समीर अपने घर के सोफे पर लेटा हुआ था और बाहर दोपहर की चिलचिलाती धूप खिड़की के पर्दों से छनकर अंदर आ रही थी। उसकी पत्नी मेघा अपने मायके गई हुई थी और घर में समीर के साथ उसकी छोटी बहन रीना रुकी हुई थी। रीना अभी चौबीस साल की थी और शहर में अपनी आगे की पढ़ाई के लिए आई थी। समीर की नज़रें बार-बार किचन की तरफ जा रही थीं जहाँ रीना दोपहर का खाना बना रही थी। रीना का शरीर जवानी की उस दहलीज पर था जहाँ हर अंग अपनी पूर्णता को छू रहा था। समीर ने देखा कि उसने हल्के बैंगनी रंग का रेशमी सूट पहना हुआ था जो उसके शरीर के हर घुमाव को स्पष्ट रूप से उभार रहा था।
रीना जब किचन से बाहर आई तो समीर की धड़कनें तेज़ हो गईं। उसके सामने वाले हिस्से में दो रसीले और बड़े तरबूज साफ झलक रहे थे जो कुर्ती की तंग फिटिंग के कारण बाहर आने को बेताब लग रहे थे। जैसे ही वह समीर के पास से गुजरी, उसके भारी और गोल पिछवाड़े की मटक ने समीर के मन में एक अजीब सी हलचल पैदा कर दी। समीर ने महसूस किया कि उसका खीरा अब पैंट के अंदर अपनी जगह बनाने के लिए छटपटा रहा है। रीना की आँखों में एक अजीब सी चमक थी और उसके चेहरे पर छाई हल्की सी लाली समीर को इशारा दे रही थी कि वह भी इस खामोश दोपहर में कुछ उत्तेजना महसूस कर रही है।
समीर और रीना के बीच हमेशा से एक शरारत भरा रिश्ता रहा था, लेकिन आज उस शरारत में एक गहरी कामुकता घुली हुई थी। रीना समीर के बगल में सोफे पर आकर बैठ गई और उसकी रेशमी त्वचा का स्पर्श समीर की बांह से हुआ। समीर के शरीर में जैसे करंट दौड़ गया। उसने रीना की ओर देखा और पाया कि वह भी समीर की आँखों में गहराई से झाँक रही है। समीर ने धीरे से अपना हाथ रीना के कंधे पर रखा और उसे महसूस हुआ कि रीना का शरीर हल्का सा कांप रहा है। उनके बीच कोई शब्द नहीं थे, बस उनकी सांसों की आवाज़ थी जो धीरे-धीरे तेज़ होती जा रही थी। समीर ने उसके कानों के पास जाकर धीरे से फुसफुसाया, ‘रीना, तुम आज बहुत ज्यादा हसीन लग रही हो।’
रीना ने अपनी नज़रें नीचे झुका लीं लेकिन उसने समीर का हाथ अपने कंधे से नहीं हटाया। समीर ने अपनी उंगलियों से उसके गर्दन के पीछे के छोटे-छोटे बालों को सहलाना शुरू किया। रीना के मुँह से एक धीमी सी आह निकली जो समीर के लिए हरी झंडी की तरह थी। समीर ने धीरे से उसका चेहरा अपनी ओर घुमाया और देखा कि रीना की आँखें आधे बंद हो चुकी थीं। उसने अपने होंठ रीना के माथे पर रखे और फिर धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ते हुए उसके गालों को चूमने लगा। रीना ने समीर की शर्ट को अपने हाथों में कसकर पकड़ लिया और अपना सिर पीछे की ओर झुका दिया, जिससे उसके गले की नसों में खिंचाव आ गया।
समीर अब और इंतज़ार नहीं कर सकता था। उसने रीना की कुर्ती के अंदर अपना हाथ डाला और उसके मुलायम और गरम तरबूज को अपने हाथों में भर लिया। रीना के मुँह से एक जोर की सिसकी निकली जब समीर ने उसके मटर जैसे निप्पल को अपनी उंगलियों के बीच दबाया। वह रेशम जैसा अहसास समीर को पागल कर रहा था। समीर ने धीरे-धीरे रीना की कुर्ती को उसके सिर के ऊपर से उतार दिया और अब वह सिर्फ अपनी ब्रा में उसके सामने थी। समीर ने उसकी ब्रा के हुक को एक झटके में खोल दिया और रीना के दोनों भारी तरबूज समीर की नज़रों के सामने आज़ाद होकर नाचने लगे। समीर ने अपनी जीभ से उन पर बने मटर को सहलाना और चूसना शुरू किया।
