मालकिन के संग दफ्तर की चु@@ई
दफ्तर की उस गगनचुम्बी इमारत की चौदहवीं मंजिल पर सन्नाटा पसरा हुआ था और बाहर शहर की रोशनियां किसी सजे हुए कालीन की तरह बिछी हुई थीं। रात के दो बज रहे थे और आर्यन अभी भी अपनी मेज पर झुका हुआ कल सुबह होने वाली बड़ी प्रेजेंटेशन की फाइलों को दुरुस्त कर रहा था। … Read more