अजनबी पड़ोसन की मदहोश चु@@ई —> समीर अभी कुछ ही दिन पहले शहर के इस नए अपार्टमेंट में रहने आया था, जहाँ की तड़क-भड़क और शांति उसे अपनी ओर खींचती थी। वह एक जवान, गठीले शरीर वाला युवक था जिसकी आँखों में हमेशा एक अजीब सी चमक और दिल में कुछ कर गुजरने की तमन्ना रहती थी। उसके बगल वाले फ्लैट में कविता रहती थी, जो लगभग चौंतीस साल की एक बेहद आकर्षक और कामुक महिला थी। कविता का पति अक्सर बिजनेस के सिलसिले में शहर से बाहर रहता था, जिस कारण वह अक्सर अकेली और उदास महसूस करती थी। जब समीर ने पहली बार उसे कॉरिडोर में देखा, तो उसे लगा जैसे उसके दिल की धड़कन एक पल के लिए रुक गई हो, क्योंकि कविता का व्यक्तित्व ही कुछ ऐसा था कि कोई भी उसे देखे बिना नहीं रह सकता था।
कविता के शरीर की बनावट ऐसी थी जिसे देखकर किसी भी पुरुष के मन में हलचल मच जाए, उसके उभरे हुए रेशमी तरबूज उसकी कुर्ती के अंदर से अपनी मौजूदगी का अहसास कराते थे। जब वह चलती थी, तो उसके शरीर के हर अंग में एक थिरकन होती थी और उसके चेहरे पर छाई रहने वाली हल्की सी मुस्कान समीर को बेचैन कर देती थी। उसकी कमर पतली और लचीली थी, और उसके भारी तरबूज हमेशा समीर का ध्यान अपनी ओर खींच लेते थे। उन तरबूजों के ऊपर छोटे-छोटे मटर जैसे दाने साफ़ झलकते थे जब वह पतले कपड़े पहनती थी। समीर अक्सर अपनी खिड़की से उसे बालकनी में खड़े देखता और उसके पिछवाड़े की गोलाई और उसकी चाल ढाल को देखकर अपने मन में अजीबोगरीब कल्पनाएँ बुनने लगता था।
धीरे-धीरे उनके बीच औपचारिक बातचीत शुरू हुई और फिर यह सिलसिला चाय और कॉफी तक जा पहुँचा, जिससे उनके बीच एक भावनात्मक जुड़ाव बनने लगा। कविता को समीर की बातें अच्छी लगती थीं और समीर को कविता का साथ, दोनों ही एक-दूसरे की ओर खिंचते चले जा रहे थे। कविता के मन में भी समीर के प्रति एक दबी हुई इच्छा जागने लगी थी, क्योंकि उसे लंबे समय से वह प्यार और स्पर्श नहीं मिला था जिसकी वह हकदार थी। एक रात जब शहर में जोर की बिजली कड़क रही थी और अचानक पूरे इलाके की लाइट चली गई, तब समीर के दरवाजे पर दस्तक हुई और सामने कविता खड़ी थी। उसने कहा कि उसे अंधेरे से डर लगता है, लेकिन उसकी आँखों की गहराई कुछ और ही बयां कर रही थी, जिसे समीर ने तुरंत भांप लिया।
उस अंधेरे कमरे में मोमबत्ती की हल्की रोशनी में कविता और समीर एक-दूसरे के बहुत करीब बैठे थे, जहाँ उनकी साँसें एक-दूसरे से टकरा रही थीं। समीर ने धीरे से कविता का हाथ अपने हाथ में लिया, तो उसने महसूस किया कि कविता का पूरा शरीर कांप रहा था, जैसे वह इसी स्पर्श का इंतजार कर रही थी। समीर ने अपना हाथ ऊपर बढ़ाते हुए कविता के कंधे को छुआ और फिर धीरे-धीरे अपनी उंगलियाँ उसके गालों पर फेरीं, जिससे कविता की आँखें बंद हो गई और उसने एक लंबी आह भरी। उसके मन में उठ रहे संघर्ष और झिझक की दीवार अब धीरे-धीरे ढहने लगी थी, क्योंकि उनकी शारीरिक और मानसिक जरूरतें एक-दूसरे में समाने को बेताब थीं।
समीर ने अब और संयम नहीं रखा और उसने कविता के होंठों को चूमना शुरू कर दिया, वह उसे बहुत ही कोमलता से प्यार कर रहा था। उसके हाथ कविता के पीठ के नीचे गए और उसने उसे अपनी ओर और जोर से खींच लिया, जिससे कविता के भारी और रसीले तरबूज समीर की चौड़ी छाती से दब गए। कविता ने भी अपनी बाहें समीर के गले में डाल दीं और उसे और करीब बुलाने लगी, उसकी गरम साँसें समीर के कान के पास एक सिहरन पैदा कर रही थीं। समीर ने धीरे-धीरे कविता की कुर्ती के बटन खोले और जैसे ही वह कपड़ा नीचे गिरा, कविता के गोरे और चमकदार तरबूज मोमबत्ती की रोशनी में चमकने लगे, जिनके ऊपर मौजूद मटर अब ठंड और उत्तेजना से पूरी तरह सख्त हो चुके थे।
