शहर की इस तपती गर्मी में जब मैं अपने नए फ्लैट में शिफ्ट हुआ था, तो मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी बगल वाली दीवार के पीछे इतनी गरमाहट छुपी होगी। मेरा नाम समीर है और मैं एक आईटी कंपनी में काम करता हूँ, अपनी बोरियत भरी जिंदगी से ऊबकर मैंने यह नया घर लिया था। शिफ्टिंग के पहले ही दिन जब मैं अपने भारी डिब्बे अंदर ले जा रहा था, तभी बगल वाले फ्लैट का दरवाजा खुला और वहां से प्रिया बाहर निकली। प्रिया की उम्र करीब 30 के आसपास रही होगी, लेकिन उसका निखरा हुआ बदन और चाल की मदहोशी किसी को भी दीवाना बनाने के लिए काफी थी। उसने एक टाइट कुर्ती पहनी हुई थी जिसमें उसके दोनों रसीले तरबूज साफ झलक रहे थे और उनके ऊपर उभरे हुए मटर अपनी मौजूदगी का एहसास दिला रहे थे।
प्रिया का रंग गेंहुआ था और उसकी आँखें किसी गहरी झील की तरह थीं जिनमें कोई भी डूब सकता था। जब उसने मुझे देखा और मुस्कुराई, तो मेरे दिल की धड़कनें तेज हो गईं, मानो सीने में कोई ड्रम बज रहा हो। उसके शरीर का ढांचा एकदम सुडौल था, कमर इतनी पतली कि कोई भी अपनी उंगलियों में भर ले और पिछवाड़ा इतना भारी कि चलते समय एक अलग ही संगीत पैदा करता था। मैंने देखा कि उसकी कुर्ती के गले से उसके तरबूज थोड़े बाहर झांक रहे थे, जो किसी भी प्यासे को अपना रस पिलाने के लिए बेकरार लग रहे थे। उस दिन के बाद से मेरी रातों की नींद और दिन का चैन गायब हो गया था, बस हर वक्त प्रिया का ही चेहरा सामने रहता था।
धीरे-धीरे हमारी बातचीत बढ़ने लगी और मुझे पता चला कि उसका पति अक्सर बिजनेस ट्रिप पर बाहर रहता है और वह यहाँ बिल्कुल अकेली महसूस करती है। एक शाम जब बाहर घनघोर बारिश हो रही थी और बिजली कड़क रही थी, तभी मेरे फ्लैट की घंटी बजी और सामने प्रिया खड़ी थी, वह पूरी तरह भीगी हुई थी। बारिश की बूंदें उसके चेहरे से होती हुई उसकी गर्दन और फिर उसके तरबूजों के बीच की गहरी घाटी में समा रही थीं। भीगने की वजह से उसकी कुर्ती उसके बदन से चिपक गई थी, जिससे उसके शरीर का हर उतार-चढ़ाव और भी साफ़ दिखने लगा था। मैंने उसे अंदर आने को कहा और वह कांपती हुई अंदर आ गई, उसकी सांसें तेज थीं और उसकी आँखों में एक अजीब सी बेचैनी थी।
प्रिया ने झिझकते हुए कहा कि उसे बिजली के कड़कने से डर लगता है और घर में लाइट भी चली गई है, इसलिए वह मेरे पास आ गई। मैंने उसे तौलिया दिया और जैसे ही हमारे हाथ एक-दूसरे से छुए, एक बिजली सी पूरे शरीर में दौड़ गई। वह पहला स्पर्श इतना गहरा था कि हम दोनों ही कुछ पल के लिए जम गए, मेरी उंगलियां उसकी मखमली त्वचा को महसूस कर रही थीं। उसके शरीर से उठने वाली भीनी-भीनी खुशबू और बारिश की सोंधी महक ने माहौल को और भी कामुक बना दिया था। हम दोनों के बीच आकर्षण का जन्म बहुत पहले हो चुका था, लेकिन उस रात उस झिझक की दीवार गिरती हुई महसूस हो रही थी।
मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी भीगी हुई कमर पर रखा, वह सिहर उठी लेकिन उसने मुझे रोका नहीं, बल्कि अपनी आँखें बंद कर लीं। मेरी धड़कनें अब बेकाबू हो रही थीं और मैंने महसूस किया कि मेरा खीरा अब पूरी तरह से जाग चुका है और अपनी आजादी के लिए तड़प रहा है। मैंने उसे अपनी ओर खींचा और उसके चेहरे को अपने हाथों में लेकर उसके होंठों की पंखुड़ियों का रस पीना शुरू कर दिया। वह एक लंबा और गहरा मिलन था, जिसमें हम दोनों की सांसें एक-दूसरे में समा रही थीं। प्रिया ने दबी हुई कराह भरी और मेरे बालों में अपनी उंगलियां फंसा लीं, जिससे मुझे अहसास हुआ कि उसकी इच्छा भी उतनी ही तीव्र है।
