जवान पडोसन की चु@@ई—>
शहर की उस तपती हुई दोपहर में सन्नाटा पसरा हुआ था और स्नेहा अपने फ्लैट की बालकनी में खड़ी होकर बाहर की वीरान सड़क को देख रही थी। स्नेहा की उम्र करीब 28 साल थी और उसकी देह किसी ढली हुई मूरत की तरह थी जो किसी भी पुरुष के मन में हलचल पैदा कर दे। उसने एक पतली सी सूती साड़ी पहन रखी थी जिसके नीचे उसने कोई चोली नहीं पहनी थी जिसकी वजह से उसके भारी भरकम तरबूज साड़ी के पतले कपड़े को फाड़कर बाहर आने को बेताब दिख रहे थे। स्नेहा का शरीर काफी भरा हुआ था और जब वह चलती थी तो उसके बड़े-बड़े तरबूज और उसका चौड़ा पिछवाड़ा एक अलग ही लय में थिरकते थे जिसे देखकर गली के कुत्ते भी रुक जाते थे। उसके चेहरे पर एक अजीब सी बेचैनी थी क्योंकि उसका पति काम के सिलसिले में अक्सर शहर से बाहर रहता था और स्नेहा की जवान देह प्यार और गर्माहट के लिए तरस रही थी। उसी समय सामने वाले फ्लैट में नया रहने आया राहुल अपनी बालकनी में आया और उसकी नज़रें सीधे स्नेहा के उभरे हुए अंगों पर जाकर टिक गईं।
राहुल की उम्र करीब 32 साल थी और उसका शरीर कसरती और गठा हुआ था जिसे देखकर ही अंदाज़ा लगाया जा सकता था कि उसके पास एक लंबा और मोटा खीरा होगा। राहुल ने जब स्नेहा को इस हालत में देखा तो उसके पजामे के अंदर उसका खीरा अंगड़ाई लेने लगा और धीरे-धीरे सख्त होने लगा। स्नेहा ने भी राहुल की प्यासी नज़रों को महसूस किया और उसने जानबूझकर अपनी साड़ी का पल्लू थोड़ा और खिसका दिया जिससे उसके गोल और रसीले तरबूजों का ऊपरी हिस्सा और उन पर मौजूद छोटे-छोटे मटर साफ झलकने लगे। दोनों की आँखों में एक अनकही प्यास थी जो शब्दों की मोहताज नहीं थी और हवा में एक कामुक तनाव घुलने लगा था। स्नेहा ने हल्की मुस्कान के साथ राहुल को अंदर आने का इशारा किया और राहुल बिना एक पल गंवाए अपनी प्यास बुझाने के लिए उसके दरवाजे की ओर बढ़ गया। जैसे ही वह अंदर आया स्नेहा ने दरवाजा बंद कर दिया और दोनों एक दूसरे की सांसों की गर्माहट को महसूस करने लगे।
कमरे के अंदर की खामोशी में सिर्फ उनकी तेज़ होती सांसों की आवाज़ सुनाई दे रही थी और राहुल ने हिम्मत बढ़ाकर स्नेहा की कमर पर हाथ रखा। स्नेहा के बदन में बिजली सी दौड़ गई और उसने अपनी आँखें मूँद लीं क्योंकि उसे महीनों बाद किसी मर्द का स्पर्श महसूस हो रहा था। राहुल के हाथ धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़े और उसने स्नेहा के भारी और मांसल पिछवाड़े को अपनी हथेलियों में भरकर जोर से दबाया जिससे स्नेहा के मुंह से एक धीमी कराह निकल गई। राहुल ने झुककर स्नेहा की गर्दन पर अपनी ज़ुबान फेरी और फिर धीरे-धीरे उसके कानों के पास फुसफुसाया कि वह कितनी खूबसूरत और कामुक लग रही है। स्नेहा ने राहुल की गर्दन में अपनी बाहें डाल दीं और उसे अपनी ओर खींच लिया जिससे उसके दोनों बड़े तरबूज राहुल की चौड़ी छाती से बुरी तरह पिचक गए। उस दबाव ने स्नेहा की खाई में एक अजीब सी हलचल पैदा कर दी और वहां से गीलापन रिसने लगा जो इस बात का सबूत था कि उसकी खाई खुदाई के लिए पूरी तरह तैयार है।
