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सख्त बॉस की चु@@ई


ऑफिस की बड़ी सी कांच की खिड़की के बाहर रात का अंधेरा गहरा चुका था और शहर की रोशनियां टिमटिमा रही थीं। रात के ग्यारह बज चुके थे और पूरी मंजिल पर सन्नाटा पसरा हुआ था, सिवाय उस केबिन के जहां मैं और मेरी बॉस अनन्या मैम एक जरूरी प्रेजेंटेशन खत्म कर रहे थे। अनन्या मैम, जिनकी उम्र करीब चौंतीस साल थी, अपनी खूबसूरती और कड़क मिजाज के लिए पूरे ऑफिस में मशहूर थीं। आज उन्होंने एक गहरे नीले रंग की सिल्क की शर्ट और काली पेंसिल स्कर्ट पहनी हुई थी, जो उनके शरीर के हर घुमाव को बखूबी उभार रही थी। उनके बैठने के अंदाज से उनकी स्कर्ट थोड़ी ऊपर चढ़ गई थी, जिससे उनकी गोरी और सुडौल जांघें साफ नजर आ रही थीं और मेरा ध्यान बार-बार काम से भटक कर उनके बदन की बनावट पर जा रहा था।

अनन्या मैम का शरीर किसी तराशी हुई मूरत जैसा था, उनके तरबूज शर्ट के बटन को जैसे तोड़कर बाहर आने को बेताब लग रहे थे। जब भी वे सांस लेतीं, उनके वे उभरे हुए तरबूज धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होते, जिससे उनके बीच की गहरी घाटी साफ झलकती थी। उनकी कमर पतली थी लेकिन उनका पिछवाड़ा काफी भरा हुआ और गोल था, जो पेंसिल स्कर्ट में बहुत ही आकर्षक लग रहा था। उनके चेहरे पर हमेशा एक गंभीरता रहती थी, लेकिन उनकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी जो किसी को भी मदहोश कर सकती थी। मैं पिछले दो साल से उनके नीचे काम कर रहा था और मन ही मन उन्हें बहुत चाहता था, लेकिन उनकी सख्ती के आगे कभी कुछ कहने की हिम्मत नहीं हुई थी।

आज रात की इस तन्हाई में हमारे बीच एक अजीब सी बेचैनी और तनाव महसूस हो रहा था जो काम से संबंधित नहीं था। हवा में उनकी महकती हुई परफ्यूम की खुशबू फैली हुई थी जो सीधे मेरे दिमाग पर असर कर रही थी। प्रेजेंटेशन की स्लाइड्स देखते हुए हमारे हाथ कई बार एक-दूसरे से टकराए, और हर बार जैसे मेरे शरीर में बिजली का एक करंट सा दौड़ जाता। मैंने गौर किया कि अनन्या मैम भी आज थोड़ी अलग लग रही थीं, वे बार-बार अपनी जुल्फों को कान के पीछे करतीं और उनकी सांसें भी कुछ भारी लग रही थीं। वे शायद जानती थीं कि मैं उन्हें देख रहा हूं, फिर भी उन्होंने मुझे टोका नहीं, बल्कि उनके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान तैर गई थी जो उनकी सख्ती को कम कर रही थी।

अचानक अनन्या मैम उठीं और कॉफी बनाने की मशीन की तरफ बढ़ीं, लेकिन शायद थकान की वजह से उनका पैर लड़खड़ाया। मैंने फुर्ती से उठकर उन्हें गिरने से बचाने के लिए अपनी बाहों में थाम लिया। उस पल हमारा शरीर एक-दूसरे से पूरी तरह सट गया था। मेरे हाथों ने उनके पतली कमर को कसकर पकड़ रखा था और उनके दोनों नरम तरबूज सीधे मेरे सीने से टकरा रहे थे। उनकी धड़कनें तेज थीं और वे सीधे मेरी आंखों में देख रही थीं। उस समय न तो कोई फाइल थी और न ही कोई बॉस-जूनियर का रिश्ता, बस दो तड़पते हुए जिस्म थे जो एक-दूसरे की गर्माहट महसूस कर रहे थे। उन्होंने अपनी नजरें नहीं हटाईं और मैंने धीरे से उनके चेहरे को अपने हाथों में लिया।

हमारी सांसें एक-दूसरे के चेहरे पर टकरा रही थीं और माहौल पूरी तरह से कामुक हो चुका था। मैंने धीरे से झुककर उनके होंठों के पास अपनी सांसें छोड़ीं और उन्होंने अपनी आंखें बंद कर लीं, जो एक तरह से हरी झंडी थी। जैसे ही मैंने उनके गुलाबी होंठों को छुआ, उन्होंने अपनी बाहें मेरी गर्दन के चारों ओर लपेट दीं और मुझे अपनी ओर और भी जोर से खींच लिया। हम दोनों एक-दूसरे में खो गए थे, जैसे सालों की प्यास बुझा रहे हों। उनकी जीभ मेरे मुंह के अंदर अपनी जगह बना रही थी और मेरा हाथ उनकी स्कर्ट के ऊपर से उनके उभरे हुए और मांसल पिछवाड़े को सहलाने लगा था, जो छूने में बहुत ही कोमल और गद्देदार महसूस हो रहा था।

