जिम की तन्हाई और पुराने प्यार की मिठास—>जिम की वो शाम बाकी शामों से बिल्कुल अलग थी क्योंकि उस समय वर्कआउट करने वाले लगभग सभी लोग जा चुके थे और सिर्फ मैं और सिमरन ही वहां बचे थे। सिमरन, जो कॉलेज के दिनों में मेरी सबसे अच्छी दोस्त हुआ करती थी और जिस पर मेरा गुप्त क्रश था, वह सालों बाद शहर लौटी थी और उसने मेरे ही जिम में दाखिला लिया था। उस रात उसने बहुत ही टाइट बैंगनी रंग की लेगिंग्स और एक छोटा सा काले रंग का स्पोर्ट्स ब्रा पहन रखा था, जो उसके शरीर के हर उभार को स्पष्ट रूप से उभार रहा था। उसके ऊपर के दो बड़े और गोल तरबूज हर सांस के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे, जिससे मेरी एकाग्रता बार-बार भंग हो रही थी।
सिमरन जब ट्रेडमिल पर दौड़ रही थी, तो उसके तरबूजों की हलचल और उसके पसीने से भीगे बदन की चमक ने मेरे अंदर एक अजीब सी हलचल पैदा कर दी थी। वह 26 साल की हो चुकी थी और उसका शरीर अब पहले से कहीं ज्यादा कामुक और भरा हुआ हो गया था। उसकी पतली कमर के नीचे उसका भारी और गदराया हुआ पिछवाड़ा लेगिंग्स के कपड़े को फाड़ देने पर आमादा लग रहा था। जब वह झुकी, तो उसके पीछे का उभार इतना गहरा और आमंत्रित करने वाला था कि मेरे मन में पुराने दबे हुए अरमान फिर से जाग उठे। मेरा ध्यान बार-बार उसके शरीर के उन हिस्सों पर जा रहा था जिन्हें वह ढकने की कोशिश तो कर रही थी, लेकिन जिम के कपड़े सब कुछ बयां कर रहे थे।
हमारे बीच का भावनात्मक जुड़ाव आज भी वैसा ही था, हम बातें करते हुए अक्सर पुराने दिनों की यादों में खो जाते थे, लेकिन उस रात हवा में कुछ अलग ही भारीपन था। मैंने उसे स्ट्रेचिंग करने में मदद करने का प्रस्ताव दिया और वह मान गई, शायद वह भी उसी आकर्षण को महसूस कर रही थी जिसे मैं कर रहा था। जैसे ही मैंने उसके कंधों पर हाथ रखा, मुझे उसके शरीर की गर्मी महसूस हुई और उसके शरीर से आने वाली हल्की सी खुशबू ने मेरे दिमाग को सुन्न कर दिया। उसके चेहरे पर हल्की सी लाली छा गई थी और उसकी सांसें कुछ तेज चलने लगी थीं, जिससे यह साफ था कि वह भी मेरी छुअन से बेखबर नहीं थी।
जब मैंने उसे कमर से पकड़कर नीचे झुकने में मदद की, तो मेरे हाथ उसके मुलायम पिछवाड़े के ऊपरी हिस्से को छू गए और उस एक स्पर्श ने मेरे अंदर जैसे बिजली का करंट दौड़ा दिया। मेरे पजामे के अंदर मेरा खीरा अब पूरी तरह से अकड़ चुका था और अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहा था। सिमरन ने मेरी आंखों में देखा और उस नजर में एक अजीब सी बेताबी और झिझक का मिश्रण था, जैसे वह चाह रही हो कि मैं आगे बढ़ूं लेकिन समाज और दोस्ती का डर उसे रोक रहा था। मैंने धीरे से उसके कानों के पास जाकर कहा कि तुम आज बहुत खूबसूरत लग रही हो, और मेरी गरम सांसों ने उसके शरीर में एक कंपन पैदा कर दी।