राहुल ने अब धीरे से स्नेहा की साड़ी के पल्लू को पूरी तरह हटा दिया और अब स्नेहा के नग्न और रसीले तरबूज उसके सामने थे जिनके बीच की गहरी घाटी और उन पर मौजूद गहरे गुलाबी मटर राहुल को पागल कर रहे थे। राहुल ने अपनी जीभ से एक मटर को घेर लिया और उसे हल्के से काटने लगा जिससे स्नेहा की पीठ में एक कमान जैसी मोच आई और वह जोर से सिसकने लगी। राहुल ने अपने हाथों से दूसरे तरबूज को सहलाना शुरू किया और उसकी कोमलता का आनंद लेने लगा जबकि स्नेहा के हाथ राहुल के पजामे तक पहुँच चुके थे। उसने कपड़े के ऊपर से ही राहुल के सख्त खीरे को महसूस किया जो किसी लोहे की छड़ की तरह गर्म और कड़ा हो चुका था। स्नेहा ने राहुल की आँखों में देखते हुए धीरे से उसके पजामे की गाँठ खोली और जैसे ही कपड़ा नीचे गिरा राहुल का विशाल खीरा उछलकर बाहर आ गया। स्नेहा उस खीरे की लंबाई और मोटाई देखकर दंग रह गई और उसके मन में एक ही ख्याल आया कि आज उसकी सूनी खाई की खुदाई बहुत गहराई से होने वाली है।
स्नेहा धीरे से अपने घुटनों के बल नीचे बैठी और राहुल के उस गर्म खीरे को अपने कोमल हाथों में थाम लिया और उसे अपनी गालों से सहलाने लगी। उसने अपनी ज़ुबान बाहर निकाली और उस खीरे के ऊपरी हिस्से को बड़े प्यार से चाटना शुरू किया जिससे राहुल के मुंह से आनंद की आह निकल गई। स्नेहा ने अब पूरे खीरे को अपने मुंह में ले लिया और उसे धीरे-धीरे चूसने लगी जैसे कोई बच्चा अपनी पसंदीदा लॉलीपॉप चूसता है। राहुल ने स्नेहा के बालों को पकड़ लिया और धीरे-धीरे अपने खीरे को उसके मुंह की गहराई में धक्का देने लगा जिससे स्नेहा की आँखों से पानी आने लगा लेकिन वह आनंद में डूबी हुई थी। काफी देर तक खीरा चूसने के बाद राहुल ने उसे उठाया और बेड पर लिटा दिया जहाँ स्नेहा की टांगें खुद-ब-खुद फैल गईं और उसकी घनी खाई साफ नज़र आने लगी। राहुल ने अपनी उंगलियों से उस खाई के होठों को सहलाया जहाँ पहले से ही काफी रस जमा हो चुका था और फिर उसने एक उंगली को खाई के अंदर डाल दिया।
जैसे ही राहुल की उंगली अंदर गई स्नेहा ने जोर से अपनी कमर ऊपर उठाई और उसका पूरा शरीर कांपने लगा क्योंकि उंगली से खुदाई का एहसास बहुत ही तीव्र था। राहुल ने अपनी उंगलियों की गति बढ़ाई और वह गहराई तक खोदने लगा जिससे स्नेहा बेकाबू होकर बिस्तर की चादरों को मुट्ठी में भींचने लगी। स्नेहा ने राहुल को अपने ऊपर खींच लिया और उसे अपनी खाई में अपना खीरा डालने के लिए उकसाने लगी क्योंकि अब उससे और इंतज़ार नहीं हो रहा था। राहुल ने अपने खीरे की नोक को स्नेहा की भीगी हुई खाई के मुहाने पर रखा और धीरे से दबाव बनाया जिससे स्नेहा के मुंह से एक लंबी आह निकली। जैसे-जैसे खीरा अंदर जा रहा था स्नेहा को एक भारीपन और फैलाव का अनुभव हो रहा था जो उसे परम सुख की ओर ले जा रहा था। जब पूरा खीरा अंदर समा गया तो दोनों कुछ पल के लिए शांत हो गए और सिर्फ एक दूसरे की धड़कनों को महसूस करने लगे जो अब एक ही लय में धड़क रही थीं।