अनन्या मैम ने धीरे से अपनी शर्ट के बटन खोलना शुरू किया और जैसे ही सिल्क का कपड़ा नीचे गिरा, उनके सफेद ब्रा में कैद विशाल तरबूज मेरी आंखों के सामने थे। उनकी ब्रा का हुक खोलते ही वे आजाद हो गए और उनकी बनावट देखकर मेरी सांसें थम गईं। उन तरबूजों के बीच के हिस्से में दो छोटे और सख्त मटर साफ उभर आए थे जो ठंड और उत्तेजना की वजह से अकड़ गए थे। मैंने अपने हाथों में उन दोनों तरबूजों को भरकर उन्हें मसलना शुरू किया, जिससे उनके मुंह से एक धीमी सी आह निकली। वे मेरे बालों में अपनी उंगलियां फंसाकर मुझे और करीब खींच रही थीं, उनकी आवाज अब कामुकता से भारी हो गई थी और वे बार-बार मेरा नाम पुकार रही थीं।

मैंने उन्हें टेबल पर बिठा दिया और उनकी स्कर्ट और अंडरवियर को नीचे खींच लिया। जैसे ही उनकी टांगें खुलीं, मेरी आंखों के सामने उनकी रेशमी और नम खाई थी, जो झाड़ियों जैसे काले बालों से घिरी हुई थी। वहां से निकलने वाली खुशबू ने मुझे पागल कर दिया था। मैंने अपनी जुबान से उनकी खाई चाटना शुरू किया, तो वे पूरी तरह से कांप उठीं। उनके हाथ टेबल को कसकर पकड़े हुए थे और उनका पिछवाड़ा हवा में उठ रहा था। मैंने उनकी खाई के मटर जैसे दाने को अपने दांतों से हल्का सा सहलाया, तो उनका शरीर धनुष की तरह तन गया। वे चिल्ला उठीं और उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े, वे बार-बार कह रही थीं कि “रोहन, मुझे और चाहिए, रुको मत।”

अब मेरी बारी थी, मैंने अपनी पैंट उतारी और मेरा सख्त खीरा पूरी तरह से बाहर निकल आया जो उनकी खाई में जाने के लिए बेताब था। अनन्या मैम ने जब मेरे खीरे को देखा तो उनकी आंखें फटी रह गईं, उन्होंने उसे अपने हाथों में पकड़ा और उसकी लंबाई और मोटाई को महसूस किया। उन्होंने धीरे से मेरे खीरे को अपने मुंह में लिया और उसे चूसना शुरू किया। उनके मुंह की गर्माहट और जीभ के स्पर्श ने मुझे स्वर्ग जैसा एहसास कराया। वे बहुत ही सलीके से खीरा चूस रही थीं, कभी उसे पूरा अंदर लेतीं तो कभी उसकी नोक को सहलातीं। मैं अपनी आंखें बंद करके उस परम सुख का आनंद ले रहा था और मेरा हाथ उनके तरबूजों को लगातार सहला रहा था।

थोड़ी देर बाद अनन्या मैम ने मुझे लेटने का इशारा किया और वे खुद मेरे ऊपर बैठ गईं। उन्होंने मेरे खीरे को अपनी खाई के मुहाने पर रखा और धीरे-धीरे नीचे बैठने लगीं। जैसे-जैसे मेरा खीरा उनकी तंग खाई के अंदर जा रहा था, उनके चेहरे पर दर्द और आनंद का मिला-जुला भाव था। जब मेरा खीरा पूरा अंदर समा गया, तो उन्होंने एक लंबी आह भरी और कुछ पल के लिए शांत हो गईं ताकि उनका जिस्म उस भराव को महसूस कर सके। फिर उन्होंने धीरे-धीरे अपने पिछवाड़े को ऊपर-नीचे करना शुरू किया। उनकी हर हरकत के साथ मेरे खीरे और उनकी खाई के बीच एक गीली आवाज हो रही थी जो शांत कमरे में गूंज रही थी।

सामने से खोदना अब बहुत ही आनंददायक हो गया था, उनके तरबूज मेरी आंखों के सामने झूल रहे थे और मैं बारी-बारी से उनके मटर को चूस रहा था। अनन्या मैम अब पूरी लय में थीं, वे बहुत तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थीं और उनकी सांसें उखड़ रही थीं। उन्होंने मेरे हाथों को पकड़ा और अपने ऊपर खींच लिया। फिर वे टेबल पर झुक गईं और मुझे पीछे से आने को कहा। मैंने उनके भरे हुए पिछवाड़े को पीछे से पकड़ा और अपने खीरे को फिर से उनकी खाई में डाल दिया। पिछवाड़े से खोदना उन्हें बहुत ज्यादा उत्तेजित कर रहा था। मेरी हर चोट उनके शरीर के गहरे हिस्सों तक पहुंच रही थी और वे बेतहाशा अपनी कमर हिला रही थीं।

