पड़ोसन कविता की चु@@ई—>कहानी

कविता ३४ साल की एक बेहद आकर्षक और सुडौल महिला थी, जिसके बदन की बनावट किसी भी मर्द का मन विचलित करने के लिए काफी थी। कविता की काया में एक गजब का उभार था; उसके तरबूज इतने बड़े और कसरती थे कि साड़ी का ब्लाउज हमेशा उन पर कसा हुआ रहता था। जब वह … Read more

अतृप्त इच्छाओं की गरम चु@@ई और मीरा भाभी का समर्पण

अतृप्त इच्छाओं की गरम चु@@ई और मीरा भाभी का समर्पण —> दोपहर की वह तपती धूप कमरे की खिड़कियों से छनकर अंदर आ रही थी, जिससे पूरा वातावरण एक अजीब सी उमस से भर गया था। मीरा भाभी रसोई में काम कर रही थीं और उनके बदन से निकलता पसीना उनकी पतली साड़ी को शरीर … Read more

मीरा मैम का सूना घर और मेरी पहली चु@@ई की दास्तां

मीरा मैम का सूना घर और मेरी पहली चु@@ई की दास्तां —> दस साल के लंबे अंतराल के बाद जब मैं अपनी पुरानी गली से गुज़रा, तो मीरा मैम के घर के बाहर रुकने से खुद को रोक नहीं पाया। वो मेरी गणित की ट्यूशन टीचर थीं, जिनके सान्निध्य में मैंने किशोरावस्था की दहलीज पार … Read more

पड़ोसन शोभा की चु@@ई

पड़ोसन शोभा की चु@@ई—>नया शहर और नया अपार्टमेंट, समीर के लिए सब कुछ एक ताज़गी भरा अहसास लेकर आया था। समीर एक फ्रीलांस फोटोग्राफर था, जिसकी आँखों में हमेशा दृश्यों को गहराई से देखने की आदत थी। उसका फ्लैट नंबर 402 था और ठीक उसके सामने वाले फ्लैट 401 में शोभा जी रहती थीं। शोभा … Read more

साली संग रसीली चु@@ई

साली संग रसीली चु@@ई—> उस रात घर में एक अजीब सी खामोशी और गर्माहट घुली हुई थी। समीर सोफे पर बैठा टीवी देख रहा था, लेकिन उसका ध्यान बार-बार रसोई की तरफ जा रहा था जहाँ उसकी साली कविता खाना गर्म कर रही थी। समीर की पत्नी ऋतु पिछले चार दिनों से अपने मायके गई … Read more

गर्म बाग की चु@@ई

नमस्ते भाइयों और बहनों, आज की ये दास्तान उस दोपहर की है जब सूरज अपनी पूरी तपिश बिखेर रहा था और गाँव के पुराने बागों में सन्नाटा पसरा हुआ था। मैं अपने पुराने बाग की देखभाल कर रहा था, जहाँ सालों से मेरी मेहनत का पसीना मिट्टी में मिल रहा था। तभी वहाँ मेरी पुरानी … Read more

कविता मैम की चु@@ई

कविता मैम की चु@@ई—> शहर की उस शांत दोपहर में जब सूरज की किरणें खिड़की के पर्दों से छनकर कमरे के फर्श पर सुनहरी लकीरें बना रही थीं, रोहन अपनी पुरानी ट्यूशन टीचर कविता मैम के घर के बाहर खड़ा था। पाँच साल बीत चुके थे, लेकिन उस घर की खुशबू आज भी वही थी। … Read more

कविता माँ की चु@@ई

कविता माँ की चु@@ई—> शहर की उस शांत दोपहर में जब घर के बाकी लोग काम से बाहर थे, आर्यन अपनी सौतेली माँ कविता के साथ घर में अकेला था। कविता की उम्र छत्तीस साल थी, लेकिन उसका शरीर किसी कच्ची कली की तरह खिला हुआ था। उसकी गेंहुआ रंगत और रेशमी साड़ी के भीतर … Read more

रीता की कोच संग चु@@ई

रीता की कोच संग चु@@ई—> जिम की ठंडी हवा और चारों तरफ मशीनों की खनक के बीच रीता अपनी कसरत में मशगूल थी, लेकिन उसका ध्यान आज बार-बार भटक रहा था। रीता की उम्र लगभग बत्तीस साल थी और उसका शरीर एक सजी हुई मूरत की तरह था, जिसकी हर ढलान और उभार किसी को … Read more

रात के सफर की एक मदहोश चु@@ई का एहसास

रात के सफर की एक मदहोश चु@@ई का एहसास —> ट्रेन की उस कूपे में हवा जैसे ठहर गई थी। दिल्ली से मुंबई जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस की गड़गड़ाहट के बीच मेरा दिल अपनी ही रफ्तार से धड़क रहा था। सामने वाली सीट पर बैठी उस अजनबी महिला की रेशमी साड़ी की सरसराहट मुझे बार-बार … Read more

You cannot copy content of this page

error: Content is protected !!