अधूरी रात की अनकही चु@@ई की प्यास —> मीरा अपने अपार्टमेंट की बालकनी में खड़ी ठंडी रात की हवा का इंतज़ार कर रही थी। शहर की रोशनी दूर तक फैली थी, पर उसके दिल में एक अजीब सी तड़प और खालीपन था। तभी पड़ोस के फ्लैट की बालकनी में नया रहने आया अर्जुन बाहर निकला। उसकी मज़बूत कद-काठी और गहरी आँखों में एक ऐसी कशिश थी, जिसने मीरा के पूरे वजूद को हिलाकर रख दिया।
उन दोनों की नजरें अचानक मिलीं और गर्म हवा के झोंके में एक अनकहा तनाव घुल गया। अर्जुन ने बहुत ही शालीनता से मुस्कुराकर मीरा का अभिवादन किया। मीरा की साँसे वहीं थम सी गईं। उसके पतले मलमल के कुर्ते के नीचे उसके भारी तरबूज तेज़ी से धड़क रहे थे। उसने घबराहट में अपनी नज़रों को झुका लिया, पर वह खिंचाव बढ़ता ही जा रहा था।
गर्मी के कारण मीरा के गोरे बदन पर पसीने की नन्हीं बूँदें मोतियों की तरह चमक रही थीं। अर्जुन की प्यासी नज़रें उन बूँदों का पीछा करते हुए मीरा के गले की गहराई से नीचे उतर रही थीं। मीरा को ऐसा महसूस हुआ जैसे उसकी कोमल खाल पर बिजली की कोई लहर दौड़ रही हो। वह अपनी बरसों की प्यास और जिस्मानी तड़प को और ज़्यादा देर तक दबा नहीं पा रही थी।
अर्जुन धीरे-धीरे अपनी बालकनी की रेलिंग के करीब आया, जो मीरा की बालकनी से जुडी थी। उसकी मर्दाना खुशबू हवा में तैरती हुई मीरा के नथुनों तक पहुँचने लगी। उसने बहुत ही धीमे स्वर में कहा, “आज की रात बहुत भारी और बेचैन करने वाली है, है न?” मीरा ने जवाब में सिर्फ एक गहरी आह भरी। उसकी मदहोश आँखों में छुपी हसरत अब साफ झलकने लगी थी।
बातों का सिलसिला बढ़ा और अर्जुन का हाथ धीरे से मीरा की नाजुक कमर पर टिक गया। उसका स्पर्श इतना गर्म और अधिकारपूर्ण था कि मीरा का पूरा शरीर सिहर उठा। उसने अपनी पलकें मूँद लीं और अर्जुन की गरमाहट महसूस करने लगी। उसे साफ़ महसूस हो रहा था कि उसके दोनों मटर कुर्ते के ऊपर ही सख़्त होकर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं।
अर्जुन ने मीरा को अपनी ओर खींचा और उसे बाहों में भर लिया। मीरा ने अपना चेहरा उसके चौड़े सीने में छुपा दिया। अर्जुन के शरीर की गर्मी मीरा के भीतर एक आग सुलगा रही थी। मीरा ने महसूस किया कि अर्जुन का खीरा उसकी जांघों से टकरा रहा है, जो सख़्ती की इंतहा पर था। वह अहसास इतना उत्तेजक था कि मीरा के पैरों के बीच की खाई गीली होने लगी थी।
अर्जुन ने झुककर मीरा के कान के पास धीरे से फुसफुसाया और उसके गर्दन पर अपनी गर्म ज़बान फेरी। मीरा के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली सिसकी निकल गई। अर्जुन के हाथों ने अब मीरा के रेशमी कुर्ते के बटन खोलना शुरू किया। जैसे ही कपड़ा कंधे से नीचे गिरा, चाँदनी की हल्की रोशनी में मीरा के उजले और सुडौल तरबूज आज़ाद होकर बाहर निकल आए।
अर्जुन ने अपनी हथेलियों में उन भारी तरबूजों को भर लिया और उन्हें धीरे-धीरे सहलाने लगा। मीरा की सिसकियाँ अब कमरे के सन्नाटे को तोड़ने लगी थीं। अर्जुन ने अपने मुँह में एक मटर को लिया और उसे अपनी ज़बान से सहलाया। मीरा ने अर्जुन के बालों में अपनी उंगलियाँ फँसा लीं। उसकी खाई से अब कामुक रस रिसने लगा था, जो उसकी जांघों तक पहुँच रहा था।