समीर ने अपनी जीभ से उन मटरों को सहलाना शुरू किया, जिससे कविता के मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं और वह समीर के बालों को अपनी उंगलियों से कसकर पकड़ने लगी। समीर का खीरा अब पूरी तरह से अकड़ चुका था और वह उसकी जींस के अंदर छटपटा रहा था, जैसे वह उस गहरी खाई में उतरने के लिए बेकरार हो। उसने कविता को बिस्तर पर लिटाया और उसके सारे कपड़े उतार दिए, अब कविता पूरी तरह से कुदरती अवस्था में उसके सामने थी। समीर ने अपना चेहरा कविता की दोनों जांघों के बीच ले जाकर उसकी रेशमी खाई को निहारना शुरू किया और अपनी जीभ से उसे चाटना शुरू कर दिया। कविता का पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया और वह बिस्तर की चादर को हाथों से भींचने लगी।
समीर ने जब अपनी उंगली से उस खाई को खोदना शुरू किया, तो कविता के शरीर से मदहोश करने वाला रस निकलने लगा, जो इस बात का सबूत था कि वह पूरी तरह तैयार है। कविता ने सिसकते हुए कहा, ‘समीर, अब और मत तड़पाओ, मुझे अपना बना लो, मुझे तुम्हारी गहराई महसूस करनी है।’ समीर ने अपनी जींस उतारी और अपना फन फैलाए हुए खीरा बाहर निकाला, जो अब अपनी पूरी लंबाई और मोटाई में चमक रहा था। उसने कविता की जांघों को फैलाया और धीरे से अपने खीरे का अगला हिस्सा उसकी गीली खाई के मुहाने पर टिका दिया, जहाँ से गरम भाप और खुशबू आ रही थी।
जैसे ही समीर ने एक जोर का धक्का मारा, उसका पूरा खीरा कविता की तंग और रसीली खाई के अंदर समा गया, जिससे कविता के गले से एक तेज चीख और फिर राहत भरी आह निकली। उसने समीर को कसकर अपनी बाहों में भर लिया और उसके कंधों पर अपने दांत गड़ा दिए, क्योंकि वह दर्द और आनंद के उस अनोखे संगम को पहली बार महसूस कर रही थी। समीर ने अब धीरे-धीरे अपनी लय बनाना शुरू किया और सामने से खोदना (मिशनरी) जारी रखा, हर धक्के के साथ कविता के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे। कमरे में केवल उनके जिस्मों के टकराने की आवाज और उनकी उत्तेजित साँसें गूँज रही थीं, जो उस रात की शांति को भंग कर रही थीं।
समीर ने अब कविता को घुमाया और उसे बिस्तर पर घुटनों के बल खड़ा कर दिया, ताकि वह पिछवाड़े से खोदना शुरू कर सके। पीछे से कविता के पिछवाड़े की गोलाई और उसकी खाई की गहराई और भी ज्यादा कामुक लग रही थी, समीर ने अपने खीरे को फिर से उसकी गहराई में उतारा। कविता अपनी कमर को पीछे की ओर धकेल रही थी ताकि समीर का खीरा उसकी कोख तक पहुँच सके, वह बार-बार कह रही थी, ‘हाँ समीर, और तेज… और गहराई तक खोदो, मुझे खत्म कर दो।’ उनकी यह खुदाई अब अपने चरम पर पहुँच रही थी, दोनों का पसीना एक-दूसरे में मिल चुका था और उनकी धड़कनें एक समान लय में धड़क रही थीं।
काफी देर तक इस गहन और थका देने वाली खुदाई के बाद, समीर को महसूस हुआ कि अब उसका रस छूटने वाला है, और ठीक उसी समय कविता का शरीर भी थरथराने लगा। समीर ने आखिरी कुछ बहुत तेज और गहरे धक्के मारे और अपना सारा गरम रस कविता की खाई की गहराई में उड़ेल दिया, जिससे कविता भी अपनी चरम सीमा पर पहुँच गई और उसका रस भी निकलकर समीर के खीरे को भिगो गया। दोनों एक-दूसरे के ऊपर निढाल होकर गिर पड़े, उनकी साँसें अभी भी बहुत तेज थीं और जिस्म पसीने से लथपथ थे, लेकिन उनके चेहरों पर एक अजीब सा संतोष और सुकून था जो शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता था।
कुछ देर बाद जब उनकी साँसें सामान्य हुईं, समीर ने कविता को अपनी बाँहों में समेट लिया और उसके माथे को चूमते हुए उसे सांत्वना दी। कविता की आँखों में हल्के आँसू थे, लेकिन वे खुशी और तृप्ति के थे, उसने समीर के सीने पर सिर रखकर कहा कि उसे आज पहली बार महसूस हुआ है कि असली जुड़ाव और प्यार क्या होता है। उस रात के बाद उनके बीच का रिश्ता और भी गहरा हो गया, जो सिर्फ जिस्मानी नहीं बल्कि रूहानी भी था। उनकी वह पहली खुदाई हमेशा उनके दिलों में एक मीठी याद बनकर बसी रही, जिसने दो अजनबियों को हमेशा के लिए एक-दूसरे का बना दिया था।