झिझक अब धीरे-धीरे कम हो रही थी और आकर्षण की डोर हमें करीब खींच रही थी। मैंने अपनी उंगलियों को धीरे से उसकी गर्दन से नीचे ले जाते हुए उसके स्पोर्ट्स ब्रा के किनारे तक पहुँचाया। वह धीरे से सिसकी और उसने अपनी आँखें बंद कर लीं, जो मेरे लिए आगे बढ़ने का हरा सिग्नल था। मैंने उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसके होठों के मीठे रस को चखने लगा, जैसे कोई प्यासा बरसों बाद पानी पी रहा हो। हमारे होठों का मिलन इतना गहरा था कि हमें समय और जगह का होश ही नहीं रहा और धीरे-धीरे हम जिम के एक अंधेरे कोने में रखे योगा मैट की ओर बढ़ गए।
जैसे ही मैंने उसके स्पोर्ट्स ब्रा को धीरे से ऊपर सरकाया, उसके दोनों बड़े और रसीले तरबूज आज़ाद होकर बाहर निकल आए। उनके बीच का उभार और उनके सिरों पर मौजूद गुलाबी मटर अब ठंडक और उत्तेजना के कारण सख्त हो गए थे। मैंने अपनी जीभ से उन मटरों को सहलाना शुरू किया, जिससे सिमरन के मुँह से दबी-दबी आहें निकलने लगीं। वह अपने हाथों से मेरे बालों को खींच रही थी और उसका शरीर नीचे की तरफ धनुष की तरह मुड़ रहा था। उसके तरबूजों का स्वाद किसी अमृत से कम नहीं था, और मैं बारी-बारी से उन्हें अपने मुँह में भरकर उनका आनंद ले रहा था।
धीरे-धीरे मेरा हाथ उसकी लेगिंग्स के अंदर पहुँचा और वहां मौजूद घने बालों के जंगल को पार करते हुए मैंने उसकी गीली खाई को महसूस किया। उसकी खाई पहले ही रस से भीग चुकी थी और बहुत गरम महसूस हो रही थी। जब मैंने अपनी उंगली से खाई के अंदर हल्की खुदाई शुरू की, तो वह जोर से तड़प उठी और उसने अपनी टांगें मेरे चारों ओर लपेट लीं। उसकी खाई इतनी तंग और फिसलन भरी थी कि मेरी उंगली बड़ी आसानी से अंदर-बाहर हो रही थी। वह बार-बार कह रही थी, “आर्यन, मुझे और चाहिए, प्लीज मत रुको,” और उसकी ये बातें मेरे अंदर की आग को और भड़का रही थीं।
अब समय आ गया था कि मैं अपने खीरे को उसकी खाई में उतारूं। मैंने अपना पजामा नीचे किया और मेरा लंबा और मोटा खीरा गर्व से उसके सामने खड़ा था। सिमरन ने जैसे ही उसे देखा, उसकी आँखें फटी की फटी रह गई और उसने धीरे से उसे अपने हाथों में पकड़ लिया। उसने अपने मुँह को खोला और धीरे-धीरे मेरे खीरे को चूसना शुरू किया, जिससे मुझे स्वर्ग जैसा आनंद महसूस होने लगा। उसकी जीभ मेरे खीरे के ऊपरी हिस्से पर जिस तरह घूम रही थी, उससे मेरा रस निकलने ही वाला था, लेकिन मैंने खुद पर काबू पाया क्योंकि असली खुदाई अभी बाकी थी।
