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पुराने प्यार की चु@@ई

पुराने प्यार की चु@@ई —> दस साल का लंबा अरसा बीत चुका था, लेकिन उस पुराने वीरान बगीचे की खुशबू आज भी राहुल के जेहन में वैसी ही बसी हुई थी जैसी स्कूल के दिनों में हुआ करती थी। रात का समय था और चाँद की हल्की रोशनी बरगद के पुराने पेड़ों की टहनियों से छनकर जमीन पर रेंग रही थी, जहाँ आज राहुल अपनी बचपन की सबसे करीबी दोस्त और अपने पहले क्रश, नेहा से मिलने वाला था। जैसे ही नेहा अंधेरे से निकलकर सामने आई, राहुल की धड़कनें एक पल के लिए थम सी गईं क्योंकि वह अब वह छोटी सी लड़की नहीं रही थी, बल्कि एक बेहद आकर्षक और कामुक स्त्री में बदल चुकी थी। उसके चेहरे पर वही पुरानी शरारत थी, लेकिन उसकी आँखों में अब एक ऐसी गहराई और प्यास थी जो राहुल के भीतर सोए हुए तूफ़ान को जगाने के लिए काफी थी।

नेहा के शरीर की बनावट अब पूरी तरह से बदल चुकी थी, उसने एक तंग रेशमी सूट पहना था जो उसके उभारों को बखूबी उभार रहा था। उसकी छाती पर मौजूद वे दो बड़े और रसीले तरबूज उसकी कुर्ती के पतले कपड़े को फाड़कर बाहर आने को बेताब दिख रहे थे, और जैसे-जैसे वह सांस ले रही थी, वे तरबूज ऊपर-नीचे होते हुए राहुल की नज़रों को अपनी ओर खींच रहे थे। उसका पिछवाड़ा अब पहले से कहीं ज्यादा चौड़ा और मांसल हो गया था, जो हर कदम के साथ एक मदमस्त कर देने वाली लय में डोल रहा था। राहुल उसे देख रहा था और सोच रहा था कि वक्त ने कैसे उसकी सहेली को एक कामुक अप्सरा में तब्दील कर दिया है, जिसके अंगों की गोलाई किसी को भी अपना होश खोने पर मजबूर कर सकती थी।

दोनों के बीच एक अजीब सी खामोशी थी, लेकिन उस खामोशी में हजार शब्द तैर रहे थे जो भावनाओं और पुरानी यादों के धागों से बुने हुए थे। राहुल ने नेहा का हाथ धीरे से अपने हाथ में लिया, तो उसे उसकी त्वचा की रेशमी गर्माहट का अहसास हुआ, जिससे उसके पूरे शरीर में बिजली की एक लहर दौड़ गई। वे दोनों एक पुराने पत्थर के बेंच पर बैठ गए, जहाँ सन्नाटा इतना गहरा था कि वे एक-दूसरे के दिल की धड़कनें साफ़ सुन सकते थे। नेहा ने अपना सिर राहुल के कंधे पर टिका दिया, और उस पल राहुल को उसके शरीर से उठने वाली उस भीनी-भीनी खुशबू ने मदहोश करना शुरू कर दिया, जो उसके भीतर दबी हुई बरसों पुरानी इच्छाओं को धीरे-धीरे सतह पर ला रही थी।

बातचीत का सिलसिला यादों से शुरू होकर धीरे-धीरे उनकी वर्तमान की तनहाई और एक-दूसरे के प्रति छिपे हुए आकर्षण की ओर मुड़ने लगा। राहुल ने महसूस किया कि नेहा की सांसें अब तेज हो रही थीं और उसका शरीर हल्का सा कांप रहा था, जैसे वह भी उसी स्पर्श का इंतजार कर रही हो जिसकी तड़प राहुल के मन में थी। बगीचे के उस सुनसान कोने में, जहाँ सिर्फ पत्तों की सरसराहट सुनाई दे रही थी, राहुल ने धीरे से अपना हाथ नेहा की कमर पर रखा और उसे अपनी ओर खींचा। नेहा ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि उसने अपनी आँखें बंद कर लीं और अपनी गर्दन एक तरफ झुका दी, जैसे वह राहुल को अपने करीब आने का मूक निमंत्रण दे रही हो।

