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मालकिन के संग दफ्तर की चु@@ई

दफ्तर की उस गगनचुम्बी इमारत की चौदहवीं मंजिल पर सन्नाटा पसरा हुआ था और बाहर शहर की रोशनियां किसी सजे हुए कालीन की तरह बिछी हुई थीं। रात के दो बज रहे थे और आर्यन अभी भी अपनी मेज पर झुका हुआ कल सुबह होने वाली बड़ी प्रेजेंटेशन की फाइलों को दुरुस्त कर रहा था। तभी उसके कानों में ऊँची हील्स की खट-खट सुनाई दी जिसने दफ्तर की खामोशी को चीर कर रख दिया। वह और कोई नहीं बल्कि उसकी बॉस मिसेज मेहरा थीं जो अपनी उम्र के चालीसवें पड़ाव पर होने के बावजूद किसी अप्सरा से कम नहीं लगती थीं। उन्होंने काले रंग की शिफॉन की साड़ी पहनी हुई थी जिसके पारदर्शी कपड़े से उनकी गोरी पीठ और कमर का उभार साफ़ झलक रहा था। उनके चलने के अंदाज में एक ऐसी मादकता थी जो किसी भी पुरुष के मन में हलचल पैदा कर दे और आर्यन तो वैसे भी पिछले कई महीनों से उनकी खूबसूरती का कायल था। मिसेज मेहरा उसके पास आकर खड़ी हो गईं और उनकी परफ्यूम की तेज खुशबू ने आर्यन के होश फाख्ता कर दिए।

मिसेज मेहरा का शरीर किसी तराशी हुई मूरत जैसा था जिसमें उनके बड़े-बड़े तरबूज साड़ी के ब्लाउज को फाड़कर बाहर आने को बेताब दिख रहे थे। उनकी साड़ी का पल्लू बार-बार खिसक रहा था जिससे उनके सीने की गहरी खाई और उन तरबूजों की गोलाई आर्यन की आंखों के सामने बार-बार आ रही थी। आर्यन ने गौर किया कि उनके चेहरे पर आज थकान के साथ-साथ एक अजीब सी बेचैनी थी। उनके होंठ लाल सुर्ख थे और उनकी आंखों में एक ऐसी प्यास थी जिसे वह चाहकर भी नहीं छुपा पा रही थीं। आर्यन की नजरें जब उनके ब्लाउज के भीतर छिपे उन भारी तरबूजों पर पड़ीं तो उसे महसूस हुआ कि उन पर लगे नन्हे मटर ठंड और उत्तेजना की वजह से उभर आए हैं। वह साड़ी उनकी देह पर इस कदर चिपकी थी कि उनके चौड़े कूल्हों और भारी पिछवाड़े की बनावट साफ़ तौर पर दिखाई दे रही थी जो हर कदम के साथ लहर मार रहे थे।

मिसेज मेहरा आर्यन के टेबल के पास रखी कुर्सी पर बैठ गईं और अपनी फाइल चेक करने का बहाना करने लगीं। उनके और आर्यन के बीच की दूरी बहुत कम थी और आर्यन को उनकी गरम सांसें अपनी गर्दन पर महसूस हो रही थीं। काम की बातें करते-करते मिसेज मेहरा ने अपना हाथ आर्यन के हाथ पर रख दिया जो अनजाने में हुआ स्पर्श नहीं लग रहा था। उनके स्पर्श में एक बिजली थी जिसने आर्यन के शरीर के भीतर दबे हुए खीरे को नींद से जगा दिया था। मिसेज मेहरा ने उसकी आंखों में देखा और धीमी आवाज में कहा कि आर्यन तुम बहुत मेहनत करते हो क्या तुम्हें कभी थकान नहीं होती। आर्यन ने उनकी नशीली आंखों में डूबते हुए जवाब दिया कि मैम जब आप साथ हों तो थकान का अहसास ही नहीं होता। यह सुनकर मिसेज मेहरा के चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आई और उन्होंने अपना पल्लू जानबूझकर कंधे से नीचे गिरा दिया जिससे उनके विशाल तरबूज अब और भी ज्यादा नुमाया हो गए थे।

