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जवान विधवा मामी के साथ एक रसीली खुदाई

राहुल अपने मामा के देहांत के करीब दो साल बाद पहली बार अपने पुराने गांव आया था। दोपहर की चिलचिलाती धूप में पूरा घर सन्नाटे में डूबा हुआ था और घर में सिर्फ वह और उसकी खूबसूरत मामी मीरा ही मौजूद थे। मीरा की उम्र लगभग पैंतीस के आसपास थी, लेकिन उसका यौवन अभी भी … Read more

कला की पाठशाला में अनकही प्यास

 दोपहर की सुनहरी धूप स्टूडियो की बड़ी खिड़कियों से छनकर आ रही थी, जहाँ कविता अपनी पेंटिंग में डूबी हुई थी। कविता के शरीर का हर मोड़ किसी तराशी हुई मूर्ति की तरह था, उसके रेशमी ब्लाउज के भीतर दबे उसके पुष्ट और रसीले तरबूज हर सांस के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे। उसके पतले … Read more

रेल के सफर की अनकही रात

मीरा की उम्र कोई तीस के करीब रही होगी, लेकिन उसका शरीर किसी पकी हुई सुराही की तरह गढ़ा हुआ था जिसे देखकर किसी भी पुरुष का मन डोल जाए। उसकी नीली शिफॉन की साड़ी उसके अंगों से इस तरह चिपकी थी जैसे पानी बदन से लिपट जाता है, और जब वह चलती थी तो … Read more

कलाकार की प्रेरणा: एक गहरी खुदाई

शहर की शोर-शराबे से दूर, ऊँची पहाड़ियों पर स्थित एक पुराने लकड़ी के बंगले में राघव अपनी चित्रकारी की दुनिया में खोया हुआ था। बाहर सन्नाटा था, लेकिन राघव के भीतर एक अजीब सी बेचैनी थी जो उसे शांत नहीं बैठने दे रही थी। तभी कमरे का दरवाज़ा धीरे से खुला और माया अंदर आई, … Read more

कलात्मकता की परछाईं

पहाड़ों की उस ठंडी और धुंधली दोपहर में सन्नाटा पसरा हुआ था, जहाँ विक्रम अपने विशाल कैनवास पर नैना की जीवंत छवि उतारने की कोशिश कर रहा था। खिड़की से आती सुनहरी धूप नैना के अर्धनग्न बदन पर गिरकर उसे किसी कीमती प्रतिमा की तरह चमका रही थी, और विक्रम की पैनी आँखें उसकी हर … Read more

योगशाला की वह तपती और मदहोश कर देने वाली शाम

मीरा हमेशा से ही अनुशासन की पक्की थी, लेकिन आज योगशाला के उस बंद कमरे में उसकी एकाग्रता जैसे कहीं खो गई थी। उसके सामने खड़ा विक्रम, जो उसका सबसे पुराना और पसंदीदा शिष्य था, आज उसे एक अलग ही नज़र से देख रहा था। मीरा के शरीर पर चिपके हुए योग के कपड़े उसके … Read more

तूलिका की तपिश और मौन समर्पण

पुराने शहर की एक सुनसान कला दीर्घा के कोने में बने उस छोटे से कमरे में चारों ओर कैनवास बिखरे हुए थे और हवा में तारपीन के तेल की तीखी गंध घुली हुई थी। आर्यन अपनी अधूरी पेंटिंग के सामने खड़ा था, लेकिन उसकी नजरें सामने बैठी अवनि पर टिकी थीं, जो आज उसकी मॉडल … Read more

पहाड़ी हवेली की वह मदहोश रात

आर्यन की आँखों में एक अजीब सी चमक थी जब उसने स्नेहा को खिड़की के पास खड़ा देखा, जहाँ चाँदनी उसके गोरे बदन पर किसी मखमली चादर की तरह लिपटी हुई थी। स्नेहा ने एक हल्की रेशमी साड़ी पहनी थी जो उसके शरीर के हर उतार-चढ़ाव को बड़ी बेरहमी से बयां कर रही थी, और … Read more

छाया और स्पर्श की दास्तान

समीर और नव्या की वह रात सन्नाटे से भरी थी, लेकिन उस खामोशी में भी एक गूँज थी जो केवल वे दोनों ही महसूस कर सकते थे। स्टूडियो की धुंधली रोशनी नव्या के चेहरे पर एक अजीब सी चमक पैदा कर रही थी, और समीर उसे अपनी आँखों से नहीं बल्कि अपनी आत्मा से देख … Read more

तूलिका की तपिश और मौन समर्पण

पुराने शहर की एक सुनसान कला दीर्घा के कोने में बने उस छोटे से कमरे में चारों ओर कैनवास बिखरे हुए थे और हवा में तारपीन के तेल की तीखी गंध घुली हुई थी। आर्यन अपनी अधूरी पेंटिंग के सामने खड़ा था, लेकिन उसकी नजरें सामने बैठी अवनि पर टिकी थीं, जो आज उसकी मॉडल … Read more

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