समीर एक शांत स्वभाव का युवक था जो शहर के एक पॉश इलाके में बने ऊँचे अपार्टमेंट के पांचवें माले पर अकेला रहता था। उसकी जिंदगी का अकेलापन उस दिन खत्म होने लगा जब उसके ठीक सामने वाले फ्लैट में रिया नाम की एक बेहद खूबसूरत महिला रहने आई। रिया की उम्र लगभग तीस साल रही होगी, लेकिन उसकी काया किसी कमसिन कली की तरह खिली हुई थी। समीर अक्सर उसे छुप-छुपकर बालकनी से देखा करता था। रिया के चलने का अंदाज़ इतना कातिलाना था कि समीर उसे देखकर अक्सर खो जाता था। उसका गोरा रंग, गहरी काली आँखें और हमेशा चेहरे पर रहने वाली एक हल्की मुस्कान किसी को भी अपना दीवाना बनाने के लिए काफी थी। उनके बीच बस औपचारिक दुआ-सलाम होती थी, लेकिन समीर के दिल में उसके प्रति एक गहरा आकर्षण जन्म ले चुका था।
रिया का शारीरिक गठन बहुत ही आकर्षक और कामुक था। जब वह टाइट कुर्तियाँ या साड़ी पहनती थी, तो उसके शरीर के उभार समीर की धड़कनें बढ़ा देते थे। उसके तरबूज इतने भरे हुए और गोल थे कि ब्लाउज के भीतर उनकी हलचल साफ़ महसूस की जा सकती थी। समीर अक्सर कल्पना करता था कि उन तरबूजों पर लगे मटर कितने कोमल और रसीले होंगे। रिया का पिछवाड़ा भी काफी भारी और गदराया हुआ था, जो उसकी हर चाल के साथ ऊपर-नीचे होता था। समीर जब भी उसे सीढ़ियां चढ़ते देखता, तो उसकी नजरें उसके पिछवाड़े की बनावट पर ही टिक जाती थीं। उसके शरीर की महक समीर के दिमाग में एक नशा पैदा कर देती थी और वह रात भर उसी के ख्यालों में खोया रहता था।
धीरे-धीरे उन दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला बढ़ने लगा। समीर ने जानबूझकर रिया की मदद करने के बहाने उससे दोस्ती करनी शुरू की। कभी ग्रोसरी का सामान उठाने में मदद, तो कभी छोटी-मोटी सलाह देना। रिया को भी समीर का साथ अच्छा लगने लगा था क्योंकि वह भी उस घर में अकेली रहती थी। उनके बीच एक भावनात्मक जुड़ाव पैदा होने लगा जो दोस्ती से बढ़कर कुछ और ही अहसास दे रहा था। समीर ने गौर किया कि जब भी वह रिया के करीब होता, उसकी सांसें तेज़ हो जाती थीं और रिया भी उसे एक खास नज़रों से देखती थी। वह आकर्षण अब केवल एक तरफा नहीं रह गया था। दोनों के मन में एक-दूसरे के प्रति कामुक इच्छाएं हिलोरें ले रही थीं, लेकिन कोई भी पहल करने से झिझक रहा था।
एक बरसात की रात, जब आसमान से पानी की बूंदें कहर बरपा रही थीं, पूरे इलाके की बिजली चली गई। समीर अपने सोफे पर बैठा बारिश का आनंद ले रहा था कि तभी उसके दरवाज़े पर दस्तक हुई। सामने रिया खड़ी थी, वह पूरी तरह भीगी हुई थी और उसके हाथ में एक बुझ चुकी मोमबत्ती थी। उसने बताया कि वह अंधेरे से बहुत डरती है और उसके पास माचिस भी खत्म हो गई है। समीर ने उसे तुरंत अंदर बुलाया और उसे तौलिया दिया। रिया के भीगे हुए कपड़े उसके बदन से चिपक गए थे, जिससे उसके तरबूज और भी ज़्यादा उभरे हुए लग रहे थे। वह दृश्य इतना कामुक था कि समीर अपनी नजरें वहां से हटा नहीं पा रहा था। रिया ने समीर की आँखों में देखा और उसे अहसास हो गया कि समीर के मन में क्या चल रहा है।
समीर ने हिम्मत जुटाई और रिया के करीब जाकर उसके गीले बालों को उसके चेहरे से हटाया। यह उनका पहला स्पर्श था, जिसने दोनों के शरीर में बिजली सी दौड़ा दी। रिया की आँखें बंद हो गई और वह कांपने लगी। समीर ने धीरे से उसका हाथ पकड़ा और उसे अपनी ओर खींचा। रिया ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि वह समीर के सीने से लग गई। समीर ने उसके कानों के पास जाकर फुसफुसाते हुए उसे अपनी भावनाओं के बारे में बताया। रिया की गर्म सांसें समीर की गर्दन पर महसूस हो रही थीं। समीर ने धीरे से उसके चेहरे को ऊपर उठाया और उसके गुलाबी होंठों को अपने होंठों में भर लिया। वह चुंबन इतना गहरा और भावुक था कि दोनों समय और स्थान को भूल गए। समीर के हाथ अब रिया की पीठ पर रेंग रहे थे।