हवा में एक अजीब सी उत्तेजना का जन्म हो चुका था और कमरे का तापमान अचानक बढ़ता हुआ महसूस हो रहा था। मिसेज मेहरा ने अपनी कुर्सी आर्यन के और करीब कर ली जिससे उनके रेशमी बदन का स्पर्श आर्यन की बांहों से होने लगा। आर्यन का मन कर रहा था कि वह अपनी सारी झिझक छोड़कर उन्हें बांहों में भर ले लेकिन ऑफिस की मर्यादा उसे रोक रही थी। तभी मिसेज मेहरा ने धीरे से फुसफुसाते हुए कहा कि आज रात घर जाने का मन नहीं है क्या हम यहाँ कुछ और नहीं कर सकते। उनकी इस बात ने आर्यन की हिम्मत बढ़ा दी और उसने धीरे से अपना हाथ उनकी मखमली कमर पर रख दिया। मिसेज मेहरा ने अपनी आंखें बंद कर लीं और एक गहरी आह भरी जिससे उनके तरबूज तेजी से ऊपर-नीचे होने लगे। उस छुअन ने दोनों के बीच की सारी दीवारें गिरा दी थीं और अब केवल आदिम इच्छाएं ही बाकी रह गई थीं जो बाहर निकलने को छटपटा रही थीं।

आर्यन ने धीरे से अपने होंठ उनकी गर्दन के पास ले जाकर पंखुड़ियों जैसा स्पर्श किया जिससे मिसेज मेहरा के पूरे शरीर में एक कंपकंपी दौड़ गई। उन्होंने आर्यन के बालों में अपनी उंगलियां फंसा लीं और उसे अपने और करीब खींच लिया। आर्यन ने हिम्मत जुटाकर उनके ब्लाउज के हुक खोलना शुरू किए और जैसे ही वह आजाद हुए उनके विशाल तरबूज किसी झरने की तरह बाहर निकल आए। आर्यन की आंखों के सामने वह अद्भुत नजारा था जिसमें दूध जैसे गोरे तरबूजों के ऊपर गुलाबी मटर चमक रहे थे। उसने धीरे से अपना मुंह उन तरबूजों पर रखा और उनके मटर को अपनी जुबान से सहलाने लगा। मिसेज मेहरा के मुंह से एक दबी हुई चीख निकली और उन्होंने आर्यन का सिर अपनी छाती से चिपका लिया। वह बार-बार कह रही थीं कि आर्यन मुझे आज और मत तड़पाओ मुझे तुम्हारी जरूरत है। आर्यन का खीरा अब पूरी तरह से अकड़ चुका था और अपनी पैंट के भीतर से बाहर आने को व्याकुल था।

धीरे-धीरे आर्यन ने उनकी साड़ी को पूरी तरह से शरीर से अलग कर दिया और अब मिसेज मेहरा केवल अपने अंतःवस्त्रों में थीं। उनकी रेशमी त्वचा पर पसीने की छोटी-छोटी बूंदें चमक रही थीं जो उनकी कामुकता को और बढ़ा रही थीं। आर्यन ने उन्हें उठाकर मेज पर लिटा दिया और उनके रेशमी बालों को सहलाते हुए उनके पैरों के बीच की गहराई तक पहुंच गया। वहां घने काले बालों के बीच उनकी रेशमी खाई पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और वहां से प्यार का रस टपक रहा था। आर्यन ने अपनी उंगली से खाई को टटोलना शुरू किया तो मिसेज मेहरा अपनी कमर ऊपर उठाने लगीं। उन्होंने अपनी टांगें आर्यन के कंधों पर रख दीं और उसे और भी गहराई से उंगली से खोदने को कहा। उनकी खाई इतनी तंग और गरम थी कि आर्यन को लग रहा था जैसे वह किसी ज्वालामुखी के मुहाने पर खड़ा हो।