रीना पूरी तरह से उत्तेजना की लहरों में बह रही थी। उसने समीर की पैंट की चेन खोली और उसका फन फैलाता हुआ खीरा बाहर निकाला। खीरे की कठोरता और लंबाई देखकर रीना की आँखें फटी की फटी रह गई। उसने धीरे से अपने कांपते हुए हाथों से उस खीरे को पकड़ा और उसे अपने मुँह के पास ले गई। समीर ने अपनी आँखें बंद कर लीं जब रीना ने उसके खीरे को चूसना शुरू किया। उसकी जीभ का स्पर्श और मुँह की गर्माहट समीर को स्वर्ग का अहसास करा रही थी। समीर ने रीना के सिर को पकड़कर अपनी गति बढ़ाई और रीना भी पूरे जोश के साथ उसका साथ दे रही थी।
समीर ने अब रीना की लेगिंग और नीचे के कपड़े भी उतार दिए। रीना अब पूरी तरह से निर्वस्त्र समीर के सामने लेटी हुई थी। उसके दोनों पैरों के बीच की घने बालों वाली खाई अब पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और समीर को अपनी ओर बुला रही थी। समीर ने अपनी उंगली से खाई को खोदना शुरू किया, जिससे रीना अपने कूल्हे ऊपर उठाने लगी। समीर ने अपना चेहरा नीचे झुकाया और रीना की खाई को चाटना शुरू कर दिया। रीना के मुँह से कामुक आवाज़ें निकलने लगीं, ‘ओह समीर… जीजू… और तेज़… मुझे कुछ हो रहा है।’ समीर की जीभ की कुशलता ने रीना को रस छोड़ने के करीब पहुँचा दिया था।
समीर ने अब रीना को सोफे पर ही सामने से खोदने के लिए तैयार किया। उसने अपने विशाल खीरे को रीना की तंग खाई के मुहाने पर रखा और एक ज़ोरदार धक्के के साथ आधा अंदर उतार दिया। रीना के मुँह से एक तीखी चीख निकली और उसने समीर की पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए। समीर कुछ पल के लिए रुका ताकि रीना उस फैलाव को सहन कर सके। फिर उसने धीरे-धीरे खुदाई शुरू की। हर धक्के के साथ रीना के तरबूज हवा में उछलते और समीर के सीने से टकराते। कमरे में सिर्फ उनके जिस्मों के टकराने की आवाज़ और रीना की मदहोश करने वाली कराहें गूँज रही थीं।
समीर ने अब रीना को घुमाया और उसे पिछवाड़े से खोदने वाली मुद्रा में खड़ा कर दिया। रीना का पिछवाड़ा समीर की आँखों के सामने एक पहाड़ी की तरह उभरा हुआ था। समीर ने अपने खीरे को दोबारा उसकी खाई में पीछे से डाला और पूरी ताकत से धक्का मारना शुरू किया। रीना का पूरा शरीर हिल रहा था और वह सोफे के कुशन को कसकर पकड़े हुए थी। समीर ने खुदाई के दौरान रीना के तरबूजों को अपने हाथों से ज़ोर-ज़ोर से दबाना शुरू किया। ‘हाँ रीना… ऐसी ही गहराई चाहिए थी… तुम बहुत तंग हो,’ समीर ने हाँफते हुए कहा। रीना भी जवाब में चिल्लाई, ‘जीजू… मुझे और ज़ोर से खोदो… मैं फटने वाली हूँ।’
खुदाई की प्रक्रिया अब अपने चरम पर थी। समीर और रीना दोनों पसीने में नहा चुके थे और उनकी त्वचा एक-दूसरे से चिपक रही थी। समीर ने रीना को वापस सीधा लिटाया और उसकी टांगों को अपने कंधों पर रख लिया। उसने अंतिम कुछ ज़ोरदार और गहरे धक्के मारे। समीर को महसूस हुआ कि उसका रस अब निकलने ही वाला है। उसी पल रीना के शरीर में एक तेज़ कंपन उठा और उसका रस भी भारी मात्रा में छूटने लगा। समीर ने अपना खीरा रीना की खाई की गहराई तक घुसा दिया और अपना सारा गर्म रस उसके अंदर छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे को कसकर पकड़े हुए काफी देर तक वैसे ही पड़े रहे।
जब उनकी साँसें कुछ सामान्य हुईं, तो रीना ने समीर की आँखों में देखा और उसे चूम लिया। उसकी आँखों में शर्म नहीं बल्कि एक गहरी संतुष्टि और प्यार था। समीर ने उसे अपनी बाहों में समेट लिया और उसके गीले बालों को सहलाया। दोनों को पता था कि यह दोपहर उनके जीवन की सबसे यादगार और रोमांचक दोपहर बन चुकी थी। रीना ने समीर के सीने पर अपना सिर रख दिया और धीरे से कहा, ‘जीजू, आपने आज मुझे वो सुख दिया है जिसके बारे में मैंने सिर्फ सपनों में सोचा था।’ समीर ने मुस्कुराते हुए उसके माथे को चूमा और वे दोनों उस सुकून भरे सन्नाटे में खो गए।