समीर के हाथ धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़े और उसने रिया के तरबूजों को अपने हाथों में भर लिया। रिया के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली। समीर ने उसके ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोल दिए। जैसे ही उसके तरबूज आज़ाद हुए, समीर ने देखा कि उसके गुलाबी मटर ठंड और उत्तेजना की वजह से पूरी तरह अकड़ गए थे। समीर ने अपना मुँह नीचे झुकाया और उन मटरों को अपनी जीभ से सहलाना शुरू किया। रिया अपनी कमर धनुष की तरह मोड़ रही थी और समीर के बालों को कसकर पकड़े हुए थी। समीर ने अब रिया के कपड़ों को पूरी तरह उतार दिया और उसे अपने बिस्तर पर लेटा दिया। वह अब पूरी तरह निर्वस्त्र थी और उसकी गोरी त्वचा मोमबत्ती की मद्धम रोशनी में चमक रही थी।
समीर ने भी अपने कपड़े उतार फेंके और उसका खीरा अब अपनी पूरी लंबाई और मोटाई के साथ खड़ा हो चुका था। रिया ने पहली बार समीर के उस विशाल खीरे को देखा और उसकी आँखें फटी की फटी रह गई। उसने धीरे से अपना हाथ बढ़ाकर खीरे को सहलाना शुरू किया। वह उसे देखकर हैरान थी कि वह कितना सख्त और गर्म था। समीर ने रिया की दोनों टांगों को फैलाया और उसकी गहरी खाई को देखने लगा। वहां हलके-हलके बाल थे जो उस गीली खाई की रक्षा कर रहे थे। समीर ने अपनी उंगली से रिया की खाई को सहलाना शुरू किया और पाया कि वह पहले से ही काफी रसीली हो चुकी थी। रिया की आहें अब और भी तेज़ होने लगी थीं और वह समीर से और भी ज़्यादा चाहने लगी थी।
समीर ने अब अपने खीरे को रिया की खाई के मुहाने पर रखा। रिया ने समीर को अपनी बाँहों में भर लिया और उसे अंदर आने का संकेत दिया। समीर ने धीरे से एक धक्का दिया और उसका खीरा रिया की तंग खाई में आधा समा गया। रिया के मुँह से एक चीख निकली और उसने समीर के कंधों पर अपने नाखून गड़ा दिए। समीर वहां रुक गया और उसे प्यार से सहलाने लगा ताकि वह सहज हो सके। थोड़ी देर बाद, समीर ने फिर से ज़ोर लगाया और इस बार उसका पूरा खीरा रिया की खाई की गहराई तक पहुँच गया। रिया की आँखें बंद थीं और वह एक अनोखे सुख में डूबी हुई थी। समीर ने अब अपनी कमर हिलाना शुरू किया और खुदाई की प्रक्रिया को गति दी।
कमरे में अब सिर्फ उनके जिस्मों के टकराने की आवाज़ और भारी सांसें गूँज रही थीं। समीर हर धक्के के साथ रिया की खाई की दीवारों को गहराई से महसूस कर रहा था। रिया भी नीचे से अपनी कमर उठा-उठाकर समीर का साथ दे रही थी। समीर ने रिया को अपने ऊपर बैठा लिया और अब रिया खुद को समीर के खीरे पर ऊपर-नीचे कर रही थी। उसके तरबूज समीर के मुँह के सामने झूल रहे थे जिन्हें वह बारी-बारी से चूस रहा था। खुदाई अब अपने चरम पर थी। समीर ने रिया को बेड के किनारे पर लिटाया और उसके पिछवाड़े को उठाकर पीछे से खोदना शुरू किया। यह स्थिति रिया के लिए बहुत ही सुखद थी, वह बार-बार समीर का नाम लेकर चिल्ला रही थी।
कुछ देर की ज़ोरदार खुदाई के बाद, समीर को महसूस हुआ कि अब उसका रस निकलने वाला है। उसने रिया को ज़ोर से जकड़ लिया और अपनी गति और तेज़ कर दी। रिया की हालत भी अब चरम पर थी, उसका पूरा शरीर कांपने लगा था और उसकी खाई से भी रस का सैलाब फूट पड़ा था। समीर ने अपने खीरे को रिया की गहराई में दबा दिया और अपना सारा गर्म रस उसकी खाई के भीतर छोड़ दिया। रिया ने उसे कसकर पकड़े रखा जब तक कि दोनों की सांसें सामान्य नहीं हो गईं। खुदाई के बाद रिया पूरी तरह निढाल होकर समीर के सीने पर सो गई। उस रात उनके बीच न केवल जिस्मों का मिलन हुआ था, बल्कि दो अजनबियों के बीच एक अटूट बंधन भी बन गया था।