अब सब्र का बांध टूट चुका था और आर्यन ने अपनी पैंट उतारकर अपने लोहे जैसे सख्त खीरे को बाहर निकाला। मिसेज मेहरा की नजरें जब उस विशाल खीरे पर पड़ीं तो उनकी आंखें फटी की फटी रह गई और उन्होंने धीरे से उसे अपने हाथों में थाम लिया। उन्होंने उस खीरे को अपने मुंह में लिया और बड़े चाव से चूसना शुरू कर दिया जिससे आर्यन के पूरे शरीर में बिजली की लहरें दौड़ने लगीं। काफी देर तक खीरा चूसने के बाद मिसेज मेहरा ने उसे इशारे से अपने ऊपर आने को कहा। आर्यन ने उन्हें मेज के किनारे पर बिठाया और अपने खीरे के अगले हिस्से को उनकी रसीली खाई के मुहाने पर टिका दिया। जैसे ही उसने पहला जोर का धक्का लगाया मिसेज मेहरा के मुंह से एक लंबी आह निकली और उनका पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया। वह पहली बार की खुदाई का आनंद ले रही थीं जो बहुत ही गहरी और जादुई थी।

आर्यन अब पूरी लय में आ चुका था और उसने मिसेज मेहरा की कमर पकड़कर तेजी से खुदाई शुरू कर दी। हर धक्के के साथ खीरा उनकी खाई की गहराई तक जा रहा था और एक अजीब सी चप-चप की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। मिसेज मेहरा अपने हाथों से मेज के कोनों को मजबूती से पकड़े हुए थीं और उनके तरबूज हर धक्के के साथ ऊपर-नीचे उछल रहे थे। आर्यन ने झुककर उनके मटर को अपने दांतों से हल्का सा दबाया जिससे उनकी उत्तेजना चरम पर पहुंच गई। खुदाई की रफ्तार अब और तेज हो गई थी और दोनों के शरीरों से पसीना बहकर एक-दूसरे में मिल रहा था। मिसेज मेहरा चिल्ला रही थीं कि हाँ आर्यन और तेज खोदो मुझे आज पूरी तरह से अपना बना लो। उनकी आवाज में एक अजीब सा सुकूँ और तड़प का मेल था जो आर्यन को और भी ज्यादा जंगली बना रहा था।

बीच खुदाई में आर्यन ने उन्हें घुमाकर मेज के सहारे झुका दिया जिससे उनका भारी पिछवाड़ा अब पूरी तरह से उसके सामने था। आर्यन ने उनके पिछले हिस्से को सहलाया और फिर पिछवाड़े से खोदने की मुद्रा में अपने खीरे को फिर से खाई के भीतर उतार दिया। यह स्थिति और भी ज्यादा रोमांचक थी क्योंकि अब वह उनके बालों को पकड़कर उन्हें पीछे से झटके दे रहा था। मिसेज मेहरा की चीखें अब दफ्तर की दीवारों को पार करने की कोशिश कर रही थीं। खुदाई इतनी दमदार थी कि मेज पर रखे पेन और फाइलें नीचे गिरने लगी थीं लेकिन किसी को इसकी परवाह नहीं थी। मिसेज मेहरा बार-बार अपने हाथों को पीछे ले जाकर आर्यन के खीरे को सहला रही थीं और उसे और भी जोर से प्रहार करने के लिए उकसा रही थीं।

अंत में जब दोनों का शरीर पूरी तरह से पसीने से लथपथ हो गया और उत्तेजना अपनी सीमाएं लांघने लगी तो आर्यन को महसूस हुआ कि उसका रस छूटने वाला है। मिसेज मेहरा भी बुरी तरह से कांप रही थीं और उनकी खाई के भीतर की दीवारें खीरे को जोर से जकड़ रही थीं। आर्यन ने आखिरी कुछ बहुत तेज और गहरे धक्के लगाए और अपना सारा गर्म रस उनकी खाई की गहराइयों में छोड़ दिया। उसी समय मिसेज मेहरा का भी रस निकल गया और वह आर्यन की बांहों में निढाल होकर गिर पड़ीं। कमरे में केवल उन दोनों की भारी सांसों की आवाज सुनाई दे रही थी। काफी देर तक दोनों एक-दूसरे से लिपटे रहे जैसे समय वहीं रुक गया हो। मिसेज मेहरा ने आर्यन के माथे को चूमा और कहा कि तुमने आज मुझे वह अहसास दिया है जो मैंने बरसों से महसूस नहीं किया था। दफ्तर की उस रात ने उनके रिश्ते को हमेशा के लिए बदल दिया था और अब वह केवल बॉस और कर्मचारी नहीं बल्कि दो प्यासी रूहें बन चुके थे।

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