खुदाई की यह प्रक्रिया अब अपने चरम पर पहुंच रही थी। कमरे का तापमान जैसे बढ़ गया था और हम दोनों पसीने से तरबतर थे। अनन्या मैम ने पीछे मुड़कर मुझे चूमा और कहा, “रोहन, मुझे छोड़ना मत, मुझे पूरा भर दो।” उनकी आंखों में उस समय जो समर्पण और प्यास थी, उसने मेरी रफ्तार और बढ़ा दी। मैं अब पूरी ताकत से उन्हें खोद रहा था, उनके मांसल पिछवाड़े और मेरी जांघों के टकराने की आवाजें तेज हो गई थीं। वे बार-बार कह रही थीं कि उनका रस छूटने वाला है और वे अब बर्दाश्त नहीं कर सकतीं। उनकी खाई अब बहुत ज्यादा गीली और गरम हो चुकी थी जो मेरे खीरे को चारों तरफ से जकड़ रही थी।

अचानक अनन्या मैम का शरीर पूरी तरह से थरथराने लगा और उन्होंने मुझे कसकर अपनी ओर खींच लिया। उनकी खाई की मांसपेशियां मेरे खीरे को जोर-जोर से भींचने लगीं, यह संकेत था कि उनका रस छूट गया है। वे पागलों की तरह कांप रही थीं और उनके मुंह से सिसकियां निकल रही थीं। उनके रस के निकलते ही मेरी सहनशक्ति भी जवाब दे गई और मैंने भी अपने खीरे से सारा गरम रस उनकी खाई के अंदर उड़ेल दिया। हम दोनों कुछ मिनटों तक उसी हालत में एक-दूसरे से चिपके रहे, हमारी सांसें बहुत तेज थीं और दिल की धड़कनें एक-दूसरे को सुनाई दे रही थीं। वह पल बहुत ही सुकून भरा और भावनात्मक था।

कुछ देर बाद हम अलग हुए और अनन्या मैम ने अपनी बिखरी हुई शर्ट को समेटा। उनके चेहरे पर एक अजीब सा संतोष और चमक थी जो मैंने पहले कभी नहीं देखी थी। उन्होंने मुझे अपनी बाहों में लिया और मेरे माथे को चूमा। ऑफिस के उस शांत माहौल में, जहां थोड़ी देर पहले सिर्फ काम की बातें होती थीं, अब एक गहरा रिश्ता बन चुका था। हमारी हालत ऐसी थी जैसे हमने कोई बहुत बड़ी जंग जीत ली हो। अनन्या मैम ने मुस्कुराते हुए कहा कि अब घर चलना चाहिए, लेकिन उनकी आंखों ने साफ कह दिया था कि यह सिर्फ एक रात की बात नहीं थी।

हमने अपने कपड़े ठीक किए और ऑफिस से बाहर निकले। लिफ्ट में भी हमारा हाथ एक-दूसरे से जुड़ा हुआ था। उस रात की उस गहरी खुदाई ने हमारे बीच की सारी दूरियां और झिझक मिटा दी थी। अनन्या मैम, जो कल तक मेरी सख्त बॉस थीं, अब मेरे लिए एक ऐसी औरत थीं जिसने मुझे अपना सब कुछ सौंप दिया था। कार की ओर जाते हुए उन्होंने धीरे से मेरे कान में फुसफुसाया, “कल थोड़ा जल्दी आना, कुछ और जरूरी काम बाकी है।” उनकी उस बात ने मुझे फिर से रोमांचित कर दिया और मैं मुस्कुराते हुए अपनी कार की ओर बढ़ गया, यह जानते हुए कि अब हमारी जिंदगी पहले जैसी नहीं रहेगी।

पूरी रात मेरे दिमाग में उनके तरबूजों की नरमी और उनकी खाई की गर्माहट घूमती रही। वह अहसास इतना गहरा था कि मुझे अभी भी अपने शरीर पर उनकी खुशबू महसूस हो रही थी। अनन्या मैम का वह रूप, जो उन्होंने सिर्फ मेरे लिए खोला था, मेरे लिए किसी वरदान से कम नहीं था। ऑफिस की फाइलों और कंप्यूटर स्क्रीन के पीछे छुपी वह कामुकता अब पूरी तरह से बाहर आ चुकी थी। मैंने घर पहुंचकर अपनी आंखें बंद कीं तो फिर से वही नजारा सामने आ गया—अनन्या मैम का वह गोल पिछवाड़ा और उनके मटर जैसे दाने जिन्हें मैंने बड़े चाव से चखा था। यह तो बस एक नई और रोमांचक शुरुआत थी।

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