते हुए बड़े ही मासूमियत भरे लहजे में पूछा। समीर का दिल जोर से धड़कने लगा क्योंकि उसे पता था कि यह सिर्फ एक बहाना है और वह बिना कोई देरी किए मेघा के करीब सोफे पर बैठ गया और उसके कंधों पर अपने हाथ रख दिए। जैसे ही समीर की उंगलियों ने मेघा की कोमल त्वचा को छुआ, मेघा के मुंह से एक दबी हुई आह निकली और समीर ने महसूस किया कि उसके शरीर में एक हल्की सी कंपकंपी दौड़ गई है।
समीर के हाथ धीरे-धीरे मेघा की गर्दन से होते हुए उसकी पीठ की तरफ बढ़ने लगे और वह देख सकता था कि मेघा की सांसें तेज होने लगी थीं और उसका शरीर धीरे-धीरे ढीला पड़ रहा था। “तुम्हारी त्वचा कितनी नरम है मेघा, बिल्कुल मखमल जैसी,” समीर ने उसके कान के पास झुककर फुसफुसाते हुए कहा, जिससे मेघा के शरीर के बाल खड़े हो गए। मेघा ने अपनी आंखें बंद कर लीं और पीछे की ओर झुककर अपना सिर समीर के कंधे पर टिका दिया, जिससे उसके तरबूज समीर की बाहों से रगड़ने लगे और माहौल में उत्तेजना चरम पर पहुंच गई।
समीर ने अब और संयम नहीं रखा और उसने धीरे से मेघा का चेहरा अपनी ओर घुमाया और उसके गुलाबी होंठों को अपने होंठों के बीच दबा लिया, मानो वह किसी मीठे फल का रस चख रहा हो। मेघा ने भी पूरी शिद्दत के साथ समीर का साथ दिया और उसके हाथ समीर के बालों में उलझ गए, जबकि समीर का एक हाथ मेघा के सूट के अंदर जाकर उसके एक भारी तरबूज को अपने कब्जे में ले चुका था। समीर ने अपनी उंगलियों से उस तरबूज के ऊपर लगे नन्हे और सख्त मटर को सहलाना शुरू किया, जिससे मेघा के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं और वह समीर की गोद में और भी करीब आ गई।
समीर ने धीरे से मेघा का सूट ऊपर की तरफ सरकाया, जिससे उसका वह गोरा और सुडौल बदन पूरी तरह से समीर की आंखों के सामने आ गया और समीर की नजरें सीधे मेघा की रसीली खाई पर जाकर टिक गईं। मेघा की खाई के चारों ओर हल्के सुनहरे बाल थे जो उसे और भी ज्यादा उत्तेजक बना रहे थे और समीर ने बिना समय गंवाए अपनी जुबान से उस खाई को चखना शुरू कर दिया। मेघा का शरीर धनुष की तरह तन गया और वह अपने हाथों से समीर का सिर अपनी खाई की ओर और जोर से दबाने लगी, क्योंकि उसे समीर की जुबान का वह स्पर्श अपनी रूह तक महसूस हो रहा था।
समीर के मुंह में जब मेघा की खाई का वह प्राकृतिक रस आने लगा, तो उसका खीरा पूरी तरह से लोहे जैसा सख्त होकर बाहर आने को बेताब हो गया और उसने अपने पायजामे को नीचे उतार दिया। मेघा ने जब समीर के उस विशाल और फन उठाए हुए खीरे को देखा, तो उसकी आंखों में एक चमक आ गई और उसने उसे अपने नाजुक हाथों में पकड़कर सहलाना शुरू कर दिया। “जीजू, आपका खीरा तो बहुत ही बड़ा और मजबूत है, यह आज मेरी खाई की गहराई को जरूर नाप लेगा,” मेघा ने मुस्कुराते हुए कहा और फिर उसने उस खीरे को अपने मुंह में ले लिया।
मेघा जिस तरह से समीर के खीरे को चूस रही थी और अपनी जीभ का जादू चला रही थी, समीर को लगा कि उसका रस बस अभी निकल ही जाएगा, लेकिन उसने खुद पर काबू पाया। समीर ने मेघा को सोफे पर लिटाया और उसके दोनों पैरों को चौड़ा करके उसकी खाई के मुहाने पर अपना खीरा टिका दिया, जो वहां से बहने वाले रस से पहले ही भीग चुका था। जैसे ही समीर ने थोड़ा दबाव डाला, मेघा की आंखों से हल्का सा पानी आ गया, लेकिन उसके चेहरे पर मिलने वाले सुख की परछाई साफ दिख रही थी क्योंकि उसका खीरा उसकी तंग खाई में धीरे-धीरे समा रहा था।