अब राहुल ने खुदाई की प्रक्रिया शुरू की और उसने धीरे-धीरे अपने कूल्हों को हिलाना शुरू किया जिससे खीरा अंदर-बाहर होने लगा। हर बार जब राहुल अंदर का गहरा धक्का मारता तो वह स्नेहा की गहराई की दीवारों से टकराता और स्नेहा के मुंह से ‘आह.. उह.. राहुल.. और तेज’ जैसे शब्द निकलने लगते। कमरे में गीली खुदाई की आवाज़ें गूँजने लगीं और दोनों का शरीर पसीने से तर-ब-तर हो चुका था लेकिन किसी को भी रुकने की फुर्सत नहीं थी। राहुल ने स्नेहा की टांगों को अपने कंधों पर रख लिया ताकि वह और भी गहराई से खोद सके और हर धक्के के साथ स्नेहा के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे। स्नेहा ने अपने दोनों हाथों से अपने ही तरबूजों को भींच लिया और अपने मटरों को सहलाने लगी जिससे उसे दोहरी उत्तेजना महसूस होने लगी। खुदाई अब अपनी चरम सीमा पर पहुँच रही थी और राहुल के धक्के अब और भी शक्तिशाली और तेज़ हो गए थे जिससे पूरा बिस्तर चरमराने लगा था।
राहुल ने अब स्नेहा को उल्टा लेटने को कहा और वह उसके पिछवाड़े से खुदाई करने के लिए तैयार हुआ जिसे देखकर स्नेहा की उत्तेजना और बढ़ गई। राहुल ने पीछे से अपने खीरे को फिर से उस गीली खाई में उतारा और इस बार धक्के और भी गहरे लग रहे थे क्योंकि पिछवाड़े का मांसल हिस्सा राहुल की जांघों से टकरा रहा था। स्नेहा ने अपने हाथों को तकिये में गड़ा दिया और जोर-जोर से कराहने लगी क्योंकि राहुल की खुदाई अब उसे स्वर्ग की सैर करा रही थी। राहुल ने अपनी गति को और बढ़ा दिया और अब वह बिना रुके लगातार धक्के मार रहा था जिससे स्नेहा का शरीर झटके खा रहा था। स्नेहा को महसूस हुआ कि उसके अंदर से रस का बांध टूटने वाला है और उसने राहुल को और ज़ोर से खोदने के लिए कहा। राहुल भी अब अपने चरम पर था और उसका खीरा फटने को तैयार था इसलिए उसने आखिरी कुछ बहुत ही गहरे और तेज़ धक्के मारे।
अचानक स्नेहा का शरीर पूरी तरह अकड़ गया और उसकी खाई से रसीला द्रव झरने लगा जो राहुल के खीरे को पूरी तरह भिगो गया। उसी पल राहुल ने भी अपने खीरे का सारा गर्म रस स्नेहा की गहराई में उड़ेल दिया जिससे दोनों को एक असीम शांति और सुख का अनुभव हुआ। दोनों पसीने में लथपथ एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े और काफी देर तक गहरी सांसें लेते रहे जबकि उनका जुड़ाव अब भी कायम था। स्नेहा ने महसूस किया कि उसकी महीनों की प्यास आज एक ही बार में शांत हो गई थी और राहुल के प्रति उसका आकर्षण अब प्यार में बदल रहा था। राहुल ने स्नेहा के माथे को चूमा और उसे अपने सीने से लगा लिया जबकि कमरे में अब भी उस कामुक मिलन की महक और गर्माहट मौजूद थी। अगले कुछ घंटों तक वे बस एक-दूसरे की बाहों में लिपटे रहे और उस सुखद थकान का आनंद लेते रहे जो सिर्फ एक गहरी और संतुष्ट खुदाई के बाद ही आती है।
शाम होने को आई थी लेकिन स्नेहा और राहुल का मन अभी भी एक-दूसरे से भरा नहीं था और वे जानते थे कि यह तो बस एक शुरुआत थी। स्नेहा ने राहुल की आँखों में देखते हुए कहा कि उसे अब रोज़ाना इसी तरह की खुदाई की ज़रूरत पड़ेगी जिस पर राहुल ने मुस्कुराते हुए उसे फिर से अपनी ओर खींच लिया। उनके बीच का यह नया रिश्ता सिर्फ जिस्मानी नहीं रह गया था बल्कि इसमें एक भावनात्मक जुड़ाव भी आ गया था जिसने उन्हें एक-दूसरे का दीवाना बना दिया था। जैसे-जैसे दिन बीतते गए उनकी यह छुप-छुप कर होने वाली मुलाकातें और भी गहरी और रोमांचक होती गईं जिससे स्नेहा की जिंदगी खुशियों से भर गई। अब वह अकेली नहीं थी क्योंकि उसके पास राहुल जैसा मर्द था जो उसकी हर छोटी-बड़ी ज़रूरत और उसकी देह की हर प्यास को बखूबी समझना और बुझाना जानता था।