धीरे-धीरे वे दोनों बेडरूम की तरफ बढ़े, जहाँ धुंधली रोशनी फैली थी। अर्जुन ने मीरा को बिस्तर पर लेटाया और उसके बाकी कपड़े भी उतार दिए। मीरा की जांघों के बीच काले घने बाल अब अर्जुन की नज़रों के सामने थे। अर्जुन ने झुककर मीरा की उस गहरी खाई को निहारा, जो पूरी तरह से गीली और लाल हो चुकी थी। वह नज़ारा किसी जादू से कम नहीं था।
अर्जुन ने अपनी पैंट उतारी और उसका विशाल और सख़्त खीरा बाहर निकल आया। मीरा ने जब उसे देखा, तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गई। उसने धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाया और उस गर्म खीरा को अपनी मुट्ठी में थाम लिया। उसकी रगों में दौड़ता हुआ खून उसे और भी जीवंत बना रहा था। मीरा ने बिना देर किए उस खीरा को अपने मुँह में भर लिया।
मीरा का खीरा चूसना इतना आनंददायक था कि अर्जुन के गले से दबी हुई आहें निकलने लगीं। वह मीरा के सिर को पकड़कर उसे लय में चलाने लगा। कमरे में थप-थप की आवाज़ गूँजने लगी। मीरा पूरी शिद्दत से उस रस का स्वाद ले रही थी। कुछ देर बाद अर्जुन ने उसे रोका और उसे बिस्तर के बीचों-बीच सीधा लेटा दिया ताकि वह अपना काम शुरू कर सके।
अर्जुन ने मीरा की दोनों टांगों को अपने कंधों पर रखा और अपने खीरा की नोक को मीरा की तड़पती हुई खाई के मुहाने पर टिका दिया। मीरा ने कसकर चादर पकड़ ली। जैसे ही अर्जुन ने पहला धक्का मारा, मीरा के मुँह से एक ऊँची चीख निकल गई। वह गहराई इतनी सुखद थी कि मीरा का पूरा जिस्म झटके खाने लगा। अर्जुन अब सामने से खोदना शुरू कर चुका था।
हर धक्के के साथ मीरा के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे और उनके मटर अर्जुन के सीने से रगड़ खा रहे थे। पसीने से लथपथ दोनों के शरीर आपस में चिपक रहे थे। अर्जुन की रफ़्तार अब बढ़ने लगी थी। मीरा की खाई उस विशाल खीरा को पूरी तरह समाहित कर रही थी। खुदाई की वह आवाज़ कमरे के कोने-कोने में गूँजकर एक मदहोश संगीत पैदा कर रही थी।
मीरा को लग रहा था जैसे वह स्वर्ग के करीब पहुँच रही है। उसने अपनी कमर उचकाकर अर्जुन का साथ देना शुरू किया। अर्जुन ने मीरा के होठों को चूसते हुए उसे और भी उत्तेजित कर दिया। सामने से खोदना अब अपनी चरम सीमा पर पहुँच रहा था। मीरा की आँखों से ख़ुशी के आंसू छलक आए थे क्योंकि यह खुदाई उसके रूह को छू रही थी।
अर्जुन ने मीरा को घुमाया और उसे घुटनों के बल खड़ा कर दिया। अब वह पिछवाड़े से खोदना चाहता था। मीरा ने अपने दोनों हाथ तकिए पर टिका दिए और अपना पिछवाड़ा अर्जुन की तरफ उठा दिया। अर्जुन ने पीछे से मीरा की कमर पकड़ी और एक ही झटके में अपना खीरा उसकी खाई में गहराई तक उतार दिया। मीरा ने दर्द और लज़्ज़त के मिले-जुले अहसास में अपना सिर पीछे झुका लिया।
पिछवाड़े से खोदना मीरा के लिए एक नया और जादुई अनुभव था। अर्जुन के मज़बूत हाथ मीरा के तरबूजों को पीछे से पकड़कर मसल रहे थे। हर प्रहार मीरा के भीतर एक हलचल पैदा कर रहा था। खुदाई की गति अब बेकाबू हो चुकी थी। पसीने की खुशबू और कामुकता की गंध ने माहौल को और भी गहरा और नशीला बना दिया था।