समीर ने अब धीरे-धीरे खुदाई शुरू की और हर धक्के के साथ वह मेघा की खाई की गहराई तक जा रहा था, जिससे मेघा के मुंह से निकलने वाली आहें कमरे की दीवारों से टकराने लगीं। “जीजू, और जोर से खोदो, आज मुझे पूरी तरह से अपना बना लो,” मेघा चिल्लाते हुए कह रही थी और समीर भी पूरी ताकत के साथ खुदाई की गति बढ़ाने लगा। समीर के तरबूज जैसे मजबूत हाथ मेघा के पिछवाड़े को जोर-जोर से थपथपा रहे थे और हर धक्के पर मेघा का शरीर सोफे पर उछल रहा था, जिससे उनके शरीर के पसीने की बूंदें आपस में मिल रही थीं।
खुदाई की प्रक्रिया अब अपने चरम पर पहुंच चुकी थी और समीर ने मेघा को घुमाकर उसे पिछवाड़े से खोदना शुरू कर दिया, जिससे उसे मेघा के गहरे पिछवाड़े और खाई का एक साथ नजारा मिल रहा था। मेघा अपने दोनों हाथों को सोफे पर टिकाए हुए अपने पिछवाड़े को पीछे की तरफ धकेल रही थी ताकि समीर का खीरा और भी गहराई तक जा सके। समीर ने महसूस किया कि मेघा की खाई अब अंदर से बहुत ज्यादा सिकुड़ रही थी और उसका रस बाहर की ओर उमड़ने लगा था, जो इस बात का संकेत था कि वह अपने चरम सुख के बहुत करीब है।
समीर की खुदाई अब और भी तेज और लयबद्ध हो गई थी, वह बार-बार मेघा के कानों में मीठी बातें कर रहा था और उसके मटर जैसे निप्पलों को अपनी उंगलियों से मसल रहा था। मेघा का पूरा शरीर थरथराने लगा और उसने अपनी मुट्ठियां भींच लीं, क्योंकि उसे महसूस हो रहा था कि उसकी खाई के अंदर से एक गर्म फव्वारा फूटने वाला है। “जीजू, मेरा रस निकलने वाला है, मैं और सहन नहीं कर सकती,” मेघा चिल्लाई और तभी उसकी खाई ने समीर के खीरे को बहुत जोर से जकड़ लिया और उसका सारा रस बाहर निकल आया।
समीर भी अब अपने आप को रोक नहीं पाया और उसने अंतिम कुछ जोरदार धक्के लगाए और अपना सारा गर्म रस मेघा की गहरी खाई के अंदर ही उड़ेल दिया, जिससे मेघा को एक असीम सुख की प्राप्ति हुई। दोनों पसीने से तरबतर होकर एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े और काफी देर तक बस एक-दूसरे की धड़कनों को सुनते रहे, मानो उस पल में समय ठहर गया हो। मेघा ने समीर के गले लगकर उसके गाल पर एक प्यार भरा चुंबन दिया और कहा कि आज की यह खुदाई उसके जीवन की सबसे यादगार घटना रहेगी और समीर ने भी उसे अपनी बाहों में कसकर भींच लिया।
कुछ देर बाद जब उनकी सांसें सामान्य हुईं, तो मेघा ने समीर की आंखों में देखते हुए कहा कि अब उनके बीच यह रिश्ता और भी गहरा हो गया है और यह सिर्फ जिस्मानी नहीं बल्कि जज्बाती भी है। समीर ने उसके माथे को चूमा और दोनों ने मिलकर अपने बिखरे हुए कपड़ों को समेटा, लेकिन उनके मन में उस दोपहर की वह कामुक यादें हमेशा के लिए कैद हो गई थीं। वे जानते थे कि घर के बाकी सदस्यों के आने से पहले उन्हें सामान्य होना होगा, लेकिन उनकी आंखों की चमक और चेहरे की लाली उनकी उस गुप्त खुदाई की कहानी खुद-ब-खुद बयां कर रही थी।