मैंने उसे योगा मैट पर सीधा लिटाया और उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया, जो सामने से खुदाई करने की सबसे बेहतरीन स्थिति थी। जैसे ही मैंने अपने खीरे की नोक को उसकी खाई के मुहाने पर रखा और धीरे से धक्का दिया, वह एक लंबी कराह के साथ पीछे की ओर झुक गई। उसकी खाई इतनी तंग थी कि मेरा खीरा बड़ी मुश्किल से अंदर जा पा रहा था, लेकिन उसके रस ने रास्ते को आसान बना दिया। जैसे ही पूरा खीरा उसकी गहराई तक पहुँचा, हम दोनों के मुँह से एक साथ आह निकली। वह पल बहुत ही भावुक और तीव्र था, जहाँ दो पुराने दोस्त अपनी सारी बंदिशें तोड़कर एक हो रहे थे।
मैंने धीरे-धीरे अपनी रफ्तार बढ़ानी शुरू की, हर धक्के के साथ मेरा खीरा उसकी खाई की दीवारों से टकराता और एक मीठा दर्द पैदा करता। सिमरन के तरबूज हवा में उछल रहे थे और मैं उन्हें अपने हाथों से मसलते हुए खुदाई का आनंद ले रहा था। पूरे जिम में केवल हमारे शरीर के टकराने की आवाज़ और उसकी उत्तेजित सिसकियाँ गूँज रही थीं। पसीना हमारे शरीरों को और भी चिकना बना रहा था, जिससे हर स्पर्श और भी ज्यादा गहरा महसूस हो रहा था। मैंने उसे पलट दिया और अब हम पिछवाड़े से खुदाई करने की स्थिति में थे, जहाँ से उसके भारी पिछवाड़े का नजारा और भी ज्यादा मदहोश करने वाला था।
पीछे से खुदाई करते समय जब मेरा खीरा उसकी खाई में गहराई तक जा रहा था, तो मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मैं उसकी आत्मा तक पहुँच गया हूँ। वह अपने हाथों को जमीन पर टिकाए हुए अपने पिछवाड़े को पीछे की ओर धकेल रही थी ताकि मेरा खीरा और अंदर तक जा सके। उसकी उत्तेजना अपने चरम पर थी और वह बार-बार मेरा नाम पुकार रही थी। कुछ ही मिनटों की उस तीव्र खुदाई के बाद, मुझे महसूस हुआ कि उसका शरीर कांपने लगा है और उसकी खाई की मांसपेशियां मेरे खीरे को जोर से जकड़ रही हैं। सिमरन का रस बड़ी मात्रा में निकलने लगा और वह पूरी तरह से निढाल होकर गिर पड़ी।
उसे रस निकलता देख मैंने भी अपनी रफ्तार बढ़ा दी और कुछ ही अंतिम धक्कों के बाद मेरे खीरे ने भी अपना सारा गरम रस उसकी खाई की गहराइयों में छोड़ दिया। वह अहसास इतना सुकून देने वाला था कि हम दोनों कई मिनटों तक उसी अवस्था में एक-दूसरे से लिपटे रहे। हमारे शरीर पसीने से तर-बतर थे और सांसें अभी भी तेज थीं, लेकिन मन में एक अजीब सी शांति थी। सिमरन ने मुड़कर मुझे देखा और उसके चेहरे पर एक ऐसी संतुष्टि थी जो मैंने पहले कभी नहीं देखी थी।
खुदाई के बाद की वह फीलिंग शब्दों में बयान करना मुश्किल था। हम दोनों उसी मैट पर लेटे हुए थे, छत की ओर देखते हुए। सिमरन की हालत ऐसी थी जैसे उसने कोई जंग जीत ली हो, उसके बाल बिखरे हुए थे और उसकी आँखों में अभी भी वो नशा था। हमने एक-दूसरे को फिर से धीरे से चूमा और अपने कपड़े ठीक किए। वह रात हमारी दोस्ती के एक नए अध्याय की शुरुआत थी, जहाँ अब कोई राज नहीं बचा था। हमने जिम का दरवाजा बंद किया और बाहर की ठंडी हवा में निकल पड़े, यह जानते हुए कि अब हमारी मुलाकातें सिर्फ वर्कआउट तक सीमित नहीं रहेंगी।