मीरा का शरीर अब कांपने लगा था। उसे महसूस हो रहा था कि उसकी खाई के भीतर एक ज्वालामुखी फटने वाला है। उसने अर्जुन से कहा, “और तेज़… मुझे पूरी तरह से भर दो।” अर्जुन ने अपनी पूरी ताकत लगा दी। उसकी सांसें तेज़ चल रही थीं और उसका खीरा मीरा की गहराई के हर कोने को छू रहा था। दोनों का जोश अपनी चरम सीमा पर था।
अचानक मीरा के शरीर में एक ज़ोरदार कंपन हुआ। उसकी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा और उसकी खाई से भारी मात्रा में गर्म रस निकलना शुरू हो गया। उसी पल अर्जुन ने भी एक आखिरी गहरा धक्का मारा और अपना सारा गर्म लावा मीरा की गहराई में उड़ेल दिया। दोनों एक-दूसरे में सिमटे हुए बिस्तर पर ढह गए, उनकी साँसे अब भी बेकाबू थीं।
रस निकलना बंद होने के बाद भी अर्जुन मीरा के ऊपर ही लेटा रहा। वह सुकून भरा पल था जब दो अजनबी रूहें जिस्मानी खुदाई के ज़रिए एक हो गई थीं। मीरा ने अर्जुन के माथे का पसीना पोंछा और उसे चूम लिया। कमरे की शांति अब बहुत ही सुखद लग रही थी। वह अधूरी रात अब एक मुकम्मल दास्तान में तब्दील हो चुकी थी।
मीरा ने महसूस किया कि यह सिर्फ हवस नहीं थी, बल्कि एक जुड़ाव था जिसने उसे खुद से रूबरू कराया था। अर्जुन ने उसे अपनी बाहों में कसकर पकड़ लिया और दोनों नींद की आगोश में खो गए। सुबह की पहली किरण जब खिड़की से आई, तो उनके चेहरों पर एक अलग ही चमक थी, जो कल रात की उस अनकही खुदाई की गवाह थी।
अगले कई दिनों तक यह सिलसिला चलता रहा। हर रात बालकनी से शुरू होती और बिस्तर पर जाकर ख़त्म होती। मीरा के तरबूज अब और भी निखर आए थे और उसकी चाल में एक नई खनक थी। अर्जुन का वह सख़्त खीरा अब मीरा की हर रात की ज़रूरत बन चुका था। उनकी इस लुका-छिपी वाली खुदाई ने उनके जीवन को रंगों से भर दिया था।
कभी अर्जुन मीरा को रसोई की स्लैब पर बैठाकर खोदता, तो कभी उसे सोफे पर झुकाकर उसके पिछवाड़े का आनंद लेता। हर बार मीरा की खाई से निकलता रस उनकी दीवानगी की गवाही देता। मीरा को अब अपने जिस्म से प्यार हो गया था। अर्जुन ने उसे सिखाया था कि कैसे अपनी इच्छाओं को खुलकर जीना चाहिए और कैसे हर स्पर्श को महसूस करना चाहिए।
एक रात अर्जुन ने मीरा के मटरों को बर्फ के टुकड़ों से सहलाया और फिर उन्हें अपने मुँह की गरमाहट से पिघलाया। मीरा पागल हो उठी थी। उसने अर्जुन को मजबूर कर दिया कि वह उसे इतनी बुरी तरह खोदे कि वह सुबह तक चल न पाए। उस रात की खुदाई सबसे यादगार थी, जिसमें दोनों ने अपनी सारी सीमाएं लांघ दी थीं।
वक़्त गुज़रता गया, पर उनकी प्यास कभी कम नहीं हुई। पड़ोसी होने का रिश्ता अब एक रूहानी और जिस्मानी बंधन बन चुका था। मीरा अक्सर बालकनी में खड़ी होकर उस रात को याद करती जब पहली बार उन दोनों की नज़रें मिली थीं। वह समझ गई थी कि कुछ मुलाकातें सिर्फ बातों के लिए नहीं, बल्कि रूहों की खुदाई के लिए होती हैं।
उनकी यह कहानी आज भी उस अपार्टमेंट की दीवारों में कैद है। जब भी रात होती है और चाँदनी बिखरती है, मीरा के तरबूज अर्जुन के हाथों का इंतज़ार करते हैं। और अर्जुन का वह खीरा आज भी मीरा की खाई को तृप्त करने के लिए उतना ही बेताब रहता है। यह एक ऐसी दास्तान है जो प्यास, तड़प और बेपनाह लज़्ज़त से बनी है।