राहुल की उंगलियां अब नेहा की पीठ पर रेंगने लगी थीं, जिससे उसके बदन में एक अजीब सी सिहरन पैदा हो रही थी। उसने अपनी उंगलियों को धीरे-धीरे ऊपर की ओर सरकाया और नेहा के तरबूजों के पास ले आया, जहाँ से वह उसकी धड़कनों की तेजी को महसूस कर सकता था। जैसे ही राहुल का हाथ एक तरबूज पर पड़ा, नेहा के मुंह से एक दबी हुई आह निकल गई और उसने राहुल को और भी कसकर पकड़ लिया। राहुल ने महसूस किया कि वे तरबूज कितने नरम और गर्म थे, और उनके बीच में मौजूद मटर अब पूरी तरह से सख्त होकर राहुल की हथेली को कुरेद रहे थे, जो इस बात का सबूत था कि नेहा भी उतनी ही उत्तेजित थी।

अब झिझक का पर्दा पूरी तरह से हट चुका था और दोनों के मन का संघर्ष एक गहरी प्यास में बदल चुका था। राहुल ने अपनी उंगलियों से नेहा के सूट के बटनों को धीरे-धीरे खोलना शुरू किया, और जैसे-जैसे कपड़ा नीचे गिरा, चाँदनी की रोशनी में उसके चमकदार बदन का दीदार हुआ। उसके तरबूज अब पूरी तरह से आजाद थे, जो राहुल की नज़रों के सामने गर्व से तनकर खड़े थे। राहुल ने अपनी उंगलियों से उन पर बने मटरों को धीरे से सहलाया, जिससे नेहा का शरीर धनुष की तरह तन गया और उसके होंठों से एक मदहोश कर देने वाली सिसकारी निकली। राहुल ने झुककर उन मटरों को अपने होंठों से छुआ, जिससे नेहा के भीतर उत्तेजना का एक नया ज्वार उमड़ पड़ा।

माहौल में अब सिर्फ कामुकता और चाहत की महक थी, राहुल ने अपना हाथ धीरे-धीरे नीचे की ओर सरकाया जहाँ रेशमी कपड़े के नीचे नेहा की गहरी खाई छिपी हुई थी। जब उसका हाथ उस रेशमी परत के ऊपर से उस खाई के मुहाने पर पहुँचा, तो उसे वहां एक गीलापन महसूस हुआ, जो इस बात का संकेत था कि कुदरत अपना रस छोड़ने की तैयारी कर रही है। राहुल ने धीरे से कपड़े को हटाया और अपनी उंगली से उस खाई को टटोलना शुरू किया। जैसे ही उसकी उंगली ने उस खाई के भीतर प्रवेश किया, नेहा ने अपनी पीठ ऊपर उठा ली और उसकी सांसें बेतहाशा तेज हो गईं। वह खाई अब पूरी तरह से रसीली और गर्म थी, जो राहुल के स्पर्श का स्वागत कर रही थी।

राहुल का खुद का खीरा अब पूरी तरह से तंग हो चुका था और अपनी जगह से बाहर आने के लिए छटपटा रहा था। उसने अपने कपड़े उतारे और अपने सख्त और लंबे खीरे को नेहा की नज़रों के सामने लाया, जिसे देखकर नेहा की आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई। उसने धीरे से अपना हाथ बढ़ाकर उस खीरे को छुआ और उसकी लंबाई और मोटाई को महसूस करते हुए उसे सहलाने लगी। राहुल को ऐसा लगा जैसे उसके शरीर में आग लग गई हो। नेहा ने फिर धीरे से राहुल के उस खीरे को अपने मुंह में लिया और उसे चूसना शुरू किया। राहुल ने अपनी आँखें बंद कर लीं और उस सुखद अहसास में खो गया, जो उसे दुनिया की हर चीज़ से बेखबर कर रहा था।

