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रेयांश और अजनबी पड़ोसन खुदाई

शहर की उस ऊँची इमारत की दसवीं मंजिल पर रेयांश पिछले दो सालों से अकेला रह रहा था, लेकिन पिछले हफ्ते ही उसके बगल वाले फ्लैट में मायरा रहने आई थी। मायरा की शख्सियत में एक अजीब सा ठहराव और रहस्य था जो रेयांश को पहली ही नजर में अपनी ओर खींच ले गया। वह … Read more

रिया साली की खुदाई

उस शाम बादलों ने जैसे पूरे शहर को अपनी बाहों में भर लिया था, और रह-रहकर होती बारिश की बौछारें मन के भीतर दबी हुई अनकही इच्छाओं को जगा रही थीं। अर्जुन बरामदे में बैठा हुआ गिरती हुई बूंदों को देख रहा था, तभी उसकी साली रिया हाथ में अदरक वाली चाय के दो प्याले … Read more

रिया साली की खुदाई

गर्मियों की वह सुनहरी शाम थी जब रोहन अपने ससुराल के उस पुराने पुश्तैनी हवेलीनुमा घर में पहुँचा, जहाँ वक़्त जैसे ठहर सा गया था। उसकी पत्नी किसी ज़रूरी काम से शहर में ही रुक गई थी, और रोहन को अकेले ही इस बड़े से घर में अपनी साली रिया के साथ कुछ दिन बिताने … Read more

रिया बुआ और यादों की खुदाई

पुरानी हवेली के उस धुंधले कोने में, जहाँ समय की धूल ने यादों की एक मोटी परत जमा दी थी, आर्यन अपनी रिया बुआ के साथ खड़ा था। हवेली की खामोशी में केवल उनकी सांसों की हल्की आवाज़ और बाहर हो रही रिमझिम बारिश का संगीत सुनाई दे रहा था। रिया बुआ, जो उम्र में … Read more

स्नेहा मैम और यादों की खुदाई

बरसों बाद जब आर्यन ने स्नेहा मैम के घर की घंटी बजाई, तो उसका दिल उसी तरह धड़क रहा था जैसे सालों पहले गणित के कठिन सवालों के दौरान धड़कता था। दरवाज़ा खुला और सामने स्नेहा खड़ी थीं, समय जैसे उनके लिए थम सा गया था। उनके चेहरे की चमक, उनकी आँखों की गहराई और … Read more

रीमा और दर्जी खुदाई

रीमा और दर्जी खुदाई—> बाहर मानसून की पहली बारिश अपनी पूरी शिद्दत के साथ बरस रही थी, जिससे उस पुरानी और संकरी गली की मिट्टी से सोंधी महक उठकर पूरे वातावरण में घुल गई थी। रीमा ने अपनी छतरी समेटी और आर्यन की छोटी सी लेकिन बेहद करीने से सजी हुई दर्जी की दुकान के … Read more

पड़ोसन और प्रेम की खुदाई

शहर की उस पुरानी और जर्जर सी दिखने वाली इमारत में सुहानी का आना किसी ताजी हवा के झोंके जैसा था, जिसने मेरे नीरस जीवन की धूल झाड़ दी थी। वह मेरे ठीक बगल वाले फ्लैट में रहने आई थी और पहली ही मुलाकात में उसकी आँखों की गहराई ने मुझे अपने मोहपाश में बाँध … Read more

संजना संग प्रेम खुदाई

संजना संग प्रेम खुदाई—> उस रात की खामोशी में एक अजीब सी खनक थी, जैसे समय खुद अपनी रफ़्तार को ट्रेन की पटरियों के साथ मिलाने की कोशिश कर रहा हो। राजधानी एक्सप्रेस के उस सुनसान और धुंधले उजाले वाले केबिन में मेरा और संजना का आमना-सामना हुआ, जो मेरे लिए एक अजनबी थी, मगर … Read more

शालू और समीर की इश्किया खुदाई

शालू और समीर की इश्किया खुदाई—>मई की उस तपती दोपहर में जब सूरज अपनी पूरी शिद्दत के साथ तप रहा था, समीर अपनी छोटी सी दर्जी की दुकान में बैठा पुराने रेडियो पर बजते धीमे संगीत में खोया हुआ था। उसकी उंगलियाँ बड़ी नज़ाकत से मखमली कपड़े पर चाक से निशान बना रही थीं, तभी … Read more

समीर मास्टर और रिया की खुदाई

समीर की छोटी सी बुटीक नुमा दुकान में उस दिन एक अजीब सी रूहानियत और खामोशी पसरी हुई थी, जिसमें सिर्फ पुरानी सिलाई मशीन की लयबद्ध आवाज़ ही गूँज रही थी। बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी और दुकान के कांच के दरवाज़े पर पानी की बूंदें एक धुंधली सी परत बना रही थीं, जो … Read more

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