प्रिया के शरीर की गर्मी अब मेरे अंदर समाने लगी थी, मैंने धीरे से उसकी कुर्ती के बटन खोले और उसके भारी तरबूजों को आजाद कर दिया। जैसे ही वे बाहर आए, उनकी सुंदरता देख मेरी आँखें फटी रह गईं, वे एकदम गोल और ऊपर छोटे-छोटे मटर की तरह दाने चमक रहे थे। मैंने झुककर एक मटर को अपने मुंह में लिया और उसे धीरे से चूसने लगा, प्रिया ने जोर से आह भरी और अपनी पीठ को धनुष की तरह मोड़ लिया। वह अपने हाथ मेरे सिर पर फेर रही थी और ‘ओह समीर…’ कह कर मुझे और उकसा रही थी। उसके तरबूज इतने नरम थे कि मेरा मन कर रहा था कि मैं बस उन्हें घंटों तक सहलाता रहूँ और उनका रस पीता रहूँ।
अब प्रिया की उत्तेजना चरम पर थी, उसने कांपते हाथों से मेरी बेल्ट खोली और मेरे उभरे हुए खीरे को बाहर निकाला। जब उसने मेरे कड़क और लंबे खीरे को देखा, तो उसकी आँखों में एक चमक और चेहरे पर हल्का सा डर भी था। उसने धीरे से अपना हाथ उस पर फेरा और फिर अपने कोमल होंठों से खीरा चूसना शुरू कर दिया, वह अहसास इतना जादुई था कि मुझे लगा मेरा रस अभी निकल जाएगा। लेकिन मैंने खुद पर काबू रखा और उसे नीचे लिटा दिया, उसकी टांगें फैलाते ही मुझे उसकी गहरी खाई के दर्शन हुए जो पहले से ही अपने रस से गीली हो चुकी थी। वहां के बाल एकदम रेशमी लग रहे थे और वहां से उठने वाली गंध ने मुझे और भी पागल कर दिया था।
मैंने अपनी उंगलियों से उसकी खाई को सहलाना शुरू किया और फिर खाई में उंगली डालकर गहराई नापने लगा, प्रिया बिस्तर पर तड़पने लगी। वह बार-बार कह रही थी, ‘समीर, अब और बर्दाश्त नहीं होता, मुझे खोदना शुरू करो, मैं तुम्हारी होना चाहती हूँ।’ मैंने उसकी बात मानी और अपने खीरे के अगले हिस्से को उसकी खाई के मुहाने पर रखा। जैसे ही मैंने धीरे से दबाव डाला, वह दर्द और आनंद के मिश्रण से चीख उठी, क्योंकि उसकी खाई बहुत तंग थी। मैंने थोड़ा रुककर उसे चूमा और फिर एक जोरदार झटके के साथ अपना पूरा खीरा उसकी खाई के अंदर उतार दिया। वह पूरी तरह से मेरे नीचे दबी हुई थी और हम दोनों के शरीर पसीने से लथपथ थे।
शुरुआत में मैंने धीमी गति से उसे खोदना शुरू किया, हर धक्के के साथ प्रिया की कराहें तेज होती जा रही थीं और मेरा खीरा उसकी गहराई को महसूस कर रहा था। उसके तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे और मैं उन्हें अपने हाथों से दबाते हुए खुदाई का आनंद ले रहा था। प्रिया ने अपनी टांगें मेरी कमर पर लपेट ली थीं ताकि मैं और गहराई तक जा सकूँ। कमरे में सिर्फ हमारे शरीरों के टकराने की आवाज़ और भारी सांसों का शोर था। मैंने महसूस किया कि उसकी खाई की दीवारें मेरे खीरे को कस कर जकड़ रही हैं, जैसे वह उसे कभी छोड़ना न चाहती हो।
कुछ देर बाद मैंने उसे पलटा और पिछवाड़े से खोदने की मुद्रा में ले आया, उसका भारी पिछवाड़ा ऊपर की ओर उठा हुआ था जो बहुत ही आकर्षक लग रहा था। मैंने फिर से पीछे से अपनी खुदाई शुरू की, इस बार हर धक्का और भी गहरा और दमदार था। प्रिया बिस्तर के चादर को अपने हाथों में जकड़े हुए चिल्ला रही थी, ‘हाँ समीर, ऐसे ही, और तेज… और गहराई से खोदो!’ हमारी उत्तेजना अब अपने शिखर पर थी, मेरा पूरा शरीर कांप रहा था और प्रिया की खाई से निकलने वाला रस अब सफेद होने लगा था। अंत में, हमने सामने से खोदना शुरू किया और कुछ मिनटों की भयंकर खुदाई के बाद, मेरा और उसका रस एक साथ छूट गया।
प्रिया के शरीर में एक अंतिम कंपन हुआ और वह पूरी तरह शांत हो गई, वह मेरे सीने से लगकर जोर-जोर से सांसें ले रही थी। हम दोनों पसीने में भीगे हुए थे और कमरे की हवा में एक अजीब सी संतुष्टि फैली हुई थी। उस रात के बाद हमारी वह खुदाई सिर्फ शारीरिक जरूरत नहीं रही, बल्कि एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव बन गई। प्रिया अब अक्सर रात के अंधेरे में मेरे पास आती है और हम घंटों एक-दूसरे के प्यार और जिस्म की खुदाई में डूबे रहते हैं। उसकी वह खाई और मेरा वह खीरा अब एक-दूसरे के बिना अधूरे महसूस होते हैं और यह सिलसिला अब भी जारी है।