अब समय आ गया था उस गहरी खुदाई का, जिसके लिए दोनों का शरीर और मन बरसों से तरस रहा था। राहुल ने नेहा को बेंच पर लिटाया और उसके दोनों पैरों को फैलाकर उस गहरी खाई के सामने अपने खीरे को टिका दिया। उसने धीरे से दबाव बनाया और उसका खीरा इंच-दर-इंच उस रसीली खाई के भीतर समाने लगा। नेहा के मुंह से एक तीखी लेकिन सुखद आह निकली और उसने राहुल की पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए। जैसे ही पूरा खीरा उस खाई की गहराई में समा गया, दोनों को एक असीम शांति और पूर्णता का अहसास हुआ। राहुल ने धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाते हुए खुदाई की प्रक्रिया शुरू की, जो बहुत ही धीमी और लयबद्ध थी।

हर धक्के के साथ नेहा का शरीर उछल रहा था और उसके तरबूज हवा में झूल रहे थे। राहुल ने अपनी गति थोड़ी बढ़ाई, जिससे उस सुनसान बगीचे में उनके शरीरों के टकराने की आवाज़ और नेहा की सिसकारियां गूंजने लगीं। वह खुदाई अब एक जुनून का रूप ले चुकी थी, जहाँ दोनों एक-दूसरे में पूरी तरह से विलीन होना चाहते थे। राहुल ने नेहा को घुमाया और उसे पिछवाड़े से खोदने की स्थिति में ला दिया। पीछे से देखने पर उसका पिछवाड़ा किसी पहाड़ की तरह सुंदर लग रहा था। राहुल ने अपने खीरे को फिर से उस खाई में उतारा और पीछे से जोर-जोर से झटके देने शुरू किए। नेहा हर झटके पर ‘ओह राहुल, और तेज’ चिल्ला रही थी, जिससे राहुल का जोश और बढ़ गया।

खुदाई अपनी चरम सीमा पर पहुँच रही थी, राहुल के खीरे की रगड़ से नेहा की खाई के भीतर घर्षण इतना बढ़ गया था कि दोनों के शरीरों से पसीना बहने लगा था। राहुल को महसूस हुआ कि अब वह और ज्यादा देर खुद को रोक नहीं पाएगा, और ठीक उसी समय नेहा का शरीर भी थरथराने लगा। उसने राहुल को पीछे मुड़कर देखा और उसकी आँखों में चरम सुख की लालसा साफ़ दिखाई दे रही थी। राहुल ने आखिरी कुछ दमदार झटके दिए और नेहा की खाई के एकदम अंदर तक अपने खीरे को धकेल दिया। उसी पल नेहा के भीतर से रस का एक फव्वारा फूटा और राहुल का भी सारा रस उसकी खाई की गहराइयों में समा गया। दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए वहीं गिर पड़े, उनकी सांसें अब भी तेज थीं लेकिन उनमें एक अजीब सा संतोष था।

काफी देर तक वे दोनों उसी अवस्था में लेटे रहे, ठंडी हवा उनके पसीने से तर शरीरों को छूकर गुजर रही थी। उस खुदाई के बाद की जो फीलिंग थी, वह शब्दों में बयान करना मुश्किल था; यह सिर्फ शारीरिक मिलन नहीं था, बल्कि दो रूहों का बरसों बाद हुआ संगम था। नेहा ने राहुल के सीने पर अपना सिर रखा और धीरे से कहा, ‘इतने सालों बाद आज मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं पूरी हुई हूँ।’ राहुल ने उसके माथे को चूमा और उसे अपनी बाहों में और कस लिया। उस रात उस वीरान बगीचे ने एक ऐसी कहानी देखी थी जो प्यार, हवस और पुरानी यादों के मिश्रण से बनी थी, और जिसकी खुशबू उन दोनों के दिलों में ताउम्र महकती रहने वाली थी।

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